गलत इलाज से बुजुर्ग की मौत

गलत इलाज से बुजुर्ग की मौत

गलत इलाज से बुजुर्ग की मौत, अस्पताल में नशाखोरी और गंदगी का बोलबाला छतरपुर (मप्र) छतरपुर जिले के बक्सवाहा स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। ग्राम कुही किशनपुरा निवासी करीब 60 वर्षीय महेश पाटोदिया उर्फ टीकाराम की मौत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गलत इलाज और डॉक्टरों की लापरवाही के चलते हो गई। साधारण बुखार और जुकाम की शिकायत पर परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे थे, जहां डॉक्टर ने दवा देने के साथ बोतल इंजेक्शन लगाया। लेकिन इंजेक्शन चढ़ते ही मरीज की हालत बिगड़ने लगी। परिजनों का कहना है कि उन्होंने बार-बार डॉक्टर को बुलाया, लेकिन समय पर मदद नहीं मिली और थोड़ी ही देर में मरीज ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि यह मौत सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का नतीजा है। उनका कहना है कि यदि सही समय पर ध्यान दिया जाता और बेहतर उपचार मिलता तो मरीज की जान बच सकती थी। वहीं इस घटना ने अस्पताल की अंदरूनी हालत की पोल भी खोल दी है। अस्पताल परिसर में नशाखोरी और गंदगी का आलम इस कदर है कि रिकॉर्ड रूम के बाहर शराब की बोतलें पड़ी रहती हैं, महिला प्रसव कक्ष और शौचालय तक शराबखोरी के सबूत मिले हैं। गंदगी का स्तर इतना अधिक है कि अस्पताल इलाज का केंद्र कम और नशेड़ियों का अड्डा ज्यादा नजर आता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि डॉक्टर समय पर अस्पताल में नहीं मिलते, दवाएं उपलब्ध नहीं होतीं और मरीजों को सही इलाज नहीं दिया जाता। इसके विपरीत अस्पताल में शराबखोरी आम हो गई है और यहां तक कि वार्ड और ड्रेसिंग रूम के बाहर भी आवारा कुत्ते और जानवर आराम फरमाते दिखाई देते हैं। इससे साफ है कि अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है और मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस घटना से ग्रामीणों में गुस्सा है। मृतक परिवार और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जिम्मेदार डॉक्टरों व कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही अस्पताल में फैली गंदगी और नशाखोरी पर तुरंत रोक लगाई जाए और मरीजों को समय पर दवाएं और उचित इलाज उपलब्ध कराया जाए। यह कोई पहला मामला नहीं है जब बक्सवाहा अस्पताल की लापरवाही सामने आई हो। ग्रामीणों का कहना है कि आए दिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन जिम्मेदारों पर कभी कार्रवाई नहीं होती। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर दोषियों पर कार्रवाई करेगा या यह घटना भी पहले की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगी।

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PM Modi on his first visit after Manipur violence

हिंसा के बाद पहली बार दौरे पर पीएम मोदी

मणिपुर में शांति बहाली की बड़ी पहल, हिंसा के बाद पहली बार दौरे पर पीएम मोदी लंबे इंतजार के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मणिपुर का दौरा करेंगे। मई 2023 में भड़की नस्लीय हिंसा के बाद यह उनकी पहली यात्रा होगी। इस दौरान वे इंफाल और चुड़ा चांदपुर—दोनों इलाकों में विकास परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। 10,800 करोड़ की परियोजनाएं प्रधानमंत्री चुड़ा चांदपुर में 7,300 करोड़ और इंफाल में 3,600 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। इसके अलावा 2,500 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय राजमार्ग की पांच परियोजनाएं, मणिपुर इंफोटेक डेवलपमेंट प्रोजेक्ट और नौ जिलों में वर्किंग वुमेन हॉस्टल भी शुरू किए जाएंगे। हिंसा के बाद बदले हालात 3 मई 2023 को मणिपुर हाईकोर्ट के फैसले के बाद कुकी और मैतेयी समुदायों के बीच हिंसा भड़की थी। हालात बिगड़ने पर फरवरी 2024 में राष्ट्रपति शासन लगाया गया। सरकार ने इसके बाद दोनों समुदायों से लगातार बातचीत की और अब पीएम मोदी का यह दौरा शांति की दिशा में अगला कदम माना जा रहा है। सियासी महत्व विपक्ष लगातार यह सवाल उठाता रहा है कि पीएम ने हिंसा के बाद मणिपुर का दौरा क्यों नहीं किया। ऐसे में यह यात्रा राजनीतिक रूप से भी अहम मानी जा रही है। मणिपुर के बाद प्रधानमंत्री असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में भी कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

