Acquired Immunity

क्या है एक्वायर्ड इम्युनिटी? क्या एक्वायर्ड इम्युनिटी के कारण COVID 19 खतरा होता है कम?

पिछले कुछ दिनों से भारत में कोरोना यानी कोविड-19 (covid-19) के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। अब तक इसके लगभग 3400 मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि, यह एक चिंता का विषय है लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक लोगों को इसको लेकर अधिक परेशान होने की जरूरत नहीं है। लोगों को सावधानियां बरतने की सलाह अवश्य दी जा रही है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक भारत के लोगों को कोविड-19  (covid-19) से डरने की जरूरत नहीं है और इसका कारण है एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) यानी विकसित इम्युनिटी। आइए जानें कि क्यों लोगों को एक्वायर्ड इम्युनिटी के कारण कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है? यह भी जानें कि एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) किसे कहा जाता है और इम्युनिटी (Immunity) को कैसे बढ़ाएं? क्या एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) के कारण कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक अभी परेशानी का कारण हैं कोविड-19 (covid-19)  के ओमिक्रॉन स्ट्रेन के सबवेरिएंट्स, जिनमें अभी भी परिवर्तन हो सकते हैं। पहले हुए वैक्सीनेशन और बूस्टर डोज की वजह से लोगों में इम्युनिटी (Immunity) में वृद्धि हुई है। इसके कारण इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं जैसे खांसी, बॉडी पेन, सिरदर्द आदि। लेकिन,कोरोना में अभी भी सावधानियां बरतना जरूरी है, जैसे जब सर्दी, जुकाम या बुखार हो, तो मास्क पहनें। उन लोगों को अधिक सावधानियां बरतने की जरूरत है, जिन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर आदि समस्याएं हैं। इसके साथ ही बुजुर्गों को भी सावधान रहने की आवश्यकता है। अब जानते हैं एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) के बारे में।  एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) क्या है? एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) इम्यून सिस्टम की पिछले इंफेक्शन (Infection) और वैक्सीनेशन के माध्यम से रोगाणुओं को पहचानने और रिस्पॉन्ड करने की एबिलिटी है। इस प्रकार की इम्युनिटी (Immunity) बी और टी लिम्फोसाइट्स द्वारा संचालित की जाती है, जो इम्यून सिस्टम का हिस्सा हैं। इन सेल्स में पुराने इंफेक्शंस को याद रखने और प्रभावी ढंग से रिस्पॉन्ड करने की एबिलिटी होती है। यह इम्युनिटी जन्मजात इम्युनिटी से पूरी तरह से विपरीत है, क्योंकि जन्मजात इम्युनिटी खास रोगाणुओं से नहीं लड़ पाती है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक इम्युनिटी को कैसे बढ़ाया जा सकता है? हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) के साथ ही इम्युनिटी (Immunity) को बढ़ाने के तरीकों के बारे में जानकारी होना भी आवश्यक है। जरूरी वेक्सीनेशन्स को लेना इम्यून सिस्टम को मजबूत करने का सबसे बेहतरीन तरीका है। उम्र, काम, जगह के अनुसार सही वैक्सीन्स लगवाएं। अधिकतर वयस्कों को निम्नलिखित समस्याओं के लिए वैक्सीनेशन का इस्तेमाल करना चाहिए: इसके लिए आप अपने डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं। इसके साथ ही बैक्टीरिया के कारण होने वाली समस्याओं में एंटीबायोटिक्स लेने से भी इम्युनिटी (Immunity) बढ़ती है। यदि डॉक्टर आपको वायरल इंफेक्शन (Viral Infection) से लड़ने के लिए एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह देते हैं, तो यह भी महत्वपूर्ण है कि आपको एंटीबायोटिक्स का पूरा कोर्स करना चाहिए। इसके साथ ही बैक्टीरियल इंफेक्शन की स्थिति में भी डॉक्टर के बताएं अनुसार इसका पूरा कोर्स करें। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Acquired Immunity #AcquiredImmunity #Immunity #Immunesystem #corona #covid-19

