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असम में 5,734 सरकारी पदों पर भर्ती का ऐलान, छह विभागों में होगी नियुक्ति; 1 फरवरी से परीक्षा प्रक्रिया शुरू

गुवाहाटी, 25 अक्टूबर 2026: असम सरकार ने युवाओं के लिए बड़ी भर्ती की घोषणा की है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि राज्य के छह सरकारी विभागों में कुल 5,734 पदों पर भर्ती की जाएगी। भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया 1 फरवरी 2027 से शुरू होगी और उम्मीदवारों को तैयारी के लिए करीब तीन महीने का समय मिलेगा। किन विभागों में कितने पद? इस भर्ती अभियान में सबसे ज्यादा पद असम पुलिस में हैं। विभागवार रिक्तियों का विवरण इस प्रकार है: कुल मिलाकर 5,734 पदों पर भर्ती की जाएगी। 1 फरवरी 2027 से शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि भर्ती प्रक्रिया 1 फरवरी 2027 से शुरू होगी। उन्होंने युवाओं से अभी से तैयारी शुरू करने की अपील की और कहा कि अभ्यर्थियों के पास पर्याप्त समय है। सबसे ज्यादा भर्ती पुलिस विभाग में कुल पदों में से 2,236 रिक्तियां असम पुलिस में हैं, जबकि वन विभाग में 1,307 पद भरे जाएंगे। इसके अलावा होमगार्ड, फायर सर्विस, जेल विभाग और पुलिस रेडियो संगठन में भी बड़ी संख्या में नियुक्तियां होंगी। आवेदन और योग्यता की जानकारी बाद में अभी विभागवार पदों की संख्या और भर्ती शुरू होने की तारीख घोषित की गई है। आवेदन की तारीख, शैक्षणिक योग्यता, उम्र सीमा, परीक्षा पैटर्न और चयन प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी संबंधित विभागों की आधिकारिक अधिसूचना में जारी की जाएगी। पुलिस और वन विभाग में शारीरिक परीक्षा भी संभव पुलिस, वन विभाग, होमगार्ड और फायर सर्विस से जुड़े पदों में लिखित परीक्षा के साथ शारीरिक दक्षता परीक्षा और अन्य चयन चरण भी हो सकते हैं। उम्मीदवारों को अंतिम पात्रता और चयन प्रक्रिया के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन का इंतजार करना होगा। युवाओं के लिए बड़ा सरकारी नौकरी अवसर 5,734 पदों की यह भर्ती असम में हाल के बड़े सरकारी रोजगार अभियानों में से एक मानी जा रही है। राज्य सरकार ने उम्मीदवारों से कहा है कि वे तीन महीने की तैयारी अवधि का पूरा उपयोग करें और परीक्षा के लिए अभी से रणनीति बनाएं। जय राष्ट्र न्यूज़

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राजस्थान के चूरू में कार-ट्रक की भीषण टक्कर, एक ही परिवार के 5 लोगों समेत 6 की मौत; मासूम बच्ची जीवित बची

चूरू, 25 अक्टूबर 2026: राजस्थान के चूरू जिले में सादुलपुर क्षेत्र के पास शनिवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक ही परिवार के पांच सदस्यों समेत कुल छह लोगों की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब तेज रफ्तार कार आगे चल रहे ट्रक से टकरा गई। कार में सवार एक मासूम बच्ची इस हादसे में जीवित बची, लेकिन उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। कहां हुआ हादसा? दुर्घटना ददरेवा-तारानगर मार्ग पर न्यांगली गांव के पास हुई। पुलिस के अनुसार कार में कुल सात लोग सवार थे। टक्कर इतनी तेज थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत मृतकों में भंवरलाल शर्मा (60), उनकी पत्नी महेंद्र देवी (55), बहुएं कविता (28) और यशोदा (34), यशोदा का चार महीने का बेटा और कार चालक मांगीलाल नाई (31) शामिल हैं। परिवार तारानगर के सोमसीसर गांव का रहने वाला था। मासूम बच्ची बनी इकलौती जीवित बची सदस्य हादसे में यशोदा की मासूम बेटी जीवित बच गई। अलग-अलग रिपोर्टों में बच्ची की उम्र सात से नौ महीने के बीच बताई गई है। उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मंदिर दर्शन के लिए निकला था परिवार रिपोर्टों के मुताबिक परिवार गोगामेड़ी में अपने कुलदेवी मंदिर में दर्शन के लिए जा रहा था। रास्ते में कार की ट्रक से टक्कर हो गई। कुछ आधिकारिक रिपोर्टों में परिवार के गुरुग्राम की ओर जाने का उल्लेख भी है, इसलिए यात्रा के अंतिम गंतव्य को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में थोड़ा अंतर है। ट्रक चालक की तलाश जारी हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन लेकर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी है और दुर्घटना की सटीक वजह की जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री ने लिया घटना का जायजा राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घटना की जानकारी ली और पीड़ित परिवार को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया। शवों को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया। तेज रफ्तार बनी वजह? प्रारंभिक पुलिस जानकारी के मुताबिक कार तेज रफ्तार में थी और आगे चल रहे ट्रक के पिछले हिस्से से टकराई। हालांकि दुर्घटना की अंतिम वजह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। जय राष्ट्र न्यूज़