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रक्षा मंत्रालय ने झूंसी में 100 घरों पर लगाया लाल निशान, खाली करने का फरमान

रक्षा मंत्रालय ने झूंसी में 100 घरों पर लगाया लाल निशान, खाली करने का फरमान

प्रयागराज झूंसी के नए इलाक़े पूरे सूरदास में गुरुवार को हड़कंप मच गया, जब सेना ने करीब 100 मकानों और दुकानों पर लाल निशान लगाकर उन्हें खाली करने का फरमान जारी कर दिया। सेना का दावा है कि जिस ज़मीन पर ये घर और दुकानें बने हुए हैं, वह रक्षा मंत्रालय की संपत्ति है, जिस पर स्थानीय लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। अधिकारियों ने नोटिस जारी करते हुए मकान मालिकों को 17 सितंबर तक अपने घर और ज़मीन के दस्तावेज़ लेकर कार्यालय में पेश होने का आदेश दिया है। गौरतलब है कि सेना की ज़मीन पर अवैध कॉलोनियां और पूरा मोहल्ला तक खड़ा हो चुका है। पहले भी मकान मालिकों को नोटिस दिया गया था, लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ। अब लाल निशान लगने के बाद पूरे क्षेत्र में खलबली मची हुई है और लोग अपने-अपने घरों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

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पूर्णिया एक्सप्रेस ट्रेन में आग- बोगी से धुआं उठते ही मची अफरा तफरी.....

पूर्णिया जा रही एक्सप्रेस ट्रेन में आग- बोगी से धुआं उठते ही मची अफरा तफरी…..

साहिबाबाद 11 Sep 2025 10:03 AM तकरीबन 40 मिनट की मशक्कत के बाद बोगी में लगी आग पर काबू पा लिया गया है गाजियाबाद पैसेंजर लेकर बिहार के पूर्णिया जा रही पूर्णिया एक्सप्रेस स्पेशल ट्रेन की बोगी में अचानक आग लग जाने से यात्रियों में बुरी तरह से अफरा तफरी मच गई बोगी के अंदर से धुआं उठते देख घबराए पैसेंजर ट्रेन से कूद कर तुरंत नीचे आ गए।तकरीबन 40 मिनट की मशक्कत के बाद बोगी में लगी आग पर काबू पा लिया गया है साहिबाबाद रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे में आनंद विहार से चलकर पूर्णिया जा रही एक्सप्रेस स्पेशल ट्रेन की लगेज बोगी से अचानक धुआं उठने लगा। बोगी से धुआं निकलते देखकर स्टेशन पर चारों तरफ तफरी मच गई। साहिबाबाद स्टेशन पर खड़ी ट्रेन में सवार यात्री आग लगने की जानकारी मिलते ही तुरंत कूद कर नीचे आ गए बोगी में लगी आग ने भीतर रखे सामान को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया घटना की जानकारी मिलते ही फायर ब्रिगेड के जवान आग बुझाने वाली गाड़ी के साथ मौके पर पहुंच गए। घटना स्थल पर पहुंचे फायर, कर्मचारियों ने तुरंत कार्यवाही करते हुए आग में जल रही बोगी को बाकी ट्रेन से अलग कर दिया, ताकि पैसेंजर की जान को किसी तरह का खतरा नहीं हो सके। तकरीबन 40 मिनट की मशक्कत के बाद फायर कर्मियों ने स्पेशल ट्रेन की बोगी में लगी आग पर काबू पा लिया। ट्रेन को बाकी डिब्बों के साथ उसकी मंजिल की तरफ रवाना कर दिया गया।

