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Nepal Floods: मृतकों की संख्या 469 पहुंची; Tibet में नई बाढ़ का खतरा, Rescue Teams को पीछे हटाया गया

काठमांडू/तिब्बत: Nepal-Tibet border पर आई विनाशकारी flash flood में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 28 अगस्त 2026 की ताजा जानकारी के मुताबिक Nepal में 469 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि China के Tibet क्षेत्र में अब तक 3 मौतें दर्ज हैं। दोनों क्षेत्रों को मिलाकर confirmed death toll कम से कम 472 हो गया है। सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं और disaster zone में नई बाढ़ का खतरा rescue operation के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सबसे गंभीर development Nepal-China border पर debris से बनी एक बड़ी barrier lake का overflow होना है। इसके कारण Chinese authorities ने Tibet में rescue personnel और vehicles को temporarily सुरक्षित स्थानों पर पीछे हटने का आदेश दिया, जबकि Nepal में भी कुछ समय के लिए search-and-rescue operation रोकना पड़ा। 469 मौतें केवल Nepal में Nepal Police ने शुक्रवार सुबह बताया कि देश में confirmed death toll एक दिन पहले के करीब 390 से बढ़कर 469 हो गया है। China की तरफ Tibet में अभी तक 3 deaths confirm की गई हैं। इसलिए अगर Nepal और Tibet दोनों को जोड़ा जाए तो कुल confirmed deaths कम से कम 472 हैं। यह संख्या आगे बढ़ सकती है क्योंकि बड़ी संख्या में लोग अभी तक लापता हैं और कई remote areas तक rescue teams पूरी तरह नहीं पहुंच पाई हैं। 1,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता Associated Press की latest update के मुताबिक Nepal और Tibet को मिलाकर 1,500 से ज्यादा लोगों के missing होने की reports हैं। Reuters के अनुसार Nepal और Tibet में लगभग 1,000 से अधिक लोग missing बताए जा रहे थे, जबकि अलग-अलग official updates में संख्या लगातार बदल रही है। Foreign tourists और pilgrims भी missing लोगों में बड़ी संख्या में शामिल हैं। Disaster के scale और communication breakdown के कारण missing-person figures में लगातार revision हो रहा है। Tibet के Gyirong में 558 लोग लापता China के Tibet Autonomous Region में सबसे ज्यादा नुकसान Gyirong County और border crossing area में हुआ है। Chinese state broadcaster CCTV के मुताबिक वहां 558 लोग missing हैं, जिनमें करीब 260 foreign nationals भी शामिल हैं। Gyirong Nepal और Tibet के बीच महत्वपूर्ण border route है और Mount Kailash तथा दूसरे Himalayan destinations जाने वाले tourists और pilgrims भी इस corridor का इस्तेमाल करते हैं। नई Barrier Lake बनी सबसे बड़ा खतरा 26 अगस्त की devastating flood के बाद पहाड़ों से आए rock, ice और mud ने river system के कुछ हिस्सों को block कर दिया। इस blockage से एक बड़ी barrier lake बन गई। Reuters के मुताबिक गुरुवार को इसमें करीब 1.5 से 2 million cubic metres पानी था, लेकिन शुक्रवार तक reservoir बढ़कर 2.5 million cubic metres से ज्यादा हो गया। पानी बढ़ने के बाद lake overflow करने लगी। Authorities को डर है कि अगर natural debris dam अचानक टूटता है तो downstream इलाकों में एक और powerful flash flood आ सकती है। Tibet में Rescue Teams को पीछे हटाया गया नई flood warning के बाद Chinese authorities ने high-risk area में काम कर रहे सभी rescue personnel और vehicles को safe location पर stand-by रहने को कहा। Reuters के मुताबिक lake के burst होने के खतरे के कारण यह preventive action लिया गया। इसलिए “Tibet में rescue operation permanently बंद” कहना सही नहीं होगा। स्थिति यह है कि कुछ high-risk zones में rescue temporarily suspend/withdraw किया गया है, ताकि rescuers खुद दूसरी flood wave की चपेट में न आएं। Nepal में भी 90 मिनट रोका गया Operation Nepal की तरफ भी authorities ने नई flood warning मिलने के बाद rescue operations को करीब 90 minutes के लिए रोकने की जानकारी दी। Rasuwa district में residents को hills और ऊंचे स्थानों की ओर जाते देखा गया, क्योंकि river level फिर बढ़ने लगा था। हालांकि Associated Press की बाद की update में Nepal Police spokesperson ने कहा कि rescue operation पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और teams high alert पर काम कर रही हैं। इसलिए situation तेजी से बदल रही है। River Level फिर बढ़ा Rasuwa district के वरिष्ठ अधिकारी Narendra Pariyar ने Reuters को बताया कि authorities को upstream lake के bank टूटने की warning मिली थी। उन्होंने कहा कि नदी में पानी का level बढ़ता दिखाई दे रहा है, हालांकि उस समय exact rise का आंकड़ा उपलब्ध नहीं था। इस warning ने पहले से devastated downstream settlements में panic बढ़ा दिया। 26 अगस्त को कैसे आई थी इतनी भयानक Flood? Initial scientific assessments के मुताबिक disaster की शुरुआत Himalayan region में बड़े glacier/ice-rock collapse से हुई। एक विशाल rock और ice mass नीचे गिरा, जिससे river temporarily block हो गई। बाद में trapped water ने debris barrier को तोड़ा और विशाल मात्रा में: तेजी से downstream areas की ओर बढ़ा। इस surge ने Nepal और Tibet के कई settlements को कुछ ही मिनटों में तबाह कर दिया। USGS ने दर्ज किया Glacier Collapse U.S. Geological Survey यानी USGS ने घटना के दौरान seismic signals का analysis किया। AP के मुताबिक agency ने इसे magnitude 5.2 के बराबर glacier collapse event के रूप में identify किया, जिसमें satellite imagery और nearby seismic stations के data का इस्तेमाल किया गया। Scientists अभी भी exact sequence की जांच कर रहे हैं। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि पहले earthquake आया और उसी ने glacier तोड़ा। मौजूदा evidence glacier collapse को primary disaster mechanism की ओर इशारा करता है। Roads और Bridges पूरी तरह तबाह Flood ने Kathmandu और Tibet के Lhasa region को जोड़ने वाले important Himalayan route को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया है। Power stations, bridges, roads और entire settlements flood और debris की चपेट में आए। कुछ areas में road connectivity पूरी तरह खत्म होने के कारण rescuers को helicopters, sniffer dogs और heavy machinery पर निर्भर रहना पड़ रहा है। Remote valleys तक पहुंच अभी भी बड़ी चुनौती है। Foreign Tourists भी बड़ी संख्या में Missing Disaster के समय Nepal-Tibet region में बड़ी संख्या में foreign trekkers, tourists और pilgrims मौजूद थे। Reuters के मुताबिक missing लोगों में कम से कम 540 foreigners शामिल हैं। अलग-अलग nationality lists में…

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Devendra Fadnavis ने Samay Raina को किया सम्मानित; Maharashtra Cyber के मंच पर ‘Latent’ विवाद पर खुद ही ली चुटकी, अब Sunil Pal ने उठाए सवाल

