Chirag Paswan's Dual Strategy

बिहार में एनडीए के साथ भी और खिलाफ भी… चिराग पासवान आखिर किस तरह की राजनीति कर रहे?

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) इस साल अक्टूबर-नवंबर माह में हो सकती है। चुनाव से पहले एनडीए (NDA) और महागठबंधन, दोनों अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटी हैं। लेकिन इन सबके बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान (Chirag Paswan) के बदले-बदले तेवरों ने सियासी हलकों में खलबली मचा दी है। एक तरफ जहां विपक्षी महागठबंधन के दल और वाम दल एकजुट होकर वोटर लिस्ट के गहन पुनरीक्षण के विरोध में सड़कों पर उतर एकजुटता का प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं एनडीए (NDA) के अंदर चिराग पासवान (Chirag Paswan) की बयानबाजी जेडीयू (JDU) के लिए सिरदर्द बनती जा रही हैं। चिराग पासवान (Chirag Paswan) लगातार यह दोहरा रहे हैं कि उनकी पार्टी राज्य की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। आरा से लेकर सारण तक अपनी रैलियों में वह यही संदेश दे रहे हैं कि उनका गठबंधन बिहार की जनता से है, न कि किसी दल विशेष से। वहीं गोपाल खेमका हत्याकांड को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा। चिराग पासवान यह बयानबाजी ऐसे समय में कर रहे हैं, जब वे भाजपा (BJP) के गढ़ माने जाने वाले इलाकों में अपनी पार्टी का विस्तार कर रहे हैं। आरा और सारण जैसे इलाकों में अभी एलजेपी (रामविलास) का कोई राजनीतिक आधार नहीं है। राजनीति में दबाव की रणनीति अपना रहे चिराग चिराग पासवान के इस आक्रामक रुख को राजनीतिक जानकार सीट शेयरिंग से पहले की दबाव बनाने वाली राजनीति के रूप में देख रहे हैं। चिराग पासवान विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) के लिए 40 से 60 सीटें मांग रहे हैं, लेकिन एनडीए (NDA) उन्हें 33 से 35 सीटें ही देना चाहती है। ऐसे में चिराग पासवान अब अपनी ही सहयोगी पार्टियों को घेरने में जुट गए हैं। राजनीतिक जानकारों यह सवाल जरूर कर रहे है कि विधानसभा में जहां पार्टी का कोई भी प्रतिनिधि नहीं है, वहां उसे इतनी सीटें एनडीए किस आधार पर दे दे मिलें? हलांकि यह बात जरूर है कि पिछले लोकसभा चुनाव में एलजेपीआर को पांच में से पांच सीटों पर जीत मिली थी, जो उनके संगठन और वोट बैंक को कुछ हद तक वैधता देती है। लेकिन विधानसभा चुनाव की प्रकृति और गणित अलग होती है। नीतीश कुमार के लिए बड़ी चुनौती  चिराग पासवान (Chirag Paswan) अपनी सभाओं में भाजपा (BJP) की आलोचना के बजाय जेडीयू की आलोचना कर रहे हैं। चिराग की यह कोई नई रणनीति नहीं है। 2020 के विधानसभा चुनाव में भी जब चिराग एनडीए से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ रहे थे, तब वो पीएम मोदी की खुलकर तारीफ करते हुए खुद को उनका “हनुमान” बताते थे, लेकिन नीतीश कुमार को निशाने पर रखते थे। इस बार भी चिराग के 243 सीटों पर चुनाव लड़ने के दावे को जेडीयू पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में चिराग की पार्टी ने अकेले लड़ते हुए जेडीयू को 33 सीटों पर नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में जेडीयू के लिए यह एक राजनीतिक चुनौती भी है और चेतावनी भी। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ भाजपा के गढ़ में जनाधार बढ़ाने में जुटे चिराग  चिराग पासवान (Chirag Paswan) की सबसे ज्यादा सक्रियता भोजपुरी बेल्ट में दिखाई दे रही है, जहां भाजपा का परंपरागत जनाधार रहा है। लेकिन इन जिलों में भाजपा का प्रदर्शन पिछले चुनावों में कुछ कमजोर रहा। मसलन, भोजपुर की सात में से केवल दो सीटों पर ही भाजपा जीत पाई थी। इस स्थिति को चिराग एक अवसर के रूप में देख रहे हैं और यहां पर अपनी पार्टी के जनाधार का विस्तार करने में जुटे हैं। यह सक्रियता केवल मौजूदा विधानसभा चुनाव की रणनीति नहीं है, बल्कि इसका संबंध चिराग के दीर्घकालिक राजनीतिक भविष्य से भी है। बीजेपी के साथ रहकर वह केंद्र की सत्ता में हिस्सेदार बने रहना चाहते हैं, लेकिन बिहार में अपनी स्वतंत्र पहचान और महत्व भी बनाना चाहते हैं। चिराग पासवान की वर्तमान राजनीति को जानकार ‘दो नावों की सवारी’ की तरह देख रहे हैं। वे एनडीए में बने रहकर केंद्र में ताकतवर भूमिका निभा रहे हैं, वहीं बिहार में स्वतंत्र और आक्रामक राजनीति कर अपनी सौदेबाज़ी की ताकत बढ़ा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि चिराग की यह चाल एनडीए को मजबूती देती है या अंदर से कमजोर करती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Chirag Paswan #ChiragPaswan #BiharPolitics #NDA #LJP #BiharNews #IndianPolitics #RamVilasPaswan

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Aadhaar fraud exposed in Bihar's Muslim-majority districts;

Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed: बिहार में गजब का खेल, मुस्लिम बहुल जिलों में 100 लोगों पर बने 120 आधार