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फर्रुखाबाद में महिला की मौत का खुलासा

आरोपी के साथ चार साल से चल रहे संबंध, दबाव के चलते लगाई आग फर्रुखाबाद। जहानगंज थाना क्षेत्र में बीते दिनों जली हुई हालत में अस्पताल पहुंची महिला की मौत के मामले में पुलिस ने जांच पूरी कर दी है। पुलिस का कहना है कि महिला ने खुद पेट्रोल डालकर आग लगाई थी। इस घटना के पीछे आरोपी युवक से चल रहे अवैध संबंध और साथ रहने का दबाव कारण बताया गया है। घटना 6 सितंबर की है। उस दिन महिला स्कूटी से दरियायगंज स्थित एक निजी नर्सिंग होम पहुंची थी। गंभीर हालत देखकर वहां मौजूद स्टाफ ने परिजनों को सूचना दी। परिजन तुरंत उसे जिला अस्पताल लोहिया और फिर सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी लेकर गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतका के पिता ने जहानगंज थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया कि उनकी बेटी को युवक दीपक और उसके पांच अज्ञात साथियों ने पेट्रोल डालकर जला दिया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। सीओ के नेतृत्व में पांच टीमें बनाई गईं और 24 घंटे के भीतर आरोपी दीपक को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि मृतका और आरोपी के बीच पिछले चार साल से संबंध थे। आरोपी महिला पर साथ रहने का दबाव बना रहा था। घटना वाले दिन भी दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद महिला ने आहत होकर पेट्रोल डालकर खुद को आग के हवाले कर लिया। आग लगने के बाद वह आरोपी के कपड़े पहनकर इलाज कराने अस्पताल पहुंची थी। मोबाइल लोकेशन की जांच में भी दोनों की मौजूदगी एक साथ मिली। अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. संजय सिंह ने फतेहगढ़ पुलिस लाइन सभागार में प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

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पंजाब में बाढ़: जनजीवन अस्त-व्यस्त, राहत कार्य जारी

पंजाब इस समय भीषण बाढ़ की मार झेल रहा है। लगातार हो रही भारी वर्षा और पहाड़ी इलाकों से छोड़े गए अतिरिक्त पानी के कारण नदियाँ उफान पर हैं। कई जिलों के सैकड़ों गाँव पानी में डूब चुके हैं। गाँव की गलियाँ, खेत और घर जलमग्न हो गए हैं। लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं। फसलों और पशुधन पर भारी असर पंजाब, जिसे देश का अन्नदाता कहा जाता है, आज फसल बर्बादी के गहरे संकट से जूझ रहा है। धान और मक्का जैसी प्रमुख फसलें पानी में पूरी तरह डूब गई हैं। किसानों की मेहनत और सालभर की कमाई एक ही झटके में खत्म हो गई। साथ ही, हज़ारों मवेशियों और पोल्ट्री को भी बाढ़ ने प्रभावित किया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर और गहरा असर पड़ा है। जनहानि और पलायन कई लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं और हजारों परिवार बेघर हो गए हैं। राहत शिविरों में शरण लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। महिलाएँ, बच्चे और बुज़ुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हैं। स्वास्थ्य सेवाओं और साफ पीने के पानी की कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। राहत और बचाव कार्य राज्य सरकार और प्रशासनिक टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। एनडीआरएफ और स्थानीय स्वयंसेवी संगठन नावों और ट्रैक्टरों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचा रहे हैं। कई जगहों पर अस्थायी शिविर, भोजन वितरण केंद्र और चिकित्सा सुविधाएँ भी स्थापित की गई हैं। राजनीतिक बहस और भविष्य की चुनौती बाढ़ ने न केवल पंजाब की आर्थिक स्थिति को झकझोरा है, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी बहस छेड़ दी है। सरकार पर पर्याप्त तैयारी न करने के आरोप लग रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि समय रहते बाँधों और तटबंधों की मरम्मत की जाती और जल निकासी की व्यवस्था सुधारी जाती, तो नुकसान कम हो सकता था। सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं  पंजाब की यह बाढ़ सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि चेतावनी भी है कि हमें जल प्रबंधन और आपदा नियंत्रण की योजनाओं को और मज़बूत करना होगा। आज सबसे बड़ी ज़रूरत है कि प्रभावित परिवारों को तुरंत राहत मिले और भविष्य में ऐसी त्रासदी को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ। PunjabFloods #punjabNews#punjabfloods2025 #PunjabRescue #floods #PunjabFloodSituation #BreakingNews #FloodAlert

