1965 के जांबाजों से बोले राजनाथ सिंह

1965 के जांबाजों से बोले राजनाथ सिंह

1965 के जांबाजों से बोले राजनाथ सिंह: भारत पड़ोसियों के मामले में भाग्यशाली नहीं, पर इसे नियति नहीं माना नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के वीर सैनिकों से बातचीत करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से भारत अपने पड़ोसियों के साथ रिश्तों के मामले में हमेशा भाग्यशाली नहीं रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश ने इस स्थिति को अपनी नियति मानकर कभी स्वीकार नहीं किया। भारत ने हर चुनौती का सामना किया और अपनी तकदीर खुद लिखी। कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने 1965 के युद्ध में लड़ने वाले जांबाजों को नमन किया। उन्होंने कहा कि उस दौर के सैनिकों का साहस, बलिदान और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्हीं की वीरता की बदौलत आज भारत की सीमाएं सुरक्षित हैं और हमारी सेनाओं का मनोबल ऊंचा है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत हमेशा शांति और सहयोग की नीति पर चला है, लेकिन जब-जब हमारी सीमाओं को ललकारा गया है, तब-तब हमारी सेनाओं ने दुश्मन को करारा जवाब दिया है। राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि भारत का पड़ोसी कौन होगा यह हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन उनसे संबंध किस तरह रखने हैं यह हमारे नियंत्रण में जरूर है। उन्होंने यह संदेश दिया कि भारत हमेशा बेहतर रिश्ते बनाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन अगर पड़ोसी सहयोग न करें तो भी देश पीछे नहीं हटेगा। रक्षा मंत्री ने यह भी दोहराया कि भारत किसी से वैरभाव नहीं चाहता, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के साथ कोई समझौता भी नहीं करेगा। इस मौके पर उन्होंने हाल के सैन्य अभियानों का भी उल्लेख किया और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हुए कदमों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत ने कठिन हालात में भी जीत को अपनी आदत बना लिया है। उन्होंने सैनिकों और उनके परिवारों को विश्वास दिलाया कि सरकार उनके साहस और बलिदान को कभी भुला नहीं सकती। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजनाथ सिंह का यह बयान मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और सीमावर्ती तनावों के बीच बेहद अहम है। चीन और पाकिस्तान के साथ रिश्तों में आए उतार-चढ़ाव की पृष्ठभूमि में रक्षा मंत्री ने साफ संदेश दिया है कि भारत संवाद और दोस्ती की नीति को प्राथमिकता देता है, लेकिन सुरक्षा से जुड़ी हर चुनौती का सख्ती से सामना भी करेगा। 1965 का युद्ध भारत के इतिहास का एक अहम मोड़ माना जाता है। इस युद्ध में भारतीय सेनाओं ने जिस साहस और रणनीति का परिचय दिया, उसने पूरे देश को गौरवान्वित किया। राजनाथ सिंह का जांबाजों के साथ यह संवाद न केवल इतिहास को याद करने का अवसर था, बल्कि वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा नीतियों पर भी एक सशक्त संकेत था

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Pakistan and Bangladesh feel like home...," said Sam Pitroda, echoing Rahul Gandhi's appeal to Gen-Z

पाकिस्तान-बांग्लादेश घर जैसा लगता है…’, बोले सैम पित्रोदा, Gen-Z से दोहराई राहुल गांधी वाली अपील

