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प्रेमानंद महाराज के आश्रम को लेकर संत के गंभीर दावे, builder lobby से लेकर ₹5 करोड़ खर्च करने तक के आरोप

मथुरा/वृंदावन: प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के श्री हित राधा केली कुंज आश्रम को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने आश्रम से जुड़े कुछ लोगों पर builder और property lobby के प्रभाव, कथित आर्थिक हितों और आश्रम की व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की प्रेमानंद महाराज से शुरुआती मुलाकात को लेकर भी ₹5 करोड़ खर्च किए जाने का दावा किया है। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से ठोस प्रमाण सामने नहीं आए हैं। दिनेश फलाहारी महाराज ने लगाए गंभीर आरोप दिनेश फलाहारी महाराज ने एक पत्र और मीडिया से बातचीत के जरिए आश्रम से जुड़े कुछ लोगों पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि धार्मिक गतिविधियों के पीछे कुछ property dealers और प्रभावशाली लोगों का नेटवर्क काम कर रहा है और प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता का इस्तेमाल कथित व्यावसायिक हितों के लिए किया जा रहा है। ‘Builder lobby के प्रभाव’ का दावा फलाहारी महाराज ने आरोप लगाया कि केली कुंज आश्रम के आसपास builder lobby का प्रभाव बढ़ गया है। उन्होंने यहां तक दावा किया कि कुछ लोग संत के नाम और प्रभाव का इस्तेमाल वृंदावन में जमीन और property से जुड़े हितों को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विराट कोहली को लेकर ₹5 करोड़ का दावा सबसे अधिक चर्चा उस दावे की हो रही है जिसमें फलाहारी महाराज ने कहा कि विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की प्रेमानंद महाराज से पहली मुलाकात कराने के लिए कथित तौर पर करीब ₹5 करोड़ खर्च किए गए थे। कुछ रिपोर्टों में इसे सीधे विराट कोहली को रकम दिए जाने के दावे के रूप में पेश किया गया है, जबकि उपलब्ध विवरण में दावा एक property syndicate द्वारा मुलाकात आयोजित कराने पर रकम खर्च किए जाने का है। इस दावे का कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है। ‘लोकप्रियता का इस्तेमाल’ करने का आरोप फलाहारी महाराज का दावा है कि celebrities के आश्रम आने से प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता और visibility काफी बढ़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इसी लोकप्रियता का आर्थिक और property-related गतिविधियों में कथित तौर पर फायदा उठा रहे हैं। आश्रम के अंदर गुटबाजी का भी दावा फलाहारी महाराज ने आश्रम के भीतर दो अलग-अलग समूह सक्रिय होने का भी दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ वास्तविक साधक हैं, जबकि दूसरी तरफ ऐसे लोग सक्रिय हैं जिनका मुख्य उद्देश्य जमीन और दूसरे आर्थिक हितों से जुड़ा है। यह भी फिलहाल केवल उनका आरोप है। प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता दिनेश फलाहारी महाराज ने प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा पर भी चिंता जताई है। उन्होंने उनके लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की मांग करते हुए दावा किया कि मौजूदा विवाद के कारण संत की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। गोवर्धन आने की भी की अपील फलाहारी महाराज ने प्रेमानंद महाराज से केली कुंज से निकलकर गोवर्धन गिरिराज क्षेत्र में आने की अपील भी की है। उनका कहना है कि इससे महाराज कथित property network और विवादों से दूर रह सकेंगे। शिष्य की मौत के बाद बढ़ा विवाद यह पूरा विवाद उस समय और गहरा हुआ जब प्रेमानंद महाराज से जुड़े साधक दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला सामने आया। इसके बाद आश्रम की व्यवस्था, शिष्यों की गतिविधियों और internal functioning को लेकर कई तरह के सवाल और दावे सोशल मीडिया तथा स्थानीय स्तर पर सामने आने लगे। आश्रम ट्रस्ट ने क्या कहा? श्री राधा केली कुंज ट्रस्ट ने साधक की मौत के मामले में कहा है कि वह पुलिस प्रशासन की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच में पूरा सहयोग कर रहा है। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं और आम लोगों से अपील की है कि जांच पूरी होने से पहले अधूरी जानकारी, अफवाह या अनुमान के आधार पर प्रेमानंद महाराज या आश्रम की छवि खराब न की जाए। लापता शिष्य का मामला भी आया था सामने इसी विवाद के बीच हाथरस का एक किशोर, जिसने आश्रम से दीक्षा ली थी, कई महीनों तक लापता रहा। बाद में पुलिस ने उसे बरसाना के एक दूसरे आश्रम से सुरक्षित खोज निकाला। इस मामले में भी परिवार ने शुरुआत में केली कुंज आश्रम को लेकर सवाल उठाए थे, लेकिन किशोर बाद में दूसरे आश्रम में मिला। पुराने वीडियो भी गलत संदर्भ में हो रहे वायरल विवाद बढ़ने के बाद प्रेमानंद महाराज का रोते हुए एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर हालिया घटनाओं से जोड़कर वायरल किया गया। Fact-check में यह वीडियो पुराना पाया गया और मार्च 2026 का बताया गया। इसलिए इसे मौजूदा विवाद से जोड़ना भ्रामक है। फिलहाल दावों की पुष्टि नहीं फलाहारी महाराज के आरोप गंभीर जरूर हैं, लेकिन उनके समर्थन में अभी सार्वजनिक रूप से प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। Builder lobby, ₹5 करोड़ खर्च करने और आश्रम के अंदर कथित आर्थिक network से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इन्हें स्थापित तथ्य के बजाय आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। source – NDTV / Navbharat Times / ABP News / Aaj Tak / The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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2029 से पहले 21 NDA शासित राज्यों में लागू होगा UCC: अमित शाह