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गंभीर चक्रवाती तूफान की आशंका के बीच ओडिशा हाई अलर्ट पर, 302 बचाव दल तैयार; 28 अक्टूबर को आंध्र तट से टकराने का अनुमान

भुवनेश्वर, 25 अक्टूबर 2026: बंगाल की खाड़ी में बन रहा मौसम तंत्र तेजी से मजबूत हो रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा अनुमान के मुताबिक यह सिस्टम पहले चक्रवाती तूफान और फिर गंभीर से बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। फिलहाल इसके 28 अक्टूबर की पूर्वाह्न तक आंध्र प्रदेश और यानम तट के बीच, बापटला से विशाखापत्तनम के बीच टकराने की संभावना जताई गई है। ओडिशा में भी भारी बारिश और तेज हवाओं की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। ओडिशा में 302 बचाव दल तैयार ओडिशा सरकार ने कुल 302 बचाव एवं राहत दल तैयार रखे हैं। इनमें करीब 60 ODRAF टीमें, 17 NDRF टीमें और 225 फायर सर्विस यूनिट शामिल हैं। संवेदनशील जिलों में इन टीमों को तैनात या स्टैंडबाय पर रखा गया है। पांच जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने का आदेश दिया गया है। दूसरे जिलों में स्थानीय स्थिति के आधार पर जिला कलेक्टर छुट्टी का फैसला करेंगे। दक्षिण ओडिशा पर ज्यादा असर की आशंका राज्य सरकार के मुताबिक दक्षिणी ओडिशा के गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश और तेज हवाओं का सबसे ज्यादा असर हो सकता है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है। IMD का ताजा अनुमान क्या है? IMD के अनुसार मौजूदा डिप्रेशन 25 अक्टूबर को डीप डिप्रेशन, 26 अक्टूबर तक चक्रवाती तूफान और 27 अक्टूबर तक गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। ताजा पूर्वानुमान में इसके 28 अक्टूबर को बापटला और विशाखापत्तनम के बीच आंध्र प्रदेश-यानम तट से बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में गुजरने की संभावना है। अधिकतम निरंतर हवा की गति 115-125 किमी प्रति घंटे, जबकि झोंके 140 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने निचले और बाढ़ संभावित इलाकों से लोगों को पहले ही सुरक्षित आश्रय स्थलों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। गर्भवती महिलाओं, मरीजों और बुजुर्गों को स्वास्थ्य केंद्रों या सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने को प्राथमिकता दी जा रही है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह मछुआरों को समुद्र में न जाने और पहले से गहरे समुद्र में मौजूद नावों को तट पर लौटने की सलाह दी गई है। बड़े ट्रॉलर और जहाज संचालकों को भी अलर्ट किया गया है। बिजली, सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं को भी अलर्ट सरकार ने इंजीनियरिंग विभागों को बिजली, सड़क और पेयजल व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति में तुरंत बहाली के लिए तैयार रहने को कहा है। स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी दवाएं, मेडिकल किट और एंटी-स्नेक वेनम का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। ‘जीरो कैजुअल्टी’ पर सरकार का जोर ओडिशा सरकार ने सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करने और ‘जीरो कैजुअल्टी’ के लक्ष्य पर ध्यान देने को कहा है। चक्रवात और बाढ़ आश्रय केंद्रों को तैयार रखा गया है और संवेदनशील इलाकों में प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। जय राष्ट्र न्यूज़

