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“Gen Z की सोच अलग है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे गलत हैं”: पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे

पुणे, 25 अक्टूबर 2026: भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (सेवानिवृत्त) ने Gen Z को लेकर चल रही राजनीतिक और सामाजिक बहस के बीच कहा है कि नई पीढ़ी का सोचने का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन सिर्फ इसी वजह से उन्हें गलत नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने युवाओं की बात सुनने, उनकी समस्याओं को समझने और संवाद के जरिए समाधान खोजने पर जोर दिया। “नई पीढ़ी का नजरिया अलग है” नरवणे ने कहा कि हर पीढ़ी अपने समय और परिस्थितियों के हिसाब से अलग सोच विकसित करती है। नई पीढ़ी भी चीजों को अपने तरीके से देखती है और यह जरूरी नहीं कि उसका नजरिया पुरानी पीढ़ी से पूरी तरह मेल खाए। उनके मुताबिक, अलग सोच का मतलब गलत सोच नहीं है। युवाओं को समझना जरूरी पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि युवाओं को सिर्फ डांटने या उनकी बात खारिज करने से समस्या हल नहीं होगी। पहले यह समझना जरूरी है कि उन्हें क्या परेशान कर रहा है, उनकी क्या मुश्किलें हैं और वे किस बदलाव की मांग कर रहे हैं। “वे देश का नुकसान नहीं चाहते” नरवणे ने कहा कि युवाओं की मंशा देश को नुकसान पहुंचाने की नहीं होती। वे भी मानते हैं कि जो मुद्दे वे उठा रहे हैं या जिन बदलावों की मांग कर रहे हैं, वे देश की बेहतरी के लिए हैं। उन्होंने युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाने की जरूरत बताई। ‘Regime Change’ बहस के बीच आया बयान नरवणे की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर युवाओं के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा “regime change” जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हुआ था। राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर लगाए थे आरोप रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर आरोप लगाया था कि वे युवाओं के विरोध प्रदर्शनों का इस्तेमाल अराजकता फैलाने और बांग्लादेश जैसे सत्ता परिवर्तन की स्थिति पैदा करने के लिए कर रहे हैं। दूसरी ओर विपक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विरोध का उद्देश्य निष्पक्ष चुनाव और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना है। संवाद को बताया सबसे जरूरी रास्ता नरवणे ने कहा कि पीढ़ियों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन समाधान का रास्ता बातचीत से ही निकलता है। उन्होंने समाज और संस्थाओं से युवाओं के नजरिए को समझने और उनकी बात सुनने की अपील की। जय राष्ट्र न्यूज़

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केरल लोक भवन की रसोई में सिर्फ शाकाहारी भोजन के निर्देश पर विवाद, केसी वेणुगोपाल ने राज्यपाल पर उठाए सवाल