मुंबई: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP-led NDA शासित सभी 21 राज्यों में Uniform Civil Code (UCC) लागू करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में UCC पहले ही लागू किया जा चुका है और बाकी NDA शासित राज्यों में भी इसे आगे बढ़ाया जाएगा। मुंबई की प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया ऐलान अमित शाह ने यह बयान 13 सितंबर को मुंबई में आयोजित एक press conference में दिया था। उन्होंने कहा कि सरकार सामाजिक और कानूनी समानता के एजेंडे के तहत UCC को आगे बढ़ा रही है। 21 NDA शासित राज्यों का किया जिक्र शाह ने कहा कि BJP-led NDA की सरकार वाले 21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू किए जाने को लेकर उन्हें भरोसा है। उन्होंने इसे अगले लोकसभा चुनाव से पहले पूरा किए जाने वाले बड़े policy goals में शामिल किया। क्या है Uniform Civil Code? Uniform Civil Code का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक कानूनों जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान civil laws लागू करना है। फिलहाल इन मुद्दों पर अलग-अलग धार्मिक personal laws भी लागू होते हैं। Uttarakhand पहले ही लागू कर चुका UCC उत्तराखंड Uniform Civil Code लागू करने वाले शुरुआती राज्यों में शामिल है। राज्य में विवाह, divorce, inheritance और live-in relationships समेत कई civil matters के लिए common legal framework तैयार किया गया है। Gujarat भी UCC की दिशा में आगे हाल में Gujarat ने भी Uniform Civil Code से जुड़े कानून को आगे बढ़ाया है। इससे BJP शासित राज्यों में UCC implementation को लेकर राजनीतिक और कानूनी चर्चा और तेज हुई है। Triple Talaq का भी किया जिक्र अमित शाह ने अपने बयान में triple talaq खत्म किए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार देने की दिशा में सरकार का बड़ा कदम बताया। BJP के core agenda में शामिल UCC Uniform Civil Code लंबे समय से BJP के प्रमुख ideological और political commitments में शामिल रहा है। पार्टी का तर्क है कि समान civil laws से gender equality और legal uniformity को बढ़ावा मिलेगा। विपक्ष लगातार उठाता रहा सवाल विपक्षी दल UCC के स्वरूप, implementation और राज्यों की विविध सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। कुछ दलों का कहना है कि किसी भी बड़े बदलाव से पहले सभी communities और stakeholders से व्यापक consultation जरूरी है। NRC पर अभी चर्चा जारी उसी press conference में अमित शाह ने NRC को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि nationwide NRC पर allies और अन्य stakeholders के साथ चर्चा जारी है, लेकिन इसकी कोई तय timeline नहीं बताई गई। 2029 से पहले बड़ा राजनीतिक लक्ष्य 2029 लोकसभा चुनाव से पहले सभी NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने का बयान BJP के बड़े policy roadmap के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि अलग-अलग राज्यों में कानून बनाने, legislative approval और judicial scrutiny जैसी प्रक्रियाओं के कारण implementation की timeline हर राज्य में अलग हो सकती है। source – The Indian Express / India Today / NDTV / Hindustan Times / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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World Cup-winning captain Harmanpreet Kaur ने India women’s team की captaincy छोड़ी, Smriti Mandhana को लेकर चर्चा तेज

नई दिल्ली: भारतीय महिला क्रिकेट टीम की World Cup-winning captain Harmanpreet Kaur ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को captaincy छोड़ने का फैसला किया। Harmanpreet ने अपने नेतृत्व में भारत को 2025 में पहली बार ICC Women’s ODI World Cup जिताया था और हाल ही में Nagoya Asian Games 2026 में भी gold medal दिलाया। उनके फैसले के बाद Smriti Mandhana को अगली captain बनाए जाने की चर्चा तेज हो गई है। Harmanpreet Kaur ने captaincy छोड़ने का किया फैसला Harmanpreet Kaur ने मंगलवार को भारतीय महिला टीम की कप्तानी से हटने का निर्णय लिया। हालांकि वह international cricket खेलना जारी रखेंगी या नहीं, इस पर फिलहाल कोई retirement announcement सामने नहीं आई है। मौजूदा update केवल captaincy छोड़ने से जुड़ी है। 2025 World Cup जीत सबसे बड़ी उपलब्धि Harmanpreet की captaincy का सबसे बड़ा moment 2025 में आया था। उनकी अगुवाई में India ने South Africa को हराकर पहली बार ICC Women’s Cricket World Cup का खिताब जीता था। यह भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रही। Asian Games gold के बाद लिया फैसला Harmanpreet ने हाल ही में Nagoya Asian Games 2026 में भी India को gold medal जिताया। भारत ने final में Sri Lanka को बड़े अंतर से हराकर लगातार दूसरा Asian Games women’s cricket gold अपने नाम किया था। Captaincy से हटने का timing अहम Harmanpreet का फैसला ऐसे समय आया है जब India women’s team एक नए leadership cycle की ओर बढ़ रही है। World Cup और Asian Games जैसे बड़े tournaments जीतने के बाद captaincy छोड़ना succession planning के लिहाज से अहम माना जा रहा है। Smriti Mandhana सबसे मजबूत दावेदार Smriti Mandhana