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आंध्र प्रदेश में डीजल ट्रांसफर के दौरान भीषण विस्फोट, 7 लोगों की मौत

अल्लूरी सीताराम राजू, 25 अक्टूबर 2026: आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में सड़क निर्माण स्थल पर डीजल एक वाहन से दूसरे वाहन में ट्रांसफर किए जाने के दौरान भीषण आग और विस्फोट हो गया। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका भी शामिल हैं। कहां हुआ हादसा? यह घटना अनंतगिरी मंडल के पीचुमामिडी/बिसिमामिडी क्षेत्र में शनिवार सुबह करीब 8:30 बजे हुई। सड़क निर्माण के काम में लगी मशीनों और वाहनों के लिए डीजल ड्रमों में भरकर लाया गया था। डीजल ट्रांसफर के दौरान लगी आग पुलिस के अनुसार, मजदूर पिकअप वाहन में रखे डीजल को दूसरे वाहन में ट्रांसफर करने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान आग लग गई, जिसने तेजी से आसपास खड़े वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। इसके बाद जोरदार विस्फोट हुआ। तीन वाहन पूरी तरह जले आग की चपेट में एक पिकअप ट्रक, एक डंपर और पास खड़ी एक दोपहिया गाड़ी आ गई। तीनों वाहन पूरी तरह जल गए। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि शुरुआती चिंगारी किस वजह से पैदा हुई। मृतकों में स्कूल शिक्षिका भी शामिल मृतकों की पहचान जगरापु सुनीता (44), मनिकंठा, गुरु पवन, पंगी चिरंजीवी, टिंकू चंद्रवंशी सिंह, नज़ीर और नारायण राव के रूप में की गई है। सुनीता एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका थीं और घटना के समय स्कूल जाने के रास्ते में थीं। विस्फोटक सामग्री की बात पुलिस ने नकारी घटना के शुरुआती चरण में कुछ रिपोर्टों में gelatin sticks की बात कही गई थी, लेकिन बाद में जिला पुलिस अधीक्षक अमित बरदार ने स्पष्ट किया कि जांच में gelatin sticks या gelatin explosive के अवशेष नहीं मिले। पुलिस ने इसे फिलहाल accidental fire बताया है। परिजनों को ₹5 लाख की सहायता जिला प्रशासन ने बताया कि ठेकेदार की ओर से मृतकों के परिवारों को ₹5-5 लाख की अनुग्रह राशि दी जाएगी। पात्र परिवारों को बीमा सहायता दिलाने की प्रक्रिया भी की जाएगी। सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल हादसे के बाद सड़क निर्माण स्थलों पर डीजल के भंडारण और ट्रांसफर की सुरक्षा प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। पुलिस और फॉरेंसिक टीम यह जांच रही है कि ईंधन संभालते समय निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। जय राष्ट्र न्यूज़

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30 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार का ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’, 1 नवंबर को INDIA ब्लॉक का ‘दिल्ली चलो’ मार्च