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turmoil of Maharashtra

महाराष्ट्र की राजनीतिक घमासान में एक दो नहीं 4-4 ‘संजय’ पर चर्चा, तीखी जुबानी जंग से लेकर हाथापाई तक 

महाराष्ट्र की राजनीति में एक तरफ जहां मराठी बनाम हिंदी भाषा का मुद्दा गर्म है, वहीं राज्य में संजय नाम के नेता भी सुर्खियों में हैं। एक तरफ जहां उद्धव ठाकरे गुट के मुख्य प्रवक्ता और राज्य सभा सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) अपने बयानों को लेकर हमेशा चर्चा में रहते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस से शिंदे गुट वाली शिवसेना में आए संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) भी विपक्ष पर तीखा पलटवार करने के कारण मीडिया में छाए रहते हैं। इन दोनों संजय के अलावा महाराष्ट्र में संजय नाम से दो और ऐसे नेता हैं, जो चर्चा में बने रहते हैं। ये हैं संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) और संजय गायकवाड़ (Sanjay Gaikwad)।  संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) राज्य सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री हैं और इस समय कैश कांड वीडियो को लेकर चर्चा में बने हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ संजय गायकवाड़ मुंबई के आकाशवाणी की कैंटीन में खराब खाने को लेकर मारपीट करने के चक्कर में चर्चित हो चुके हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में देखें तो ये चारों संजय इस समय एक दूसरे पर हमलवार हैं। संजय राउत (Sanjay Raut) जहां शिरसाट और गायकवाड़ को घेरने में जुटे हैं, तो वहीं संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) अपने बयानों से राउत पर प्रहार कर रहे हैं।  संजय राउत बनाम संजय शिरसाट और संजय निरुपम बता दें कि मंत्री संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) को आयकर विभाग ने संपत्ति में गड़बड़ी को लेकर नोटिस भेजा हुआ है। इस पर राजनीति अभी थमी भी नहीं थी कि संजय राउत (Sanjay Raut) ने शिरसाट के बेडरूम का एक वीडियो जारी किया। जिसमें शिरसाट कथित तौर पर नोटों से भरे एक बैग के पास सिगरेट पीते नजर आ रहे हैं। संजय राउत ने इस वीडियो के माध्यम से शिंदे की शिवसेना पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए घेरा है। वहीं संजय शिरसाट ने बैग में कपड़े होने का दावा करते हुए राउत पर मानहानि का केस करने की चेतावनी दी है।  वहीं दूसरी तरफ संजय निरुपम और संजय राउत (Sanjay Raut) भी एक दूसरे पर लगातार प्रहार करने में जुटे हैं। पिछले दिनों संजय राउत ने दावा किया था कि गुरु पूर्णिमा के दिन एकनाथ शिंदे अपने “गुरु” गृह मंत्री अमित शाह से मिलने दिल्ली गए थे। राउत के इस दावे को संजय निरुपम ने झूठा बातते हुए घेरा। निरुपम ने कहा कि गुरु पूर्णिमा के दिन अमित शाह झारखंड में थे और वहां एक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे। यह सभी को पता है, लेकिन इसके बाद भी राउत ने गंदी राजनीति के लिए झूठ फैलाया। इसके लिए राउत को बिना किसी शर्त एकनाथ शिंदे से माफी मांगनी चाहिए। साथ ही राउत को चटुकार तक कह दिया। इसके बाद से ही दोनों में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है।   इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ संजय गायकवाड़ भी भर रहे हुंकार बुलढाणा विधानसभा से विधायक संजय गायकवाड़ अपने कैंटीन प्रकरण को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। गायकवाड़ ने खराब खाने का आरोप लगाते हुए कैंटीन कर्मचारियों के साथ मारपीट की थी, जिसका वीडियो वायरल हो गया। गायकवाड़ के इस हरकत पर महराष्ट्र में खूब बवाल हुआ है। विवाद बढ़ने के बाद सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कार्रवाई के लिए यह मामला विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर को रेफर कर दिया है। अब देखना यह होगा कि स्पीकर इस मामले में क्या एक्शन लेते हैं। संजय गायकवाड़ अपनी हरकतों और बयानों को लेकर अक्सर कंट्रोवर्सी में रहते हैं। कैंटीन कर्मचारियों को पीटने के बाद गायकवाड़ ने विवादित बयान देते दक्षिण भारतीयों पर भी निशाना साधा था। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा था साउथ इंडियन डांस और लेडीज बार चला मराठा संस्कृति को खराब कर रहे हैं। ऐसे लोगों को कैंटीन के ठेके नहीं मिलने चाहिए। Latest News in Hindi Today Hindi news  #Maharashtraelection #Election2025 #Mumbai #Devendrafadnavish

