टेँशन यानी तनाव ऐसी समस्या है, जो आजकल सामान्य होती जा रही है खासतौर पर युवाओं में। भविष्य में तनाव बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है और इससे रोजाना का जीवन भी प्रभावित होता है। योगा को तनाव से छुटकारा पाने का बेहतरीन तरीका माना जाता है। हालांकि, माइंड ही नहीं बल्कि बॉडी के लिए भी योगा को कई तरह से फायदेमंद माना गया है। ऐसे कई योगासन (Yogasana) हैं, जिनका अभ्यास करना सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। इन्हीं में से एक है वृक्षासन (Vrikshasana)। वृक्षासन (Vrikshasana) का दूसरा नाम ट्री पोज भी है। आइए जानें कि वृक्षासन के फायदे (Benefits of Vrikshasana) क्या हैं? इसके साथ ही इसे करने के तरीके के बारे में भी जानें।
वृक्षासन के फायदे (Benefits of Vrikshasana)
आर्ट ऑफ लिविंग (Art of living) के अनुसार वृक्षासन (Vrikshasana) एक संस्कृत शब्द है जिसमें वृक्ष का अर्थ है पेड़ और आसन का अर्थ है पोजीशन यानी इस योगासन (Yogasana) में करने वाले की पोजीशन वृक्ष की तरह लगती है। इसके फायदे इस प्रकार हैं:
- बैलेंस को सुधारें: वृक्षासन को करने से शरीर का बैलेंस सुधारने में मदद मिलती है। इसके साथ ही स्थिरता भी बढ़ती है जिससे रोजमर्रा का जीवन आसान होता है। उम्र के बढ़ने पर होने वाली इंबैलेंस की समस्या से राहत मिल सकती है।
- पैरों को बनाए मजबूत: वृक्षासन (Vrikshasana) को करने से पैरों और कूल्हों की मसल्स स्ट्रांग बनती हैं। यानी, शरीर को मजबूती मिलती है। इसके साथ ही नर्वस सिस्टम में भी सुधर होता है।
- रीढ़ की हड्डी के लिए बेहतरीन: इस योगासन (Yogasana)को करने से रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। जिन लोगों को पीठ में दर्द की समस्या है, वो इसे रोजाना करने से मदद मिल सकती है।
- कंसंट्रेशन में वृद्धि: इस आसन को करने से कंसंट्रेशन बढ़ती है और ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है। यानी, मेंटल हेल्थ (Mental Health) में भी सुधार होता है।
- तनाव कम करने में मिले मदद: वृक्षासन (Vrikshasana) करने से तनाव कम करने में भी हेल्प मिल सकती है। रोजाना इसे करने से शांति मिलती है, जिससे खुश रहने में भी मदद मिलती है।
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वृक्षासन (Vrikshasana) कैसे करें?
इस योगासन (Yogasana) को करना बेहद आसान है। वृक्षासन के फायदे (Benefits of Vrikshasana) क्या हैं, यह आप जान ही गए होंगे। इस आसन को इस तरह से किया जा सकता है:
- वृक्षासन (Vrikshasana) को करने के लिए सबसे पहले किसी शांत जगह पर सीधे खड़े हो जाएं।
- आपके दोनों पैर एक साथ होने चाहिए।
- अब अपने दाहिनें पैरों को मोड़ें और बाएं पैर की जांघ यानी थाई पर रख दें। ध्यान रखें आपके पैर का तलवा बाएं पैर की थाई के अंदर की तरफ होना चाहिए।
- अब इसी स्थिति में संतुलन बनाने की कोशिश करें और इस दौरान अपनी नजर बिलकुल सामने किसी चीज पर फोकस करें।
- अब अपने हाथों को ऊपर उठाएं और सांस लेते हुए इन्हें सिर के ऊपर ले जाएं। आपकी हथेलियां नमस्कार की मुद्रा में होनी चाहिए।
- कुछ समय तक इसी अवस्था में रहें और सांस को रोक कर रखें।
- धीरे-धीरे सांस को बाहर छोड़ते हुए हाथों को नीचे ले आएं और सामान्य पोजीशन में आ जाएं।
- नियमित रूप से इस आसन को करें और आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे।
नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें।
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