मुंबई: Stand-up comedian Samay Raina एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई विवादित comedy show नहीं बल्कि Maharashtra Cyber का cyber-awareness campaign है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में Samay Raina को cybercrime awareness initiative में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया। यह कार्यक्रम 26 अगस्त 2026 को आयोजित हुआ था। इस कार्यक्रम में Maharashtra Cyber ने cyber fraud को लेकर awareness बढ़ाने के उद्देश्य से short film ‘Digital Arrest’ और ‘1930 Maharashtra Cyber Anthem’ लॉन्च किया। Samay Raina समेत entertainment industry के कई कलाकार इस initiative से जुड़े थे और उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया गया। अब 28 अगस्त 2026 को इस सम्मान पर comedian Sunil Pal की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामला फिर social media पर चर्चा में है। Sunil Pal ने Samay Raina को सम्मानित किए जाने पर सवाल उठाते हुए इसे गलत संदेश देने वाला बताया है। आखिर Samay Raina को क्यों किया गया सम्मानित? Samay Raina को उनकी comedy career या किसी particular show के लिए यह सम्मान नहीं दिया गया। Reports के मुताबिक उन्हें Maharashtra Cyber द्वारा चलाए जा रहे cybercrime awareness campaign में योगदान के लिए felicitate किया गया। इस campaign में ‘Digital Arrest’ नाम की awareness short film और 1930 cyber helpline को promote करने वाला Maharashtra Cyber Anthem शामिल है। Digital arrest scams पिछले कुछ वर्षों में cybercrime का बड़ा तरीका बनकर सामने आए हैं। इसमें fraudsters खुद को police, CBI, customs या दूसरी investigating agency का अधिकारी बताकर victim को डराते हैं और video call या phone के जरिए पैसे transfer करने का दबाव बनाते हैं। इसी तरह के scams को लेकर public awareness बढ़ाने के लिए Maharashtra Cyber ने celebrities को campaign में शामिल किया। मंच पर Samay Raina ने खुद Cyber Cell पर किया Joke सम्मान लेने के बाद Samay Raina ने अपने पुराने Maharashtra Cyber experience को लेकर मजाक किया, जिससे कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis और दूसरे celebrities हंस पड़े। Raina ने कहा कि Maharashtra Cyber के साथ उनका “पुराना रिश्ता” है और 1930 उनके लिए जाना-पहचाना number है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि Maharashtra Cyber इतनी active है कि कोई व्यक्ति India में हो या America में, agency उसे ढूंढ लेगी। उन्होंने अपने पिछले summons का जिक्र करते हुए यह भी मजाक किया कि इस बार Cyber Cell का officer उन्हें लेकर आया और परिणाम interrogation नहीं बल्कि felicitation निकला। इस comment पर CM Fadnavis समेत मंच पर मौजूद कई लोगों की हंसी छूट गई। CM Fadnavis से मांग लिया Biscuit कार्यक्रम का एक और clip social media पर तेजी से viral हुआ। सम्मान लेने के दौरान Samay Raina ने मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis से मजाकिया अंदाज में पास रखा biscuit लेने की अनुमति मांगी। उनके अचानक किए गए सवाल से मंच पर मौजूद लोग हंसने लगे और formal cyber-awareness programme कुछ देर के लिए stand-up comedy जैसे माहौल में बदल गया। Raina ने बाद में कार्यक्रम का video अपने social media account पर भी साझा किया। कार्यक्रम में Pankaj Tripathi समेत कई Celebrities Maharashtra Cyber के इस programme में Samay Raina अकेले entertainment personality नहीं थे। Reports के मुताबिक कार्यक्रम में: समेत कई जाने-माने कलाकार मौजूद थे। इन personalities को cyber-awareness film और anthem के जरिए लोगों तक cyber safety का message पहुंचाने में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। Fadnavis ने Cybercrime Awareness पर दिया जोर CM Devendra Fadnavis ने कार्यक्रम में cybercrime के बढ़ते खतरे को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि actors, singers और दूसरे लोकप्रिय चेहरे awareness messages को आम लोगों तक ज्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचा सकते हैं। सरकार और cyber authorities का focus खास तौर पर digital arrest जैसे scams से लोगों को बचाना है। Cyber fraud की स्थिति में national cybercrime helpline 1930 पर शिकायत की जा सकती है। क्यों चर्चा में है Samay Raina और Maharashtra Cyber का ‘पुराना रिश्ता’? इस felicitation को लेकर social media पर सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए हुई क्योंकि लगभग डेढ़ साल पहले Samay Raina का Maharashtra Cyber के साथ रिश्ता बिल्कुल अलग परिस्थिति में सामने आया था। February 2025 में उनके comedy show ‘India’s Got Latent’ के एक episode में YouTuber और podcaster Ranveer Allahbadia की एक sexually explicit टिप्पणी पर बड़ा विवाद हुआ था। उसके बाद अलग-अलग जगह complaints और FIRs दर्ज हुईं और Samay Raina समेत show से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की गई। Maharashtra Cyber ने भेजे थे Summons India’s Got Latent controversy के दौरान Maharashtra Cyber ने Samay Raina को questioning के लिए बुलाया था। उस समय Raina विदेश में थे और उन्होंने video conferencing के जरिए अपना statement दर्ज कराने की अनुमति मांगी थी, लेकिन Maharashtra Cyber ने personal appearance पर जोर दिया। बाद में Samay Raina मुंबई में agency के सामने पेश हुए थे। इसी background के कारण अब उसी Maharashtra Cyber के awareness programme में उन्हें सम्मानित किए जाने को social media users “full circle moment” बता रहे हैं। आज Sunil Pal ने क्यों किया विरोध? 28 अगस्त की fresh development में comedian Sunil Pal ने Samay Raina की felicitation को लेकर नाराजगी जताई है। Sunil Pal ने अपने video की शुरुआत “घोर कलयुग आ गया है” कहते हुए की और सवाल उठाया कि past controversies से जुड़े entertainer को government-linked मंच पर सम्मानित करना युवा comedians को क्या message देगा। Pal का तर्क था कि controversial या abusive content के बाद publicity हासिल करने और फिर public recognition मिलने से गलत precedent बन सकता है। यह Sunil Pal की व्यक्तिगत राय और आलोचना है; इसे Maharashtra government या किसी authority की official assessment नहीं माना जाना चाहिए। Sunil Pal ने नए Comedians को लेकर जताई चिंता Sunil Pal ने कहा कि उनके हिसाब से young performers को ऐसा impression नहीं मिलना चाहिए कि controversy और police cases popularity या recognition पाने का रास्ता हैं। उन्होंने Samay Raina और India’s Got Latent के past content को लेकर भी अपनी असहमति दोहराई। खबर लिखे जाने तक Samay Raina की ओर से Sunil Pal की इस fresh criticism पर कोई verified detailed response सामने नहीं…

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Malda Medical College में 3 हफ्तों में 60 शिशुओं की मौत; Health Department ने मांगी Detailed Report, आज District-Level Review

मालदा: पश्चिम बंगाल के Malda Medical College and Hospital (MMCH) में August के पहले तीन हफ्तों के दौरान 60 बच्चों/नवजातों की मौत के आंकड़े सामने आने के बाद राज्य का Health Department हरकत में आ गया है। इनमें August के दूसरे सप्ताह में एक ही दिन 10 बच्चों की मौत भी दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल से detailed report मांगी गई है और बच्चों को पहले इलाज देने वाले private hospitals, nursing homes और block-level health facilities की भी जांच की जा रही है। 27 August 2026 की fresh स्थिति में initial investigation जारी है, preliminary report राज्य सरकार को भेजी जा चुकी है और Malda District Magistrate के स्तर पर आज मामले की review meeting निर्धारित की गई है। फिलहाल किसी एक बीमारी, hospital negligence या infection को इन सभी मौतों का confirmed कारण नहीं बताया गया है। तीन हफ्तों में 60 मौतों से मचा हड़कंप Hospital records के मुताबिक August के पहले तीन सप्ताह में MMCH में कुल 60 pediatric deaths दर्ज हुईं। सबसे ज्यादा चिंता तब बढ़ी जब दूसरे सप्ताह के एक दिन में ही 10 बच्चों की मौत हुई। इस unusual cluster के बाद state Health Department ने hospital administration से deaths का case-by-case विवरण मांगा। मामला केवल Malda Medical College के treatment system तक सीमित नहीं रखा गया है। अधिकारी यह भी जांच रहे हैं कि जिन बच्चों को दूसरी facilities से MMCH refer किया गया, वहां उन्हें शुरुआती स्तर पर किस तरह का इलाज मिला था और referral कितनी जल्दी किया गया। 60 में से 44 बच्चे दूसरे Hospitals में जन्मे थे पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 60 मृत बच्चों में से 44 का जन्म Malda Medical College में नहीं हुआ था। ये बच्चे अन्य government hospitals, private hospitals, nursing homes या health facilities में पैदा हुए थे और उनकी condition गंभीर होने के बाद उन्हें MMCH भेजा गया। बाकी 16 बच्चों का जन्म Malda Medical College में हुआ था। यही वजह है कि Health Department अब केवल medical college नहीं बल्कि पूरे referral chain की जांच कर रहा है। एक दिन में मरे 10 बच्चों में 8 बाहर से हुए थे Refer जिस दिन 10 बच्चों की मौत दर्ज हुई, उस दिन के cases की भी अलग से scrutiny हो रही है। MMCH Superintendent Prasenjit Bar के मुताबिक इन 10 बच्चों में: Hospital administration ने इस information की पुष्टि की है। इसलिए केवल “Malda Medical College में इलाज की कमी से 60 बच्चों की मौत” कहना अभी उपलब्ध evidence से साबित नहीं होता। Respiratory Distress, Jaundice और Heart Problems के Cases Doctors की शुरुआती जानकारी के मुताबिक मृत newborns में अलग-अलग गंभीर medical conditions थीं। इनमें: जैसी समस्याएं शामिल बताई गई हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी 60 बच्चों की मौत इन्हीं तीन कारणों से हुई। Health Department ने प्रत्येक case के medical records और treatment history की जांच शुरू की है, जिसके बाद ही mortality pattern को लेकर ज्यादा स्पष्ट picture सामने आएगी। Health Department ने मांगी Detailed Report West Bengal Health Department ने Malda Medical College administration से पूरे मामले पर comprehensive report मांगी है। Hospital Superintendent Prasenjit Bar ने बताया कि एक preliminary report पहले ही भेजी जा चुकी है, जबकि विस्तृत report तैयार की जा रही है। Detailed report में संभवतः यह देखा जाएगा कि: इन सवालों के जवाब final inquiry के बाद ही स्पष्ट होंगे। 16 Hospitals और Nursing Homes की हो चुकी जांच Health officials ने investigation को district level तक expand कर दिया है। Latest reports के मुताबिक 16 hospitals और nursing homes का inspection किया जा चुका है। Officials खास तौर पर यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि critically ill newborns को higher medical centre में refer करने से पहले छोटे hospitals में कितना समय रखा गया और वहां appropriate neonatal treatment उपलब्ध था या नहीं। यदि referral में delay हुआ हो तो उसका clinical impact भी जांच का हिस्सा हो सकता है। आज District Magistrate के स्तर पर Review 27 August की fresh development में Malda District Magistrate के स्तर पर आज situation की review meeting scheduled है। बैठक में initial investigation के findings, hospital records, referral pattern और district की neonatal healthcare facilities की स्थिति पर चर्चा की जानी है। खबर लिखे जाने तक इस meeting से किसी final finding या disciplinary action की verified जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि district administration ने किसी doctor, hospital या nursing home को deaths के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया है। क्या Medical Negligence साबित हुई? अभी नहीं। 60 deaths का आंकड़ा गंभीर है और इसी वजह से government review शुरू हुआ है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले इन्हें सीधे medical negligence का परिणाम घोषित करना factual रूप से सही नहीं होगा। सबसे बड़ी वजह यह है कि majority—60 में से 44—बच्चे दूसरी healthcare facilities से serious condition में refer होकर MMCH पहुंचे थे। Investigation को यह तय करना होगा कि mortality में कितना योगदान: का था। Referral System पर सबसे ज्यादा सवाल इस मामले से district healthcare network का referral system भी scrutiny में आ गया है। Malda Medical College tertiary referral centre के रूप में ऐसे कई newborns को receive करता है जिन्हें छोटे hospitals या nursing homes में manage करना संभव नहीं होता। लेकिन अगर बच्चे को critical condition बनने के बाद ही higher centre भेजा जाता है तो survival chances कम हो सकते हैं। इसीलिए authorities अब यह देख रही हैं कि referral सही समय पर किया गया था या नहीं। Private Hospitals भी जांच के घेरे में State Health Department ने सरकारी facilities के साथ private hospitals और nursing homes को भी investigation में शामिल किया है। इसका कारण यह है कि 44 deceased infants MMCH के बाहर पैदा हुए थे। Officials उनके: की जांच कर सकते हैं। अगर किसी facility में prescribed neonatal-care standards का violation मिलता है तो आगे regulatory action संभव हो सकता है, लेकिन अभी ऐसी किसी specific facility के खिलाफ final finding उपलब्ध नहीं है। एक दिन में 10 मौतें क्यों हुईं? यही…