तिरुवनंतपुरम, 24 अक्टूबर 2026: केरल के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के पद संभालने के पहले ही दिन लोक भवन की रसोई में केवल शाकाहारी भोजन तैयार करने के निर्देश को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस और CPI(M) ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं, जबकि लोक भवन की ओर से कहा गया है कि यह व्यवस्था केवल राज्यपाल और उनके निजी स्टाफ के भोजन से जुड़ी है, कर्मचारियों या अन्य लोगों की निजी भोजन पसंद पर कोई रोक नहीं है। केसी वेणुगोपाल ने क्या कहा? AICC महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि राज्यपाल अपनी निजी भोजन पसंद को संस्थान पर लागू कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केरल की खाद्य संस्कृति विविध है और लोगों को शाकाहारी या मांसाहारी भोजन चुनने की स्वतंत्रता है। वेणुगोपाल ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताते हुए राज्यपाल से फैसला वापस लेने की मांग की। CPI(M) ने भी जताया विरोध CPI(M) के राज्य सचिव एम वी गोविंदन ने कहा कि राज्यपाल स्वयं शाकाहारी भोजन कर सकते हैं, लेकिन दूसरों पर अपनी पसंद लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने भी इस फैसले को वैचारिक एजेंडे से जोड़कर आलोचना की। लोक भवन ने क्या सफाई दी? लोक भवन के सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर सख्त शाकाहारी हैं और उन्होंने केवल उस रसोई के लिए निर्देश दिया है जहां उनका और उनके कुछ निजी स्टाफ का भोजन तैयार होता है। कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था है और वे अपनी पसंद का भोजन कर सकते हैं। क्या सभी के लिए मांसाहारी भोजन पर रोक है? नहीं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह कहना सही नहीं होगा कि पूरे लोक भवन परिसर में मांसाहारी भोजन प्रतिबंधित कर दिया गया है। विवाद मुख्य रसोई में मांस या मछली न पकाए जाने के निर्देश को लेकर है। कर्मचारियों के निजी भोजन पर रोक की पुष्टि नहीं हुई है। पहले लोक भवन में बनता था मांसाहारी भोजन रिपोर्टों के मुताबिक पूर्व राज्यपालों के कार्यकाल में लोक भवन की रसोई में शाकाहारी के साथ मछली और मांसाहारी व्यंजन भी तैयार किए जाते थे। इसी वजह से नई व्यवस्था राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। पहले दिन ही शुरू हुआ विवाद ओम प्रकाश माथुर ने शुक्रवार को केरल के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण के दिन ही भोजन व्यवस्था से जुड़ा यह मुद्दा सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में चर्चा तेज हो गई। जय राष्ट्र न्यूज़

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अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप ने कनाडा के कुछ उत्पादों पर 50% शुल्क हटाया, कई जरूरी वस्तुओं को मिली राहत

वॉशिंगटन, 24 अक्टूबर 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आयात होने वाले कुछ चुनिंदा उत्पादों पर लगाए गए 50% शुल्क को हटाने का आदेश दिया है। यह फैसला 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले आया है और इसका असर खासतौर पर उन अमेरिकी राज्यों पर पड़ सकता है जो कनाडाई आपूर्ति पर काफी निर्भर हैं। राहत 30 अक्टूबर से प्रभावी होगी। किन उत्पादों को मिली राहत? व्हाइट हाउस के अनुसार शुल्क में राहत प्लाईवुड शीट, कुछ कागज उत्पाद, चुनिंदा मशीनरी, रेफ्रिजरेशन उपकरण, पैकेजिंग सामग्री और कुछ कृषि-संबंधित वस्तुओं पर लागू होगी। ताजा कदम से खासकर मेन राज्य के कारोबारियों और किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है। मेन की सीनेटर सुसान कॉलिन्स ने किया था दबाव रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स ने दावा किया कि उन्होंने इन छूटों के लिए ट्रंप प्रशासन से लगातार बातचीत की थी। उनका कहना है कि कनाडा से आने वाले कई उत्पाद मेन की ब्लूबेरी, आलू, सेब और समुद्री शैवाल उद्योगों के लिए जरूरी हैं और उन पर ऊंचा शुल्क स्थानीय लागत बढ़ा रहा था। चुनावी राजनीति से भी जुड़ा फैसला सुसान कॉलिन्स इस बार कड़े चुनावी मुकाबले का सामना कर रही हैं। इसी वजह से विपक्षी डेमोक्रेट्स ने आरोप लगाया है कि शुल्क में राहत का फैसला आर्थिक से ज्यादा चुनावी दबाव से प्रभावित है। हालांकि व्हाइट हाउस ने कहा कि बदलाव अमेरिकी व्यापार पर दबाव कम करने और सार्वजनिक हित में किया गया है। सभी शुल्क नहीं हटे, कुछ नए भी लगाए गए यह राहत सीमित उत्पादों तक ही है। ट्रंप प्रशासन ने उसी समय कारपेट, कुछ वाल्व, पेंट, शैम्पू और एयर-कंडीशनिंग उपकरणों समेत कुछ अन्य कनाडाई वस्तुओं पर नए शुल्क भी जोड़े हैं। इसलिए अमेरिका-कनाडा व्यापार तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अगस्त से बढ़ा था अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद अमेरिका और कनाडा के बीच अगस्त में व्यापार वार्ता विफल होने के बाद ट्रंप प्रशासन ने करीब 20 अरब डॉलर मूल्य के कनाडाई उत्पादों पर 50% शुल्क लगाया था। जवाब में कनाडा ने भी अमेरिकी उत्पादों पर प्रतिशोधात्मक शुल्क लगाए थे। ट्रंप बोले—कनाडा समझौते के लिए मेहनत कर रहा ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि कनाडा अमेरिका के साथ व्यापार समझौता करने के लिए “बहुत मेहनत” कर रहा है और दावा किया कि बातचीत में अमेरिका के पास मजबूत स्थिति है। हालांकि दोनों देशों के बीच अभी किसी व्यापक नए समझौते की घोषणा नहीं हुई है। कनाडा अभी बदलावों का कर रहा आकलन कनाडाई सरकार ने कहा है कि वह अमेरिकी शुल्क नीति में किए गए नए बदलावों की समीक्षा कर रही है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि ओटावा इस सीमित राहत के बाद अपनी जवाबी शुल्क नीति में कोई बदलाव करेगा या नहीं। जय राष्ट्र न्यूज़