आगे और पढ़ें
Whatsapp logout feature

व्हाट्सऐप का नया फीचर: लॉग आउट हुआ आसान, डेटा भी सुरक्षित

व्हाट्सऐप (Whatsapp) पूरी दुनिया में सबसे अधिक प्रसिद्ध ऐप है। इसका इस्तेमाल हम दूसरों को टेक्स्ट, फोटो, वीडियो, वॉइस मैसेज आदि भेजने के लिए कर सकते हैं। यही नहीं, इससे वॉइस व वीडियो कॉल आसानी से की जा सकती है। इससे न केवल हम अपने प्रियजनों से कांटेक्ट कर सकते हैं बल्कि हमारा काम भी और आसान हो सकता है। व्हाट्सऐप (Whatsapp) समय-समय पर नए फीचर्स लाता रहता ,है ताकि इसका इस्तेमाल और सुगम हो सके और यह अब एक और नया फीचर ले कर आया है। व्हाट्सऐप (Whatsapp) में अब लॉगआउट फीचर (Logout feature) आ रहा है। इस फीचर से हमारे डेटा को कोई नुकसान नहीं होगा और इसके साथ ही यूजर्स की और भी कई समस्याएं कम हो जाएंगी। जानें व्हाट्सऐप का लॉगआउट फीचर (Whatsapp logout feature) क्या है और क्या हैं इसके फायदे? क्या है व्हाट्सऐप का लॉगआउट फीचर (Whatsapp logout feature): जानें  व्हाट्सऐप (Whatsapp) अभी एक नए लॉगआउट फीचर (Logout feature) को टेस्ट कर रहा है और जल्द ही यह फीचर इसमें आएगा। इससे यूजरअपने प्राइमरी अकाउंट से लॉगआउट (Logout) कर पाएंगे। अच्छी बात यह है की इसके लिए आपको न तो इसे डिलीट करना होगा और डेटा भी सेफ रहेगा। ऐप के इस फीचर में यह विकल्प आपको मिलेंगे: दूसरे विकल्प को चुनने के बाद आपका डेटा भी सुरक्षित रहेगा और आप लॉगआउट (Logout) भी कर पाएंगे यानी व्हाट्सअप से ब्रेक ले पाएंगे, वो भी बिना किसी समस्या के। इस नए ऑप्शन से लोगों के लिए चीजें और अधिक आसान हो जाएगा।  इसे भी पढ़ें: Lava Shark 5G: आईफोन जैसा डिजाइन, 5G कनेक्टिविटी और कीमत भी कम किन लोगों के लिए फायदेमंद है यह व्हाट्सऐप का लॉगआउट फीचर (Whatsapp logout feature)?  यह नया फीचर उन यूजर्स के लिए फायदेमंद हैं जो टेम्पोरेरी इस ऐप से ब्रेक लेना चाहते हैं, ऐप में अगर कोई समस्या है तो उसे ठीक करना चाहते हैं या बिना डेटा लूज किए एक ही डिवाइस पर बहुत से एकाउंट्स के बीच स्विच करना चाहते हैं।  यह व्हाट्सऐप का लॉगआउट फीचर (Whatsapp logout feature) कब आएगा, इसके बारे में कोई सही जानकारी नहीं है लेकिन यह बीटा टेस्टर्स के लिए जल्दी ही उपलब्ध होगी। इसके बाद इसे रिलीज किया जाएगा। Latest News in Hindi Today Hindi Whatsapp logout feature #WhatsApplogoutfeature #WhatsApp #logout #logoutfeature #data