लंबे समय से India women’s team की vice-captain रही हैं। वह पहले भी Harmanpreet की अनुपस्थिति में team की captaincy संभाल चुकी हैं, इसलिए उन्हें permanent captain बनाए जाने की संभावना पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। BCCI के फैसले का इंतजार हालांकि Smriti Mandhana का नाम सबसे आगे माना जा रहा है, लेकिन BCCI ने अभी तक नई captain की औपचारिक घोषणा नहीं की है। Women’s Selection Committee और BCCI leadership आने वाले दिनों में leadership transition को लेकर फैसला कर सकते हैं। Harmanpreet का लंबा captaincy tenure Harmanpreet Kaur भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे सफल captains में शामिल रही हैं। उन्होंने लंबे समय तक T20I और ODI formats में टीम का नेतृत्व किया और India को कई ICC tournaments के knockout stages तक पहुंचाया। 2025 World Cup ने बदल दी legacy 2025 ODI World Cup जीत ने Harmanpreet की captaincy legacy को ऐतिहासिक बना दिया। इस जीत के साथ भारत ने women’s cricket में लंबे इंतजार के बाद पहला senior ICC title हासिल किया। Asian Games में भी dominance 2026 Asian Games final में India ने Sri Lanka को 147 runs से हराया। Smriti Mandhana ने final में 79 runs बनाए थे, जबकि Harmanpreet की captaincy में टीम ने पूरे tournament में dominant प्रदर्शन किया। Leadership transition पर नजर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि BCCI Harmanpreet के बाद किसे नई captain बनाता है। Smriti Mandhana के अलावा कुछ अन्य senior players भी leadership group का हिस्सा हैं, लेकिन experience और vice-captaincy role के कारण Mandhana फिलहाल सबसे आगे नजर आती हैं। Player के तौर पर जारी रह सकती हैं Harmanpreet Captaincy छोड़ने का मतलब international retirement नहीं है। अगर Harmanpreet player के रूप में जारी रहती हैं, तो उनका experience नई captain और युवा खिलाड़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। भारतीय महिला क्रिकेट में नए दौर की शुरुआत Harmanpreet के फैसले के साथ India women’s cricket में एक leadership era समाप्त होता नजर आ रहा है। World Cup और Asian Games gold के बाद अब टीम अगले phase में किस direction में आगे बढ़ती है, इस पर cricket fans की नजर रहेगी। source – India Today / BCCI / ESPNcricinfo जय राष्ट्र न्यूज़

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रुपया ₹96.39 प्रति डॉलर तक गिरा, crude oil और FII selling का बढ़ा दबाव

मुंबई: भारतीय रुपया मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को शुरुआती कारोबार में कमजोर होकर ₹96.39 प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। घरेलू मुद्रा पर ऊंची crude oil prices, foreign institutional investors (FII) की बिकवाली और मजबूत dollar का दबाव देखने को मिला। शुरुआती सत्र में रुपया अपने पिछले बंद स्तर के मुकाबले कमजोर खुला और डॉलर के मुकाबले और नीचे फिसल गया। शुरुआती कारोबार में ₹96.39 तक पहुंचा रुपया Interbank foreign exchange market में रुपया कमजोरी के साथ खुला। कारोबार के शुरुआती हिस्से में भारतीय मुद्रा गिरकर ₹96.39 प्रति डॉलर तक पहुंच गई, जो हाल के महीनों में रुपये के सबसे कमजोर स्तरों में से एक है। Crude oil की तेजी बनी बड़ी वजह भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा crude oil imports के जरिए पूरा करता है। जब international crude prices बढ़ती हैं तो तेल कंपनियों की dollar demand भी बढ़ती है। इससे foreign exchange market में रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। FII selling ने भी बढ़ाया दबाव Foreign institutional investors की भारतीय equities से निकासी भी रुपये की कमजोरी की बड़ी वजह मानी जा रही है। FII selling बढ़ने पर विदेशी निवेशक भारतीय assets बेचकर dollars में funds convert करते हैं, जिससे dollar demand बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव आता है। मजबूत Dollar का असर Global markets में अमेरिकी dollar की मजबूती ने भी emerging-market currencies को प्रभावित किया। US Treasury yields ऊंचे रहने और Federal Reserve की आगे की monetary policy को लेकर uncertainty से dollar को support मिला है। RBI की intervention पर भी नजर Forex traders की नजर Reserve Bank of India की गतिविधियों पर भी बनी हुई है। आमतौर पर रुपये में तेज volatility होने पर RBI state-run banks के जरिए dollar selling करके बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव सीमित करने की कोशिश कर सकता है। Importers के लिए बढ़ सकती है लागत रुपये की कमजोरी का सीधा असर import-dependent sectors पर पड़ सकता है। Crude oil, electronics, machinery और अन्य dollar-denominated imports महंगे होने से कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। महंगाई पर भी पड़ सकता है असर अगर रुपया लंबे समय तक कमजोर रहता है और crude oil prices भी ऊंची बनी रहती हैं, तो imported inflation का खतरा बढ़ सकता है। Fuel और transportation costs में बढ़ोतरी का असर दूसरी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। Exporters को मिल सकता है कुछ फायदा कमजोर रुपया exporters के लिए कुछ हद तक फायदेमंद हो सकता है। IT services, pharmaceuticals और अन्य export-oriented businesses को dollar में होने वाली कमाई को रुपये में बदलने पर ज्यादा revenue मिल सकता है, हालांकि इसका