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Mahakal Ujjain

उज्जैन में क्यों निकलती है महाकाल की सवारी? जानिए सदियों पुरानी परंपरा और उसका धार्मिक रहस्य

धार्मिक नगरी उज्जैन को प्राचीन काल से ही शिव की नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग को बारह ज्योतिर्लिंगों में सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त है। सावन के पावन महीने में जब पूरी धरती शिवमय हो जाती है, तब उज्जैन में महाकाल की सवारी एक ऐसा अद्भुत आयोजन होता है, जिसे देखने और अनुभव करने के लिए लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से उमड़ पड़ते हैं। पर क्या आपने कभी सोचा है कि इस महाकाल की सवारी का धार्मिक महत्व क्या है? क्यों भगवान स्वयं नगर भ्रमण पर निकलते हैं? आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक परंपरा और उसकी आस्था से जुड़ी गहराई को। महाकाल की सवारी क्या है? महाकाल की सवारी उज्जैन (Mahakal Ujjain) में सावन और भाद्रपद के विशेष सोमवारों को निकलने वाली एक पवित्र धार्मिक शोभायात्रा है। इस सवारी में भगवान महाकाल अपने विविध स्वरूपों—मनमहेश, चंद्रमौलेश्वर, भूतनाथ आदि—में नगर भ्रमण करते हैं। यह सवारी महाकाल मंदिर से निकलकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए रामघाट तक जाती है, जहां शिप्रा नदी में भगवान का अभिषेक किया जाता है। महाकाल की सवारी 2025: जानिए कब-कब निकलेंगी भव्य शोभायात्राएं  सावन मास में भगवान महाकाल की सवारी हर सोमवार को निकाली जाती है। वर्ष 2025 में यह सवारियां निम्नलिखित तिथियों को उज्जैन (Ujjain) नगर में श्रद्धा और भव्यता के साथ निकाली जाएंगी: महाकाल की सवारी का ऐतिहासिक महत्व (Mahakal Ki Sawari History) सावन और भाद्रपद के पावन महीनों में निकलने वाली महाकाल की यह विशेष सवारी एक प्राचीन धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, जो आज भी पूरे श्रद्धा और विधि-विधान से निभाई जाती है। इतिहास के अनुसार, इस सवारी को भव्य रूप देने का श्रेय राजा भोज को जाता है। उनके शासनकाल में महाकाल की सवारी में नए रथों और हाथियों को सम्मिलित कर इसे एक राजसी शोभायात्रा का रूप दिया गया था। तब से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है और प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन में भाग लेते हैं। महाकाल की सवारी का आध्यात्मिक महत्व (Mahakal Sawari Significance) महाकाल की सवारी को अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन माना जाता है। इस अवसर पर भगवान महाकाल को रथ पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया जाता है। सवारी के दौरान भक्तगण ऊँचे स्वर में “जय महाकाल” के नारे लगाते हैं और ढोल-नगाड़ों की गूंज से पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है। इस भव्य यात्रा में तलवारबाज, घुड़सवार और अखाड़ों के साधु-संत भी भाग लेते हैं। यह सवारी महाकाल की शक्ति, साकार स्वरूप और नगर पर उनकी कृपा का प्रतीक मानी जाती है। धार्मिक ग्रंथों में भी इस परंपरा का उल्लेख मिलता है, जो इसकी प्राचीनता और महत्व को प्रमाणित करता है। इसे भी पढ़ें:- सावन 2025: क्यों प्रिय है महादेव को बेलपत्र? जानिए इसके पीछे छिपी पौराणिक कथा और महत्व सावन में क्यों होती है सवारी? सावन का महीना भगवान शिव (Lord Shiva) को अत्यंत प्रिय है। इस मास में की गई शिव उपासना, व्रत, अभिषेक और पूजन का फल अत्यधिक होता है। सावन के सोमवार और महाकाल की सवारी का संयोग भक्तों के लिए एक दुर्लभ अवसर होता है, जब वे स्वयं महाकाल के नगर भ्रमण और दर्शन का पुण्य प्राप्त करते हैं। यह विश्वास है कि महाकाल की सवारी में सम्मिलित होने से कष्टों का नाश, पापों से मुक्ति और कुल की उन्नति होती है। यही कारण है कि यह सवारी हर वर्ष भव्य रूप से श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली जाती है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news  #MahakalKiSawari #UjjainMahakal #LordShivaProcession #Sawan2025 #MahakalDarshan #SpiritualIndia