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अडानी पावर का मुनाफा 142% बढ़ा, जेएसडब्ल्यू स्टील का लाभ तीन गुना से ज्यादा; तिमाही नतीजों में दोनों कंपनियां चर्चा में

नई दिल्ली/मुंबई, 24 अक्टूबर 2026: सितंबर तिमाही के नतीजों में अडानी पावर और जेएसडब्ल्यू स्टील ने मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। अडानी पावर का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर करीब 142% बढ़कर ₹7,019.32 करोड़ हो गया, जबकि जेएसडब्ल्यू स्टील का समेकित शुद्ध लाभ 225% बढ़कर ₹5,279 करोड़ पहुंच गया। अडानी पावर का मुनाफा ₹7,019 करोड़ अडानी पावर ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में ₹7,019.32 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया। एक साल पहले समान तिमाही में कंपनी का मुनाफा ₹2,906.46 करोड़ था। कंपनी ने बेहतर आय और एकमुश्त आय को इस तेज वृद्धि की प्रमुख वजह बताया। आय में भी करीब 30% की बढ़ोतरी अडानी पावर की परिचालन आय बढ़कर ₹17,014.06 करोड़ हो गई, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹13,106.34 करोड़ से करीब 29.8% ज्यादा है। कंपनी के मुताबिक बिजली की मांग बढ़ने, बेहतर बिक्री और कुछ बिजली खरीद समझौतों में ऊंचे शुल्क से आय को समर्थन मिला। एकमुश्त आय ने भी बढ़ाया मुनाफा कंपनी ने तिमाही के दौरान करीब ₹2,422 करोड़ की पूर्व अवधि से जुड़ी आय दर्ज की। यह कुछ बिजली खरीद समझौतों के पुराने ऊर्जा शुल्क में संशोधन से संबंधित थी। इसी वजह से शुद्ध लाभ की वृद्धि परिचालन लाभ की तुलना में काफी ज्यादा दिखाई दी। जेएसडब्ल्यू स्टील का लाभ 225% उछला दूसरी ओर, जेएसडब्ल्यू स्टील का सितंबर तिमाही में समेकित शुद्ध लाभ ₹1,623 करोड़ से बढ़कर ₹5,279 करोड़ हो गया। यह सालाना आधार पर करीब 225% की बढ़ोतरी है। मजबूत बिक्री और स्टील की कीमतों ने कंपनी के प्रदर्शन को सहारा दिया। रिकॉर्ड 7.46 मिलियन टन स्टील की बिक्री जेएसडब्ल्यू स्टील ने तिमाही में 7.46 मिलियन टन स्टील बेचा, जो कंपनी की अब तक की सबसे अधिक तिमाही बिक्री है। बिक्री मात्रा सालाना आधार पर 13% बढ़ी। कंपनी का परिचालन राजस्व भी बढ़कर ₹54,486 करोड़ पहुंच गया। बड़े विस्तार की भी तैयारी जेएसडब्ल्यू स्टील ने ओडिशा के उत्कल संयंत्र में अतिरिक्त 5 मिलियन टन क्षमता जोड़ने की योजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना पर करीब ₹16,150 करोड़ निवेश का प्रस्ताव है। बाजार की नजर अब आगे की कमाई पर दोनों कंपनियों के नतीजे मजबूत रहे हैं, लेकिन निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि अडानी पावर एकमुश्त आय के बिना अपनी कमाई की गति कितनी बनाए रखता है और जेएसडब्ल्यू स्टील बढ़ती कच्चे माल की लागत के बीच मार्जिन कैसे संभालता है। जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-न्यूजीलैंड दूसरे टी20 में वैभव सूर्यवंशी की प्लेइंग इलेवन में वापसी, भारत ने टॉस जीतकर चुनी गेंदबाजी