आगे और पढ़ें
CM Nitish Kumar

बिहार सरकार का बड़ा फैसला: सभी वर्गों को मिलेगा सम्मान

बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की सरकार ने सामाजिक समावेशिता और सभी वर्गों के न्यायोचित विकास को सुनिश्चित करने के लिए दो नए आयोगों का गठन किया है। यह कदम समाज के हर तबके की समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। समाज के हर वर्ग के लिए सुनवाई और समाधान बिहार सरकार (Bihar Government) ने उच्च जाति विकास आयोग (Upper Caste Development Commission) और राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग (State Scheduled Tribe Commission) का गठन करके यह स्पष्ट कर दिया है कि वह राज्य के हर नागरिक को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। इन दोनों आयोगों का कार्य केवल समस्याएं पहचानना नहीं होगा, बल्कि यह आयोग सरकार को नीतिगत सुझाव भी देंगे ताकि हर वर्ग को उसका अधिकार मिल सके। उच्च जाति विकास आयोग की भूमिका सरकार द्वारा गठित उच्च जाति विकास आयोग का नेतृत्व भाजपा नेता और पूर्व मंत्री महाचंद्र प्रसाद सिंह को सौंपा गया है। आयोग के उपाध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद होंगे और इसके अन्य सदस्य दयानंद राय, जय कृष्ण झा और राजकुमार सिंह हैं। इनका कार्यकाल तीन वर्षों का निर्धारित किया गया है। यह आयोग बिहार में उच्च जातियों की शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन करेगा। इसके आधार पर आयोग राज्य सरकार को सुझाव देगा कि इस वर्ग के उत्थान के लिए किन योजनाओं और संसाधनों की आवश्यकता है। अक्सर यह धारणा बनी रहती है कि केवल पिछड़े वर्गों को ही सहायता की आवश्यकता है, लेकिन इस आयोग के गठन से यह संदेश गया है कि हर वर्ग की जरूरतें अलग हैं और उन्हें ध्यान में रखते हुए नीति बनानी चाहिए। अनुसूचित जनजाति आयोग: अधिकारों की रक्षा की ओर कदम बिहार सरकार (Bihar Government) ने अनुसूचित जनजातियों के हितों की रक्षा और उनके सतत विकास को ध्यान में रखते हुए राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग की स्थापना की है। इस आयोग के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार बनाए गए हैं, जबकि उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सुरेंद्र उरांव को दी गई है। अन्य सदस्य प्रेमशिला गुप्ता, तल्लू बासकी और राजू कुमार हैं। इस आयोग का मुख्य उद्देश्य बिहार की आदिवासी आबादी की समस्याओं की गहराई से पड़ताल करना और उनके समाधान के लिए सरकार को व्यावहारिक और प्रभावी सुझाव देना है। यह आयोग भी तीन वर्षों तक कार्य करेगा और एक माध्यम बनेगा जिससे आदिवासी समुदाय की आवाज सीधे प्रशासन तक पहुंचे। समावेशी विकास की ओर निर्णायक कदम इन दोनों आयोगों का गठन बिहार सरकार की एक रणनीतिक सोच का परिणाम है, जिसमें समावेशी विकास को प्राथमिकता दी गई है। नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का यह कदम स्पष्ट करता है कि सरकार अब केवल किसी एक वर्ग के विकास पर ध्यान नहीं देगी, बल्कि हर समाज, जाति और समुदाय को विकास के पथ पर साथ लेकर चलेगी। यह प्रयास इस बात का भी संकेत है कि समाज में समानता और न्याय की स्थापना बिना समग्र दृष्टिकोण के संभव नहीं है। यदि राज्य का हर नागरिक अपने आप को प्रशासनिक निर्णयों में सहभागी और प्रतिनिधित्व प्राप्त महसूस करेगा, तो सामाजिक ताना-बाना और मजबूत होगा। इसे भी पढ़ें:- एमपी-हरियाणा में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति, ऑब्जर्वरों की टीम तैनात ऐसे में कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े होते हैं। जैसे: 1. क्या इन दोनों आयोगों द्वारा दिए गए सुझावों को कानूनी रूप से लागू करने की कोई गारंटी या स्पष्ट नीति बनाई गई है? 2. क्या इन आयोगों के गठन के बाद अन्य वर्गों (जैसे पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक समुदाय) के लिए भी समान रूप से ठोस और प्रभावी नीतिगत प्रयास किए जाएंगे? 3. आयोगों द्वारा प्राप्त रिपोर्टों और सिफारिशों को सार्वजनिक किया जाएगा या नहीं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और जनता भी निगरानी रख सके? इस नई पहल के साथ बिहार सरकार (Bihar Government) ने यह संकेत दिया है कि सामाजिक संतुलन और हर वर्ग को विकास में सहभागी बनाना उसकी प्राथमिकता है। यदि यह प्रयास ईमानदारी से लागू किए जाते हैं, तो यह राज्य के सामाजिक और आर्थिक ढांचे में एक क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news #BiharGovernment #NitishKumar #CMNitishKumar #BiharPolitics

आगे और पढ़ें
ISRO Scientists and Engineer Job

ISRO साइंटिस्ट भर्ती 2025: आवेदन प्रक्रिया, योग्यता और आयु सीमा

इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन (Indian Space Research Organisation) यानी इसरो (ISRO) हमारे देश की मुख्य साइंटिफिक इंस्टीटूशन है। यह इंस्टीटूशन स्पेस रिसर्च और टेक्नोलॉजी के क्षत्र में काम करता है और इसमें महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। अगर आप इस आर्गेनाईजेशन के साथ काम करना चाहते हैं, तो आपके लिए एक खुशखबरी है। इसरो (ISRO) ने साइंटिस्ट्स और इंजीनियर पोस्ट्स के लिए आवेदन निकालें हैं। इच्छुक उम्मीदवार आसानी से ऑनलाइन इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं। याद रखें इसके लिए लास्ट डेट 16 जून है। आप अधिक जानकारी के लिए इसरो (ISRO) की ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। आइए जानें इसरो द्वारा निकाली साइंटिस्ट्स और इंजीनियर पोस्ट्स (Scientists and Engineer posts by ISRO) के बारे में विस्तार से। इसरो द्वारा निकाली साइंटिस्ट्स और इंजीनियर पोस्ट्स (Scientists and Engineer posts by ISRO): पाएं जानकारी इन पोस्ट्स के लिए इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन (Indian Space Research Organisation) द्वारा 320 पोस्ट्स निकाली गयी हैं, जिनके लिए आसानी से अप्लाई किया जा सकता है। इन पोस्ट्स का विवरण इस प्रकार है: इसरो द्वारा निकाली साइंटिस्ट्स और इंजीनियर पोस्ट्स (Scientists and Engineer posts by ISRO): योग्यता इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन (Indian Space Research Organisation) द्वारा निकाली पोस्ट्स के लिए कैंडिडेट्स के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया इस प्रकार है: इसरो द्वारा निकाली साइंटिस्ट्स और इंजीनियर पोस्ट्स (Scientists and Engineer posts by ISRO): चयन प्रक्रिया इन पोस्ट्स के लिए लिखित परीक्षा ली जाएंगी। जिसमें सिंगल ऑब्जेक्टिव टाइप पेपर होगा, जिसके दो भाग होंगे। इस एग्जाम की अवधि रहेगी 120 मिनट। इस लिखित परीक्षा के आधार पर कैंडिडेट्स को इंटरव्यू के लिए शार्ट-लिस्ट किया जाएगा। इसे भी पढ़े: बिहार में स्टाफ नर्स की भर्ती: 11 हजार से अधिक पदों के लिए कर सकते हैं आवेदन इसरो द्वारा निकाली साइंटिस्ट्स और इंजीनियर पोस्ट्स (Scientists and Engineer posts by ISRO): एप्लीकेशन फीस इन पोस्ट्स के लिए एप्लिकेशन फीस है 250 रुपए। लेकिन प्रतियोगियों को पहले प्रोसेसिंग फीस के रूप में समान रूप से 750 रुपये का भुगतान करना होगा। यह प्रोसेसिंग फीस बाद में इस तरह से रिफंड की जाएगी: Latest News in Hindi Today Hindi news ISRO JOBS #IndianSpaceResearchOrganisation #ISRO #ISRORecruitmentforScientistsandEngineersPosts, #OfficialWebsite #Scientists #Engineers