साल के अंत में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव के मद्देनजर सभी राजनीतिक दलों ने अभी से सही कमर कसनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए (एसआईआर) शुरू किया है। आधार कार्ड को नागरिकता के सबूत के रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा। दरअसल, हाल ही में बिहार में सामने आए आधार कार्ड सैचुरेशन के आंकड़ों ने सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। ऐसा इसलिए राज्य का औसत आधार सैचुरेशन 94% है। तो वहीं मुस्लिम बहुल जिलों में यह आंकड़ा हैरान करने वाला (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) है। किशनगंज में 68 फीसदी मुस्लिम आबादी है। यहां आधार सैचुरेशन 126 फीसदी है। यानी, हर 100 लोगों पर 120 से अधिक आधार कार्ड। सामान्य तौर पर आधार कार्ड एक व्यक्ति-एक कार्ड की नीति पर आधारित है। लेकिन ये आंकड़े बताते हैं कि जनसंख्या से अधिक आधार कार्ड मौजूद हैं, तो यह संकेत देता है कि या तो डुप्लिकेट आधार कार्ड बनाए गए हैं या फिर गैर-नागरिकों को भी आधार कार्ड जारी किए गए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या अतिरिक्त आधार कार्डों का इस्तेमाल गैर-कानूनी मतदाताओं को शामिल करने के लिए किया गया है? सीमांचल में अधिकांश लोगों के पास आधार के अलावा अन्य दस्तावेज जैसे जन्म (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) प्रमाणपत्र या डोमिसाइल सर्टिफिकेट नहीं हैं और उससे भी बड़ा सवाल यह कि ये अतिरिक्त आधार कार्ड किसके लिए और क्यों बनाए गए हैं? इस मुद्दे ने न सिर्फ बिहार बल्कि पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में भी चर्चा को तेज कर दिया है। दरअसल, ममता बनर्जी सरकार की पहले से ही आधार कार्ड डिएक्टिवेशन जैसे मुद्दों पर केंद्र से तनातनी चल (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) रही है। ऐसे सोचनीय बात यह कि क्या यह विपक्ष और वामपंथी लॉबी द्वारा आधार को नागरिकता का सबूत बनाने की कोशिश का हिस्सा है? महत्वपूर्ण बात यह कि सीमांचल में अधिकांश लोगों के पास आधार के अलावा अन्य दस्तावेज जैसे जन्म प्रमाणपत्र या डोमिसाइल सर्टिफिकेट नहीं हैं। जिससे मतदाता सूची से नाम हटने का खतरा बढ़ गया है। कहने की जरूरत नहीं यह स्थिति गरीब समुदायों विशेषकर मुस्लिम आबादी को सबसे अधिक प्रभावित कर सकती है।  आधार सैचुरेशन का 100 फीसदी से अधिक होना कई प्रश्न निर्माण करता (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) है गौरतलब हो कि बिहार के सीमांचल क्षेत्र-किशनगंज, पूर्णिया कटिहार और अररिया में मुस्लिम आबादी 38 फीसदी से 68 फीसदी तक है। ऐसे में इन जिलों में आधार सैचुरेशन का 100 फीसदी से अधिक होना कई प्रश्न निर्माण करता (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) है। ऐसे में कहने की जरूरत नहीं, सीमांचल क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति इसे और संवेदनशील बनाती है। दरअसल, ये जिले पश्चिम बंगाल और नेपाल की सीमा से सटे हैं। बड़ी बात यह कि बांग्लादेश भी इससे ज्यादा दूर नहीं है। और तो और इस क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया गया है कि इन जिलों में आधार कार्ड की अधिकता की सबसे बड़ी वजह बांग्लादेशी घुसपैठिए हो सकते हैं। जिन्हें स्थानीय नेताओं और कट्टरपंथी समूहों के सहयोग से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ  विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ बिहार बंद का आह्वान किया, जिसमें आधार को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार न करने की बात कही (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) गई चुनावी सरगर्मी के बीच राजद नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ बिहार बंद का आह्वान किया, जिसमें आधार को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार न करने की बात कही (Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed) गई। दूसरी ओर कुछ लोग तर्क देते हैं कि विपक्ष आधार को नागरिकता का सबूत बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि अवैध आप्रवासियों को मतदाता सूची में शामिल किया जा सके। महत्वपूर्ण बात यह कि विपक्ष खासकर राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस ने आधार कार्ड को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए जोर दिया है। लेकिन इसे नागरिकता का सबूत मानने के खिलाफ भी आवाज उठाई है। यही नहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आधार कार्ड डिएक्टिवेशन के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने साल 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आधार डिएक्टिवेशन को एसी, एसटी और ओबीसी समुदायों के खिलाफ साजिश करार दिया था। ममता ने यह भी घोषणा की थी कि उनकी सरकार वैकल्पिक आधार कार्ड जारी करेगी, जिसे केंद्र ने गैर-कानूनी बताया।  Latest News in Hindi Today Hindi news Aadhaar Scam in Bihar: 120 Cards for 100 People Exposed #aadhaar #biharnews #scamalert #identityfraud #breakingnews #aadhaarscam #fraudinindia #newsupdate #muslimdistricts #dataleak

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Air Pollution May Trigger Anxiety and Depression

डब्ल्यूएचओ की चेतावनी: एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा

एयर पॉल्यूशन (Air pollution) गंभीर समस्याओं में से एक है। हमारे देश में यह समस्या बेहद गंभीर हो चुकी है। इस परेशानी का मुख्य कारण माना जाता जाता है गाड़ियों और इंडस्ट्रीज से निकले धुएं को। इस धुएं से कई हानिकारक गैसें निकलती हैं जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड, ओजोन, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड आदि। इनडोर और आउटडोर पॉल्यूशन सांस संबंधी और कई रोगों का कारण बन सकता है। लेकिन, हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार इसका प्रभाव मेंटल हेल्थ पर भी पड़ सकता है। डब्ल्यूएचओ ने एंग्जायटी और डिप्रेशन को पुअर एयर क्वालिटी (Poor air quality) के साथ लिंक किया है। आइए जानें पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) के बारे में। पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) डब्ल्यूएचओ (WHO) के डाटा के अनुसार लगभग पूरी दुनिया की अधिकतम आबादी ऐसी हवा में सांस लेती है, जो डब्ल्यूएचओ गाइडलाइन लिमिट्स से अधिक है तथा जिसमें प्रदूषकों का स्तर बहुत अधिक है। डब्ल्यूएचओ ने हाल ही में एक हैरान करने वाली जानकारी दी है। उनके अनुसार एयर पॉल्यूशन (Air pollution) मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स जैसे एंग्जायटी और डिप्रेशन का एक मुख्य कारण हो सकता है। एयर पॉल्यूशन (Air pollution) में मौजूद  हानिकारक पार्टिकल्स और गैसेस से हमारे दिमाग और शरीर दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह सब हमारी ब्लडस्ट्रीम पर पहुंच कर दिमाग में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा कर सकते हैं। इससे मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स को बढ़ावा मिलता है। यह तो थी पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) के बारे में जानकारी। अब जानते हैं एयर पॉल्यूशन के अन्य प्रभावों के बारे में।  एयर पॉल्यूशन के दिमाग पर इफेक्ट  जैसा की पहले ही बताया गया है कि एयर पॉल्यूशन (Air pollution) से मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क बढ़ता है। इससे एंग्जायटी, डिप्रेशन और अन्य समस्याएं हो सकती हैं। इसके साथ ही इससे मेंटल हेल्थ की क्वालिटी कम होती है जिससे नींद में भी समस्या आ सकती है और अन्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।  बच्चों और पहले से ही मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स के रोगी पुअर एयर क्वालिटी (Poor air quality) के प्रति अधिक सेंसिटिव हो सकते हैं।  हालांकि, पुअर एयर क्वालिटी और डिप्रेशन में कनेक्शन (Connection between poor air quality and depression) के बारे में अभी अधिक स्टडी की जानी जरूरी है। यही नहीं, लोगों को एयर पॉल्यूशन (Air pollution) के सम्पर्क में आने से भी बचना चाहिए, ताकि कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं से बचा जा सके।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ एयर पॉल्यूशन को कम करने और इससे बचने के उपाय? एयर पॉल्यूशन को कम करने और इससे बचने  के कुछ तरीके इस प्रकार हैं: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Air pollution #airpollution #WHOwarning #mentalhealth #anxiety #depression #toxicair #healthalert