पाकिस्तान-बांग्लादेश घर जैसा लगता है…’, बोले सैम पित्रोदा, Gen-Z से दोहराई राहुल गांधी वाली अपील नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राहुल गांधी के करीबी सैम पित्रोदा ने एक बार फिर बयान देकर राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। पित्रोदा ने कहा कि “पाकिस्तान और बांग्लादेश हमारे लिए घर जैसा लगता है”। उन्होंने साथ ही Gen-Z यानी नई पीढ़ी से राहुल गांधी की सोच और संदेश को आगे बढ़ाने की अपील की। राहुल गांधी की लाइन को दोहराया सैम पित्रोदा ने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते हमेशा संवाद और विश्वास पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी की “नफरत नहीं, मोहब्बत” वाली लाइन को दोहराते हुए कहा कि नई पीढ़ी को सीमाओं से आगे बढ़कर भाईचारे और शांति का रास्ता अपनाना चाहिए। Gen-Z को संदेश उन्होंने खासतौर पर Gen-Z पीढ़ी से कहा कि वे सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी से जुड़े हुए हैं, इसलिए उन्हें सीमाओं से परे सोचकर वैश्विक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। पित्रोदा ने कहा कि भारत का भविष्य तभी मजबूत होगा जब नई पीढ़ी नफरत और विभाजन की राजनीति से ऊपर उठकर साझेदारी और भाईचारे की राह चुनेगी। बीजेपी का पलटवार पित्रोदा के इस बयान पर बीजेपी ने कड़ा विरोध जताया है। बीजेपी नेताओं ने कहा कि कांग्रेस हमेशा पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुद्दों पर “नरम रुख” दिखाती रही है। उनका आरोप है कि इस तरह के बयान से राष्ट्रीय हित और सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं। चुनावी संदर्भ में देखा जा रहा बयान विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान सीधा-सीधा चुनावी राजनीति से जुड़ा है। कांग्रेस लगातार युवाओं और नए मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी के संदेश को आगे बढ़ाकर सैम पित्रोदा भी उसी दिशा में काम कर रहे हैं।

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बुरहानपुर ब्रेकिंग: इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर भीषण सड़क हादसा

बुरहानपुर ब्रेकिंग: इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर भीषण सड़क हादसा, दो युवक गंभीर घायल, ट्रक चालक फरार बुरहानपुर (मध्यप्रदेश)। जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम इच्छापुर शनिमंदिर के पास रविवार को एक बड़ा सड़क हादसा सामने आया। इंदौर-इच्छापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-52) पर अज्ञात ट्रक ने मोटरसाइकिल सवार दो युवकों को जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भयानक था कि मोटरसाइकिल के परखच्चे उड़ गए और दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। कैसे हुआ हादसा प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तेज रफ्तार ट्रक ने पीछे से मोटरसाइकिल को टक्कर मारी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक के कई टुकड़े हो गए और युवक दूर जा गिरे। हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन को मौके पर छोड़ने के बजाय तुरंत फरार हो गया। घायल युवकों की हालत नाजुक हादसे में घायल दोनों युवकों को स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत अस्पताल ले जाया गया। उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें आगे रेफर कर दिया है। मौके पर लोगों का आक्रोश घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने पुलिस को खबर दी, लेकिन पुलिस के मौके पर देर से पहुंचने पर लोगों ने नाराजगी जताई और विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे पर आए दिन ऐसे हादसे होते रहते हैं, लेकिन प्रशासन और पुलिस ट्रैफिक नियंत्रण एवं सख्ती को लेकर गंभीर नहीं है। पुलिस की कार्रवाई पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और फरार ट्रक चालक की तलाश शुरू कर दी है। आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लगातार बढ़ रहे हैं हादसे गौरतलब है कि इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर तेज रफ्तार और भारी वाहनों की आवाजाही के चलते आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सख्त कदम उठाने और ब्लैक स्पॉट्स पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है।

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नेपानगर में बड़ा हादसा टला

नेपानगर में बड़ा हादसा टला: ताप्ती पुल से लटक गया आयसर वाहन, बाल-बाल बचीं कई जानें