आगे और पढ़ें
Monsoon and Respiratory Infections

मानसून और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन में क्या है कनेक्शन? जानिए इसके कारणों और बचाव के तरीके

भयंकर गर्मी के मौसम के बाद मानसून (Monsoon) का आना राहत पहुंचाता है। लेकिन, मानसून (Monsoon) में कई हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क बढ़ जाता है। इस दौरान बढ़ती ह्यूमिडिटी, तापमान और नमी वाले वातावरण में वायरस व बैक्टीरिया के बढ़ने के कारण कई समस्याएं हो सकती हैं। इन्हीं में से एक है रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Respiratory Infections)। अगर बात की जाए रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Respiratory Infections) की, तो इसे रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन भी कहा जाता है। यह वो समस्या है जिससे रेस्पिरेटरी सिस्टम प्रभावित होता है। इस सिस्टम में नाक, गला, एयरवेज और फेफड़े आदि शामिल हैं। इस समस्या के कारण इम्यूनिटी कमजोर होती है जिससे सर्दी-जुकाम, खांसी और अन्य समस्याओं का जोखिम बढ़ता है। जानिए मानसून और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Monsoon and Respiratory Infections) के बारे में विस्तार से।  मानसून और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Monsoon and Respiratory Infections): क्या हैं मानसून में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन के कारण? नॉर्थवेस्टर्न मेडिसिन (Northwestern Medicine) के अनुसार रेस्पिरेटरी इंफेक्शन किसी को भी हो सकता है लेकिन स्मोकर्स, छोटे बच्चों, बुजुर्गों, रेस्पिरेटरी डिजीज से पीड़ित और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में इसकी संभावना अधिक रहती है। मानसून (Monsoon) में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Respiratory Infections) के कारण इस प्रकार हैं:  इसे भी पढ़ें: COVID-19 और Dengue हैं दो अलग-अलग बीमारियां, इनके बीच के अंतर को समझें और रहें सुरक्षित मानसून और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Monsoon and Respiratory Infections): कैसे बचें इस समस्या से? मानसून में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन से बचाव के लिए कुछ चीजों का खास ख्याल रखना चाहिए, जैसे: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Monsoon and Respiratory Infections #MonsoonandRespiratoryInfections #Monsoon #RespiratoryInfections #infection

आगे और पढ़ें
Khan Sir

Khan Sir: सुर्ख़ियों में रहने वाले खान सर ने चुपके-चुपके कर ली शादी?

खान सर (Khan Sir) एक ऐसा नाम है, जो युवाओं में बेहद लोकप्रिय है। यह एक ऐसे मोटिवेटर और शिक्षक हैं, जो अपने अनोखे और प्रोत्साहित करने वाले टीचिंग मेथड्स के लिए जाने जाते हैं। यही कारण हैं कि लाखों लोग उन्हें फॉलो करते हैं। वो उन स्टूडेंट्स को भी गाइड और सपोर्ट करते हैं, जो गवर्नमेंट जॉब एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं। खान सर अक्सर चर्चाओं में रहते हैं और आजकल वो फिर से एक बारे चर्चा का विषय बने हुए हैं। इसका कारण कोई विवादित व्यान नहीं बल्कि उनकी शादी है। हाल ही लें उन्होंने अपनी लाइव क्लास में इस बात की जानकारी दी कि पिछले दिनों भारत-पाकिस्तान विवाद (India Pakistan Tension) के समय उन्होंने सीक्रेट वेडिंग की है। आइए जाने कौन हैं खान सर, क्या हैं उनके कमाई के साधन और क्या है उनकी नेट वर्थ? कौन हैं खान सर (Khan Sir)?  खान सर बहुत ही सरल भाषा में पढ़ाते हैं और उनके कई छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में पास हो चुके हैं। उनका असली नाम है फैजल खान (Faizal Khan) और वो 32 साल के हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गोरखपुर में हुआ है। उन्होंने अपने शिक्षण करियर की शुरुआत 2013 में की थी और उनके यूट्यूब चैनल पर लगभग 24 मिलियन यानी 2.5 करोड़ सब्सक्राइबर हैं। खान सर के कमाई के साधन खान सर यानी फैजल खान (Faizal Khan) कई तरीकों से अर्न करते हैं। आपको शायद यह पता नहीं होगा कि वो “कौन बनेगा करोडपति” में भी भाग ले चुके हैं। खान सर के कमाई के साधन इस प्रकार हैं: इसे भी पढ़े: बिहार में स्टाफ नर्स की भर्ती: 11 हजार से अधिक पदों के लिए कर सकते हैं आवेदन खान सर की नेट वर्थ फैजल खान (Faizal Khan) यानी खान सर (Khan Sir) की सही नेट वर्थ का अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है। लेकिन, इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनकी नेट वर्थ करोड़ो में है। दिलचस्प बात यह है कि खान सर के अनुसार वो एक सामान्य स्टूडेंट थें और उन्होंने बचपन में बहुत गरीबी देखी थी। उन्होंने छोटी उम्र में ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया था। आज वो निसंदेह करोड़ो लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन चुके हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Khan Sir #KhanSir #KhanGSResearchCenter #FaisalKhan #Khansirnetworth