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Lord Shiva Puja Vidhi

सावन सोमवार 2025: शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय इन गलतियों से रहें सावधान, जानें सही विधि और शुभ मुहूर्त

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पावन और फलदायी माना जाता है। विशेष रूप से सावन के सोमवार को व्रत और जलाभिषेक करने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं। भक्तगण इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, भस्म आदि अर्पित कर पूजन करते हैं। लेकिन कई बार श्रद्धा के साथ की गई पूजा भी अशुद्धियों और अनजाने में हुई गलतियों के कारण पूर्ण फल नहीं देती। इसलिए जरूरी है कि सावन सोमवार (Savan Somwar) के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखा जाए। शिवलिंग पर जल अर्पण की विधि (Lord Shiva Puja Vidhi) जब आप शिव मंदिर या घर में शिवलिंग की पूजा करने जाएं, तो पूजन स्थल पर उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों। पूजा में तांबे, पीतल या चांदी के लोटे में जल लेकर विधिपूर्वक अर्पण करें। सबसे पहले शिवलिंग के दाहिने भाग पर जल चढ़ाएं, जो गणेश जी का प्रतीक स्थान माना जाता है।इसके बाद बाएं भाग पर जल अर्पित करें, जो भगवान कार्तिकेय से संबंधित माना जाता है।फिर शिवलिंग के मध्य भाग में जल चढ़ाएं, जिसे अशोक सुंदरी (शिव-पार्वती की पुत्री) का स्थान कहा गया है।इसके बाद शिवलिंग के गोलाकार आधार पर जल चढ़ाएं, जिसे माता पार्वती के कर-स्पर्श जैसा माना जाता है।अंत में शिवलिंग के मुख्य ऊपरी भाग पर जल अर्पित करें, जो स्वयं भगवान शिव का प्रतीक होता है। मंत्र जाप का महत्व: पूरे जलाभिषेक के दौरान श्रद्धा भाव से “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें। यह न केवल पूजा को पूर्ण बनाता है, बल्कि मन को भी एकाग्र और शुद्ध करता है, जिससे भगवान शिव की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है। सावन में जलाभिषेक का शुभ समय (Sawan Somvar Puja Vidhi 2025) 1. ब्रह्म मुहूर्त:शिवलिंग पर जल अर्पण करने का सर्वोत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त होता है, जो सूर्योदय से करीब डेढ़-दो घंटे पहले माना जाता है। यह समय आत्मिक शुद्धि, ध्यान और ईश्वर की साधना के लिए अत्यंत शुभ और प्रभावकारी माना गया है। 2. प्रातःकाल (सुबह 4 से 6 बजे):यदि ब्रह्म मुहूर्त में पूजा संभव न हो, तो सुबह 4 बजे से 6 बजे के बीच शिवलिंग पर जलाभिषेक करना भी अत्यंत लाभकारी होता है। इस समय शरीर, मन और वातावरण तीनों शुद्ध रहते हैं, जिससे पूजा में एक विशेष ऊर्जा और पवित्रता बनी रहती है। 