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Sanjay Raut announces Uddhav and Raj Thackeray's

महाराष्ट्र निकाय चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगे उद्धव और राज ठाकरे, संजय राउत का बड़ा ऐलान, कहा- कांग्रेस अकेले अपने दम पर लड़े

महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। कहा जा रहा था कि महाराष्ट्र निकाय चुनाव से पहले इंडिया (INDIA) गठबंधन टूट जाएगा। इस बात पर अब शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत (Sanjay Raut) ने मुहर लगा दी है। राउत ने कहा है कि  BMC समेत सभी स्थानीय निकाय चुनाव शिवसेना (UBT) अब INDIA गठबंधन के साथ नहीं लड़ेगी। उनकी पार्टी यह महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ लड़ेगी। कांग्रेस को यह चुनाव अपने दम पर लड़ना होगा। संजय राउत (Sanjay Raut) ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) करीब 20 साल बाद एक साथ आए हैं। दोनों भाईयों के बीच पिछले छह महीने से पर्दे के पीछे बातचीत चल रही थी। अब जब महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता और हिंदी भाषा को जबरन थोपे जाने का मुद्दा गरमा गया है, तो दोनों पार्टियों ने इस मोर्चे पर साथ मिलकर लड़ने का निर्णय लिया है। राउत ने कहा, “भाजपा सरकार जिस तरह मराठी भाषा और संस्कृति की अनदेखी कर रही है, उसके खिलाफ उद्धव और राज ठाकरे एकजुट हैं। इससे जनता का भी जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। इसलिए अब जनता खुद चाहती है कि शिवसेना (UBT) और MNS मिलकर निकाय चुनाव लड़ें।” दोनों भाईयों का मिलन कांग्रेस के लिए बड़ा झटका पत्रकारों ने जब संजय राउत (Sanjay Raut) से पूछा कि महाराष्ट्र में INDIA गठबंधन (जिसमें कांग्रेस, एनसीपी (SCP) और शिवसेना UBT शामिल हैं) का स्थानीय चुनावों में क्या रोल होगा, तो उन्होंने स्पष्ट कहा, “INDIA गठबंधन केवल लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए था। स्थानीय चुनावों की परिस्थितियां और रणनीति अलग होती हैं।” संजय राउत ने यह भी याद दिलाया कि 2017 के BMC चुनाव में भी शिवसेना ने भाजपा के साथ गठबंधन होते हुए भी अलग चुनाव लड़ा था और उसी चुनाव के नतीजों ने 2019 में शिवसेना-भाजपा गठबंधन को तोड़ने की नींव रखी थी। उन्होंने कहा कि स्थानीय चुनावों की परिस्थिति अलग होती है और पार्टियां अलग-अलग निर्णय लेती हैं। राउत के इस बयान से साफ है कि कांग्रेस को मुंबई और अन्य निकाय चुनावों में अपने दम पर उतरना होगा। कांग्रेस पहले ही संकेत दे चुकी है कि वह गठबंधन के मुद्दे पर कोई टकराव नहीं चाहती, लेकिन अंदरखाने उसे इस फैसले से झटका जरूर लगा है। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ BMC सहित सभी नगर निगमों में साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी संजय राउत ने यह भी बताया कि उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे की पार्टियां सिर्फ बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में ही नहीं, बल्कि ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, नासिक, उल्हासनगर और संभाजीनगर (औरंगाबाद) जैसे नगर निगमों में भी मिलकर चुनाव लड़ सकती हैं। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि शिवसेना परिवार ‘मराठी मानुष’ की राजनीति पर दोबारा केंद्रित हो रहा है। दोनों भाईयों का यह कदम बालासाहेब ठाकरे की उस राजनीति को वापसी लाने के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें क्षेत्रीय अस्मिता, हिंदुत्व और सड़कों पर आंदोलन का अनूठा मिश्रण होता था। माना जा रहा है कि उद्धव और राज ठाकरे इस शैली को फिर से अपनाकर भाजपा को निकाय चुनाव में चुनौती देना चाहते हैं। शिवसेना (UBT) और MNS ने हाल ही में महाराष्ट्र में हिंदी भाषा की अनिवार्यता के खिलाफ आंदोलन शुरू किया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार हिंदी को जबरन महाराष्ट्र पर थोपने की कोशिश कर रही है, जिससे मराठी पहचान खतरे में पड़ गया है। यह आंदोलन उत्तर भारतीय राजनीति में भी हलचल मचा रहा है, क्योंकि बिहार में भी इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में आरजेडी और कांग्रेस गठबंधन हिंदी अस्मिता को लेकर संवेदनशील है। Latest News in Hindi Today Hindi news Uddhav Thackeray #UddhavThackeray #RajThackeray #MaharashtraPolls #SanjayRaut #Congress #ShivSena #MNS #MaharashtraPolitics