प्रभाव sector और hedging strategy पर निर्भर करता है। RBI policy पर बाजार की नजर Currency market की नजर RBI की Monetary Policy Committee की बैठक पर भी है। बाजार यह देख रहा है कि inflation, rupee weakness और crude oil prices को देखते हुए RBI interest rates पर क्या रुख अपनाता है। आगे भी volatility की आशंका आने वाले दिनों में रुपये की दिशा crude oil prices, FII flows, dollar index, US bond yields और RBI policy संकेतों पर निर्भर करेगी। Global uncertainty बनी रहने पर forex market में volatility जारी रह सकती है। source – The Times of India / Reuters / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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INDIA गठबंधन का Election Commission तक मार्च, राहुल गांधी-अखिलेश समेत कई बड़े नेता शामिल; पुलिस ने रास्ते में रोका

नई दिल्ली: Special Intensive Revision (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को और तेज हो गया। INDIA गठबंधन के सांसदों और नेताओं ने संसद से Election Commission headquarters की ओर मार्च निकाला। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई विपक्षी नेता इसमें शामिल हुए, लेकिन भारी सुरक्षा और barricading के बीच पुलिस ने मार्च को Nirvachan Sadan पहुंचने से पहले ही रोक दिया। संसद से शुरू हुआ विपक्ष का मार्च INDIA bloc के सांसदों को सुबह Parliament House के Makar Dwar के पास जुटने के लिए कहा गया था। इसके बाद विपक्षी सांसद Election Commission headquarters की ओर बढ़े। मार्च का मुख्य मुद्दा electoral rolls की Special Intensive Revision प्रक्रिया और CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोप थे। राहुल गांधी ने मांगा CEC का इस्तीफा मार्च के दौरान Leader of Opposition राहुल गांधी ने Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने एक placard भी दिखाया जिस पर लिखा था, “Gyanesh, it’s done bro, time to resign.” यह नारा प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहा। अखिलेश यादव भी प्रदर्शन में शामिल समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी INDIA bloc के मार्च में शामिल हुए। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि voter-list revision की प्रक्रिया में transparency और impartiality को लेकर गंभीर सवाल हैं और Election Commission को इन पर जवाब देना चाहिए। खरगे बोले- लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई Congress अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य democratic principles और voters के अधिकारों की रक्षा करना है। पुलिस ने Election Commission पहुंचने से पहले रोका Opposition march Election Commission headquarters तक नहीं पहुंच सका। पुलिस ने barricades लगाकर नेताओं और सांसदों को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने वहीं बैठकर विरोध दर्ज कराया। करीब 4,000 सुरक्षाकर्मी तैनात मार्च को देखते हुए Central Delhi में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। Delhi Police और Central Armed Police Forces के करीब 4,000 personnel को New Delhi district में तैनात किया गया। Connaught Place, Patel Chowk, Parliament Street और Election Commission के आसपास traffic restrictions भी लगाई गईं। SIR विवाद है प्रदर्शन की बड़ी वजह Opposition parties Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर लगातार सवाल उठा रही हैं। उनका आरोप है कि voter lists में बदलाव की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर eligible voters के नाम प्रभावित हो सकते हैं। Election Commission और BJP ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बढ़ा राजनीतिक दबाव पिछले कई दिनों से Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। Student groups, activists और political parties अलग-अलग जगहों पर उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। Delhi में विरोध का यह पांचवां दिन था। BJP ने विपक्ष पर लगाया राजनीति करने का आरोप BJP ने Congress और INDIA bloc के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष Election Commission जैसी constitutional institution को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। BJP spokesperson Sambit Patra ने Congress पर Form 6 और electoral process को लेकर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। विपक्ष का आंदोलन आगे भी रहेगा जारी Congress ने संकेत दिया है कि यह आंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। 8 अक्टूबर तक district-level padyatras, 10 से 20 अक्टूबर तक block-level meetings और इसके बाद state-level rallies आयोजित करने की योजना बनाई गई है। SIR को लेकर राष्ट्रपति से भी मुलाकात INDIA bloc नेताओं का एक delegation राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करने वाला है। विपक्ष SIR और Election Commission की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी आपत्तियां राष्ट्रपति के सामने रखने की तैयारी में है। source – Reuters / The Indian Express / Hindustan Times / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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बल्लारी में 7,561 वोटरों के नाम हटाने की कथित कोशिश, BJP BLA के खिलाफ FIR; कोर्ट ने search warrant भी जारी किया