बुरहानपुर। जिले के नेपानगर-अंबाडा मार्ग पर मंगलवार सुबह एक ऐसा हादसा हुआ जिसने कुछ ही पलों में लोगों की सांसें थमा दीं। एक तेज़ रफ्तार आयसर वाहन ताप्ती नदी के पुल पर अचानक अनियंत्रित होकर रेलिंग तोड़ते हुए आधा हिस्सा नीचे की ओर लटक गया। वाहन पूरी तरह नदी में गिरने से बस एक कदम दूर था। सौभाग्य से बड़ा हादसा टल गया और कई लोगों की जान बाल-बाल बच गई। — हादसा कैसे हुआ? मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि यह घटना सुबह लगभग 11 बजे की है। आयसर वाहन बुरहानपुर से नेपानगर की ओर तेज गति से आ रहा था। जैसे ही वाहन ताप्ती पुल के पास पहुंचा, चालक अचानक संतुलन खो बैठा। वाहन सीधे पुल की रेलिंग से टकराया और आधा हिस्सा तोड़ते हुए बाहर की ओर झुक गया। कुछ ही सेकंड के लिए ऐसा लगा कि वाहन नदी में गिर जाएगा, लेकिन किसी तरह उसका पिछला हिस्सा पुल पर अटका रह गया। आंखों देखा हाल बताने वाले प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर वाहन थोड़ा और आगे खिसक जाता, तो वह सीधे नदी की गहराई में जा गिरता और एक बड़ा हादसा निश्चित था। मौके पर अफरा-तफरी जैसे ही यह घटना घटी, पुल पर और उसके आसपास मौजूद लोग सहम गए। कुछ ही पलों में सड़क पर जाम लग गया और लोग भागकर वाहन की ओर दौड़े। मौके पर मौजूद कई राहगीरों ने अपने मोबाइल से वीडियो और फोटो बनाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते यह दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। खबर मिलते ही पुलिस दल और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा और राहत कार्य शुरू किया। वाहन को सुरक्षित निकालने के लिए क्रेन मंगाई गई। इस दौरान करीब एक घंटे तक यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। बड़ी जनहानि से बचाव सबसे राहत की बात यह रही कि वाहन में बैठे लोगों को गंभीर चोट नहीं आई। केवल कुछ हल्की खरोंचें और मामूली चोटों की सूचना मिली है। अगर वाहन पूरी तरह नदी में गिर जाता, तो न सिर्फ चालक और सवार लोग बल्कि नीचे से गुजर रहे अन्य लोग भी इसकी चपेट में आ सकते थे। स्थानीय लोगों ने इसे भगवान की कृपा बताते हुए कहा कि यह वाकई चमत्कार ही था कि इतने खतरनाक मोड़ पर भी कोई बड़ी अनहोनी नहीं हुई। सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल इस हादसे ने एक बार फिर से सड़क सुरक्षा और ओवरस्पीडिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नेपानगर-अंबाडा मार्ग पर कई बार वाहन तेज गति से गुजरते हैं और प्रशासन इस पर सख्ती नहीं करता। ताप्ती पुल पर पहले भी छोटे-मोटे हादसे हो चुके हैं, लेकिन इस बार तो मामला बेहद गंभीर था। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती गति, ओवरलोडिंग और चालक की लापरवाही से सड़क हादसों की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग को सख्ती से नियम लागू करने होंगे। सोशल मीडिया पर चर्चा जैसे ही घटना के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर आए, लोग लगातार अपनी प्रतिक्रियाएं देने लगे। किसी ने इसे चालक की लापरवाही बताया, तो किसी ने प्रशासन की कमजोरी। कई यूजर्स ने लिखा कि पुल की सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि ऐसे हादसे भविष्य में टाले जा सकें। प्रशासन की प्रतिक्रिया हादसे की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है कि वाहन तेज गति में था और मोड़ पर चालक ने नियंत्रण खो दिया। हालांकि, वाहन में किसी तकनीकी खराबी की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से सीख लेनी चाहिए। ओवरस्पीडिंग पर नियंत्रण और यातायात नियमों का पालन हर किसी के लिए जरूरी है। साथ ही, उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे हादसे के समय अफरा-तफरी न फैलाएं और प्रशासन की मदद करें।

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आंखों पर पट्टी, मन में न्याय की लौ! नागझरी पंचायत में भ्रष्टाचार के खिलाफ युवक का अनोखा प्रदर्शन

आंखों पर पट्टी, मन में न्याय की लौ! नागझरी पंचायत में भ्रष्टाचार के खिलाफ युवक का अनोखा प्रदर्शन