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026: विपक्षी दलों के INDIA ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। गठबंधन ने घोषणा की है कि 30 अक्टूबर को दिल्ली में ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ की प्रतीकात्मक कार्यवाही आयोजित की जाएगी और इसके बाद 1 नवंबर को ‘दिल्ली चलो’ मार्च निकाला जाएगा, जो रामलीला मैदान में बड़ी रैली के साथ समाप्त होगा। क्या है ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’? यह कोई संवैधानिक या कानूनी महाभियोग प्रक्रिया नहीं है। विपक्ष इसे ‘मॉक पार्लियामेंट’ या प्रतीकात्मक जन-कार्यवाही के रूप में आयोजित करेगा। रिपोर्टों के मुताबिक कार्यक्रम दिल्ली के होटल अशोक में होगा, जहां विपक्षी सांसदों और वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की योजना है। विपक्ष क्यों कर रहा है यह कार्यक्रम? कांग्रेस और INDIA ब्लॉक चुनाव आयोग पर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। विपक्ष ने इन मुद्दों को ‘वोट चोरी’ से जोड़ते हुए CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। ये विपक्ष के आरोप हैं; चुनाव आयोग ऐसे आरोपों को पहले खारिज कर चुका है। केसी वेणुगोपाल ने किया ऐलान कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि 30 अक्टूबर को होने वाली इस प्रतीकात्मक कार्यवाही में जनता का कथित फैसला CEC को हटाने की मांग के रूप में सामने रखा जाएगा। उन्होंने इसे संविधान और चुनावी प्रक्रिया की रक्षा के लिए विपक्ष के अभियान का हिस्सा बताया। 1 नवंबर को ‘दिल्ली चलो’ मार्च ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ के बाद INDIA ब्लॉक 1 नवंबर को दिल्ली चलो मार्च आयोजित करेगा। यह मार्च दिल्ली के रामलीला मैदान में समाप्त होगा। कांग्रेस का दावा है कि इस रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे और पार्टी ने करीब 10 लाख लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा है। यह विपक्ष का अनुमान है, वास्तविक उपस्थिति कार्यक्रम के दिन ही स्पष्ट होगी। खड़गे ने सहयोगी दलों से की अपील कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने INDIA ब्लॉक के सहयोगी दलों से 30 अक्टूबर और 1 नवंबर को दिल्ली में अपनी मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित करने की अपील की है। कांग्रेस अपने राज्य संगठनों और फ्रंटल संगठनों को भी रैली के लिए सक्रिय कर रही है। दिल्ली में सुरक्षा भी बढ़ाई गई 1 नवंबर की प्रस्तावित रैली और हाल के विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उच्च स्तर पर समीक्षा की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक गृह मंत्री अमित शाह ने भी दिल्ली पुलिस मुख्यालय में सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की। संवैधानिक महाभियोग से अलग है यह कार्रवाई यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 30 अक्टूबर का ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ संवैधानिक रूप से CEC को पद से हटाने की वैधानिक प्रक्रिया नहीं है। यह विपक्ष द्वारा आयोजित एक राजनीतिक और प्रतीकात्मक कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य चुनाव आयोग पर सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव बढ़ाना है। जय राष्ट्र न्यूज़

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SIR में इस्तेमाल सॉफ्टवेयर का नाम-वर्जन बताने से चुनाव आयोग का इनकार, RTI में ‘ट्रेड सीक्रेट’ और बौद्धिक संपदा का दिया हवाला

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026: चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां और असंगतियां पहचानने के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर का नाम और वर्जन सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। आयोग ने RTI कानून की धारा 8(1)(d) का हवाला देते हुए कहा कि यह जानकारी “commercial confidence, trade secrets और intellectual property” से जुड़ी है और इसके खुलासे से किसी तीसरे पक्ष की प्रतिस्पर्धी स्थिति प्रभावित हो सकती है। किसने मांगी थी जानकारी? तेलंगाना के करीमनगर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एम.ए. मुजीब अय्यूब ने RTI आवेदन के जरिए चुनाव आयोग से पूछा था कि SIR में मतदाता डेटा की गलतियां पकड़ने के लिए कौन-सा software, application या AI platform इस्तेमाल किया गया। उन्होंने उसका नाम, version और काम करने के तरीके की जानकारी भी मांगी थी। चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया? 16 अक्टूबर को दिए जवाब में आयोग ने कहा कि software का नाम और version बताना RTI Act की धारा 8(1)(d) के तहत exempt है। यह धारा commercial confidence, trade secrets और intellectual property से जुड़ी कुछ जानकारियों को सार्वजनिक करने से छूट देती है। क्या SIR के लिए नया software बनाया गया था? चुनाव आयोग ने साफ किया कि SIR के लिए कोई नया software विकसित या खरीदा नहीं गया था। हालांकि आयोग ने यह नहीं बताया कि पहले से मौजूद किस system या platform का इस्तेमाल किया गया। AI और Machine Learning के इस्तेमाल पर भी स्पष्ट जवाब नहीं RTI में यह भी पूछा गया था कि क्या voter records को flag करने में AI, machine learning, predictive analytics या automated decision-support tools का इस्तेमाल हुआ। आयोग ने इन सवालों को “clarification” बताते हुए कहा कि ये RTI Act की धारा 2(f) के तहत “information” की परिभाषा में नहीं आते। इसलिए यह स्पष्ट नहीं हुआ कि automated tools या AI का इस्तेमाल हुआ था या नहीं। गलत तरीके से नाम flag होने से बचाने के क्या safeguards हैं? RTI आवेदक ने पूछा था कि genuine voters को गलती से flag या delete होने से बचाने के लिए कौन-से safeguards हैं। इस सवाल पर भी आयोग ने विस्तृत तकनीकी जानकारी नहीं दी। यही वजह है कि SIR के software और verification process की transparency को लेकर अब नई बहस शुरू हो गई है। अंतिम फैसला ERO का होता है चुनाव आयोग ने कहा कि मतदाता का नाम शामिल या बाहर करने का अंतिम निर्णय software नहीं, बल्कि संबंधित विधानसभा क्षेत्र के Electoral Registration Officer (ERO) द्वारा तथ्य और रिकॉर्ड देखने के बाद लिया जाता है। आयोग ने Representation of the People Act, 1950 की धाराओं 13B(1) और 13B(2) का हवाला दिया। समीक्षा कौन करता है, इस पर भी सीमित जानकारी जब पूछा गया कि software द्वारा flag किए गए records की समीक्षा कौन करता है, आयोग ने RTI Act की धारा 8(1)(g) का हवाला दिया। यह प्रावधान ऐसी जानकारी को रोकने की अनुमति देता है जिससे किसी व्यक्ति की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है या confidential source की पहचान उजागर हो सकती है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपील की सलाह दी पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत ने कहा कि RTI आवेदक को इस जवाब के खिलाफ सक्षम प्राधिकारी के सामने अपील करनी चाहिए। उनके मुताबिक मामला कानूनी व्याख्या से जुड़ा है और अपील के जरिए अधिक जानकारी मांगी जा सकती है। SIR पर पहले से जारी है विवाद SIR प्रक्रिया पहले से ही मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम हटने और data verification को लेकर राजनीतिक विवाद के केंद्र में है। ऐसे में software की technical details सार्वजनिक न किए जाने से पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि अंतिम निर्णय statutory अधिकारियों द्वारा ही लिया जाता है और SIR के लिए कोई अलग नया software तैयार नहीं किया गया। जय राष्ट्र न्यूज़