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PM Modi ने Khelo India Dialogue में युवाओं से किया संवाद; 1,500+ Institutions जुड़े, 2036 Olympics पर दिया बड़ा संदेश

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गुरुवार, 27 अगस्त 2026, को देशभर के युवा खिलाड़ियों, students और volunteers से ‘Khelo India Dialogue – Khel Ki Baat, Pradhan Mantri Modi Ke Saath’ के जरिए संवाद किया। कार्यक्रम video conferencing के माध्यम से आयोजित हुआ और देशभर के 1,500 से ज्यादा educational institutions इससे जुड़े। इस दौरान प्रधानमंत्री ने India की Olympic performance को लेकर एक बड़ी चुनौती की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि भारत अभी भी Olympics में शामिल कई खेलों में हिस्सा तक नहीं लेता और medal tally बढ़ाने के लिए देश को नए sporting disciplines में अपनी मौजूदगी मजबूत करनी होगी। PM Modi ने कहा- कई Olympic Sports में India हिस्सा ही नहीं लेता Khelo India Dialogue में प्रधानमंत्री Modi ने India की Olympic strategy को लेकर कहा कि देश को केवल उन खेलों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए जिनमें वह traditionally मजबूत रहा है। उन्होंने इसे एक “bitter truth” बताते हुए कहा कि Olympics में मौजूद लगभग आधे खेलों में Indian teams की participation ही नहीं होती। Paris Olympics 2024 में India ने 32 sports में से 16 में हिस्सा लिया था। प्रधानमंत्री का तर्क था कि जब देश बड़ी संख्या में medal events में compete ही नहीं करेगा तो medal tally बढ़ाना मुश्किल होगा। Surfing और Sport Climbing का दिया Example PM Modi ने खास तौर पर surfing और sport climbing जैसे sports का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि India के पास लंबी coastline और विशाल mountainous regions हैं, इसलिए water sports, mountain sports और winter sports के लिए natural potential मौजूद है। इसके बावजूद कई ऐसे disciplines में India की international presence बहुत कम है। उनका कहना था कि अलग-अलग जिलों और राज्यों की geography के हिसाब से sporting ecosystem develop किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर coastal regions में water sports और Himalayan तथा hill states में climbing तथा winter sports को बढ़ावा दिया जा सकता है। 2036 Olympics पर बड़ा Focus आज के संवाद का सबसे बड़ा विषय 2036 Olympics भी रहा। भारत 2036 Olympic Games की मेजबानी हासिल करने की कोशिश कर रहा है और केंद्र सरकार लंबे समय से इसे national sporting ambition के तौर पर पेश कर रही है। PM Modi ने कहा कि Olympics की तैयारी केवल hosting infrastructure तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि India को उन sports में भी athletes तैयार करने होंगे जहां अभी देश qualify या participate नहीं करता। Khelo India Dialogue के official agenda में भी scientific talent identification, transparent selection और long-term athlete development को 2036 Olympic preparations का हिस्सा बनाया गया है। 5 से 15 साल के बच्चों के लिए Talent Hunt PM Modi ने अपने Independence Day address में घोषित nationwide sports talent hunt का भी जिक्र किया। इस अभियान में 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों की sporting क्षमता पहचानने पर focus रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि केवल यह देखना काफी नहीं कि बच्चा कौन सा खेल खेलना चाहता है; यह भी वैज्ञानिक तरीके से पहचानना जरूरी है कि उसकी physical ability और natural skills किस sport के लिए ज्यादा suitable हैं। इसके बाद सही coaching और long-term training उपलब्ध कराने की जरूरत होगी। यह approach India के traditional talent-selection model से ज्यादा scientific sporting pipeline बनाने की दिशा में कदम माना जा रहा है। ‘Sports सिर्फ Medal जीतने तक सीमित नहीं’ प्रधानमंत्री ने कहा कि sports को केवल medals से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने इसे youth power और Viksit Bharat के nation-building vision से जोड़ा। उनका कहना था कि खेल discipline, fitness, teamwork और leadership जैसे गुण विकसित करते हैं और इसी कारण sporting culture को देश के development process का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। Official programme भी sports के साथ civic responsibility, volunteering, youth leadership और nation-building को जोड़ता है। 1,500 से ज्यादा Educational Institutions जुड़े Ministry of Youth Affairs and Sports की official information के मुताबिक Khelo India Dialogue में 1,500 से ज्यादा educational institutions शामिल किए गए। इनमें प्रमुख तौर पर: शामिल हैं। PMO की दूसरी official communication के मुताबिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के हर जिले से दो colleges के युवाओं की participation का framework भी रखा गया। इससे programme को केवल elite sports institutions तक सीमित रखने के बजाय nationwide youth dialogue बनाने की कोशिश की गई। देश के बड़े खिलाड़ियों को भी किया गया शामिल Khelo India Dialogue की एक खास बात यह रही कि young participants को देश के prominent athletes और medal winners से interact करने का मौका देने की योजना बनाई गई। Official list में शामिल प्रमुख नामों में: Mary Kom, Saina Nehwal, P.T. Usha, Mirabai Chanu, P.R. Sreejesh, Gagan Narang, Deepa Karmakar, Baichung Bhutia, Pullela Gopichand, Anju Bobby George और Karnam Malleswari शामिल हैं। इन athletes के जरिए youngsters को sporting careers, setbacks, training और international competition के अनुभवों से परिचित कराने का उद्देश्य रखा गया। Para Athletes का भी किया जिक्र अपने संबोधन में PM Modi ने para-athletes को भी inspiration के रूप में सामने रखा। उन्होंने archer Sheetal Devi, shooter Avani Lekhara, para powerlifter Jhandu Kumar और javelin thrower Sumit Antil जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी athlete की सफलता केवल व्यक्तिगत achievement नहीं होती बल्कि उससे उसके परिवार, school, college, district और region की पहचान भी बदल सकती है। Major Dhyan Chand को किया याद National Sports Day हर साल 29 August को hockey legend Major Dhyan Chand की birth anniversary पर मनाया जाता है। Khelo India Dialogue 27 August को National Sports Day celebrations के हिस्से के रूप में आयोजित किया गया। PM Modi ने अपने संबोधन में Major Dhyan Chand को याद करते हुए Indian hockey और sporting history में उनके योगदान का जिक्र किया। यहां date distinction महत्वपूर्ण है—National Sports Day 29 August को है, जबकि Khelo India Dialogue दो दिन पहले 27 August को आयोजित किया गया। पांच मुख्य Themes पर ‘Yuva Samvaad’ PMO के मुताबिक इस programme के Yuva Samvaad को पांच प्रमुख themes के आसपास तैयार किया गया है: Sports Ecosystem: बेहतर facilities, coaching, sports science और inclusive participation. Olympic Aspirations: 2036 Olympics के लिए scientific talent identification और…