आगे और पढ़ें
India advanced weapon

India Upgrades Deadly Weapon: ऑपरेशन सिंदूर में जिस हथियार ने पाकिस्तान में मचाई थी तबाही, उसे और भी एडवांस बना रहा है भारत

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान द्वारा पोषित आतंकियों ने 26 निर्दोष नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया था। इस नृशंस हत्या का बदला लेने के लिए भारत की मोदी सरकार ने 6 और 7 मई की दरम्यानी रात तकरीबन डेढ़ बजे ऑपरेशन सिन्दूर के तहत पाकिस्तान के 9 आतंकी अड्डों और एयर बेस को नेस्तनाबूत कर दिया था। ऑपरेशन सिंदूर की धमक न सिर्फ पाकिस्तान बल्कि समूची दुनिया ने देखी। इस दौरान पूरी दुनिया की नजर भारत की सैन्य शक्ति और हथियारों पर भी (India Upgrades Deadly Weapon) पड़ी। कहने की जरूरत नहीं भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी ताकत दिखाते हुए दुश्मनों को साफ़ चेतावनी दी कि भारत अब बदल चुका है। भारत ने अपने हथियारों के दम पर दिखा दिया कि भारत न सिर्फ घर में घुसता है बल्कि घुसकर मरता भी है और बताता भी है। डीआरडीओ जल्द ही पिनाका एमके 3 की करने जा रहा (India Upgrades Deadly Weapon) है टेस्टिंग  ध्यान देने वाली बात यह कि पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के कई शहरों पर रॉकेट और ड्रोन से हमले की कोशिश की थी। उसने दिल्ली और अमृतसर को भी निशाना बनाया था, लेकिन भारत के मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम ने उसके हर हमले को नाकाम कर दिया। आपको जानकर गर्व होगा कि भारत के पास कई खतरनाक हथियार हैं जो दुश्मन मुल्क को नाकों चने चबवा सकते हैं। भविष्य में दुश्मन सेना को माकूल जवाब दिया जा सके इसलिए भारतीय सेना को जल्द ही घातक हथियार मिलने वाला है। दरअसल, डीआरडीओ जल्द ही पिनाका एमके 3 की टेस्टिंग करने जा रहा (India Upgrades Deadly Weapon) है। जानकारी के मुताबिक यह एक मल्टीबैरल रॉकेट लॉन्चर है। इसे जल्द अपग्रेड किया जाएगा। भारत के पास अभी पिनाका का पुराना वेरिएंट है।  पिनाका ने हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में अहम भूमिका निभाई (India Upgrades Deadly Weapon) थी बता दें कि पिनाका ने हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ अहम भूमिका निभाई (India Upgrades Deadly Weapon) थी। पिनाका एमके 1 की रेंज 40 किलोमीटर है। एमके 2 की रेंज 60 से 90 किलोमीटर है। इसका तीसरा वेरिएंट गाइडेड पिनाका है, जिसकी रेंज 70 से 90 किलोमीटर है। अब भारत का इसका अपग्रेडेड संस्करण मिलने वाला है। जल्द ही पिनाका एमके 3 की टेस्टिंग होगी। इसकी रेंज 120 किलोमीटर तक होगी। यह 250 किलोग्राम के वारहेड के साथ आएगी। डीआरडीओ की टीम इसमें नेविगेशन और कंट्रोल किट लगाएगी। यह लेजर गायरो नेविगेशन और माइक्रोस्ट्रिप एंटीने से लैस होगी। पिनाका 44 सेकेंड में 12 रॉकेट लॉन्च करने में सक्षम है। कहा जा रहा है कि भविष्य में डीआरडीओ 200 से 300 किलोमीटर की रेंज वाली पिनाका की टेस्टिंग भी करेगा। पिनाका एमके 3 की रेंज काफी अधिक है। बेशक यह पाकिस्तान और चीन जैसे दुशमन पड़ोसी देशों के लिए खतरे की घंटी होगी।  इसे भी पढ़ें:-  इन देशों के साथ-साथ अब भारत भी एयर डिफेंस सिस्टम पर बढ़ा रहा है अपना फोकस भारत के पास कई घातक मिसाइलें (India Upgrades Deadly Weapon) हैं खैर, इसके आलावा भारत के पास कई घातक मिसाइलें (India Upgrades Deadly Weapon) हैं। इसमें अग्नि 5 और ब्रह्मोस मिसाइल शामिल है। ब्रह्मोस की मारक क्षमता तकरीबन 600 किलोमीटर है तो वहीं इसकी स्पीड 3700 किलोमीटर प्रति घंटे की है। बात करें अग्नि 5 की तो इसकी रेंज 5000 से 8000 किलोमीटर तक की है। इसमें मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (एमआईआरवी) तकनीक भी है। यह एक ही मिसाइल से कई लक्ष्यों को तबाह करने में सक्षम है।  Latest News in Hindi Today Hindi news India Upgrades Deadly Weapon #India #WeaponUpgrade #OperationSindoor #IndianArmy #PakistanStrike #MissileTech #DRDO #DefenseNews #MilitaryPower #MakeInIndia