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Article 326 Election Commission's X Post Explained

क्या है Article 326? जिसे भारत के Election Commission ने X पर किया है पोस्ट 

भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 (Article 326) की तस्वीर साझा की है। यह पोस्ट राजनीतिक हलकों में खासा चर्चित हो गई है, विशेषकर बिहार में चल रहे विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के संदर्भ में। इस समय बिहार में विपक्षी दलों राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस (Congress) और अन्य पार्टियों ने इस प्रक्रिया को लेकर कड़े सवाल उठाए हैं। अनुच्छेद 326: भारत में वयस्क मताधिकार की गारंटी भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise) है, जिसकी गारंटी संविधान के अनुच्छेद 326 (Article 326) में दी गई है। यह अनुच्छेद कहता है कि भारत का प्रत्येक नागरिक, जो 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का है और निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य रूप से निवास करता है, उसे मतदान (Voting) करने का अधिकार प्राप्त होगा। हालांकि, कुछ अपवाद भी हैं। यदि कोई व्यक्ति: तो उसे मतदान के अधिकार से वंचित किया जा सकता है। यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि भारत में चुनाव स्वच्छ, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हों। आयोग की X पोस्ट: एक संवैधानिक संदेश भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) का अनुच्छेद 326 साझा करना केवल एक सामान्य पोस्ट नहीं, बल्कि यह राजनीतिक आलोचनाओं के जवाब में एक संविधान सम्मत जवाब था। आयोग यह दर्शाना चाहता है कि उसका पूरा काम संविधान की भावना और प्रावधानों के तहत हो रहा है। यह विशेष रूप से उन आरोपों के संदर्भ में था जो बिहार में चल रहे SIR अभियान को लेकर लगाए जा रहे हैं। आयोग की मंशा साफ है कि योग्य भारतीय नागरिकों को ही मतदाता सूची में स्थान देना, और अपात्र या फर्जी नामों को हटाना। यह प्रक्रिया लोकतंत्र की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। 𝗔𝗿𝘁𝗶𝗰𝗹𝗲 𝟯𝟮𝟲 𝗼𝗳 𝘁𝗵𝗲 𝗖𝗼𝗻𝘀𝘁𝗶𝘁𝘂𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗼𝗳 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮 #𝗕𝗶𝗵𝗮𝗿 #𝗦𝗜𝗥 #𝗘𝗖𝗜 pic.twitter.com/o0TCgDCYg9 — Election Commission of India (@ECISVEEP) July 9, 2025 बिहार में SIR अभियान: उद्देश्य और विवाद बिहार में 2025 के आगामी विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election 2025) की तैयारी के तहत निर्वाचन आयोग ने 25 जून से 26 जुलाई 2025 तक विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) अभियान की शुरुआत की है। इसका मुख्य उद्देश्य है: इस अभियान के अंतर्गत बिहार के लगभग 7.89 करोड़ मतदाताओं को शामिल करने के लिए गणना फॉर्म बांटे जा रहे हैं, जिन्हें उचित पहचान दस्तावेजों के साथ भरकर जमा करना होगा। विपक्ष की आपत्ति: समय और प्रक्रिया पर सवाल विपक्षी दलों का तर्क है कि यह प्रक्रिया मानसून और संभावित बाढ़ के समय में शुरू की गई है, जो अवास्तविक और गैर-व्यावहारिक है। इस समय ग्रामीण क्षेत्रों में आवाजाही कठिन हो जाती है और गरीब, मजदूर वर्ग और अशिक्षित लोग जरूरी दस्तावेजों की कमी या जानकारी के अभाव में मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। यह लोकतांत्रिक समावेशन के मूल सिद्धांत के विपरीत माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त, कुछ विपक्षी नेताओं ने इस प्रक्रिया को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया है कि इसके जरिए कुछ खास वर्गों को मतदाता सूची से बाहर करने की कोशिश की जा रही है। इसे भी पढ़ें:- बिहार बंद के दौरान चुनाव आयोग पर जमकर बरसे राहुल-तेजस्वी, कही यह बात लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है पारदर्शिता चुनाव आयोग (Election Commission of India) पर यह जिम्मेदारी है कि वह जनता के विश्वास को बनाए रखे और यह केवल तभी संभव है जब उसकी प्रक्रिया पारदर्शी और समावेशी हो। मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन इसका क्रियान्वयन इस तरह होना चाहिए कि कोई भी पात्र नागरिक वंचित न रह जाए। इस संदर्भ में डिजिटल साक्षरता बढ़ाना, स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार और सहायता केंद्रों की स्थापना जैसे कदम आवश्यक हो सकते हैं। इसके अलावा, राजनीतिक दलों को भी चाहिए कि वे मतदान अधिकारों के प्रति जनता को जागरूक करें, बजाय इसके कि केवल आलोचना करें। संविधान का अनुच्छेद 326 (𝗔𝗿𝘁𝗶𝗰𝗹𝗲 𝟯𝟮𝟲 𝗼𝗳 𝘁𝗵𝗲 𝗖𝗼𝗻𝘀𝘁𝗶𝘁𝘂𝘁𝗶𝗼𝗻 𝗼𝗳 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮) भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है, जो हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मतदान का अधिकार देता है। भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission Of India) की जिम्मेदारी है कि वह इस अधिकार की रक्षा करे और उसे सशक्त बनाए। बिहार में चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान एक जरूरी और नियमित प्रक्रिया है, लेकिन इसे स्थानीय परिस्थितियों और जन भावनाओं को ध्यान में रखते हुए लागू करना चाहिए। आलोचनाएं यदि तथ्यपरक हों तो उन्हें दूर करना आयोग की जिम्मेदारी है, लेकिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से बचते हुए एक स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह वक्त है कि हर नागरिक अपने मताधिकार को समझे, जागरूक बने और लोकतंत्र को मजबूत करने में अपना योगदान दे। Latest News in Hindi Today Hindi news Election Commission of India #Article326 #ElectionCommission #RightToVote #IndianElections #IndianConstitution

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Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest: बिहार बंद के दौरान चुनाव आयोग पर जमकर बरसे राहुल-तेजस्वी, कही यह बात