क्राइस्टचर्च, 24 अक्टूबर 2026: भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले जा रहे दूसरे टी20 मुकाबले में भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारत ने अपनी प्लेइंग इलेवन में दो बदलाव किए हैं। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को ईशान किशन की जगह मौका मिला है, जबकि प्रिंस यादव को मयंक यादव की जगह टीम में शामिल किया गया है। ईशान किशन की चोट से खुला वैभव के लिए रास्ता ईशान किशन को पहले टी20 मुकाबले के दौरान दाएं पैर के एडडक्टर में हल्का खिंचाव आया था। बीसीसीआई ने पुष्टि की थी कि वह दूसरे मुकाबले के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे। इसी वजह से वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में जगह मिली। भारत ने किए दो बदलाव भारत ने दूसरे टी20 में दो बदलाव किए। वैभव सूर्यवंशी ने ईशान किशन की जगह ली, जबकि तेज गेंदबाज प्रिंस यादव को मयंक यादव की जगह शामिल किया गया। कप्तान श्रेयस अय्यर ने प्रिंस यादव के चयन को रणनीतिक बदलाव बताया। न्यूजीलैंड ने भी बदली टीम न्यूजीलैंड ने अपनी प्लेइंग इलेवन में एक बदलाव किया है। जैकब डफी को एडम मिल्ने की जगह टीम में शामिल किया गया। मेजबान टीम की कप्तानी मिचेल सैंटनर कर रहे हैं। भारत की प्लेइंग इलेवन भारत की टीम में संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, श्रेयस अय्यर, तिलक वर्मा, नीतीश कुमार रेड्डी, नमन धीर, अक्षर पटेल, भुवनेश्वर कुमार, अर्शदीप सिंह और प्रिंस यादव शामिल हैं। पहले मुकाबले में भारत ने बनाई थी बढ़त भारत पांच मैचों की टी20 सीरीज में पहले ही 1-0 से आगे है। पहले मुकाबले में भारतीय टीम ने 226 रन का लक्ष्य हासिल कर शानदार जीत दर्ज की थी। संजू सैमसन और नमन धीर ने उस जीत में अहम भूमिका निभाई थी। वैभव सूर्यवंशी पर रहेंगी निगाहें सिर्फ 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित युवा बल्लेबाजों में गिना जा रहा है। दूसरे टी20 में उनकी वापसी के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि वह न्यूजीलैंड की तेज गेंदबाजी के सामने कैसा प्रदर्शन करते हैं। जय राष्ट्र न्यूज़

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एशियन पैरा गेम्स में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, रिकॉर्ड 114 पदक जीतकर चौथे स्थान पर रहा