बुरहानपुर। बुरहानपुर जिले की खकनार तहसील के ग्राम पंचायत नागझरी में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ एक जागरूक ग्रामीण ने ऐसा अनोखा प्रदर्शन किया, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया। गांव के युवक लखन पटेल ने आंखों पर काली पट्टी बांधकर जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर पंचायत सचिव सहित पंचायत व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनका यह विरोध न केवल प्रतीकात्मक था, बल्कि एक गहरी सामाजिक पीड़ा और जनता की आक्रोशित आवाज को उजागर करता हुआ दिखा। पंचायत सचिव पर गंभीर आरोप लखन पटेल का आरोप है कि ग्राम पंचायत नागझरी में लंबे समय से भ्रष्टाचार और मनमानी चरम पर है। उन्होंने कहा कि पंचायत की अधिकांश योजनाओं और शासकीय लाभों का वितरण सही पात्रों तक नहीं पहुंच रहा। नियमों और दिशा-निर्देशों को दरकिनार कर अपात्र लोगों को योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है, जबकि वास्तव में जिन परिवारों को सहायता की जरूरत है, वे दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। लखन पटेल ने खुलासा किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट, जो गरीब और बेघर लोगों के लिए है, उसमें भी भारी गड़बड़ी की गई है। उन्होंने बताया कि एक सरकारी कर्मचारी को ही इस योजना का लाभ दे दिया गया है, जो कि नियमों का सीधा उल्लंघन है। यह घटना न केवल योजना की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाती है। अभद्र व्यवहार का आरोप लखन पटेल ने यह भी आरोप लगाया कि जब वह पंचायत कार्यालय किसी जानकारी की मांग करने या शिकायत दर्ज कराने पहुंचते हैं, तो पंचायत के कर्मचारी उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं। पारदर्शिता और जवाबदेही की जगह वहां डर और दबाव का माहौल बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है मानो पंचायत कार्यालय जनता की सुविधा का केंद्र न होकर कुछ व्यक्तियों के हित साधन का अड्डा बन गया है। आंखों पर पट्टी बांधकर दिया संदेश लखन पटेल का विरोध प्रदर्शन बेहद प्रतीकात्मक रहा। उन्होंने कलेक्टर कार्यालय के सामने आंखों पर काली पट्टी बांधकर यह संदेश दिया कि “यदि शासन और प्रशासन भ्रष्टाचार के मामलों पर आंखें मूंदकर बैठे रहेंगे, तो आम नागरिकों को भी आंखें बंद कर लेना चाहिए। या तो चुप्पी साध लें या फिर आवाज उठाएं।” उनका यह कदम यह बताता है कि लोकतंत्र में जनता की जागरूकता ही सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने यह भी कहा कि जब जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंद लेंगे, तो गरीब और जरूरतमंदों की आवाज कहीं दबकर रह जाएगी। ऐसे में हर जागरूक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह सामने आए और अपनी बात रखे। निष्पक्ष जांच की मांग लखन पटेल ने जिला कलेक्टर से अपील करते हुए पंचायत की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो भ्रष्टाचार का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा और वास्तविक हितग्राही लगातार वंचित होते रहेंगे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं हुई, तो वह व्यापक स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे और ग्रामीणों को साथ लेकर पंचायत स्तर पर जवाब मांगेंगे। जनता में चर्चा का विषय बना प्रदर्शन लखन पटेल का यह अनोखा विरोध अब ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने वर्षों से पंचायत की गड़बड़ियों को सहा है, लेकिन कोई खुलकर सामने नहीं आया। लखन पटेल ने हिम्मत दिखाकर न केवल पंचायत सचिव पर उंगली उठाई, बल्कि प्रशासन का ध्यान भी इस ओर आकर्षित किया है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी माना कि पंचायत में योजनाओं का लाभ अक्सर उन्हीं लोगों को मिलता है जिनका पंचायत कर्मियों से नजदीकी संबंध है। वहीं गरीब, मजदूर और कमजोर वर्ग की आवाज को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इस कारण गांव में असमानता और नाराजगी बढ़ती जा रही है। प्रशासन की जिम्मेदारी यह मामला अब जिला प्रशासन के सामने है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह प्रशासनिक ढिलाई भ्रष्टाचार को और बढ़ावा देगी। पंचायत स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार से सीधे-सीधे गरीब और जरूरतमंद प्रभावित होते हैं, इसलिए यह प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। लोकतंत्र में जनता की ताकत लखन पटेल का यह अनोखा विरोध लोकतंत्र में जनता की ताकत का प्रतीक है। एक साधारण ग्रामीण ने आंखों पर पट्टी बांधकर यह दिखा दिया कि यदि सत्ता और तंत्र आंख मूंदकर बैठे रहेंगे, तो आम जनता भी आंखें मूंद सकती है। मगर, विकल्प यही है कि अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई जाए। यह विरोध केवल पंचायत स्तर की गड़बड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संदेश है कि जब भी जनता संगठित होकर अपनी बात रखती है, तो सबसे बड़े तंत्र को भी जवाब देना पड़ता है।