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Punjab में 3 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारी Mass Casual Leave पर; Hospital OPD से सरकारी दफ्तरों तक काम प्रभावित

चंडीगढ़: पंजाब में आज, 27 अगस्त 2026, सरकारी कर्मचारियों की राज्यव्यापी ‘महा हड़ताल’ का बड़ा असर देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार के अलग-अलग departments, boards और corporations से जुड़े 3 लाख से ज्यादा कर्मचारी mass casual leave पर चले गए हैं। आंदोलन में बड़ी संख्या में pensioners भी शामिल हैं। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में लंबित Dearness Allowance (DA) और उसके arrears, Old Pension Scheme की बहाली, contractual कर्मचारियों को regular करना और वेतन से जुड़े कई पुराने मुद्दे शामिल हैं। हड़ताल के कारण सरकारी hospitals की OPD services, सरकारी offices, schools और कई public-facing departments का काम प्रभावित हुआ है। हालांकि emergency और mother-and-child healthcare services चालू रखी गई हैं। Punjab में आज बड़े स्तर पर ‘Maha Hartal’ Punjab Government के कर्मचारियों और pensioners के विभिन्न संगठनों ने मिलकर 27 अगस्त को statewide protest का आह्वान किया था। Hindustan Times के मुताबिक 3 लाख से अधिक employees government departments, boards और corporations से mass casual leave पर हैं। वहीं चार लाख से ज्यादा pensioners के भी agitation में शामिल होने की उम्मीद जताई गई थी। The Tribune ने mobilisation का आंकड़ा और बड़ा बताते हुए करीब चार लाख सरकारी कर्मचारियों और लाखों pensioners के आंदोलन में शामिल होने की बात कही है। अलग-अलग unions द्वारा दिए गए आंकड़ों में अंतर है, इसलिए कर्मचारियों की संख्या को “3 लाख से ज्यादा” कहना फिलहाल ज्यादा सुरक्षित है। Hospital OPD Services पर पड़ा सीधा असर इस हड़ताल का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव healthcare services पर दिखाई दिया। Punjab Civil Medical Services Association ने आंदोलन का समर्थन किया है। सरकारी hospitals की routine OPD services प्रभावित हुई हैं, जबकि emergency treatment जारी रखा गया है। Mother-and-child hospitals में भी आवश्यक सेवाओं को strike से बाहर रखा गया है। Doctors के साथ nursing, paramedical और Class-IV employees के कुछ संगठन भी protest में शामिल हैं। इसलिए patients को routine consultation के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन इसे “पूरे Punjab में hospitals बंद” कहना गलत होगा। Government Offices में भी काम प्रभावित हड़ताल का असर कई प्रमुख सरकारी establishments पर पड़ा है। Protest से जुड़े कर्मचारियों में: समेत कई departments के staff शामिल हैं। Ludhiana समेत कई जिलों में कर्मचारी संगठनों ने पहले ही आम लोगों से 27 अगस्त को जरूरी काम न होने पर सरकारी offices आने से बचने की अपील की थी। सबसे बड़ी मांग—Pending DA Arrears आंदोलन की सबसे बड़ी वजह Dearness Allowance यानी DA का लंबित भुगतान है। Employee unions का कहना है कि Punjab के सरकारी कर्मचारियों को फिलहाल basic pay का 42% DA मिल रहा है, जबकि उनकी मांग है कि यह rate बढ़ाकर applicable higher rate के अनुरूप किया जाए और पिछले arrears का भुगतान किया जाए। Hindustan Times के मुताबिक unions का दावा है कि कुल करीब ₹20,161 करोड़ के DA arrears लंबित हैं। इसमें करीब ₹6,000 करोड़ मौजूदा वर्षों से जुड़े बताए गए हैं और बाकी पुराने dues से संबंधित हैं। हालांकि arrears की exact government-accepted liability और unions के calculations में अंतर हो सकता है। High Court के आदेश का भी हवाला Employee unions अपने आंदोलन में Punjab and Haryana High Court के आदेश का भी हवाला दे रहे हैं। Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने 3 अगस्त को state government को pending DA arrears के भुगतान के लिए 15 दिन का समय दिया था और 18 अगस्त तक की deadline बताई गई थी। Employees का कहना है कि deadline गुजरने के बावजूद उनकी पूरी मांग पूरी नहीं हुई है। वहीं Punjab सरकार का कहना है कि arrears का भुगतान चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा चुका है। Finance Minister Harpal Singh Cheema ने क्या कहा? Punjab Finance Minister Harpal Singh Cheema ने कहा है कि सरकार arrears के भुगतान पर काम कर रही है। Indian Express के मुताबिक Cheema ने कहा कि previous governments से भी बड़ी मात्रा में liabilities inherited हुई थीं और वर्तमान सरकार ने लगभग ₹5,000-6,000 करोड़ तक arrears का भुगतान किया है। बाकी dues भी जारी करने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और employee unions के बीच बातचीत से सकारात्मक समाधान निकल सकता है। इसलिए arrears के मुद्दे पर union और government के figures तथा interpretations को अलग-अलग पक्ष के रूप में देखना जरूरी है। Old Pension Scheme भी बड़ी मांग DA के अलावा employees की प्रमुख मांगों में Old Pension Scheme यानी OPS का implementation भी शामिल है। Employee unions खास तौर पर उन कर्मचारियों के लिए OPS की मांग कर रहे हैं जो नए pension framework के तहत आते हैं। इसके साथ कई अन्य service-related demands भी उठाई गई हैं। इनमें: जैसी मांगें शामिल हैं। Schools और Colleges में भी असर Government teachers के संगठन भी agitation में शामिल हैं। Indian Express के मुताबिक Punjab के 19,000 से ज्यादा government schools में करीब एक लाख teachers काम करते हैं और unions ने अनुमान लगाया था कि regular और contractual मिलाकर लगभग 80,000 teachers strike में शामिल हो सकते हैं। हालांकि वास्तविक attendance district-to-district अलग हो सकती है। इस वजह से कई सरकारी schools और educational institutions में teaching activities प्रभावित होने की आशंका जताई गई। क्या Punjab पूरी तरह बंद है? नहीं। इसे “Punjab Bandh” की तरह पेश करना misleading हो सकता है। Employee organisations ने साफ किया है कि उनका protest मुख्य रूप से government services और government establishments तक सीमित है। Markets, private businesses, factories और सामान्य private establishments को बंद करने का call नहीं दिया गया है। Highways block करने की भी statewide घोषणा नहीं की गई। इसलिए accurate description “सरकारी कर्मचारियों की statewide Maha Hartal/Mass Casual Leave” है। Bus Services पर भी पड़ सकता है असर Punjab Roadways और PEPSU Road Transport Corporation से जुड़े regular employees के आंदोलन में भाग लेने के कारण public transport के कुछ operations पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई थी। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे Punjab में सभी buses बंद हैं। Different depots और employee categories के participation के आधार पर impact अलग-अलग हो सकता है। Pensioners भी उतरे आंदोलन में इस agitation की खास बात यह है कि केवल serving…

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बारिश में धंसा ₹36,000 करोड़ का गंगा एक्सप्रेसवे? उन्नाव में Repair के बाद फिर पड़ी बड़ी दरारें, Akhilesh ने सरकार को घेरा