आगे और पढ़ें
Baba Khatu Shyam

कब जरुरी है बाबा खाटू श्याम के दरबार में हाजिरी लगाना

भारत के आध्यात्मिक और धार्मिक मान्यताओं में बाबा खाटू श्याम (Baba Khatu Shyam) का नाम विशेष श्रद्धा और भक्ति के साथ लिया जाता है। राजस्थान के खाटू गांव में स्थित बाबा के मंदिर में लाखों श्रद्धालु हर वर्ष आते हैं, अपनी मनोकामनाएं पूरी करने और जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति पाने के लिए। बाबा खाटू श्याम को भगवान कृष्ण (Lord Krishna) का अवतार माना जाता है, जो संकट में अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उनका जीवन सुखमय बनाते हैं। बाबा खाटू श्याम का महत्व और इतिहास बाबा खाटू श्याम जी (Baba Khatu Shyam) का असली नाम बरद्वाज ऋषि का पुत्र बारद्वाज था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्होंने महाभारत युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण के लिए युद्ध किया था। भगवान कृष्ण ने उनकी वीरता और भक्ति को देखते हुए अपने रूप में उनके नाम से खाटू श्याम जी का पूजन करने का आदेश दिया। इसीलिए उनके भक्त उन्हें “श्री खाटू श्याम” के नाम से पुकारते हैं। कब लगानी चाहिए बाबा के दरबार में हाजिरी? धार्मिक मान्यता है कि जीवन में जब भी संकट, परेशानी या कठिनाइयों का सामना हो, तब बाबा खाटू श्याम (Baba Khatu Shyam) के दरबार में हाजिरी लगाना शुभ और फलदायक होता है। लेकिन इसके साथ ही कुछ संकेत भी होते हैं, जिनके मिलने पर बाबा के दरबार में विशेष भक्ति और आराधना करनी चाहिए। आइए जानते हैं उन प्रमुख संकेतों के बारे में: 1. सपनों में बाबा का दर्शन यदि आपको सपने में बाबा खाटू श्याम का दर्शन होता है, तो इसे एक विशेष संकेत माना जाता है कि बाबा आपको अपनी ओर बुला रहे हैं। ऐसे अवसर पर आपको बाबा खाटू श्याम (Baba Khatu Shyam) के दर्शन अवश्य करने चाहिए और उनकी भव्य पूजा-अर्चना करनी चाहिए। धार्मिक विश्वास के अनुसार, बाबा खाटू श्याम की उपासना से साधक के जीवन में सकारात्मक बदलाव और शुभ फल प्राप्त होते हैं, साथ ही उनकी असीम कृपा सदैव बनी रहती है। 2. खाटू श्याम बाबा की कृपा से बदली जीवन की दिशा? जीवन में कई ऐसी घटनाएं होती हैं जो हमारे मार्ग को बदल सकती हैं। यदि आपके जीवन में खाटू श्याम बाबा (Baba Khatu Shyam) की वजह से कोई सकारात्मक बदलाव आया है, तो इसे बाबा की ओर से बुलावे का संकेत समझना चाहिए। ऐसे समय में आपको अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए अवश्य खाटू श्याम मंदिर जाकर उनके दर्शन करने चाहिए। 3. खाटू श्याम मंदिर की समूह यात्रा के लिए आपको कोई संकेत या संदेश प्राप्त हुआ होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान अपने भक्तों तक विभिन्न माध्यमों से संकेत पहुँचाते हैं। यदि आपको खाटू श्याम मंदिर (Baba Khatu Shyam) की किसी सामूहिक यात्रा के बारे में कोई संदेश या सूचना प्राप्त होती है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह समझना चाहिए कि यह बाबा खाटू श्याम की ओर से आपको उनके मंदिर में आने का आमंत्रण है। इसे भी पढ़ें:- महाभारत के युद्ध में गूंजे थे दिव्य अस्त्रों के नाम, जानिए उनकी अद्भुत शक्तियां 4. बार-बार सुनाई दे रहा है खाटू श्याम बाबा का नाम अगर आप लगातार किसी न किसी रूप में खाटू श्याम बाबा का नाम सुनते रहते हैं, तो इसे एक संकेत माना जाता है कि बाबा आपको अपने पास बुला रहे हैं। ऐसे में आपको खाटू श्याम बाबा (Baba Khatu Shyam) से दर्शन करने के लिए खाटू धाम अवश्य जाना चाहिए। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Baba Khatu Shyam #BabaKhatuShyam #Krishna #LordKrishna #ShyamBhakti