आइची-नागोया, जापान, 24 अक्टूबर 2026: भारत ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड 114 पदक जीते। इनमें 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदक शामिल हैं। भारत ने पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया, जो एशियन पैरा गेम्स के इतिहास में उसका सर्वश्रेष्ठ स्थान है। पिछला रिकॉर्ड भी टूटा भारत का पिछला सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हांगझोउ संस्करण में था, जहां उसके खाते में 108 पदक दर्ज हुए थे। आइची-नागोया में 114 पदक जीतकर भारतीय दल ने अपना पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। सिर्फ 168 खिलाड़ियों ने रचा इतिहास इस बार भारत ने केवल 168 पैरा खिलाड़ियों का दल भेजा था, जो पिछले संस्करण की तुलना में काफी छोटा था। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने ज्यादा पदक जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। एथलेटिक्स में सबसे ज्यादा पदक भारत के लिए पैरा एथलेटिक्स सबसे सफल खेल रहा। एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 65 पदक जीते, जिनमें 22 स्वर्ण पदक शामिल रहे। इसके बाद पैरा बैडमिंटन में भारत ने 16 पदक हासिल किए। तैराकी में भी बड़ा सुधार पैरा स्विमिंग में भारत ने इस बार उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और 11 पदक जीते। इनमें 3 रजत और 8 कांस्य पदक शामिल रहे। पिछली बार की तुलना में यह प्रदर्शन काफी बेहतर रहा। आखिरी दिन बरसे स्वर्ण पदक भारत ने अपने अंतिम प्रतिस्पर्धी दिन 9 स्वर्ण पदक जीते, जो इस संस्करण में एक दिन में उसका सबसे बड़ा स्वर्ण प्रदर्शन रहा। इसी दिन संदीप ने पुरुषों की 400 मीटर T64 स्पर्धा में 52.28 सेकंड का विश्व रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण पदक जीता, जबकि हनी ने पुरुषों की भाला फेंक F37/38 स्पर्धा में 60.49 मीटर के विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण जीता। पदक तालिका में भारत चौथे स्थान पर चीन पदक तालिका में पहले स्थान पर रहा, जबकि मेजबान जापान दूसरे और उज्बेकिस्तान तीसरे स्थान पर रहा। भारत ने 30 स्वर्ण पदकों के साथ चौथा स्थान हासिल किया और दक्षिण कोरिया को पीछे छोड़ा। भारतीय पैरा खेलों के लिए बड़ी उपलब्धि 114 पदकों का यह रिकॉर्ड भारतीय पैरा खेलों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। कम खिलाड़ियों के बावजूद ज्यादा पदक जीतना यह दिखाता है कि भारत में पैरा खेलों का स्तर लगातार मजबूत हो रहा है। जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन में सरकार पर सवाल उठाने वाले पोस्टर मिले, एफआईआर दर्ज; स्पेशल सेल भी जांच में शामिल