उन्नाव: उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद एक बार फिर सड़क में दरारें सामने आने से निर्माण और drainage व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। 27 अगस्त 2026 को उन्नाव के आसपास repaired stretch पर fresh cracks की तस्वीरें और वीडियो सामने आए। रिपोर्ट्स के मुताबिक बशीरतगंज क्षेत्र में किलोमीटर 421 से 422 के बीच करीब 25 मीटर लंबी दरार देखी गई है। हालांकि सोशल मीडिया पर इसे पूरे ₹36,230 करोड़ के एक्सप्रेसवे के “धंस जाने” के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक damage एक सीमित stretch पर है और expressway पर traffic जारी है। आज क्या हुआ? आज सामने आई reports के मुताबिक उन्नाव में पहले repair किए गए हिस्से पर फिर cracks दिखाई दीं। Times Now Navbharat ने बशीरटगंज के पास kilometre 421-422 के बीच करीब 25 metre लंबी और लगभग 3 inch चौड़ी दरार report की है। आसपास slope protection और मिट्टी वाले हिस्से में भी rainwater erosion का असर बताया गया है। Maintenance team ने प्रभावित स्थान पर barricading और corrective work शुरू किया है। फिलहाल traffic को पूरी तरह बंद किए जाने की सूचना नहीं है। एक सप्ताह पहले बना था 10 मीटर गहरा Crater मौजूदा controversy इसलिए ज्यादा गंभीर हो गई क्योंकि इसी महीने गंगा एक्सप्रेसवे पर एक और बड़ा damage सामने आया था। 17-18 अगस्त के आसपास उन्नाव क्षेत्र में kilometre 421 के पास भारी बारिश के बाद road और adjoining embankment का हिस्सा प्रभावित हुआ और करीब 10 metre गहरा crater बनने की reports आई थीं। उस समय UPEIDA और project agency की teams ने मौके पर repair work किया था। 19 अगस्त तक संबंधित अधिकारियों ने बताया था कि प्रभावित section को repair कर दिया गया है और traffic normal तरीके से चल रहा है। अब उसी broader area में fresh cracks सामने आने से repair की durability को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्या आज पूरा Expressway धंस गया? नहीं। यह खबर publish करते समय यह distinction बेहद जरूरी है। 594-km लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का पूरा हिस्सा collapse नहीं हुआ है। Fresh damage उन्नाव के एक specific stretch में report हुआ है। इसलिए headline: “₹36,000 करोड़ का गंगा एक्सप्रेसवे धंस गया” अपने आप में misleading impression दे सकती है। बेहतर framing होगी: “₹36,230 करोड़ के गंगा एक्सप्रेसवे पर फिर दरारें; बारिश के बाद उन्नाव में repaired stretch प्रभावित” बारिश के पानी से Soil Erosion की बात Reports में damage के पीछे heavy rainfall, soil settlement और embankment erosion को प्रमुख factors के रूप में बताया गया है। 19 अगस्त को project head R.K. Mishra ने पहले damage पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि नई construction में पहली बारिश के दौरान बड़े स्तर पर भरी गई मिट्टी के settlement से ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा था कि sensitive sections की monitoring और patrolling बढ़ाई गई है। लेकिन 27 अगस्त की fresh cracks का final technical cause अभी किसी विस्तृत independent investigation से establish नहीं हुआ है। इसलिए construction corruption या substandard material को proven cause के तौर पर लिखना अभी सही नहीं होगा। July में भी उन्नाव में हुआ था नुकसान गंगा एक्सप्रेसवे पर monsoon-related damage की यह पहली report नहीं है। July में भी Unnao के Sonic Toll Plaza को expressway से जोड़ने वाली करीब 7-metre approach road heavy rainfall के बाद प्रभावित हुई थी। Embankment की मिट्टी बहने और carriageway के हिस्से को नुकसान पहुंचने की reports सामने आई थीं। इसके बाद repair work कराया गया था। यानी July, mid-August और अब 27 August—तीनों developments ने monsoon के दौरान कुछ sections की drainage और slope stability पर ध्यान खींचा है। Hardoi में भी सामने आया था Subsidence July में Hardoi के Mallawan क्षेत्र में भी heavy rainfall के बाद Ganga Expressway के करीब 60 metre हिस्से में subsidence की report सामने आई थी। Technical team ने वहां repair शुरू किया और अधिकारियों ने उस समय लगातार 48 घंटे हुई rainfall को संभावित कारण बताया था। इन घटनाओं को देखते हुए expressway के अलग-अलग vulnerable stretches की long-term durability अब scrutiny में है। कितना बड़ा है Ganga Expressway? UPEIDA की official information के मुताबिक Ganga Expressway की लंबाई करीब 594 kilometres है। यह: Prime Minister Narendra Modi ने इसका उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को Hardoi जिले में किया था। Current media reports project cost को करीब ₹36,230 करोड़ बताती हैं। उद्घाटन के चार महीने के भीतर सवाल Expressway को शुरू हुए अभी करीब चार महीने ही हुए हैं। इतने कम समय में अलग-अलग जगहों पर soil erosion, approach-road damage, crater और cracks जैसी reports आने के कारण इसकी construction quality और drainage planning पर public scrutiny बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि हर incident का cause समान हो, यह जरूरी नहीं है। किसी location पर drainage, दूसरी पर soil settlement और किसी अन्य जगह embankment erosion जिम्मेदार हो सकता है। Technical audit के बिना सभी घटनाओं को एक ही construction defect से जोड़ना जल्दबाजी होगी। Akhilesh Yadav ने सरकार पर लगाया Corruption का आरोप Fresh cracks सामने आने के बाद Samajwadi Party प्रमुख Akhilesh Yadav ने social media पर एक video share करते हुए BJP सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने cracks को corruption से जोड़ते हुए commuters की safety पर सवाल उठाए। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि corruption का आरोप Akhilesh Yadav का राजनीतिक दावा है। उपलब्ध reports में fresh cracks को corruption का परिणाम साबित करने वाली कोई final technical inquiry सामने नहीं आई है। Traffic बंद हुआ या जारी है? Latest reports के अनुसार affected portion की सुरक्षा के लिए barricading और corrective work किया जा रहा है, लेकिन पूरे Ganga Expressway का traffic बंद नहीं हुआ है। 27 अगस्त की दोपहर तक वाहनों का आवागमन जारी बताया गया। इसलिए social media पर “expressway बंद” या “पूरा highway collapse” जैसे claims को official confirmation के बिना publish नहीं करना चाहिए। UPEIDA ने पहले Damage पर क्या कहा था? पिछले week’s crater के बाद UPEIDA और project team ने affected section को तेजी से repair करने की बात कही थी। Project management ने दावा किया था कि rain-sensitive stretches की regular patrolling और…

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महिलाओं के लिए सपा का बड़ा चुनावी ऐलान; सरकार बनी तो सालाना ₹40,000, मुफ्त बस सफर और छात्राओं को लैपटॉप