बल्लारी: कर्नाटक के बल्लारी में Special Intensive Revision (SIR) के दौरान 7,561 मतदाताओं के नाम electoral roll से हटवाने की कथित कोशिश को लेकर BJP के Booth Level Agent (BLA) और चुनाव अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मामला BJP corporator और BLA-1 T. Srinivas Mothkur से जुड़ा है। ताजा घटनाक्रम में बल्लारी की एक अदालत ने पुलिस को उनके दफ्तर की तलाशी के लिए search warrant भी जारी किया है। 1 अक्टूबर को दर्ज हुई FIR Brucepet Police Station में यह FIR 1 अक्टूबर को Congress BLA Goutham S की शिकायत पर दर्ज की गई थी। FIR में T. Srinivas Mothkur के अलावा Ballari City Corporation के Assistant Commissioner Nandish, BLO Sumalatha और case worker Sharanabasava के नाम भी शामिल हैं। 7,561 वोटरों की re-verification की मांग मामले की शुरुआत 21 सितंबर को हुई, जब Srinivas ने Ballari City Assembly constituency के 7,561 मतदाताओं की दोबारा जांच की मांग की। उन्होंने दावा किया कि इनमें कुछ मतदाता क्षेत्र छोड़ चुके हैं, अनुपस्थित हैं या दूसरे स्थान पर भी registered हैं। अधिकारियों ने पहले खारिज किया था अनुरोध चुनाव अधिकारियों ने शुरुआती request को पर्याप्त दस्तावेज या supporting information न होने के कारण स्वीकार नहीं किया। इसके बाद Srinivas ने इन मतदाताओं के खिलाफ Form 7 objections दाखिल करने की कोशिश की। Form 7 का इस्तेमाल electoral roll में किसी नाम के inclusion पर objection या deletion की मांग के लिए किया जाता है। Bulk Form 7 submissions पर सवाल Election authorities ने Srinivas को बताया था कि BLA एक दिन में एक BLO के पास सीमित संख्या में applications दे सकता है। अगर claims-and-objections period में किसी BLA की applications 30 से अधिक होती हैं, तो ERO या Assistant ERO द्वारा व्यक्तिगत cross-verification जरूरी हो जाता है। शिकायत में 98.08% minority voters का दावा Congress BLA की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिन 7,561 voters को target किया गया, उनमें लगभग 98.08% minority communities से थे। यह शिकायतकर्ता का आरोप है और पुलिस जांच में इसकी सत्यता की जांच की जानी है। चुनाव अधिकारियों पर भी मिलीभगत का आरोप शिकायत में आरोप है कि कुछ election officials ने पहले objection reject होने के बावजूद बाद में इन voters की re-verification शुरू की। इसी आधार पर election officials को भी FIR में आरोपी बनाया गया है। कोर्ट ने BJP BLA के दफ्तर की तलाशी की अनुमति दी मामले में अब एक नया development सामने आया है। Ballari court ने पुलिस को Srinivas Mothkur के Talur Road स्थित office की तलाशी लेने की अनुमति दी है। जांच टीम Form 7 applications की तैयारी और submission से जुड़े records और अन्य material की जांच करना चाहती है। Karnataka CEO ने bulk deletion complaints पर जांच का भरोसा दिया Karnataka के Chief Electoral Officer V. Anbukumar ने bulk Form 7 applications से जुड़ी शिकायतों की जांच और कानून के मुताबिक कार्रवाई का भरोसा दिया है। राज्य के दूसरे हिस्सों से भी कथित mass voter-deletion applications की शिकायतें सामने आई हैं। BJP ने FIRs पर उठाए सवाल BJP और JD(S) नेताओं ने इन FIRs का विरोध किया है। उनका कहना है कि genuine Form 7 objections दाखिल करने वाले party workers को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। BJP ने यह भी तर्क दिया है कि bulk objections दाखिल करना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है। Congress ने लगाया voter suppression का आरोप दूसरी ओर Congress नेताओं का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान eligible voters, विशेषकर minorities, के नाम हटाने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है। इन आरोपों को BJP ने खारिज किया है और कहा है कि voter list verification का उद्देश्य केवल गलत, duplicate या ineligible entries की पहचान करना है। जांच के बाद ही साफ होगी वास्तविकता फिलहाल 7,561 voters के नाम वास्तव में हटाए गए थे, इसका दावा स्थापित नहीं हुआ है। मामला कथित deletion attempt और Form 7 submissions से जुड़ा है। पुलिस जांच, electoral records और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी स्पष्ट होगी। source – The News Minute / Hindustan Times / The Indian Express / IANS / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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अमित शाह का बड़ा ऐलान: 2029 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य, न्याय व्यवस्था में 3 साल की समयसीमा पर जोर

भोपाल: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नशे के खिलाफ केंद्र सरकार की मुहिम और नए आपराधिक कानूनों को लेकर बड़ा बयान दिया है। भोपाल में उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश को 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि नए criminal laws के पूरी तरह लागू होने के बाद FIR दर्ज होने से लेकर Supreme Court के फैसले तक न्याय प्रक्रिया को करीब तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है। 