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फरार 30 हजार का इनामी आरोपी रविंद्र गिरफ्तार

फरार 30 हजार का इनामी आरोपी रविंद्र गिरफ्तार

छतरपुर जिला अस्पताल कैदी वार्ड से फरार 30 हजार का इनामी आरोपी रविंद्र गिरफ्तार, तीन सहयोगी भी पकड़े गए छतरपुर। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में जिला अस्पताल कैदी वार्ड से फरार हुए आरोपी रविंद्र सिंह परिहार को आखिरकार पुलिस ने दबोच लिया है। आरोपी की गिरफ्तारी पर पुलिस महानिरीक्षक (सागर जोन) श्रीमती हिमानी खन्ना ने 30 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। आईजी ने किया इनाम घोषित, एसपी ने गठित की 10 टीमें मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता की समुचित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया था। पुलिस अधीक्षक अगम जैन ने घटनास्थल का सुपरविजन किया और आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी के लिए 10 पुलिस टीमों का गठन कर विशेष निर्देश दिए। लगातार दबिश और फिक्स प्वाइंट पर तैनाती गठित टीमों ने जिले और आसपास के इलाकों में लगातार दबिश दी। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए विभिन्न स्थानों पर फिक्स प्वाइंट पर पुलिस बल की तैनाती भी की गई। इस बीच आरोपी की गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी पुलिस को प्राप्त हुई। ग्राम पनौठा से गिरफ्तार हुआ फरार आरोपी जानकारी के आधार पर पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए ग्राम पनौठा के पास से फरार आरोपी रविंद्र सिंह परिहार पिता सुल्तान सिंह परिहार को गिरफ्तार कर लिया। तीन सहयोगी भी चढ़े हत्थे आरोपी को फरार कराने में मदद करने वाले तीन सहयोगियों चंद्रभान अनुरागी, प्रदीप सिंह चंदेल और अंगद सिंह सिसोदिया को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उनके पास से एक पुलिस वेपन, तीन मोबाइल फोन और एक स्प्लेंडर मोटरसाइकिल जब्त की है। चार आरोपी अब भी फरार पुलिस के अनुसार इस प्रकरण में अन्य चार आरोपियों की तलाश अब भी जारी है। गिरफ्तार आरोपियों को विधिवत कार्रवाई पूरी करने के बाद न्यायालय में पेश किया जा रहा है।

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देहरादून में बादल फटा

देहरादून में बादल फटा: सहस्त्रधारा क्षेत्र में तबाही, होटल-दुकानें बहीं, दो लोग लापता

देहरादून, 16 सितंबर 2025 उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के सहस्त्रधारा क्षेत्र में मंगलवार सुबह बादल फटने से भारी तबाही मच गई। Karligaad (Karliguard) नाले के पास अचानक आई जलप्रलय ने पूरे इलाके का स्वरूप बदल दिया। कई होटल और दुकानें बह गईं, जबकि सड़कों पर मलबा भर गया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में दो लोग लापता प्रशासन के अनुसार, इस आपदा में दो लोग लापता हैं। SDRF और NDRF की टीमें लगातार तलाश अभियान चला रही हैं। अब तक किसी की मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन भारी नुकसान की खबरें सामने आई हैं। मंदिर भी आया पानी की चपेट में तेज़ बारिश के कारण Tamsa नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। नदी का उफान इतना तेज़ था कि प्रसिद्ध Tapkeshwar Mahadev मंदिर पानी में डूब गया। मंदिर के आसपास बने घाट पूरी तरह जलमग्न हो गए। होटल और दुकानों को भारी नुकसान सहस्त्रधारा क्षेत्र पर्यटकों के लिए खासा लोकप्रिय है। यहाँ बने होटल और दुकानों को सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि मलबे और पानी के तेज़ बहाव से कई दुकानें और छोटे होटल बह गए, जिससे करोड़ों का नुकसान हुआ है। बचाव और राहत कार्य जारी घटना की सूचना मिलते ही SDRF, NDRF, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुँच गईं। प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। प्रशासन ने हाई-अलर्ट जारी कर दिया है और राहत शिविर बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हालात पर नज़र बनाए रखने के निर्देश दिए हैं और जिला प्रशासन को हर संभव मदद उपलब्ध कराने को कहा है। स्कूल बंद, रेड अलर्ट जारी जिला प्रशासन ने एहतियातन प्रभावित क्षेत्र के स्कूलों को बंद रखने का आदेश दिया है। उधर, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तराखंड के कई हिस्सों के लिए भारी बारिश और तूफ़ानी हवाओं का रेड अलर्ट जारी किया है। स्थानीय लोगों में दहशत इस घटना के बाद सहस्त्रधारा क्षेत्र और आसपास के गाँवों में दहशत का माहौल है। लोग ऊँचाई वाले सुरक्षित स्थानों पर शरण ले रहे हैं। कई परिवारों को अस्थायी शिविरों में पहुँचाया गया है।