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं को लेकर राजनीतिक मुकाबला तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी ने ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ की घोषणा करते हुए महिलाओं के लिए सालाना ₹40,000 की आर्थिक सहायता, मुफ्त बस यात्रा और इंटरमीडिएट पास छात्राओं को लैपटॉप देने समेत कई बड़े चुनावी वादे किए हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और मैनपुरी सांसद डिंपल यादव ने 26 अगस्त को लखनऊ में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन घोषणाओं को सामने रखा। आज 27 अगस्त 2026 को इन घोषणाओं पर BJP ने तीखा पलटवार किया है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत कई BJP नेताओं ने इसे चुनावी वादा और “महिला कार्ड” बताते हुए सपा पर निशाना साधा। क्या है ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’? समाजवादी पार्टी का कहना है कि अगर 2027 के Uttar Pradesh Assembly Election के बाद उसकी सरकार बनती है तो ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ लागू की जाएगी। इसके तहत शुरुआत में पात्र महिलाओं को ₹40,000 सालाना आर्थिक सहायता देने का वादा किया गया है। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा है कि इस सहायता राशि को आने वाले वर्षों में बढ़ाया जाएगा। हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण clarification जरूरी है। कुछ reports ने इस योजना को गरीब या BPL महिलाओं के लिए बताया है, जबकि कुछ में इसे अधिक व्यापक रूप से “महिलाओं को ₹40,000” कहा गया है। अभी detailed manifesto, eligibility criteria, income limit या application rules सार्वजनिक नहीं हुए हैं। इसलिए फिलहाल यह कहना ज्यादा सुरक्षित है कि सपा ने ₹40,000 annual assistance का चुनावी वादा किया है, लेकिन final eligibility बाद में स्पष्ट होगी। छात्राओं को मिलेगा Laptop सपा ने education sector में भी महिलाओं और छात्राओं को लेकर बड़ा वादा किया है। अखिलेश यादव के मुताबिक अगर पार्टी सत्ता में आती है तो Intermediate यानी Class 12 पास करने वाली छात्राओं को laptop दिया जाएगा। सपा इससे पहले अपनी पिछली सरकार के दौरान भी laptop distribution programme चला चुकी है और अखिलेश यादव ने नए चुनावी वादे को उसी policy का विस्तार बताया। पार्टी का कहना है कि technology तक आसान पहुंच से छात्राओं को higher education, competitive examinations और employment opportunities में मदद मिलेगी। महिलाओं के लिए Free Bus Travel का वादा सपा की घोषणाओं में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा भी शामिल है। Reports के मुताबिक पार्टी ने Roadways और city bus services में महिलाओं को free travel सुविधा देने की बात कही है। इसके साथ स्कूल और कॉलेज जाने वाली छात्राओं के लिए metro travel को भी free या pass-based बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। यह अभी केवल चुनावी घोषणा है। इसे लागू करने के लिए सरकार बनने की स्थिति में budgetary allocation और detailed policy framework की जरूरत होगी। महिलाओं को हर महीने 2 Special Leave का भी वादा सपा ने working women के लिए एक और बड़ा वादा किया है। पार्टी नेताओं के मुताबिक महिलाओं को हर महीने दो दिन का विशेष आकस्मिक अवकाश देने का प्रस्ताव है। इसे सरकारी के साथ private workplaces तक लागू करने की बात कही गई है। हालांकि private sector में ऐसी व्यवस्था को लागू करने के लिए labour laws, rules और enforcement mechanism की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल यह भी party promise के स्तर पर है। सरकारी स्कूलों में Fees माफ, Private में आधी करने का दावा सपा की महिला-focused घोषणाओं में education costs कम करने की बात भी शामिल है। Live Hindustan की report के मुताबिक party leaders ने कहा कि: जैसे कदम उठाए जाएंगे। इन promises का exact scope—कौन से classes, कौन से colleges और कौन से income groups—अभी detailed policy document आने के बाद ही साफ होगा। 26,000 बंद Primary Schools फिर खोलने का वादा अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि अगर समाजवादी पार्टी सत्ता में आती है तो राज्य में बंद किए गए करीब 26,000 primary schools को दोबारा खोला जाएगा। इसके अलावा Anganwadi centres को मजबूत करने और education infrastructure में investment बढ़ाने का वादा किया गया है। सपा ने इस घोषणा को women empowerment से जोड़ा है क्योंकि rural areas में schools और Anganwadi centres की accessibility का सीधा असर छात्राओं और महिलाओं पर पड़ता है। 1090 Women Power Line को मजबूत करने की बात अखिलेश यादव ने अपनी पिछली सरकार के दौरान शुरू की गई 1090 Women Power Line का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सपा सरकार बनने पर women safety system को और मजबूत किया जाएगा और महिलाओं की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। सपा ने women safety को अपने 2027 election campaign के प्रमुख मुद्दों में शामिल करने के संकेत दिए हैं। Widows और बेसहारा महिलाओं के लिए Housing पार्टी ने विधवा और बेसहारा महिलाओं के लिए housing support का भी वादा किया है। Reports के मुताबिक ऐसी महिलाओं को Lohia Awas जैसी housing व्यवस्था से जोड़ने और elderly women की public transport accessibility बढ़ाने की बात कही गई है। हालांकि इसके लिए पात्रता, घरों की संख्या और annual budget जैसी details अभी सामने नहीं आई हैं। महिला Reservation पर BJP को चुनौती महिला-focused press conference के दौरान अखिलेश यादव ने BJP को 33% महिला आरक्षण अगले Uttar Pradesh Assembly Election से लागू करने की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि अगर BJP ज्यादा महिलाओं को टिकट देती है तो समाजवादी पार्टी उससे भी ज्यादा महिला candidates को चुनाव मैदान में उतारने का प्रयास करेगी। अखिलेश ने कहा कि देश और प्रदेश का विकास “आधी आबादी” की सक्रिय भागीदारी के बिना पूरा नहीं हो सकता। PDA में ‘A’ का मतलब ‘आधी आबादी’ समाजवादी पार्टी लंबे समय से अपने PDA formula को चुनावी strategy के रूप में पेश कर रही है। डिंपल यादव ने महिला योजना की घोषणा के दौरान कहा कि पार्टी के PDA में ‘A’ का अर्थ ‘आधी आबादी’ भी है। उनका कहना था कि महिला empowerment केवल slogans तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि महिलाओं को आर्थिक सहायता, technology, education और representation देना जरूरी है। इससे साफ है कि SP 2027 election में women voters को अपनी PDA strategy का central component बनाने की कोशिश कर रही है। Uttar Pradesh में 6 करोड़ से ज्यादा महिला Voters महिलाओं पर इतना political…

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छात्र आंदोलन में ‘कुत्ता जनता पार्टी’ का पोस्टर चर्चा में; BPSC अधिकारी की टिप्पणी के विरोध का बना प्रतीक

पटना: बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्तियों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच ‘कुत्ता जनता पार्टी’ यानी KJP नाम का एक पोस्टर और उससे जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने इसे किसी वास्तविक चुनावी राजनीतिक दल के रूप में नहीं, बल्कि Bihar Public Service Commission (BPSC) के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक Rajesh Kumar Singh की विवादित टिप्पणी के विरोध में एक प्रतीकात्मक नाम के तौर पर इस्तेमाल किया है। वायरल तस्वीरों और वीडियो में प्रदर्शनकारी ‘कुत्ता जनता पार्टी जिंदाबाद’ के नारे लगाते दिखाई देते हैं। Banner पर छात्रों के सम्मान से जुड़ा संदेश भी लिखा गया है और आरोप लगाया गया है कि BPSC अधिकारी ने आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की तुलना कुत्तों से की। कहां से शुरू हुआ पूरा विवाद? विवाद की शुरुआत BPSC के परीक्षा नियंत्रक Rajesh Kumar Singh की एक press conference से हुई। छात्रों के ongoing protests पर सवाल पूछे जाने के दौरान Singh ने हिंदी की कहावत “हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार” का इस्तेमाल किया था। प्रदर्शनकारी छात्रों और विपक्षी नेताओं ने इस टिप्पणी को आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों से जोड़कर देखा और इसे अपमानजनक बताया। हालांकि Rajesh Kumar Singh ने बाद में कहा कि उनकी कही गई कहावत को context से अलग करके देखा गया और उनका किसी व्यक्ति या समूह को अपमानित करने का इरादा नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी बात से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका खेद है। इसलिए यह कहना ज्यादा accurate होगा कि छात्रों ने उनकी टिप्पणी को अपने लिए अपमानजनक माना, न कि यह तथ्यात्मक रूप से घोषित कर दिया जाए कि अधिकारी ने सीधे छात्रों को ‘कुत्ता’ कहा था। सरकार ने Rajesh Kumar Singh को किया Suspend विवाद बढ़ने के कुछ घंटों के भीतर Bihar government ने Rajesh Kumar Singh को suspend करने का निर्देश दिया। Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने General Administration Department को कार्रवाई का आदेश दिया था। सिंह की टिप्पणी के बाद छात्र संगठनों और राजनीतिक नेताओं की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी। इसके बावजूद छात्रों का कहना था कि केवल एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई से उनकी broader concerns खत्म नहीं होतीं। फिर सामने आया ‘कुत्ता जनता पार्टी’ का Banner इसी controversy के बीच प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से ‘कुत्ता जनता पार्टी – KJP’ नाम वाला banner सामने आया। Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक viral video में कुछ युवा banner लेकर ‘कुत्ता जनता पार्टी जिंदाबाद’ के नारे लगाते नजर आए। इसे BPSC अधिकारी की टिप्पणी के खिलाफ sarcasm और protest के रूप में पेश किया गया। Navbharat Times के मुताबिक Lovely Kumari नाम की एक प्रदर्शनकारी छात्रा इस symbolic protest के साथ सामने आईं। उनका कहना था कि छात्र अपमान नहीं बल्कि सम्मान चाहते हैं और केवल अधिकारी का suspension पर्याप्त नहीं है। क्या सच में बन गई कोई नई Political Party? नहीं, उपलब्ध credible reports के आधार पर इसे formally registered political party कहना सही नहीं होगा। यह मुख्य रूप से protest और social-media satire के रूप में सामने आया है। ‘कुत्ता जनता पार्टी’ नाम के banners, slogans और online posts जरूर सामने आए हैं, लेकिन इसे Election Commission में registered electoral party या established political organisation मानने का कोई आधार इन reports में नहीं है। Aaj Tak ने भी इसे छात्रों द्वारा social media पर बनाई गई अपनी एक प्रतीकात्मक ‘party’ के रूप में describe किया है। इसलिए Jai Rashtra News की खबर में “नई पार्टी का गठन” लिखने के बजाय “प्रतीकात्मक पार्टी/पोस्टर के जरिए विरोध” कहना factual रूप से ज्यादा सुरक्षित रहेगा। आखिर छात्र आंदोलन क्यों कर रहे हैं? ‘कुत्ता जनता पार्टी’ वाला विवाद बिहार में पहले से चल रहे बड़े recruitment agitation के बीच सामने आया है। Patna के Gardanibagh में 18 अगस्त से कई छात्र और अभ्यर्थी विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। Indian Express के मुताबिक एक दर्जन से ज्यादा groups आंदोलन में शामिल रहे हैं। प्रमुख मांगों में शामिल हैं: BPSC ने इनमें से कई मांगों पर अलग रुख रखा है। आयोग का कहना है कि TRE-4 के लिए two-stage system और objective examinations में negative marking जारी रहेगी। 70वीं BPSC परीक्षा भी आंदोलन का बड़ा मुद्दा Students 70वीं BPSC preliminary examination को लेकर भी allegations उठा रहे हैं। कुछ अभ्यर्थियों ने alleged irregularities और paper leak का दावा करते हुए परीक्षा रद्द करने की मांग की है। BPSC ने इन आरोपों को खारिज किया है और social media पर circulating कुछ documents को fake बताया है। आयोग का कहना है कि candidates को उनकी answer sheets login ID के जरिए उपलब्ध कराई जाएंगी। इसलिए paper leak या irregularity को established fact के तौर पर नहीं लिखा जाना चाहिए; फिलहाल ये छात्रों के आरोप और मांगें हैं। 25 अगस्त को उग्र हुआ प्रदर्शन 25 अगस्त को छात्र आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया। सैकड़ों प्रदर्शनकारी Gandhi Maidan से मुख्यमंत्री आवास की ओर march करने निकले। JP Golambar और Dak Bungalow Chowk के आसपास barricades तोड़े जाने और police के साथ धक्का-मुक्की की घटनाएं सामने आईं। Police ने protesters को रोकने के लिए water cannons का इस्तेमाल किया और बाद में force का प्रयोग भी किया। कई छात्रों को हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ police personnel के घायल होने की भी रिपोर्ट सामने आई। इसी व्यापक agitation के बीच KJP वाला poster और videos तेजी से viral हुए। Opposition ने भी अधिकारी की टिप्पणी पर उठाए सवाल RJD नेता और Bihar विधानसभा में विपक्ष के नेता Tejashwi Yadav ने भी BPSC अधिकारी की टिप्पणी की आलोचना की थी। उन्होंने अधिकारी से माफी की मांग की और सरकार पर छात्रों के प्रति असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाया। हालांकि सरकार ने विवादित टिप्पणी सामने आने के बाद परीक्षा नियंत्रक के suspension का आदेश देकर कार्रवाई की। यह मामला इसलिए recruitment policy के साथ political controversy का भी हिस्सा बन गया। ‘अपमान नहीं, सम्मान’ बना Protest का संदेश KJP poster के पीछे protesting students का मुख्य संदेश उनके मुताबिक सम्मान और dignity का है। Students का कहना है कि job aspirants कई वर्षों तक competitive exams की तैयारी करते…