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चीन रोबोटिक्स में तेजी से आगे, भारत में होलोग्राम तकनीक पर चर्चा; आखिर भारत की तकनीकी दिशा क्या है?

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026: चीन ने humanoid robots और embodied AI को प्रयोगशाला से निकालकर factories, hospitals, warehouses और service sectors में उतारने की दिशा में तेजी बढ़ा दी है। दूसरी ओर भारत में हाल के महीनों में AI-powered hologram, AR और immersive display technologies चर्चा में रही हैं। लेकिन यह मानना गलत होगा कि भारत की तकनीकी रणनीति सिर्फ hologram तक सीमित है। भारत की बड़ी दिशा AI, robotics, semiconductors, quantum technology और advanced manufacturing को साथ लेकर चलने की है। चीन ने humanoid robots पर बढ़ाई रफ्तार चीन ने 2026 में humanoid robots और embodied intelligence के लिए राष्ट्रीय स्तर पर real-world training programme शुरू किया है। उसका लक्ष्य साल के अंत तक 10,000 humanoid robots की commercial deployment और 100 से ज्यादा high-value use cases विकसित करना है। Manufacturing, logistics, healthcare, retail और disaster management जैसे क्षेत्रों पर खास फोकस किया जा रहा है। रोबोटिक्स के लिए राष्ट्रीय standards भी तैयार चीन ने humanoid robotics के लिए अपना पहला comprehensive national standards framework भी जारी किया है। इसमें robot hardware, AI models, safety, ethics, applications और lifecycle management तक के standards शामिल हैं। 2025 में चीन में 140 से ज्यादा manufacturers ने 330 से अधिक humanoid robot models पेश किए थे। भारत में hologram क्यों चर्चा में है? भारत में hologram technology हाल में museums, advertising और interactive AI experiences में दिखाई दी है। दिल्ली के AI Impact Summit में AI-generated भगवान कृष्ण और अर्जुन के holographic avatars प्रदर्शित किए गए थे। इसी तरह प्रधानमंत्री संग्रहालय में महात्मा गांधी का AI-powered 3D avatar भी शुरू किया गया। भारत hologram पर ही नहीं कर रहा काम भारत सरकार ने फरवरी 2026 में Robotics के लिए strategic roadmap पर उच्चस्तरीय बैठक की थी। इसमें advanced robotics, collaborative robots, physical AI, healthcare robotics और defence के लिए unmanned systems पर चर्चा हुई। भारत की robotics strategy का लक्ष्य देश को research, design, development और manufacturing में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना है। असली चुनौती—robot के जरूरी हिस्से भारत में बनें भारत के robotics ecosystem में actuators, sensors, precision gears, chipsets और advanced control systems जैसी critical technologies में gaps की पहचान की गई है। इसलिए सरकार और industry की बड़ी चुनौती सिर्फ robot assemble करना नहीं, बल्कि इन components का देश में डिजाइन और निर्माण करना है। AI और semiconductor पर भी बड़ा निवेश भारत सरकार की IndiaAI Mission के लिए ₹10,371.92 करोड़ का प्रावधान है। इसके अलावा ₹1 लाख करोड़ का Research, Development and Innovation Fund deep-tech, AI, robotics, space और अन्य emerging technologies को बढ़ावा देने के लिए रखा गया है। Semiconductor manufacturing को भी technological self-reliance का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। Display technology में भी भारत बढ़ा रहा क्षमता मई 2026 में सरकार ने गुजरात में करीब ₹3,936 करोड़ के दो semiconductor projects को मंजूरी दी, जिनमें देश की पहली commercial Mini/Micro-LED display manufacturing facility भी शामिल है। ऐसी technologies आगे AR glasses, advanced displays और immersive systems के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं। होलोग्राम पर भारतीय शोध भी सिर्फ entertainment तक सीमित नहीं CSIR के वैज्ञानिकों ने holographic gratings का इस्तेमाल करके lightweight और energy-efficient AR glasses displays विकसित करने की दिशा में प्रगति की है। यह तकनीक भविष्य में industrial, medical और defence applications में इस्तेमाल हो सकती है। तो चीन और भारत में असली अंतर क्या है? फिलहाल चीन की बड़ी ताकत large-scale hardware manufacturing और तेजी से real-world deployment है। भारत की रणनीति comparatively broader है—software और AI की अपनी ताकत को semiconductor, robotics, quantum और advanced manufacturing से जोड़ना। हालांकि global robotics race में आगे आने के लिए भारत को research से ज्यादा तेजी से commercial manufacturing और mass deployment पर ध्यान देना होगा। यह उपलब्ध सरकारी roadmaps और मौजूदा industrial priorities से निकलने वाला निष्कर्ष है। जय राष्ट्र न्यूज़