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026: दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन की एक ट्रेन के अंदर सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने वाले दो पोस्टर मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पोस्टरों में सरकार के प्रदर्शन को लेकर कई दावे लिखे थे और लोगों को एक ऑनलाइन समूह से जुड़ने के लिए क्यूआर कोड भी दिया गया था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल भी इस मामले की जांच में शामिल हो गई है। 20 अक्टूबर को सामने आया मामला एफआईआर के मुताबिक यह मामला 20 अक्टूबर को सामने आया। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के एक ट्रेन ऑपरेटर ने नई दिल्ली से यशोभूमि स्टेशन तक यात्रा पूरी करने के बाद ट्रेन की जांच के दौरान सीट पर चिपके दो पोस्टर देखे। उसने पोस्टर हटाकर वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। पोस्टरों में क्या लिखा था? काले-सफेद ए4 आकार के इन पोस्टरों पर सरकार के प्रदर्शन पर सवाल उठाने वाले संदेश और हाल के वर्षों में देश में हुए बदलावों से जुड़े नौ दावे लिखे थे। इनमें “Voting Protest”, “Community Building Reform” और “Dissatisfied? You Are Not Alone” जैसे संदेश शामिल थे। पोस्टरों पर मौजूद क्यूआर कोड लोगों को एक ऑनलाइन समूह से जुड़ने का निमंत्रण देता था। किन धाराओं में मामला दर्ज? रिपोर्ट के मुताबिक मामला दिल्ली सार्वजनिक संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम और मेट्रो रेलवे कानून के तहत दर्ज किया गया है। फिलहाल एफआईआर अज्ञात लोगों के खिलाफ है और किसी की गिरफ्तारी की जानकारी सामने नहीं आई है। स्पेशल सेल क्यों जांच कर रही है? दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल पोस्टर लगाने वाले लोगों की पहचान के साथ-साथ क्यूआर कोड से जुड़े ऑनलाइन समूह के संचालकों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। पुलिस तकनीकी जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पोस्टर किसने तैयार किए और ट्रेन में किसने लगाए। पोस्टर पुलिस ने किए जब्त ट्रेन ऑपरेटर ने पोस्टर मिलने के बाद उन्हें स्टेशन कंट्रोलर को सौंपा था। इसके बाद पुलिस ने दोनों पोस्टर जब्त कर लिए और संबंधित ट्रेन, स्टेशन तथा संभावित सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की। दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के बीच सामने आया मामला यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब दिल्ली में अक्टूबर के दौरान कई राजनीतिक और छात्र संगठनों के प्रदर्शन हुए हैं। अलग-अलग विरोध प्रदर्शनों को लेकर दिल्ली पुलिस ने इस महीने दर्जनों एफआईआर दर्ज की हैं और कई मामलों की जांच विशेष इकाइयों को सौंपी गई है। हालांकि मेट्रो में मिले पोस्टरों को किसी खास संगठन से जोड़ने की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली की वोटर लिस्ट से 47.6 लाख नाम हटे, दोबारा जुड़वाने के लिए सिर्फ 2.5 लाख आवेदन; SIR पर नए सवाल

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026: दिल्ली में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 47.6 लाख नाम हटाए गए, लेकिन इसके बाद 22 अक्टूबर तक वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए सिर्फ 2,50,754 फॉर्म-6 आवेदन मिले। यह आंकड़ा दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने जारी किया है। 1.45 करोड़ से घटकर 97.5 लाख रह गए मतदाता SIR शुरू होने से पहले दिल्ली में करीब 1.45 करोड़ मतदाता दर्ज थे। 31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर लगभग 97.5 लाख रह गई। करीब 47.5 से 47.6 लाख मतदाताओं को अनुपस्थित, दूसरी जगह शिफ्ट, मृत या डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों में रखा गया। सिर्फ 2,50,754 लोगों ने भरा फॉर्म-6 CEO कार्यालय के अनुसार, 31 अगस्त से 22 अक्टूबर के बीच कुल 2,50,754 फॉर्म-6 आवेदन प्राप्त हुए। इसमें पहली बार वोटर बनने वाले लोग भी शामिल हैं और ऐसे लोग भी जिनका नाम SIR के दौरान हट गया था। इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि सभी 2.5 लाख आवेदन सिर्फ हटाए गए मतदाताओं के हैं। इतनी बड़ी संख्या में नाम हटे, आवेदन इतने कम क्यों? यही अंतर अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है। अधिकारियों का कहना है कि हटाए गए मतदाताओं में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी हो सकती है जो दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जिनके नाम दो जगह दर्ज थे। वहीं आलोचकों का सवाल है कि क्या सभी योग्य मतदाताओं तक दोबारा नाम जुड़वाने की जानकारी ठीक से पहुंची है। 33 लाख रिकॉर्ड में मिली थीं गड़बड़ियां SIR के दौरान करीब 33 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में अलग-अलग तरह की विसंगतियां पाई गई थीं। इनमें लगभग 13.79 लाख ऐसे मतदाता थे जिनका रिकॉर्ड 2002 की पिछली SIR सूची से लिंक नहीं हो पाया, जबकि करीब 19.33 लाख मामलों में तार्किक गड़बड़ियां सामने आईं। CEO कार्यालय के अनुसार करीब 29.5 लाख मामलों का समाधान कर लिया गया है या उन्हें अंतिम सूची के लिए विचाराधीन रखा गया है। पश्चिमी दिल्ली से सबसे ज्यादा आवेदन 31 अगस्त से 22 अक्टूबर के बीच पश्चिमी दिल्ली से 30,361 फॉर्म-6 आवेदन आए, जो सभी जिलों में सबसे ज्यादा हैं। वहीं नई दिल्ली जिले से सिर्फ 4,341 आवेदन मिले, जो सबसे कम हैं। 30 अक्टूबर तक दर्ज करा सकते हैं दावा दिल्ली में SIR के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 है। चुनाव अधिकारियों ने 25 अक्टूबर को राजधानी के सभी 14,947 मतदान केंद्रों पर विशेष नामांकन शिविर लगाने की भी घोषणा की है। अंतिम मतदाता सूची 4 दिसंबर 2026 को प्रकाशित किए जाने की योजना है। विपक्ष ने उठाए सवाल 47.6 लाख नाम हटने और उसके मुकाबले बेहद कम फॉर्म-6 आवेदन आने को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठने लगे हैं। विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता तथा पात्र मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होने की आशंका जताई है। हालांकि चुनाव अधिकारियों का कहना है कि दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया अभी जारी है और पात्र मतदाताओं को नाम जुड़वाने का अवसर दिया जा रहा है। जय राष्ट्र न्यूज़