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तिब्बत सीमा से आई अचानक बाढ़ ने नेपाल में मचाई तबाही; 160 से ज्यादा मौतें, सैकड़ों लापता, भारतीय तीर्थयात्रियों की भी तलाश

काठमांडू/रसुवा: Nepal-Tibet border के पास हिमालयी इलाके में हुए भीषण glacial ice-rock collapse के बाद आई flash flood ने नेपाल में बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। 27 अगस्त 2026 की ताजा जानकारी के मुताबिक नेपाल में कम से कम 162 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि Tibet की तरफ भी तीन लोगों की मौत दर्ज की गई है। दोनों ओर मिलाकर सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं और rescue operation युद्धस्तर पर जारी है। नेपाल के Rasuwa और Dhading जिले सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। पानी, कीचड़, बड़े पत्थरों और बर्फ के मलबे की तेज लहर ने गांवों, सड़कों, पुलों, hydropower projects और वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। कई इलाकों में electricity और communication network भी ठप हो गया है। 26 अगस्त की सुबह अचानक आया सैलाब यह आपदा बुधवार, 26 अगस्त की सुबह सामने आई। Nepal के Rasuwa जिले में Bhote Koshi river system में अचानक पानी का स्तर बेहद तेजी से बढ़ा। कुछ ही समय में पानी के साथ भारी मात्रा में mud, rock और debris नीचे की तरफ आया और Timure तथा Syafrubesi जैसे इलाकों में विनाश मचा दिया। Reuters के मुताबिक flood wave इतनी तेज थी कि river level downstream इलाकों में लगभग आधे घंटे के अंदर 9 metres तक बढ़ गया। क्या सच में Tibet से आई बाढ़? Geographically देखा जाए तो disaster का शुरुआती source Nepal-Tibet border के उत्तर-पूर्वी Himalayan क्षेत्र में था। Nepal की disaster authority द्वारा satellite images के शुरुआती analysis में पाया गया कि Rasuwagadhi border crossing से करीब 20 km northeast में Lhende river valley के ऊपर ice और rock का एक विशाल हिस्सा टूटकर नीचे गिरा। इस collapse ने नदी के flow को अचानक प्रभावित किया और फिर बड़ी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टान तथा sediment downstream Nepal की तरफ बढ़ गया। इसी वजह से इसे कई reports में “Tibet-origin flood” कहा जा रहा है। Glacier का बड़ा हिस्सा टूटकर गिरा Planet Labs की satellite imagery का analysis करने वाले experts के मुताबिक करीब 5,200 metre की ऊंचाई पर स्थित glacier का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे की valley में गिरा। Ice-rock mass ने लगभग 1,200 metre नीचे गिरते हुए भारी debris avalanche पैदा की। यह debris नदी में पहुंचा और उसके साथ मिलकर बेहद शक्तिशाली flash flood में बदल गया। Experts इसे सामान्य monsoon flood के बजाय ice-rock avalanche triggered flood मान रहे हैं। पहले Earthquake समझा गया, फिर तस्वीर बदली Disaster के शुरुआती घंटों में इलाके में दर्ज seismic signal को लगभग 4.4 magnitude earthquake माना गया था। लेकिन बाद की geological analysis में यह संभावना मजबूत हुई कि seismic signal खुद massive glacier और rock collapse के कारण पैदा हुआ हो सकता है। इसलिए अभी यह निश्चित रूप से कहना सही नहीं होगा कि earthquake ने glacier तोड़ा। Scientists अभी exact sequence और trigger की जांच कर रहे हैं। नेपाल में 162 लोगों की मौत 27 August की latest Reuters update के मुताबिक Nepal में कम से कम 162 लोगों की मौत हो चुकी है। Tibet की तरफ तीन मौतें confirm की गई हैं, जिससे दोनों क्षेत्रों में confirmed death toll कम से कम 165 हो जाता है। Casualty figures अभी भी लगातार बदल रहे हैं क्योंकि कई दूरदराज इलाके पूरी तरह accessible नहीं हैं। Authorities को आशंका है कि search operation आगे बढ़ने के साथ death toll बढ़ सकता है। करीब 1,000 लोग दोनों ओर लापता इस disaster का सबसे चिंताजनक पहलू missing persons की संख्या है। Associated Press की latest reporting के मुताबिक: बताए गए हैं। यानी combined figure करीब 1,000 लोगों तक पहुंच रहा है। हालांकि disaster के शुरुआती दौर में duplicate registrations और communication breakdown के कारण missing figures में बदलाव संभव है। भारतीय तीर्थयात्री भी लापता इस tragedy में बड़ी संख्या में foreign tourists और pilgrims भी फंसे हैं। यह इलाका Mount Kailash और Mansarovar जाने वाले कई यात्रियों के transit route से जुड़ा है। Nepal Tourism Board से जुड़ी reports में कम से कम 133 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। भारतीय authorities नेपाल सरकार के साथ उनकी पहचान और location verify करने में जुटी हैं। अलग-अलग reports में Indian missing count में कुछ अंतर है, इसलिए final number अभी बदल सकता है। India ने भेजी 10 Ton Relief Material आपदा के तुरंत बाद भारत ने Nepal को humanitarian assistance भेजना शुरू कर दिया। External Affairs Minister S. Jaishankar के मुताबिक India ने 10 tonnes Humanitarian Assistance and Disaster Relief material तथा essential medicines Nepal भेजे हैं। पहली खेप Indian Air Force के C-130J aircraft के जरिए Kathmandu भेजी गई। 27 अगस्त की सुबह relief material Nepal पहुंचने और वहां authorities को hand over किए जाने की पुष्टि भी हुई। PM Modi ने Nepal को दिया मदद का भरोसा Prime Minister Narendra Modi ने Nepal के Prime Minister Balendra Shah से बातचीत कर इस tragedy पर संवेदना व्यक्त की और भारत की तरफ से हर संभव सहायता देने का भरोसा दिया। India ने rescue teams और additional assistance को भी standby पर रखा है। नेपाल भारत का करीबी पड़ोसी होने के साथ खुली सीमा साझा करता है, इसलिए इस तरह की Himalayan disaster का असर भारत की disaster preparedness पर भी पड़ता है। गांव, घर और गाड़ियां मलबे में दबीं Verified footage में पहाड़ों से आती mud और debris की विशाल लहर को buildings तथा vehicles को बहाते देखा गया है। Reuters के मुताबिक कई स्थानों पर: Survivors ने बताया कि पानी के साथ इतना ज्यादा mud और rock आ रहा था कि flood सामान्य नदी के पानी की बजाय moving concrete जैसी दिखाई दे रही थी। 40 KM से ज्यादा Road Network प्रभावित Latest international reports के मुताबिक disaster में करीब 40 kilometres road और कम से कम 19 bridges को नुकसान पहुंचने की सूचना है। इससे rescue teams के लिए remote areas तक पहुंचना और भी मुश्किल हो गया है। कई जगह helicopters ही survivors तक पहुंचने का मुख्य जरिया बने हुए हैं। Hydropower Projects को भारी नुकसान Nepal की economy में hydropower की बड़ी भूमिका है और प्रभावित Himalayan river belt में कई power projects…