बिहार में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के विरोध में महागठबंधन ने आज यानी बुधवार को ‘बिहार बंद’ का आह्वान किया। जिसमें आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हुए। बंद में हिस्सा लेने के लिए राहुल गांधी सुबह ही दिल्ली से पटना पहुंचे हैं। बिहार बंद का असर राजधानी पटना के अलावा अन्य जिलों में भी देखने को मिल रहा (Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest) है। इस बंद के दौरान तेजस्वी यादव और राहुल गांधी सहित महागठबंधन घटक दलों के अन्य नेता और कार्यकर्ता आयकर गोलंबर से निर्वाचन कार्यालय तक विरोध मार्च शुरू कर चुके हैं। विरोध मार्च में वीआईपी चीफ मुकेश सहनी भी शामिल हैं। दरअसल, विपक्षी दल के नेताओं का कहना है कि “मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। मतदाता सूची पुनरीक्षण में जिन 11 दस्तावेजों की मांग की जा रही है, वे गरीबों के पास नहीं हैं। ऐसा ही हुआ तो बिहार में भारी संख्या में मतदाता अपने अधिकार से वंचित रह जाएंगे।” उनका कहना है कि “इसे विधानसभा चुनाव के बाद किया जाना चाहिए” बिहार को चुनाव चोरी करने की कोशिश की जा रही (Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest) है चुनाव आयोग को ललकारते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी न कहा कि “चुनाव आयोग मैं आपको साफ बोल रहा हूं। मैं बिहार और हिन्दुस्तान की जनता को स्पष्ट कह रहा हूं कि महाराष्ट्र का चुनाव चोरी किया गया था और वैसे ही बिहार को चुनाव चोरी करने की कोशिश की जा रही (Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest) है। उन्हें पता है कि हमने महाराष्ट्र मॉडल समझ लिया है, इसलिए वे बिहार मॉडल लाए हैं। ये गरीबों की वोट छीनने का तरीका है।” इस दौरान बिहार बंद को लेकर तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग और केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि “चुनाव आयोग एक राजनीतिक दल का हिस्सा बन गया है। क्या गुजरात के दो लोग तय करेंगे कि कौन बिहारी वोट दे सकता है और कौन नहीं?” इस बीच चुनाव आयोग पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “चुनाव आयोग अपनी विश्वसनीयता खो चुका है। गरीब लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की बड़े पैमाने पर तैयारी चल रही है। पहले उनके नाम हटाए जा रहे हैं, फिर उनकी पेंशन और राशन भी छीन लिया जाएगा।”  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ सांसद पप्पू यादव ने भी अपने समर्थकों के साथ बिहार बंद में भाग लिया (Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest) है यही नहीं, कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार ने बिहार बंद को लेकर कहा कि “सड़कों पर उतरे हैं लोकतंत्र की रक्षा के लिए। क्योंकि कहा जाता है कि अगर सड़कें सुनी हो जाए तो संसद आवारा हो जाती है इसलिए सड़कों पर उतरना जरूरी है। इस बीच पुर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भी अपने समर्थकों के साथ बिहार बंद में भाग लिया (Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest) है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रदर्शन का एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि “शंखनाद हो गया, जनता सड़क पर उतर गई, वोटबंदी की सरकार, उखाड़ फेंकेगा बिहार, राहुल गांधी जी हम बिहारी हैं तैयार।” बता दें कि राहुल-गांधी और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन में शामिल दलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी है। कांग्रेस और आरजेडी सहित महागठबंधन में शामिल सभी दलों के दिग्गज नेता हुजूम के साथ निर्वाचन कार्यालय की तरफ बढ़ रहे हैं। खबर यह भी है कि प्रदर्शन के बाद दोनों नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कर सकते हैं। देखना दिलचस्प होगा कि निर्वाचन आयोग पर इस बिहार बंद का क्या कुछ असर पड़ता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Rahul, Tejashwi Slam EC During Bihar Bandh Protest #RahulGandhi #TejashwiYadav #BiharBandh #ElectionCommission #BiharNews #PoliticalProtest

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Woman Gangraped, Thrown from Train, Loses Leg

Woman Gangraped, Thrown from Train, Loses Leg: महिला से गैंगरेप के बाद चलती ट्रेन से ट्रैक पर फेंका, पीड़िता का कटा पैर