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लद्दाख में भारतीय बाइकर्स के फोन पर दिखा चीन का समय, वायरल वीडियो के पीछे सामने आई तकनीकी वजह

लेह-लद्दाख: लद्दाख में चीन सीमा के नजदीक घूम रहे कुछ भारतीय बाइकर्स उस समय हैरान रह गए, जब उनके मोबाइल फोन का समय अपने-आप बदलकर चाइना स्टैंडर्ड टाइम दिखाने लगा। वायरल वीडियो में बाइकर्स भारत की सीमा के अंदर मौजूद होने के बावजूद फोन पर भारत से करीब ढाई घंटे आगे का समय दिखाते नजर आए। यह वीडियो जून 2026 का है और अब दोबारा सोशल मीडिया पर चर्चा में है। फोन पर अचानक कैसे दिखा चीन का समय? रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके पीछे सबसे संभावित वजह स्मार्टफोन की ऑटोमैटिक टाइम जोन सेटिंग है। यह फीचर आसपास के मोबाइल नेटवर्क या टावर से मिली जानकारी के आधार पर फोन का समय अपने-आप बदल सकता है। चीन के मोबाइल सिग्नल भारतीय क्षेत्र तक पहुंचे? लद्दाख के कुछ सीमावर्ती इलाकों में भारतीय मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने पर चीन की तरफ से आने वाले मजबूत दूरसंचार सिग्नल फोन द्वारा पकड़े जा सकते हैं। ऐसे में फोन नेटवर्क की टाइम जोन जानकारी को चीन की मानकर समय बदल सकता है। भारत और चीन के समय में कितना अंतर? भारत भारतीय मानक समय का पालन करता है, जबकि चीन पूरे देश में चाइना स्टैंडर्ड टाइम इस्तेमाल करता है। चीन का समय भारत से करीब 2 घंटे 30 मिनट आगे है। वायरल वीडियो में भी बाइकर्स ने लगभग यही अंतर दिखाया। क्या इसका मतलब फोन चीन के नियंत्रण में चला गया? नहीं। उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि फोन हैक हो गए थे या चीन ने भारतीय क्षेत्र में किसी तरह का नियंत्रण कर लिया था। इसे मुख्य रूप से सीमावर्ती इलाके में होने वाला नेटवर्क सिग्नल ओवरलैप और फोन की ऑटोमैटिक सेटिंग से जुड़ी घटना बताया गया है। घटना ने सीमा पर कनेक्टिविटी को लेकर उठाए सवाल भले ही इसका तकनीकी कारण सामान्य हो सकता है, लेकिन घटना ने सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय दूरसंचार नेटवर्क की मजबूती और कवरेज को लेकर चर्चा जरूर तेज की। कई लोगों ने सवाल उठाया कि अगर विदेशी मोबाइल सिग्नल भारतीय क्षेत्र तक पहुंच रहे हैं तो स्थानीय नेटवर्क को और मजबूत करने की जरूरत है। ऐसी स्थिति आए तो क्या करें? फोन का समय गलत होने पर उपयोगकर्ता ऑटोमैटिक टाइम जोन और ऑटोमैटिक नेटवर्क चयन बंद करके भारतीय नेटवर्क तथा भारतीय मानक समय को मैन्युअली चुन सकते हैं। जय राष्ट्र न्यूज़