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भागलपुर में गंगा की तेज धारा में पलटी मजदूरों की नाव; 19 सुरक्षित, 2 अब भी लापता, SDRF का Search Operation जारी

भागलपुर: बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी के तेज बहाव के बीच बड़ा नाव हादसा सामने आया है। नवगछिया अनुमंडल के राघोपुर क्षेत्र में बाढ़ और कटाव रोकने के काम में लगे मजदूरों को लेकर जा रही नाव बुधवार, 26 अगस्त 2026 की दोपहर अचानक पलट गई। प्रशासन के latest official figures के मुताबिक नाव पर 21 लोग सवार थे, जिनमें 19 को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि दो लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों की पहचान सिकंदर मंडल और बादल मंडल के रूप में बताई गई है। SDRF की टीम मोटरबोट और अन्य rescue equipment के साथ गंगा में लगातार उनकी तलाश कर रही है। शुरुआती Reports में 18 लोग और 6 Missing बताए गए थे हादसे के तुरंत बाद सामने आई शुरुआती मीडिया reports में नाव पर 18 मजदूर सवार होने, 12 के तैरकर बच निकलने और 6 के लापता होने की जानकारी दी गई थी। लेकिन बाद में जिला प्रशासन और पुलिस से मिली updated information में तस्वीर साफ हुई। Bhagalpur District Magistrate Alankrita Pandey के हवाले से बाद की reports में बताया गया कि नाव पर कुल 21 लोग—19 मजदूर और दो नाविक—सवार थे। SDRF ने 19 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया, जबकि दो लोग लापता रहे। इसलिए खबर publish करते समय 18 सवार, 12 सुरक्षित और 6 लापता वाली शुरुआती संख्या के बजाय latest official count का इस्तेमाल करना ज्यादा सही होगा। कहां हुआ हादसा? घटना भागलपुर जिले के नवगछिया क्षेत्र में राघोपुर तटबंध के पास हुई। यहां पिछले दिनों गंगा के बढ़ते जलस्तर और तटबंध में breach के बाद बाढ़ तथा कटाव रोकने का काम चल रहा था। मजदूर नदी में sandbags डालकर तटबंध को मजबूत करने और कटाव रोकने की कोशिश कर रहे थे। इसी flood-fighting operation के दौरान मजदूरों को लेकर जा रही नाव तेज धारा की चपेट में आ गई। दोपहर करीब 2:30 बजे पलटी नाव अधिकारियों के मुताबिक हादसा 26 अगस्त को करीब दोपहर 2:30 बजे हुआ। Water Resources Department से जुड़े flood-control और embankment repair operations के दौरान नाव गंगा में आगे बढ़ रही थी, तभी वह अचानक असंतुलित होकर पलट गई। नाव के पलटते ही उसमें सवार लोग तेज बहाव में गिर गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। भंवर बनने की आशंका District Magistrate Alankrita Pandey के मुताबिक preliminary information में आशंका जताई गई कि नदी में अचानक बने whirlpool यानी भंवर के कारण नाव का संतुलन बिगड़ा और वह पलट गई। हालांकि हादसे का exact technical cause जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगा। गंगा में इस समय तेज बहाव और बाढ़ की स्थिति के कारण rescue operations भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। SDRF ने बचाए 19 लोग हादसे की सूचना मिलते ही घटनास्थल पर तैनात State Disaster Response Force यानी SDRF की टीम ने rescue operation शुरू किया। Latest official reports के अनुसार कुल 19 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों ने भी rescue operation में प्रशासन की मदद की। बचाए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और लापता मजदूरों की तलाश नदी के downstream क्षेत्रों में भी की जा रही है। दो मजदूर अब भी लापता Latest reports के मुताबिक दो लोग अब भी नहीं मिले हैं। उनकी पहचान: के रूप में की गई है। 27 अगस्त की fresh स्थिति में दोनों की तलाश जारी बताई गई है। प्रशासन ने अभी दोनों को मृत घोषित नहीं किया है, इसलिए उन्हें “लापता” ही लिखा जाना चाहिए। मजदूर सामान्य यात्रा पर नहीं, Flood-Fighting Work में थे शुरुआती reports में यह भी कहा गया था कि मजदूर रोजमर्रा की मजदूरी के लिए नदी पार कर रहे थे। लेकिन बाद में प्रशासन और पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक वे बाढ़ और तटबंध कटाव रोकने के काम में लगे हुए थे। Workers sandbags लेकर गंगा में erosion-control operation कर रहे थे। इसलिए इसे केवल “मजदूरी करने जा रहे मजदूरों की नाव” बताने के बजाय “कटाव-रोधी काम में लगे मजदूरों की नाव” कहना ज्यादा accurate है। दो दिन पहले टूट गया था तटबंध का हिस्सा राघोपुर इलाके में गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद तटबंध का एक हिस्सा टूट गया था, जिसके चलते आसपास के गांवों में पानी घुसने और बड़े पैमाने पर erosion का खतरा पैदा हो गया। इसी के बाद Water Resources Department की तरफ से emergency flood-fighting और sandbagging operation तेज किया गया था। हादसे के वक्त मजदूर इसी emergency work का हिस्सा थे। बचाए गए मजदूर ने लगाए गंभीर आरोप हादसे में सुरक्षित निकले मजदूर Abhinandan Kumar ने ANI से बातचीत में दावा किया कि नाव डूबने के दौरान तत्काल मदद नहीं पहुंची और लोगों को अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। यह rescued worker का बयान है। Rescue response की पूरी sequence और किसी agency या contractor की जिम्मेदारी जांच के बाद ही तय की जा सकती है। Contractor के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी हादसे के बाद प्रशासन ने safety arrangements को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। कुछ reports के मुताबिक district administration ने संबंधित contractor/vendor के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं। यह सवाल भी उठ रहा है कि तेज बहाव और flood conditions में मजदूरों को ले जाते समय पर्याप्त: उपलब्ध थे या नहीं। इन पहलुओं की जांच के बाद ही किसी specific व्यक्ति या contractor की negligence स्थापित की जा सकती है। नाव से Sandbags ले जाने पर रोक हादसे के बाद administration ने safety को देखते हुए sandbags ले जाने के लिए नावों के इस्तेमाल पर रोक लगाने और वैकल्पिक माध्यम अपनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। Reports के मुताबिक जहां संभव है वहां tractors के जरिए flood-control material पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य तेज धारा के दौरान दूसरे workers को ऐसे जोखिम से बचाना है। गंगा के बढ़ते जलस्तर से Bhagalpur में चिंता भागलपुर में पिछले कुछ दिनों से गंगा का बढ़ता जलस्तर कई इलाकों के लिए चिंता बना हुआ है। तटबंध और erosion-control structures पर बढ़ते दबाव के कारण administration को लगातार flood-fighting operations करने पड़ रहे हैं। ऐसे में नदी में काम करने वाले labourers और rescue personnel की सुरक्षा एक…

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