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त मध्य प्रदेश का लक्ष्य अमित शाह ने कहा कि मध्य प्रदेश में narcotics के खिलाफ अभियान को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने लक्ष्य रखा कि 31 दिसंबर 2029 तक राज्य में नशीले पदार्थों के कारोबार और उनकी उपलब्धता को खत्म करने की दिशा में कठोर कार्रवाई की जाए। केंद्र का लक्ष्य 2029 तक ‘नशामुक्त भारत’ मध्य प्रदेश के लक्ष्य के साथ केंद्र सरकार ने देशव्यापी स्तर पर भी 2029 तक नशामुक्त भारत के लिए एक roadmap तैयार किया है। इस roadmap में जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक का तीन वर्षीय action plan शामिल है, जिसमें enforcement, drug supply chains, demand reduction, rehabilitation और inter-agency coordination पर जोर दिया गया है। 200 से ज्यादा action points पर काम केंद्र सरकार के Vision Document 2026-29 में 200 से ज्यादा action points तय किए गए हैं। इनमें drug sources और trafficking routes की पहचान, synthetic drugs पर नियंत्रण, money trails की जांच, rehabilitation capacity बढ़ाना और राज्यों की anti-narcotics machinery मजबूत करना शामिल है। युवाओं को नशे से बचाने पर खास जोर अमित शाह ने कहा कि drug abuse का सबसे गंभीर असर युवा पीढ़ी पर पड़ता है। सरकार का कहना है कि enforcement के साथ-साथ awareness, treatment और rehabilitation भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। ‘तारीख पर तारीख’ वाली व्यवस्था बदलने का दावा न्याय व्यवस्था पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि देश की पुरानी criminal justice system को अक्सर ‘तारीख पर तारीख’ से जोड़ा जाता था। उनका दावा है कि नए आपराधिक कानूनों के पूर्ण implementation के बाद criminal cases में अधिक स्पष्ट और समयबद्ध प्रक्रिया लागू होगी। FIR से Supreme Court तक तीन साल का लक्ष्य शाह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य FIR दर्ज होने से लेकर Supreme Court के अंतिम फैसले तक criminal justice process को तीन साल के भीतर पूरा करना है। उन्होंने इसे नए criminal laws के बड़े objectives में से एक बताया। BNS, BNSS और BSA पर भरोसा नई न्याय व्यवस्था भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत संचालित हो रही है। सरकार का कहना है कि इन कानूनों में investigation, forensic evidence, digital procedures और trial timelines को ज्यादा व्यवस्थित करने की कोशिश की गई है। ‘मूल मंत्र न्याय है, दंड नहीं’ अमित शाह ने कहा कि नए कानूनों का उद्देश्य सिर्फ punishment देना नहीं, बल्कि समय पर न्याय सुनिश्चित करना है। उनके मुताबिक दंड का प्रावधान अपराध रोकने के लिए है, जबकि पूरी व्यवस्था का केंद्रीय उद्देश्य न्याय है। Anti-Narcotics Task Force को मजबूत करने की योजना राष्ट्रीय roadmap के तहत प्रत्येक राज्य में मार्च 2027 तक fully equipped Anti-Narcotics Task Force तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ drug samples की forensic testing reports 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। केंद्र और राज्यों के coordination पर जोर नशे के खिलाफ अभियान में केंद्र सरकार राज्यों के साथ coordination बढ़ाने की तैयारी कर रही है। Home Ministry quarterly reviews के जरिए progress monitor करने और measurable targets के आधार पर accountability तय करने की योजना पर काम कर रहा है। बड़े reform agenda का हिस्सा अमित शाह के ये दोनों संदेश—नशामुक्त भारत और समयबद्ध न्याय—केंद्र सरकार के broader governance reform agenda का हिस्सा हैं। हालांकि तीन साल में FIR से Supreme Court तक न्याय का लक्ष्य व्यवहार में कितना सफल होगा, यह courts, police, prosecution, forensic infrastructure और pending cases की स्थिति पर निर्भर करेगा। source – PIB / Hindustan Times / The Times of India / The Indian Express / Live Hindustan जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के गंभीर आरोप, मामला Crime Branch को सौंपा गया

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन की कवरेज के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। दिल्ली पुलिस ने शिकायतों को विस्तृत जांच के लिए Crime Branch को भेज दिया है। 6 अक्टूबर तक मामले में FIR दर्ज नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। 3 अक्टूबर के प्रदर्शन से जुड़ा मामला यह मामला 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास हुए उस प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और voter-list revision से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध किया जा रहा था। पुलिस का कहना है कि इलाके में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू थे और प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई के दौरान विवाद हुआ। तीन महिला पत्रकारों ने लगाए आरोप प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहीं तीन महिला पत्रकारों ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके साथ कथित तौर पर अनुचित शारीरिक व्यवहार और यौन उत्पीड़न हुआ। ये आरोप अभी जांच के अधीन हैं और किसी अधिकारी की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। ACP विवेक भगत का नाम आया सामने एक महिला पत्रकार की शिकायत में Connaught Place के ACP विवेक भगत का नाम सामने आया। पत्रकार ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उनके साथ कथित रूप से अनुचित व्यवहार किया गया। ACP या अन्य अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोपों की जांच Crime Branch कर रही है। Crime Branch को ट्रांसफर हुई शिकायत Delhi Police ने कहा कि तीनों महिला पत्रकारों की शिकायतें Crime Branch को भेज दी गई हैं। जांच टीम CCTV footage, mobile videos, eyewitness statements और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। मेडिकल जांच भी कराई गई रिपोर्टों के मुताबिक शिकायत करने वाली महिला पत्रकारों का medical examination भी कराया गया। इसके साथ ही पुलिस ने घटनास्थल के CCTV और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध video footage की जांच शुरू की है। 