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मणिपुर में हजारों लोगों का ‘साउंड प्रोटेस्ट’, बर्तन-हॉर्न और ड्रम बजाकर सरकार के खिलाफ जताया गुस्सा

इंफाल, 24 अक्टूबर 2026: मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय हिंसा और सामान्य स्थिति बहाल न होने से नाराज हजारों लोग शुक्रवार शाम सड़कों पर उतर आए। राज्य के पांच घाटी जिलों में लोगों ने बर्तन बजाए, ड्रम पीटे, वाहन के हॉर्न और सायरन बजाए और बिजली के खंभों पर हथौड़े मारकर करीब आधे घंटे तक ‘साउंड प्रोटेस्ट’ किया। शाम 7:30 से 8 बजे तक चला विरोध यह विरोध प्रदर्शन फेडरेशन ऑफ हाओमी के आह्वान पर किया गया। लोगों से शाम 7:30 बजे से 8 बजे तक आवाज़ के जरिए अपना विरोध दर्ज कराने की अपील की गई थी। इंफाल समेत कई इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। कांगला किले के पास बढ़ा तनाव इंफाल का ऐतिहासिक कांगला किला प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी वहां पहुंचे और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। राजभवन की ओर जाने वाले रास्ते पर सुरक्षा बढ़ाई गई और पुलिस ने बैरिकेड लगाए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। प्रदर्शनकारियों की क्या मांगें हैं? प्रदर्शनकारियों ने मणिपुर में जारी हिंसा और हत्याओं को रोकने के साथ-साथ राज्य में जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने की मांग की। इसके अलावा कुछ प्रदर्शनकारियों ने NRC लागू करने, कथित अवैध प्रवासियों की पहचान करने और सशस्त्र समूहों के साथ Suspension of Operations समझौते को खत्म करने की मांग भी उठाई। ‘नेताओं तक हमारी आवाज पहुंचे’ प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि लंबे समय से उनकी मांगों और पीड़ा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से इतनी तेज आवाज पैदा की, ताकि सरकार और नेताओं तक उनकी नाराजगी पहुंचे। हाल की हत्याओं के बाद बढ़ा गुस्सा यह विरोध ऐसे समय हुआ है जब हाल के दिनों में राज्य में हत्याओं की घटनाओं को लेकर तनाव बढ़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक 19 अक्टूबर को तीन मैतेई लकड़हारों की हत्या के बाद कई इलाकों में धरने और विरोध प्रदर्शन तेज हुए हैं। 2023 से जारी है मणिपुर का संकट मणिपुर मई 2023 से जातीय संघर्ष और हिंसा का सामना कर रहा है। लगातार घटनाओं और राजनीतिक समाधान में देरी को लेकर लोगों में नाराजगी बनी हुई है। शुक्रवार का ‘साउंड प्रोटेस्ट’ इसी बढ़ती असंतुष्टि का नया रूप माना जा रहा है। जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली-हरियाणा के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया अमेरिका में गिरफ्तार