आगे और पढ़ें
Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum

Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum: ताजा सर्वे में नितीश को लगा झटका, बीजेपी और तेजस्वी की बल्ले-बल्ले 

इस साल बिहार में चुनाव होना है। फ़िलहाल भारतीय चुनाव आयोग चुनावी तैयारियों की समीक्षा कर रहा है। अभी तक चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की है। अक्टूबर-नवंबर होने वाले बिहार चुनाव में भाजपा-जदयू (एनडीए गठबंधन) का मुकाबला राजद-कांग्रेस के महागठबंधन से होगा। खैर, चुनाव होने में अभी तो महीनो बाकी है। इस बीच इंकइनसाइट द्वारा मई के शुरू में जारी एक नए ओपिनियन पोल ने नेताओं की नींद हराम कर दी है। सर्वे के मुताबिक सूबे की महिलाएं राज्य में सरकार बनाने के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन को अपनी पहली पसंद बता (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) रही हैं। दरअसल, सर्वे में शामिल 45 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वे नीतीश को फिर से सूबे के मुखिया के तौर पर देखना चाहती हैं। यही नहीं, सर्वे के मुताबिक बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन, राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन से अधिक लोकप्रिय है। इस सर्वे में 60.4 प्रतिशत महिलाओं ने दावा किया है कि वो सत्तारूढ़ गठबंधन को वोट देना पसंद करेंगी, जबकि 28.4 प्रतिशत ने महागठबंधन का समर्थन किया है।  18-29 आयु वर्ग के 42 प्रतिशत लोगों ने अगले सीएम के तौर पर तेजस्वी यादव को किया (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) पसंद   एक तरफ जहाँ नितीश कुमार बतौर महिलाओं की पहली पसंद बने हुए हैं तो वहीं आरजेडी नेता तेजस्वी यादव युवाओं के बीच पहली पसंद बनकर उभरे हैं।  इंकइनसाइट के सर्वे में शामिल 18-29 आयु वर्ग के 42 प्रतिशत लोगों ने अगले सीएम के तौर पर नीतीश की जगह उन्हें पसंद किया (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) है। हालांकि, एनडीए अभी भी युवाओं के बीच पहली पसंद बनी हुई है। 18-29 आयु वर्ग के 44.6 प्रतिशत लोगों ने कहा कि “वो एनडीए को वोट देंगे, वहीं 39.5 प्रतिशत ने कहा कि वे महागठबंधन को सत्ता में देखना पसंद करेंगे।” सिर्फ 0.76 प्रतिशत ने कहा कि “वो प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को वोट देंगे।” इस ओपिनियन पोल में शामिल 39 प्रतिशत लोगों ने कहा कि “वो तेजस्वी यादव को बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) हैं तो वहीं 34 प्रतिशत लोगों ने कहा कि “वो इस पद पर नीतीश कुमार को पसंद करेंगे।” बता दें कि ये दूसरा ओपिनियन पोल है जिसमें आरजेडी के तेजस्वी यादव को सीएम पद की पहली पसंद बताया गया है। गौरतलब हो कि “सी-वोटर के पहले के प्री-पोल सर्वे में तेजस्वी यादव को सीएम पद के लिए शीर्ष पसंद बताया गया था। उसमें प्रशांत किशोर दूसरे स्थान पर थे और उसके बाद नीतीश कुमार तीसरे स्थान पर थे।  इसे भी पढ़ें:-लालू की पार्टी आरजेडी के नेता शंभू गुप्ता 2 करोड़ रुपये की अफीम के साथ गिरफ्तार तेजस्वी यादव सीएम के रूप में शीर्ष बने हुए (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) हैं पसंद  गौर करने वाली बड़ी बात यह कि “सर्वे के मुताबिक, 30-39 वर्ष आयु वर्ग और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों के बीच तेजस्वी यादव सीएम के रूप में शीर्ष पसंद बने हुए (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) हैं। दूसरी ओर, 40-49 वर्ष और 50-59 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं के बीच नीतीश कुमार शीर्ष पसंद हैं। दिलचस्प बात ये है कि अधिकांश 45.8 प्रतिशत पुरुषों ने कहा कि “वो तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री के रूप में पसंद करेंगे।” कुल-मिलाकर इस सर्वे के मुताबिक महिलाओं के बीच, राज्य में एक और कार्यकाल के लिए सरकार बनाने हेतु एनडीए शीर्ष विकल्प बना हुआ है। इस सर्वे में 60.4 प्रतिशत ने दावा किया है कि वो सत्तारूढ़ गठबंधन को वोट देना पसंद करेंगी, तो वहीं 28.4 प्रतिशत ने महागठबंधन का समर्थन किया है। Latest News in Hindi Today Hindi news Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum #NitishKumar #BiharPolitics #BJPVictory #TejashwiYadav #ElectionSurvey #PoliticalTwist #BJPvsJDU #IndiaElections #BiharUpdates #VoterMood