6 अक्टूबर तक FIR दर्ज नहीं मामले में एक बड़ा सवाल यह है कि शिकायत के कई दिन बाद तक FIR दर्ज नहीं हुई थी। महिला पत्रकार और समर्थक लगातार FIR दर्ज करने तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आरोपी ACP का promotion बना विवाद मामला तब और चर्चा में आया जब ACP विवेक भगत को routine order में Additional DCP का current charge दिया गया। इसके बाद आलोचना तेज हुई। बाद में दिल्ली सरकार ने बताया कि विवेक भगत ने जांच पूरी होने तक नया charge न लेने का अनुरोध किया, जिसके बाद आदेश को modify करने की प्रक्रिया शुरू की गई। Delhi Police ने कुछ आरोपों को किया खारिज दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर महिला प्रदर्शनकारियों के साथ physical assault से जुड़े कुछ दावों को “baseless and misleading” बताया है। पुलिस का कहना है कि महिला प्रदर्शनकारियों को female personnel द्वारा कानून के मुताबिक संभाला गया। हालांकि महिला पत्रकारों की sexual harassment complaints की अलग से Crime Branch जांच जारी है। पत्रकारों और संगठनों ने उठाए सवाल मामले को लेकर पत्रकार संगठनों, छात्र समूहों और राजनीतिक नेताओं ने पारदर्शी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि protest coverage के दौरान journalists की सुरक्षा और पुलिस accountability सुनिश्चित की जानी चाहिए। जांच के बाद ही तय होगी जिम्मेदारी फिलहाल सभी आरोप शिकायत और जांच के स्तर पर हैं। Crime Branch की जांच, CCTV footage, medical evidence और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ FIR या आगे की कानूनी कार्रवाई बनती है या नहीं। source – The Indian Express / Hindustan Times / Delhi Police जय राष्ट्र न्यूज़

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नीम करौली बाबा के धाम में उमड़ा जनसैलाब, कई किलोमीटर लंबा जाम; घंटों फंसे श्रद्धालु

नैनीताल: उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंची धाम में नीम करौली बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने से यातायात व्यवस्था चरमरा गई। लंबे वीकेंड के दौरान भवाली, भीमताल और कैंची धाम की ओर जाने वाले मार्गों पर कई किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें लग गईं। हालात ऐसे रहे कि सामान्य तौर पर कुछ घंटों में पूरी होने वाली यात्राओं में कई यात्रियों को 10 से 12 घंटे तक लग गए। रोजाना 35 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे नैनीताल प्रशासन के मुताबिक कैंची धाम में सामान्य दिनों में करीब 25 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद रहती है। लेकिन long weekend के दौरान यह संख्या बढ़कर 35 हजार से ज्यादा प्रतिदिन पहुंच गई, जिससे मंदिर परिसर और आसपास की सड़कों पर भारी दबाव पड़ा। भवाली से कैंची तक रेंगते रहे वाहन भवाली से कैंची धाम जाने वाले रास्ते पर कारों, बसों और दोपहिया वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दीं। कई श्रद्धालु जाम में लंबे समय तक फंसे रहने के बाद वाहन छोड़कर पैदल ही धाम की ओर बढ़ते नजर आए। Haldwani-Kainchi route पर सबसे ज्यादा दबाव सबसे ज्यादा दबाव हल्द्वानी से कैंची धाम, नैनीताल और अल्मोड़ा की ओर जाने वाले मार्गों पर देखा गया। कुछ यात्रियों ने दावा किया कि सामान्य दो से तीन घंटे का सफर पूरा करने में 10 से 12 घंटे तक लग गए। Ambulance और जरूरी वाहनों पर भी असर भारी traffic congestion का असर केवल श्रद्धालुओं पर ही नहीं पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार ambulances, स्थानीय निवासियों और जरूरी सामान ले जाने वाले वाहनों को भी जाम का सामना करना पड़ा, जिससे प्रशासन को emergency traffic restrictions लागू करनी पड़ीं। बाहरी दोपहिया वाहनों पर लगाई गई रोक भीड़ नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने कुछ traffic restrictions लागू किए। बाहरी क्षेत्रों से आने वाले दोपहिया वाहनों की entry पर भी अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया और traffic को अलग-अलग routes से divert किया गया। ‘Hanuman Ansh’ के बाद बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या हालिया भीड़ को फिल्म ‘Hanuman Ansh’ की लोकप्रियता से भी जोड़कर देखा जा रहा है। फिल्म नीम करौली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक प्रभाव से प्रेरित बताई जा रही है। फिल्म की सफलता के बाद कैंची धाम में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की खबरें सामने आई हैं। फिल्म के निर्देशक ने श्रद्धालुओं से की अपील फिल्म के निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने भी बढ़ती भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं से यात्रा से पहले स्थिति जांचने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखने और अत्यधिक भीड़ होने पर वैकल्पिक धार्मिक स्थलों पर जाने की सलाह दी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए जाम के वीडियो कैंची धाम और आसपास के इलाकों में लगे लंबे traffic jam के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इनमें पहाड़ी सड़कों पर bumper-to-bumper वाहनों की कतारें और पैदल चलते श्रद्धालु