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₹5 का फिनाइल ₹33,500 में, ₹306 की एलईडी ₹11,800 में! मध्य प्रदेश में ₹1,134 करोड़ की सरकारी खरीद पर उठे गंभीर सवाल

भोपाल, 25 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में पिछले तीन वर्षों में हुई सरकारी खरीद की जांच में कीमतों का चौंकाने वाला अंतर सामने आया है। कहीं एक लीटर फिनॉलिक डिसइन्फेक्टेंट यानी फिनाइल ₹5 में खरीदा गया, तो कहीं इसी तरह के उत्पाद की कीमत ₹33,500 दर्ज हुई। इसी तरह 60 वॉट की एलईडी लाइट कहीं ₹306 में खरीदी गई, जबकि भोपाल में उसी क्षमता की एलईडी की कीमत ₹11,800 दर्ज की गई। अब इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश लोकायुक्त ने जांच शुरू कर दी है। तीन साल में ₹1,134 करोड़ की खरीद सरकारी प्रस्तुति के मुताबिक मध्य प्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने पिछले तीन साल में सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी GeM के जरिए करीब ₹1,134 करोड़ की खरीद की। अधिकारियों के विश्लेषण में दावा किया गया कि अगर सामान औसत दरों के आसपास खरीदा जाता, तो करीब ₹250 करोड़ की बचत हो सकती थी। हालांकि यह अनुमान अपने-आप भ्रष्टाचार साबित नहीं करता; अंतिम निष्कर्ष के लिए सामान की गुणवत्ता, स्पेसिफिकेशन और खरीद दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी। ₹5 से ₹33,500 तक पहुंचा फिनाइल का रेट प्रस्तुति में बताया गया कि एक निकाय में फिनॉलिक डिसइन्फेक्टेंट की कीमत ₹5 प्रति लीटर दर्ज हुई, जबकि दूसरे स्थान पर इसी श्रेणी के उत्पाद की कीमत ₹33,500 तक दिखाई गई। अधिकारियों ने इस भारी अंतर पर सवाल उठाए हैं और अब यह जांच का विषय है कि क्या दोनों उत्पाद वास्तव में समान थे या उनमें तकनीकी अंतर था। भोपाल में ₹11,800 की 60-वॉट एलईडी इसी तरह एक नगरीय निकाय ने 60 वॉट की एलईडी लाइट ₹306 में खरीदी, जबकि भोपाल में इसी क्षमता की लाइट का रेट ₹11,800 दर्ज हुआ। भोपाल की इस खरीद का कुल मूल्य करीब ₹3.78 लाख बताया गया है। अधिकारी यह भी जांच रहे हैं कि इसमें installation, accessories या अन्य अतिरिक्त लागत शामिल थी या नहीं। कचरा वाहन की कीमत में भी तीन गुना अंतर सरकारी बैठक में कचरा संग्रहण वाहनों की खरीद का उदाहरण भी दिया गया। एक नगरीय निकाय ने ऐसा वाहन करीब ₹2 लाख में खरीदा, जबकि दूसरे निकाय ने चार डस्टबिन के साथ उसी तरह के वाहन के लिए ₹6 लाख खर्च किए। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने इस तरह की खरीद पर अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी। ₹65 करोड़ डंपर पर, ₹49 करोड़ स्ट्रीट लाइट पर खर्च तीन वर्षों के आंकड़ों में करीब ₹65 करोड़ गारबेज टिपर और डंपर, ₹49 करोड़ स्ट्रीट लाइट, ₹27 करोड़ ऑक्टागोनल पोल और ₹18 करोड़ डिसइन्फेक्टेंट पर खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है। लोकायुक्त ने शुरू की जांच मामला सार्वजनिक होने और वीडियो वायरल होने के बाद मध्य प्रदेश लोकायुक्त ने कथित अनियमितताओं की जांच शुरू कर दी है। विशेष पुलिस स्थापना के महानिदेशक योगेश देशमुख ने कहा कि संबंधित विभाग से रिपोर्ट मांगी जाएगी और रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। अधिकारियों को दी गई सख्त चेतावनी नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने बैठक में साफ कहा कि विभाग अब यह देख सकता है कि कौन-सा निकाय क्या खरीद रहा है और किस दर पर खरीद रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि आगे ऐसी अनियमितताएं मिलीं तो कार्रवाई की जाएगी। क्या ₹250 करोड़ का घोटाला साबित हो गया? फिलहाल इसे सीधे ₹250 करोड़ का घोटाला कहना सावधानी के बिना सही नहीं होगा। ₹250 करोड़ वह अनुमानित राशि है जो अधिकारियों के विश्लेषण के मुताबिक औसत दरों पर खरीद करने से बचाई जा सकती थी। यह तय करना कि वास्तविक वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार कितना हुआ, लोकायुक्त और विभागीय जांच के बाद ही संभव होगा। जय राष्ट्र न्यूज़