कड़े कानून के बावजूद देश में दुष्कर्म की घटनाएं हैं कि कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला है हरियाणा के पानीपत का, जहाँ महिला के साथ चलती ट्रेन में गैंगरेप कर उसे ट्रैक पर फेंक दिया। दिल दहला देने वाली इस घटना में आरोपियों ने पहले तो सामूहिक दुष्कर्म किया और फिर सोनीपत ले जाकर रेलवे ट्रैक पर उसे मरने के लिए फेंक दिया। हालाँकि महिला बच (Woman Gangraped, Thrown from Train, Loses Leg) निकली। बच तो निकली लेकिन उसका पैर कट गया। दरअसल, उठकर ट्रैक से भागने के दौरान वो ट्रेन की चपेट में आ गई। जिसकी वजह से उसका पैर कट गया। इस बीच सूचना के बाद मौके पहुंची पुलिस ने पीड़िता को सोनीपत के नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया। वहां से डॉक्टरों ने उसे पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया। इस दरम्यान पुलिस अधिकारियों ने पीड़िता के परिजनों को इस हादसे की सूचना दी। परिजनों के पहुंचने के बाद महिला के साथ गैंगरेप का खुलासा है। परिजनों के मुताबिक 35 वर्षीय महिला 23 जून को घर से गायब हुई थी। काफी खोजबीन के बाद भी जब कुछ पता नहीं चला तो महिला के पति ने 26 जून को किला थाना पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।  जांच के लिए 40 टीमें गठित की गई (Woman Gangraped, Thrown from Train, Loses Leg) हैं महत्वपूर्ण बात यह कि मानवता को शर्मसार कर देने वाली इस घटना के बाद पुलिस हरकत में आई और आरोपियों की तलाश में जुट गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी गठित की गई है। जांच के लिए 40 टीमें गठित की गई (Woman Gangraped, Thrown from Train, Loses Leg) हैं। यही नहीं, पहचान के लिए उसे 16 रेलवे स्टेशनों की तस्वीरें दिखाई जाएंगी।इसके अलावा पुलिस की एक टीम सोनीपत भी पहुंची है। यही नहीं पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच की तीन टीमें जांच में जुटी हैं। आलम यह है कि पानीपत से लेकर सोनीपत तक जांच टीमें फैली हैं। स्थानीय दुकानदारों व लोगों से पूछताछ की जा रही है। ताकि कहीं कोई सुराग मिल जाए। यही नहीं,पुलिस रेलवे ट्रैक व आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे भी खंगाल रही है। मालगोदाम के पास से गए और ट्रेन के डिब्बे में गैंगरेप (Woman Gangraped, Thrown from Train, Loses Leg) किया  प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक “उसने महिला की रोने की आवाज सुनी थी। जब वह रेलवे ट्रैक के पास गया तो महिला की हालत देखकर उसने तत्काल पुलिस को सूचना दी।” पीजीआई में महिला ने बताया कि 24 जून की रात वह पानीपत स्टेशन पर (Woman Gangraped, Thrown from Train, Loses Leg) थी। दो-तीन युवक उसे मालगोदाम के पास से गए और ट्रेन के डिब्बे में गैंगरेप किया। फिर उसे ट्रेन में सोनीपत ले गए। सोनीपत स्टेशन पर पहुंचते ही धक्का दे दिया। आगे पीड़िता ने बताया कि ट्रैक पार करते समय उसका पैर फंस गया। जिसके चलते पैसेंजर ट्रेन की चपेट में आने से पैर कट गया। इस वारदात के बाद महिला को गहरा सदमा लगा है। चूंकि महिला बार-बार बयान बदल रही है, इसलिए पुलिस उसे मानसिक रूप से बीमार बता रही है। खैर, महिला का मेडिकल परीक्षण किया गया। परिक्षण में दुष्कर्म की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने इस घटना की जानकारी सोनीपत रेलवे पुलिस को दी है। पानीपत निवासी महिला के पति ने उसकी गुमशुदगी की शिकायत किला थाना में एक जून को दी। इसके बाद महिला की पहचान हुई। इसे भी पढ़ें:- आरसीबी के तेज गेंदबाज यश दयाल पर यौन शोषण का केस दर्ज नौ जून को महिला के तीन वर्ष के इकलौते बेटे की बीमारी से मौत हो गई (Woman Gangraped, Thrown from Train, Loses Leg) थी महिला ने बताया कि “पति से अनबन होने के कारण वह घर से निकल गई थी और 24 जून की रात तकरीबन 10 बजे वह पानीपत रेलवे स्टेशन पर कुर्सियों पर बैठी थी। इस बीच पानी की टंकी की ओर गई तो देखा कि वहां दो युवक खड़े (Woman Gangraped, Thrown from Train, Loses Leg) थे। वह मुझे रेलवे स्टेशन पर माल गोदाम की ओर ले गए। और फिर वहां दोनों ने बारी बारी से दुष्कर्म किया। इसके बाद ट्रेन से सोनीपत ले गए। इस बीच चलती ट्रेन से ट्रैक पर धक्का दे दिया। और धक्का देकर दोनों युवक वहां से फरार हो गए। इसके बाद जब होश आया तो अस्पताल में मिली। प्राप्त जानकरी के मुताबिक नौ जून को महिला के तीन वर्ष के इकलौते बेटे की बीमारी से मौत हो गई थी। जिसके बाद उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई। दुष्कर्म के बाद से पीड़िता की मानसिक स्थिति और बिगड़ती जा रही। Latest News in Hindi Today Hindi Woman Gangraped, Thrown from Train, Loses Leg #womangangraped #traincrime #crimeagainstwomen #breakingnews #india #justiceforvictim #newsupdate

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6 Tips from Harvard Doctors to Keep Your Liver Healthy

हार्वर्ड डॉक्टर्स से जानें लिवर की सेहत बनाए रखने के लिए 6 महत्वपूर्ण बातों के बारे में

