साल 2025 की शुरुआत में जस्टिन ट्रूडो की जगह मार्क कार्नी कनाडा के प्रधानमंत्री बने थे। अहम बात यह कि पिछले महीने ही उनकी पार्टी लिबरल को उनके नेतृत्व में चुनाव में जीत मिली थी। इस बीच मंगलवार को कनाडा के नये नवेले प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अपनी मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल किया है। जानकारी के मुताबिक पीएम कार्नी के नए मंत्रिमंडल से 10 से अधिक लोगों को हटाया है। हटाए गए लोगों में पूर्व रक्षा मंत्री बिल ब्लेयर भी शामिल हैं। खैर, मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव करते हुए उन्होंने भारतीय मूल की अनीता आनंद को अपना नया विदेश मंत्री नामित (Indian-Origin Named Canada’s FM) किया है। मेलानी जोली की जगह आनंद को विदेश मंत्री बनाया है। गौर करने वाली बात यह कि उन्होंने गीता पर हाथ रखकर शपथ ली। इससे पहले ट्रूडो सरकार में वो कनाडा की रक्षा मंत्री थीं। बेशक कार्नी के इस फैसले ने भारत-कनाडा के रिश्तों में सुधार की गुंजाइश को बढ़ा दिया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या अनीता आनंद के विदेश मंत्री बनने से भारत संग कनाडा केरिश्तों में सुधार होगा? दरअसल, जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में भारत और कनाडा के रिश्तों में खटास आ गई थी। अब क्या मार्क कार्नी और अनीता आनंद इसे ठीक करेंगे?
पेशे से वकील, प्रोफेसर और रिसर्चर रह चुकी हैं अनीता आनंद

निश्चित ही आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये अनीता आनंद कौन हैं? तो आपको बता दें कि अनीता आनंद कनाडा (Indian-Origin Named Canada’s FM) की पहली हिंदू महिला सांसद और कैबिनेट मंत्री हैं। भले ही उनका जन्म भले भारत में न हुआ हो, मगर उनका ताल्लुक भारत से है। दरअसल, अनीता आनंद के माता-पिता भारत से थे। पिता तमिलनाडु तो मां पंजाब से थीं। पेशे से दोनों फिजिशियन थे। बाद में कनाडा में बस गए थे। अनीता के दादा भारत के स्वतंत्रता सेनानी थे। अनीता आनंद का जन्म केंटविले, नोआ स्कोटिया में हुआ था। उनकी दो बहनें हैं- गीता आनंद जो कि टोरंटो में एक वकील हैं, और दूसरी सोनिया आनंद, जो कि मैकमास्टर यूनिवर्सिटी में एक फिजिशियन और रिसर्चर हैं। पेशे से वकील, प्रोफेसर और रिसर्चर रह चुकी अनीता आनंद साल 1985 में ओंटारियो चली गईं थी। उन्होंने अब तक कई पदों पर काम किया है। पहली बार साल 2019 में वह ओकविले के लिए संसद सदस्य के रूप में चुनी गई थीं। उन्होंने 2019 से 2021 तक न सिर्फ सार्वजनिक सेवा और खरीद मंत्री के रूप में कार्य किया बल्कि ट्रेजरी बोर्ड के अध्यक्ष और राष्ट्रीय रक्षा मंत्री के तौर पर भी काम किया। आपको जानकर हैरानी होगी कि एक वक्त ऐसा भी था जब अनीता आनंद को जस्टिन ट्रूडो के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा था। परिस्थितियां यदि अनुकूल होती तो कनाडा की प्राइम मिनिस्टर होती।
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नई सरकार को मजबूत जनादेश के साथ चुना है, ताकि वे संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक नया आर्थिक और सुरक्षा संबंध स्थापित कर सकें
खैर, इस पूरे मामले पर (Indian-Origin Named Canada’s FM) बोलते हुए पीएम कार्नी ने कहा कि “कनाडाई लोगों ने इस नई सरकार को मजबूत जनादेश के साथ चुना है, ताकि वे संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक नया आर्थिक और सुरक्षा संबंध स्थापित कर सकें और सभी कनाडाई लोगों के लिए एक मजबूत अर्थव्यवस्था का निर्माण कर सकें।” हालाँकि इस बीच कार्नी ने बताया कि 27 मई को जब संसद फिर से शुरू होगी, तब किंग चार्ल्स तृतीय कनाडा सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए भाषण देंगे। बता दें कि चार्ल्स कनाडा में राष्ट्राध्यक्ष हैं, जो पूर्व उपनिवेशों के ब्रिटिश राष्ट्रमंडल का सदस्य है। खैर, इस बीच कार्नी ने कनाडा के यूनाइटेड किंगडम, संस्थापक राष्ट्रों और फ्रांस पर जोर देते हुए कहा कि “लगातार बढ़ते एकीकरण पर आधारित अमेरिका के साथ पुराना रिश्ता खत्म हो गया है।
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