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न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 में वैभव सूर्यवंशी को मिला मौका, नंबर-3 पर उतरे बल्लेबाजी करने

क्राइस्टचर्च, 24 अक्टूबर 2026: भारत और न्यूजीलैंड के बीच दूसरे टी20 मुकाबले में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस के समय साफ किया कि वैभव ओपनिंग नहीं करेंगे, बल्कि नंबर-3 पर बल्लेबाजी के लिए उतरेंगे। भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। ईशान किशन की जगह मिली टीम में जगह वैभव सूर्यवंशी को चोटिल ईशान किशन की जगह प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। बीसीसीआई के मुताबिक ईशान को पहले टी20 के दौरान दाएं पैर के adductor में हल्का खिंचाव आया था, जिसके चलते वह दूसरे मुकाबले से बाहर हो गए। ओपनिंग नहीं, नंबर-3 पर उतरे वैभव वैभव आमतौर पर सलामी बल्लेबाज के रूप में खेलते हैं, लेकिन टीम मैनेजमेंट ने अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन की ओपनिंग जोड़ी को बरकरार रखा। इसी कारण 15 वर्षीय वैभव को नंबर-3 की नई भूमिका दी गई। श्रेयस अय्यर ने टॉस पर किया खुलासा भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस के दौरान कहा कि ईशान किशन की जगह वैभव टीम में आए हैं और वह नंबर-3 पर बल्लेबाजी करेंगे। भारत ने टीम में एक और बदलाव करते हुए प्रिंस यादव को मयंक यादव की जगह शामिल किया। नंबर-3 पर बड़ी पारी नहीं खेल सके वैभव हालांकि नई बल्लेबाजी भूमिका में वैभव सूर्यवंशी बड़ी पारी नहीं खेल पाए। वह 8 गेंदों में सिर्फ 4 रन बनाकर नाथन स्मिथ की गेंद पर आउट हो गए। नंबर-3 पर उनकी बल्लेबाजी को लेकर बाद में चर्चा भी हुई। भारत ने चार विकेट से जीता मुकाबला भारत ने इस मैच में न्यूजीलैंड को चार विकेट से हराया और पांच मैचों की टी20 सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली। हालांकि वैभव का व्यक्तिगत प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, लेकिन टीम ने मुकाबला अपने नाम कर लिया। वैभव की भूमिका पर उठी चर्चा पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी वैभव को नंबर-3 पर खिलाने के फैसले पर सवाल उठाए। उनका मानना था कि युवा बल्लेबाज इस पोजीशन पर सहज नजर नहीं आए और टीम मैनेजमेंट को उनकी स्वाभाविक बल्लेबाजी शैली के मुताबिक भूमिका तय करने पर विचार करना चाहिए। जय राष्ट्र न्यूज़

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