लिवर (Liver) हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो पेट के ऊपरी हिस्से में होता है। यह अंग हमारे शरीर के कई जरूरी कार्यों के लिए जिम्मेदार होता है जैसे खून से टॉक्सिन को फिल्टर करना, ब्लड प्रेशर  और डाइजेशन को सही रखना आदि। यही नहीं ,यह यह शरीर का सबसे बड़ा ग्लेंड है और स्ट्रांग इम्युनिटी, डेटोक्सिफिकेशन, विटामिन स्टोरेज आदि में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाता है। इसलिए, अपने लिवर (Liver) को हेल्दी बनाए रखना बेहद आवश्यक है। इसे हेल्दी रखने का सबसे बेहतरीन उपाय है अपनी लाइफस्टाइल में सुधार लाना। लिवर (Fatty liver) से जुड़ी कुछ ऐसी बातें हैं, जिनकी जानकारी हार्वर्ड के डॉक्टर्स के अनुसार हर किसी को होनी चाहिए। आइए जानें लिवर संबंधी जरूरी बातें, जो सबको पता होनी चाहिए (Liver related Important things that everyone should know)।  लिवर संबंधी जरूरी बातें, जो सबको पता होनी चाहिए (Liver related Important things that everyone should know) कोलंबियासर्जरी (Columbiasurgery) के अनुसार लिवर (Liver) शरीर का वो सबसे बड़ा सॉलिड ऑर्गन है, जो कई जरूरी कार्यों को करने का काम करता है। हार्वर्ड के डॉक्टर्स के अनुसार लिवर संबंधी जरूरी बातें, जो सबको पता होनी चाहिए (Liver related Important things that everyone should know), इस प्रकार हैं: लिवर की पुनर्जन्म क्षमता लिवर एक ऐसा ऑर्गन है जो अपने सेल्स को फिर से जेनरेट कर सकता है। लिवर (Liver) की यह कपैसिटी उसे सही से कार्य करने में मदद करती है और इससे शरीर को हेल्दी रहने में भी मदद मिलती है। हालांकि, किसी समस्या के कारण यह कपैसिटी सीमित हो सकती है। लिवर के लिए यह चीजें हैं हानिकारक अपने लिवर (Liver) को हेल्दी बनाए रखने के लिए कुछ चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए जैसे एल्कोहॉल। एल्कोहॉल के सेवन से लिवर संबंधी कई परेशानियां हो सकती हैं। इसके साथ ही अनहेल्दी डायट को लेने से भी बचें। जंक फ़ूड और प्रोसेस्ड आहार को अपने आहार में जगह देने से बचें। यही नहीं, कुछ दवाईयों का अधिक सेवन करने से भी लिवर (Liver) को नुकसान हो सकता है। लिवर के लिए यह हैं फायदेमंद चीजें खट्टे फल जैसे निम्बू, संतरे आदि का सेवन करना लिवर (Fatty liver) के लिए बेनेफिशियल है। यही नहीं हरी पत्तेदार सब्जियों को खाना भी लिवर के साथ-साथ सम्पूर्ण हेल्थ के लिए फायदेमंद है। कॉफ़ी का सेवन लिवर (Liver) के लिए अच्छा है लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। नींद से प्रभावित होता है लिवर  खराब नींद लिवर की कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करती है जैसे टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालना आदि। एक्सपर्ट्स के मुताबिक रोजाना 9 घंटे रात की नींद लेने से लिवर को रिपेयर करने और सम्पूर्ण रूप से हेल्दी रहने में मदद मिलती है। कुछ दवाईयां भी लिवर (Liver) पर बुरा प्रभाव डाल सकती हैं। इसे भी पढ़ें:- मॉनसून में मच्छरों से बचाएगा एसएमओएसएस, आंध्र प्रदेश सरकार का एआई-बेस्ड प्लान लिवर को हेल्दी रखने के तरीके अगर आप अपने लिवर (Liver) को हेल्दी बनाए रखना चाहते हैं, तो हमारे लिए हाइड्रेट रहना, पर्याप्त नींद लेना और सही आहार का सेवन करना जरूरी है। यही नहीं स्मोकिंग करना भी लिवर के लिए नुकसानदायक है। नियमित रूप से लिवर टेस्ट कराने से भी लिवर (Liver) को हेल्दी रखने में मदद मिल सकती है। लिवर को कौन सी समस्याएं कर सकती हैं प्रभावित? लिवर संबंधी समस्याओं में एक है हेपेटाइटिस जो वायरस, बैक्टीरिया आदि के कारण होती है। इसके साथ ही फैटी लिवर (Fatty liver) वो परेशानी है, जिसमें लिवर में अधिक फैट जमा हो जाता है। ऐसा माना जाता है कि अधिक एल्कोहॉल का सेवन करने वाले लोगों को फैटी लिवर (Fatty liver) की समस्या होती है। लेकिन नॉन-एल्कोहॉलिक लोगों को भी फैटी लिवर (Fatty liver) हो सकता है। लिवर फेलियर होने पर लिवर ट्रांसप्लांट एक इलाज है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Fatty liver #liverhealth #harvarddoctors #livercare #healthtips #naturalremedies #liverdetox #healthybody

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hindi marathi controversy

हिंदी-मराठी विवाद से गरमाई देश की सियासत, ठाकरे बंधुओं पर उत्तर भारतीय नेताओं का हमला, कांग्रेस ने बनाई विवाद से दूरी 

महाराष्ट्र में हिंदी और मराठी भाषा (Marathi Language Controversy) को लेकर एक बार फिर से राजनीतिक पारा चढ़ गया है। उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) की मराठी भाषा पर हालिया सक्रियता और बयानों ने जहां इस विवाद को राज्य में राजनीतिक हवा दी, वहीं हिंदी भाषी राज्यों के नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाओं ने इस मराठी भाषा विवाद (Marathi Language Controversy) को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया। जिसकी वजह से राजनीतिक दलों में टकराव बढ़ता जा रहा है, जबकि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना की सहयोगी कांग्रेस ने इस मुद्दे से दूरी बना रखी है।  बता दें कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा (Marathi Language Controversy) न बोलने वाले हिंदीभाषियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार और उनके खिलाफ बोले जा रहे बयानों पर हिंदी पट्टी के कई नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey), बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव और यूपी के आजमगढ़ से भाजपा के पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ ने ठाकरे बंधुओं को खुली चुनौती दी है। ‘अगर उनमें हिम्मत है तो वे उर्दू, तमिल और तेलुगु भाषियों पर भी वही रवैया अपनाकर दिखाएं, जैसा वे हिंदीभाषियों के साथ कर रहे हैं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने तो राज (Raj Thackeray) और उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) पर सीधा हमला करते हुए यहां तक कह दिया कि, ”अगर उनमें हिम्मत है तो वे उर्दू, तमिल और तेलुगु भाषियों पर भी वही रवैया अपनाकर दिखाएं, जैसा वे हिंदीभाषियों के साथ कर रहे हैं। अपने घर में शेर बनना उनके लिए आसान है। आओ बिहार और उत्तर प्रदेश, हम भी देखेंगे तुम्हारी हेकड़ी। यह गुंडागर्दी अब नहीं चलेगी।” इस दौरान दुबे ने मराठी भाषा और महाराष्ट्र के स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान करते हुए कहा कि हम मराठी संस्कृति का आदर करते हैं, लेकिन राजनीतिक फायदे के लिए जो भाषा को हथियार बनाया जा रहा है, वह निंदनीय है। पप्पू यादव और निरहुआ ने राज ठाकरे को ललकार  सांसद पप्पू यादव ने भी राज ठाकरे (Raj Thackeray) पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज ठाकरे हिंदीभाषियों के खिलाफ खुलेआम हिंसा करवा रहे हैं। पप्पू यादव ने चेतावनी दी, “अगर उन्होंने यह गुंडई बंद नहीं की, तो मैं खुद मुंबई आकर उनको उनकी ही भाषा में जवाब दूंगा।“ पप्पू यादव का आरोप है कि राज ठाकरे भाजपा के इशारे पर यह सब कर रहे हैं ताकि इसी साल महाराष्ट्र में होने वाली BMC चुनाव में ध्रुवीकरण किया जा सके। भाजपा के पूर्व सांसद और भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ ने भी ठाकरे बंधुओं को ललकारते हुए कहा, “मैं खुद मुंबई में रहता हूं। अगर हिम्मत है तो मुझे निकालकर दिखाओ।” उनका यह बयान उत्तर भारतीयों की ओर से एक मजबूत प्रतिरोध के रूप में देखा जा रहा है। उद्धव ठाकरे ने भी किया पलटवार हिन्दी भाषी राज्य के इन नेताओं के बयानों पर जब पत्रकारों ने उद्धव ठाकरे से प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा, “दुबे, बिबे जैसे लोग केवल विवाद खड़ा करना जानते हैं। महाराष्ट्र की जनता सब जानती है। इनकी बातों को ज्यादा गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।” उद्धव ने इस दौरान यह भी कहा कि, उनका विरोध हिंदी भाषा से नहीं है, बल्कि हिंदी की जबरन थोपे जाने वाली अनिवार्यता से है। उन्होंने कहा, “हम खुद हिंदी में बात कर रहे हैं, हमारे सांसद भी हिंदी बोलते हैं। यह विवाद जबरन खड़ा किया गया है।” इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ कांग्रेस की चुप्पी और संतुलित रुख इस पूरे विवाद पर जहां महाराष्ट्र से लेकर बिहार तक में हलचल मची हुई और पक्ष-विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर हैं। वहीं, कांग्रेस ने खुद को इस मुद्दे से अलग रखने का निर्णय लिया है। मुंबई में कांग्रेस के उत्तर भारतीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अवनीश सिंह (Nishikant Dubey) ने कहा कि मुंबई में वर्षों से उत्तर भारतीय समाज शांतिपूर्वक रह रहा है और यहां की संस्कृति में घुल-मिल चुका है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि राजनीतिक फायदे के लिए सामाजिक ढांचे को नुकसान न पहुंचाएं। उन्होंने यह भी कहा कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह पर भाजपा की सरकार है, तो भाषा के नाम पर हो रही उकसाने वाली राजनीति पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी उन्हीं की बनती है। सरकार को चाहिए कि वह उन नेताओं पर कार्रवाई करे जो समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Nishikant Dubey #hindi #marathi #controversy #thackeray #uddhavthackeray #rajthackeray #northindianleaders #congress #politics #india