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वित्त मंत्रालय में डिप्टी सेकेट्ररी को BMW कार ने मारी टक्कर हुई मौत पत्नी के साथ गुरुद्वारे से बाइक पर थे नवजोत सिंह

वित्त मंत्रालय में डिप्टी सेकेट्ररी को BMW कार ने मारी टक्कर हुई मौत

दिल्ली के कैंट मेट्रो स्टेशन के पास एक बीएमडब्लू कार ने बाइक को टक्कर मारी l ये बाइक केंद्रीय वित्त मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेट्री नवजोत सिंह चला रहे थे l उनकी मौत हो गई और उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हैं। BMW कार को एक महिला चला रही थी और उसके पति भी कार में मौजूद थे l डिप्टी सेक्रेट्री अपनी पत्नी के साथ बांग्ला साहब गुरुद्वारे से लौट रहे थे। इतने बड़े अधिकारी होने के बाद भी उनकी सादगी बेमिसाल थी। वो निजी उपयोग में सरकारी वाहन का उपयोग नहीं करते थे। जब कार ने उन्हें टक्कर मारी और तो उनकी बाइक बस से टकराई और वो गंभीर रूप से घायल हो गये l बीएमडब्लू कार चला रही महिला और उसके पति घायल नवजोत सिंह और उनकी पत्नी को कैब में अस्पताल ले गए। यहां भी गलती ये रही कि उन्हें 17 किलोमीटर दूर जीटीबी नगर के अस्पताल ले जाया गया जहां नवजोत सिंह को मृत घोषित कर दिया गया। कार चलाने वाली महिला और उसके पति को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जो गुरुग्राम के रहने वाले हैं और कारोबारी हैं। एक्सीडेंट में कार भी बुरी तरह डैमेज हुई है ।

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राहुल गांधी का पंजाब दौरा: बाढ़ पीड़ितों से मिले, सरकार पर निशाना साधा