3. सुबह 7:00 से 11:00 बजे तक:जो लोग बहुत जल्दी नहीं उठ पाते, उनके लिए सुबह 7 बजे से 11 बजे के बीच भी शिव पूजन करना शुभ माना जाता है। इस समय की गई पूजा यदि पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक की जाए, तो भगवान शिव अवश्य प्रसन्न होते हैं और भक्त को मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। इसे भी पढ़ें:- सावन 2025: क्यों प्रिय है महादेव को बेलपत्र? जानिए इसके पीछे छिपी पौराणिक कथा और महत्व जल चढ़ाते समय न करें ये गलतियां नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें।Latest News in Hindi Today Hindi news  #SawanSomvar2025 #LordShivaBlessings #SawanVrat #ShivBhakti #MiraculousRemedie

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Career in yoga

Career in yoga: कोर्स से लेकर इंस्टीट्यूट्स तक योगा में करियर बनने के लिए पाएं इसके बारे में पूरी जानकारी

योगा (Yoga) के बारे में न केवल आज पूरा विश्व जानता है, बल्कि शारीरिक और मानसिक बचाव के लिए इसे अपनाया भी है। भारत में शुरू हुई इस तकनीक को आजकल करोड़ों लोग अपने जीवन का जरूरी हिस्सा बना चुके हैं। ऐसा माना गया है कि नियमित रूप से योगा करने से कई समस्याओं से राहत पाई जा सकती है। लेकिन, योगा (Yoga) की शुरुआत करने के लिए एक्सपर्ट की सलाह और मार्गदर्शन लेना जरूरी है। अगर आप योगा (Yoga) में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं, तो आपको इसके बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए कि आप इसका कहां कोर्स कर सकते हैं और उसमे कितना समय लगेगा आदि। आइए जानें कि योगा में करियर कैसे बनाएं (How to make a career in yoga)? इसकी पढ़ाई कहां से की जाए, यह जानकारी भी पाएं। योगा में करियर कैसे बनाएं (How to make a career in yoga): योगा कोर्स  योगा में करियर (Career in yoga) बनाने के लिए आप कई कोर्स कर सकते हैं, जो इस प्रकार हैं: योगा कोर्स करवाने वाले मुख्य इंस्टीट्यूट्स हमारे देश में ऐसे कई इंस्टीट्यूट्स हैं जो यह कोर्स कराते हैं। इनकी लिस्ट बहुत लंबी है। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं:  इसे भी पढ़ें:- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट कैसे बनें? योगा में करियर बनाने के लिए किन स्किल्स का होना जरूरी है? योगा में करियर (Career in yoga) बनाने के लिए कैंडिडेट्स में निम्नलिखित स्किल्स होना जरूरी है:  नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi  #HowtomakeacareerinYoga #Yoga #YogaScience #MainInstitutesOfferingYogaCourses #CareerinYoga

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