आगे और पढ़ें

Jharkhand Encounter: 15 Lakh Rewarded Pappu Lohra Killed: झारखंड के इचाबार सलैया जंगल में भीषण एनकाउंटर, मारा गया 15 लाख का इनामी कुख्यात पप्पू लोहरा

झारखंड के लातेहार जिले के इचाबार सलैया जंगल में शनिवार सुबह सुरक्षाबलों और उग्रवादियों के बीच एक भीषण मुठभेड़ हुई। इस एनकाउंटर में सुरक्षा बलों ने झारखंड जन मुक्ति परिषद (JJMP) के कुख्यात सरगना पप्पू लोहरा (Pappu Lohra) और उसके एक साथी को मार (Jharkhand Encounter: 15 Lakh Rewarded Pappu Lohra Killed) गिराया। यह वही पप्पू लोहरा था, जिसके सिर पर सरकार ने 15 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। यह मुठभेड़ लातेहार के उस इचाबार सलैया के जंगल में हुई जो कुछ साल पहले तक नक्सलियों का बड़ा गढ़ माना जाता था।  झारखंड पुलिस (Jharkhand Police) ने इस मुठभेड़ की जानकारी देते हुए बताया कि हमें खुफिया इनपुट मिला था कि पप्पू लोहरा (Pappu Lohra) अपने साथियों के साथ जंगल में छिपा हुआ है। इसके बाद झारखंड पुलिस (Jharkhand Police) के जवानों ने अर्ध सैनिक बलों के साथ मिलकर इचाबार सलैया जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सुरक्षा बलों ने रात से ही इलाके की घेराबंदी शुरू की दी और सुबह होते ही दोनों तरफ से गोलीबारी शुरू हो गई। कई घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद जब फायरिंग थमी, तो सुरक्षा बलों को जमीन पर दो शव पड़े मिले। इनकी पहचान पप्पू लोहरा (Pappu Lohra) और उसके साथी के रूप में की गई। पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए यह एक बड़ी सफलता है।  पहले नक्सली था पप्पू लोहरा, फिर बना लिया अपना गैंग  पप्पू लोहरा का नाम झारखंड के नक्सल प्रभावित जिलों में आतंक का पर्याय बन चुका था। इसने एक आम नक्सली के तौर पर शुरुआत की की, लेकिन जब सुरक्षा बलों ने बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र में मौजूद नक्सलियों को वहां से खदेड़ दिया तो इसने नक्सलियों से अलग होकर अपना एक नया संगठन जेजेएमपी (JJMP) बना लिया। इसके बाद यह क्षेत्र में अवैध वसूली, लूटपाट, धमकी और सरकारी प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाने जैसे काम करना शुरू कर दिया। पुलिस के मुताबिक, लोहरा का गिरोह क्षेत्र में ठेकेदारों, व्यापारियों और ग्रामीणों को धमका कर उनसे वसूली करता था। इसने कई बार सुरक्षा बलों पर भी हमला किया। जिसकी वजह से ही सुरक्षा बल लंबे समय से इसकी तलाश कर रही थी।  एनकाउंटर के बाद जब सुरक्षा बलों को पता चला कि मारा गया उग्रवादी पप्पू लोहरा है, तो मौके पर मौजूद जवानों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। इस ऑपरेशन को झारखंड पुलिस और राज्य सरकार नक्सल विरोधी मुहिम में एक निर्णायक सफलता मान रही है। क्योंकि यह सिर्फ एक आतंकी के अंत की कहानी नहीं है, बल्कि लाखों नागरिकों को उस भय और दबाव से छुटकारा दिलाने की थी, जो पप्पू लोहरा ने बना रखा था।  इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तानी जासूस ज्योति के समर्थन में उतरी पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर हीरा बतूल, जानें क्या है रिश्ता  छत्तीसगढ़ में भी नक्सलियों की कमर टूट रही है बता दें कि सुरक्षा बलों ने इस समय नक्सलवाद के खिलाफ जबरदस्त अभियान चला रखा है। पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों ने पिछले कुछ सप्ताह के अंदर ही 100 से ज्यादा नक्सलियों को मार गिराया है। इसमें करोड़ों रुपये इनामी कई टॉप कमांडर भी शामिल हैं। इसके अलावा हजारों ने नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के सामने हथियारों के साथ सरेंडर भी किया है। कहा जा रहा है कि देश में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई निर्णायक मोड़ में पहुंच गई है। भारत सरकार ने मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह से खत्म कर देने का वादा किया है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Jharkhand Encounter: 15 Lakh Rewarded Pappu Lohra Killed #PappuLohra #JharkhandEncounter #NaxalNews #CRPFSuccess #SalaiyaJungle #15LakhReward #MaoistKilled #BreakingNews #LawAndOrder #IndianSecurityForces

आगे और पढ़ें
Translate »