राहुल गांधी का पंजाब दौरा: बाढ़ पीड़ितों से मिले, सरकार पर निशाना साधा

अमृतसर/गुरदासपुर, 15 सितंबर 2025 पंजाब में हाल ही में आई बाढ़ से हुई तबाही का जायज़ा लेने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी सोमवार को पंजाब पहुँचे। उन्होंने अमृतसर जिले के अजनाला क्षेत्र के घोनेवाल गांव से अपने दौरे की शुरुआत की। यहाँ उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, खेतों और टूटे हुए घरों का मुआयना किया और ग्रामीणों की समस्याएँ सुनीं। राहुल गांधी का कार्यक्रम अमृतसर, गुरदासपुर और पठानकोट जिलों के कई गांवों तक फैला है। उन्होंने गुरुद्वारा बाबा बुधा साहिब (रामदास, अमृतसर) में मत्था टेका और स्थानीय लोगों से बातचीत की। इसके बाद वे गुरदासपुर के गुरचाक और मककोरा पट्‌टन गांवों सहित सीमावर्ती क्षेत्रों का भी दौरा करेंगे। बाढ़ से सबसे ज़्यादा नुकसान किसानों को हुआ है। राज्य सरकार के मुताबिक अब तक लगभग 1.98 लाख हेक्टेयर फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। राहुल गांधी ने खेतों का मुआयना करते हुए कहा कि कांग्रेस किसानों की हरसंभव मदद करेगी। उन्होंने पीड़ित परिवारों को भरोसा दिलाया कि उनकी आवाज़ दिल्ली तक पहुँचाई जाएगी। आपदा प्रबंधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ से अब तक 56 लोगों की मौत हो चुकी है और हज़ारों परिवार बेघर हो गए हैं। कई गांवों में सड़कें और पुल टूट गए हैं, जिससे राहत कार्य प्रभावित हो रहा है। राहुल गांधी के दौरे से पहले भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि “कांग्रेस-शासित राज्यों ने पंजाब की मदद के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। सिर्फ़ दौरा करना पर्याप्त नहीं है।” वहीं, पंजाब कांग्रेस ने कहा कि राहुल गांधी का दौरा जनता के दुख-दर्द को करीब से समझने और समाधान निकालने की दिशा में एक अहम कदम है। – जनता की उम्मीदें ग्रामीणों ने राहुल गांधी से अपनी परेशानियाँ साझा करते हुए कहा कि बाढ़ के कारण उनका सबकुछ बर्बाद हो गया है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उन्हें उचित मुआवज़ा और राहत प्रदान करेंगी।

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पीएम मोदी का बिहार दौरा

पीएम मोदी का बिहार दौरा

पीएम मोदी का बिहार दौरा: पूर्णिया में बड़े विकास प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन, एयरपोर्ट व मखाना बोर्ड शामिल पूर्णिया (बिहार), 15 सितंबर 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पूर्णिया के दौरे पर रहे और यहां राज्य के लिए कई बड़े विकास परियोजनाओं का उद्घाटन तथा शिलान्यास किया। केंद्रीय नेतृत्व के अनुसार इन परियोजनाओं का उद्देश्य स्थानीय बुनियादी ढांचे, परिवहन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है।  पीएम ने इस दौरे के दौरान उत्तर बिहार के एक लंबे समय से प्रतीक्षित कदम के रूप में पूर्णिया एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का भी उद्धाटन किया, जिसे क्षेत्र की हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। साथ ही केंद्र और राज्य के सहयोग से कई लोक-कल्याणकारी और अवसंरचनात्मक परियोजनाओं की घोषणा की गई, जिनकी कुल लागत मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक करीब ₹36,000–40,000 करोड़ के आसपास बताई जा रही है।  प्रधानमंत्री का यह दौरा उस राजनीतिक और विकासात्मक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है जिसमें बिहार अगले कुछ महीनों में निर्वाचन की तैयारियों के बीच है; केन्द्र की नीतियों और प्रोजेक्ट्स को स्थानीय स्तर पर दिखाने का यह एक रणनीतिक अवसर भी माना जा रहा है। पदयात्रा के एजेंडे में कृषि, ऊर्जा, रेल व महिला-समर्थन से जुड़े कई प्रोजेक्ट शामिल थे, जिनके जरिए रोजगार और कनेक्टिविटी में बढ़ोतरी का दावा किया गया है।  इस यात्रा से पहले प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल (कोलकाता) में 16वीं कम्बाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन भी किया — केंद्रीय कार्यक्रमों और राज्य यात्राओं का यह समन्वय बताता है कि इसी दिन पीएम कई राज्यों के कार्यक्रमों में जुड़े हुए थे। केंद्र सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर भी 13-15 सितंबर के बीच कई पूर्वनिर्धारित राज्यों के दौरे का बयान जारी किया गया था।  स्थानीय प्रतिक्रिया के संदर्भ में, क्षेत्रीय राजनीतिक दलों व नागरिकों ने परियोजनाओं के लाभ-हानि दोनों पहलुओं पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए हैं — जहां कुछ लोगों ने विकास और कनेक्टिविटी की उम्मीद जताई, वहीं आलोचक परियोजनाओं की प्राथमिकता व चुनावी मकसद पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे समय में यह देखना बाकी है कि घोषित निवेश स्थानीय लोगों तक कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ पहुंचेगा। 

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