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026: दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में हत्या, अपहरण, रंगदारी और संगठित अपराध के कई मामलों में वांछित गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया को अमेरिका के लास वेगास में गिरफ्तार किया गया है। हरियाणा एसटीएफ से मिले इनपुट के बाद अमेरिकी एजेंसियों ने 22 अक्टूबर को दोनों को पकड़ा। अब भारतीय एजेंसियां उन्हें भारत वापस लाने की प्रक्रिया में जुटी हैं। हरियाणा एसटीएफ के इनपुट पर हुई कार्रवाई अधिकारियों के मुताबिक हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया की गिरफ्तारी हरियाणा स्पेशल टास्क फोर्स (STF) से मिली जानकारी के आधार पर हुई। अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी ICE ने कार्रवाई में मदद की और दोनों को लास वेगास में हिरासत में लिया गया। कौन है हिमांशु भाऊ? हिमांशु भाऊ का असली नाम हिमांशु रिटोलिया है और वह हरियाणा के रोहतक जिले का रहने वाला है। वह दिल्ली और हरियाणा पुलिस की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था। उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, आपराधिक धमकी और जालसाजी समेत कई गंभीर मामले दर्ज हैं। उसके खिलाफ अगस्त 2023 में इंटरपोल रेड नोटिस भी जारी किया गया था। लॉरेंस बिश्नोई गैंग का प्रतिद्वंद्वी पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार हिमांशु भाऊ को जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का प्रतिद्वंद्वी माना जाता है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह विदेश में बैठकर दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और आसपास के इलाकों में अपने गिरोह के जरिए आपराधिक गतिविधियां संचालित कर रहा था। कई चर्चित मामलों में जुड़ा नाम जांच एजेंसियों ने हिमांशु भाऊ और उसके नेटवर्क को दिल्ली-एनसीआर में हुई कई गोलीबारी और रंगदारी की घटनाओं से जोड़ा है। उसके गिरोह पर कारोबारियों को धमकी देकर पैसे मांगने और निशाना बनाकर हमले करवाने के आरोप भी हैं। हालांकि इन मामलों में अंतिम दोषसिद्धि अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। नीरज फरीदपुरिया पर 25 से ज्यादा केस हरियाणा के पलवल जिले का रहने वाला नीरज फरीदपुरिया, जिसका नाम नीरज कौशिक भी बताया गया है, भी लंबे समय से वांछित था। उसके खिलाफ 25 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। वह भी गिरफ्तारी के समय अमेरिका में रह रहा था। भारत लाने की प्रक्रिया शुरू हरियाणा एसटीएफ अमेरिकी अधिकारियों और केंद्रीय एजेंसियों के संपर्क में है। दोनों को भारत वापस लाने के लिए deportation या extradition से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। अभी उनकी भारत वापसी की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। संगठित अपराध नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई दोनों की गिरफ्तारी को दिल्ली-हरियाणा में सक्रिय संगठित अपराध नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। भारतीय एजेंसियां अब उनसे जुड़े नेटवर्क, फंडिंग और विदेश से संचालित आपराधिक गतिविधियों की जांच आगे बढ़ा सकती हैं। जय राष्ट्र न्यूज़

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