दिखाई दिए। प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती कैंची धाम की बढ़ती लोकप्रियता के साथ स्थानीय प्रशासन के सामने traffic management, parking और crowd control बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। District administration अब बढ़ती भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त traffic measures और वैकल्पिक routes पर विचार कर रहा है। श्रद्धा के साथ व्यवस्था का भी सवाल कैंची धाम में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर धार्मिक पर्यटन स्थलों की carrying capacity और infrastructure पर सवाल खड़े किए हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से traffic rules का पालन करने, निर्धारित parking का उपयोग करने और यात्रा से पहले traffic updates देखने की अपील की है। source – The Indian Express / India Today / Economic Times / Navbharat Times जय राष्ट्र न्यूज़

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बिहार की बाढ़ और महिला सुरक्षा के सवालों पर मैथिली ठाकुर से मीडिया के सवाल, जवाब दिए बिना आगे बढ़ीं BJP विधायक

पटना: बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति और महिला सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच BJP विधायक और लोकगायिका मैथिली ठाकुर से मीडिया ने उनके हालिया विदेश दौरे और राज्य के हालात पर प्रतिक्रिया मांगी। रिपोर्टों के मुताबिक पत्रकार लगातार सवाल पूछते रहे, लेकिन मैथिली ठाकुर ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गईं। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर उनकी चुप्पी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विदेश दौरे से लौटने के बाद पूछे गए सवाल मैथिली ठाकुर हाल ही में विदेश दौरे से बिहार लौटी थीं। इसी दौरान पत्रकारों ने उनसे पूछा कि जब राज्य के कई इलाके बाढ़ से प्रभावित हैं, तब उनके विदेश दौरे और मौजूदा हालात को लेकर वह क्या कहना चाहेंगी। जवाब दिए बिना आगे बढ़ीं मैथिली ठाकुर मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पत्रकारों के कई सवालों के बावजूद मैथिली ठाकुर ने मौके पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी। वह पत्रकारों से दूरी बनाते हुए अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गईं, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर भी शेयर किए गए। बिहार में बाढ़ से कई इलाके प्रभावित हाल के दिनों में बिहार के कई जिलों में बाढ़ ने गंभीर स्थिति पैदा की है। सारण समेत कई इलाकों में गांव जलमग्न हुए हैं और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए प्रशासन को helicopter तक का इस्तेमाल करना पड़ा है। बाढ़ राहत व्यवस्था पर भी उठे सवाल राहत वितरण से जुड़े कई वीडियो और घटनाएं भी चर्चा में रही हैं। एक मामले में सारण जिले के एक पुलिस अधिकारी को बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत वितरण के दौरान pistol लहराते दिखने के बाद निलंबित किया गया था। महिला सुरक्षा पर भी बढ़ी बहस बिहार में हाल की कुछ घटनाओं के बाद महिला सुरक्षा का मुद्दा भी राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में है। इसी संदर्भ में पत्रकारों ने मैथिली ठाकुर से उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही। पुराना वीडियो फिर हुआ वायरल इस बीच मैथिली ठाकुर का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हुआ, जिसमें वह कहती नजर आती हैं कि वह बिहार की बेटी हैं और खुद को राज्य में सुरक्षित महसूस करती हैं। लेकिन fact-check में सामने आया कि यह वीडियो अप्रैल 2026 का है और इसे Jamui की हालिया घटना से जोड़कर शेयर करना भ्रामक है। क्या कहा था पुराने वीडियो में? अप्रैल में मीडिया से बातचीत के दौरान मैथिली ठाकुर ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बिहार और उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा से जुड़ी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि वह खुद बिहार से आती हैं और यहां सुरक्षित महसूस करती हैं। यह बयान किसी हालिया Jamui case के बाद नहीं दिया गया था। सोशल मीडिया पर चुप्पी को लेकर आलोचना ताजा मीडिया interaction के बाद सोशल मीडिया पर कई users ने सवाल उठाया कि जनप्रतिनिधि होने के नाते मैथिली ठाकुर को बाढ़ और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर स्पष्ट प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। वहीं केवल वीडियो के आधार पर उनके इरादों या पूरे राजनीतिक रुख का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। Alinagar से BJP विधायक हैं मैथिली ठाकुर लोकगायिका के रूप में प्रसिद्ध मैथिली ठाकुर अब बिहार की राजनीति में भी सक्रिय हैं और Alinagar विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसी कारण उनसे सांस्कृतिक हस्ती के साथ-साथ निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में भी स्थानीय मुद्दों पर जवाबदेही की अपेक्षा की जा रही है। वायरल दावों की जांच जरूरी इस पूरे विवाद में दो अलग बातें सामने आई हैं—एक उनका ताजा media interaction, जिसमें उन्होंने सवालों का जवाब नहीं दिया, और दूसरा महिला सुरक्षा पर उनका पुराना बयान। दोनों को एक ही घटना से जोड़कर पेश करना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा। source – Navbharat Times / Inshorts / Newschecker / Aaj Tak / The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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