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Anil Chauhan

CDS जनरल अनिल चौहान की चेतावनी: चीन-पाकिस्तान-बांग्लादेश का संभावित गठजोड़ भारत के लिए बड़ा खतरा

भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान (Anil Chauhan) ने एक थिंक-टैंक कार्यक्रम में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं। उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय हालात भारत के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश में बढ़ती नजदीकी पर कहा कि यह संभावित रणनीतिक गठजोड़ अगर होता है, तो भारत की सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है। जनरल अनिल चौहान (Anil Chauhan) ने कहा कि आज की दुनिया एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। पुराने वैश्विक संतुलन की जगह एक नई व्यवस्था आकार ले रही है, जिसमें अमेरिका की भूमिका पहले से अधिक जटिल होती जा रही है। ऐसे में भारत जैसे विकासशिल देश को अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पहले से कहीं ज्यादा सजग और सशक्त रहना होगा। उन्होंने जोर दिया कि अब सुरक्षा केवल सैन्य ताकत तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि आर्थिक, व्यापारिक और तकनीकी क्षेत्रों में भी सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। अब आर्थिक ताकत ही असली ताकत CDS ने कहा कि किसी भी देश की असली ताकत उसकी आर्थिक मजबूती और लचीलापन है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा केवल बॉर्डर सिक्योरिटी नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से भी जुड़ी होती है। जब तक देश की आंतरिक स्थिति मजबूत नहीं होगी और आर्थिक आधार स्थिर नहीं रहेगा, तब तक बाहरी खतरों से निपटना मुश्किल होगा।” उन्होंने कहा कि, भारत जैसे विविधता भरे देश में आंतरिक स्थिरता बनाए रखना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं। जनरल अनिल चौहान (Anil Chauhan) ने इस दौरान विशेष रूप से सामाजिक एकता पर बात करते हुए कहा कि हमारे देश की ताकत उसकी विविधता है, लेकिन यही विविधता अगर सामाजिक अस्थिरता में बदल जाए, तो यह बाहरी ताकतों के लिए अवसर बन सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को अपने सामाजिक ढांचे को मजबूत रखने की आवश्यकता है ताकि आंतरिक सुरक्षा कमजोर न पड़े। बड़े खतरे को देखते हुए हमें एकजुट रहने की जरूरत है। सामाजिक रूप से ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए, जिसका फायदा दुश्मन उठा सके।  चीन-पाकिस्तान-बांग्लादेश का संभावित गठजोड़ बड़ा खतरा- CDS CDS चौहान (Anil Chauhan) ने इस दौरान चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश में बढ़ती नजदीकी को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि तीनों देशों के इस संभावित गठजोड़ को लेकर भारत को सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर इन देशों के बीच आपस में किसी भी स्तर पर रणनीतिक तालमेल बनता है, तो वह भारत के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है। उन्होंने खासतौर पर बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि अगर वहां अस्थिरता बढ़ती है और भारत में शरण ले रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की स्थिति बदतर होती है, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। इसे भी पढ़ें:- आरसीबी के तेज गेंदबाज यश दयाल पर यौन शोषण का केस दर्ज ‘ऑपरेशन सिंदूर’ था भारत की निर्णायक कार्रवाई CDS चौहान ने इस बातचीत के दौरान ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह वह क्षण था जब परमाणु संपन्न दो राष्ट्र सीधे सैन्य टकराव में आए। उन्होंने बताया कि भारत ने इस संघर्ष में पाकिस्तान की परमाणु धमकियों को झूठा साबित करते हुए निर्णायक बढ़त हासिल की। यह पूरी दुनिया के लिए एक सबक था कि केवल परमाणु हथियारों की धमकी देकर कोई देश अपनी नापाक हरकतों को छिपा नहीं सकता। जनरल चौहान ने कहा कि अब युद्ध केवल सीमा पर नहीं लड़े जाते, बल्कि साइबर हमले, ड्रोन, हाइपरसोनिक मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक हथियार के जरिए लड़े जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के पास इन सभी क्षेत्रों में कोई पूर्ण सुरक्षा प्रणाली नहीं है, इसलिए भारत को बहुआयामी सुरक्षा नीति अपनानी होगी। Latest News in Hindi Today Hindi Anil Chauhan #IndiaSecurity #CDSAnilChauhan #ChinaPakistanBangladesh #BorderThreat #StrategicAlliance #IndiaDefence

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