सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पावन और फलदायी माना जाता है। विशेष रूप से सावन के सोमवार को व्रत और जलाभिषेक करने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं। भक्तगण इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, भस्म आदि अर्पित कर पूजन करते हैं। लेकिन कई बार श्रद्धा के साथ की गई पूजा भी अशुद्धियों और अनजाने में हुई गलतियों के कारण पूर्ण फल नहीं देती। इसलिए जरूरी है कि सावन सोमवार (Savan Somwar) के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखा जाए।
शिवलिंग पर जल अर्पण की विधि (Lord Shiva Puja Vidhi)
जब आप शिव मंदिर या घर में शिवलिंग की पूजा करने जाएं, तो पूजन स्थल पर उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों। पूजा में तांबे, पीतल या चांदी के लोटे में जल लेकर विधिपूर्वक अर्पण करें।
सबसे पहले शिवलिंग के दाहिने भाग पर जल चढ़ाएं, जो गणेश जी का प्रतीक स्थान माना जाता है।
इसके बाद बाएं भाग पर जल अर्पित करें, जो भगवान कार्तिकेय से संबंधित माना जाता है।
फिर शिवलिंग के मध्य भाग में जल चढ़ाएं, जिसे अशोक सुंदरी (शिव-पार्वती की पुत्री) का स्थान कहा गया है।
इसके बाद शिवलिंग के गोलाकार आधार पर जल चढ़ाएं, जिसे माता पार्वती के कर-स्पर्श जैसा माना जाता है।
अंत में शिवलिंग के मुख्य ऊपरी भाग पर जल अर्पित करें, जो स्वयं भगवान शिव का प्रतीक होता है।
मंत्र जाप का महत्व:
पूरे जलाभिषेक के दौरान श्रद्धा भाव से “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें। यह न केवल पूजा को पूर्ण बनाता है, बल्कि मन को भी एकाग्र और शुद्ध करता है, जिससे भगवान शिव की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।
सावन में जलाभिषेक का शुभ समय (Sawan Somvar Puja Vidhi 2025)
1. ब्रह्म मुहूर्त:
शिवलिंग पर जल अर्पण करने का सर्वोत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त होता है, जो सूर्योदय से करीब डेढ़-दो घंटे पहले माना जाता है। यह समय आत्मिक शुद्धि, ध्यान और ईश्वर की साधना के लिए अत्यंत शुभ और प्रभावकारी माना गया है।
2. प्रातःकाल (सुबह 4 से 6 बजे):
यदि ब्रह्म मुहूर्त में पूजा संभव न हो, तो सुबह 4 बजे से 6 बजे के बीच शिवलिंग पर जलाभिषेक करना भी अत्यंत लाभकारी होता है। इस समय शरीर, मन और वातावरण तीनों शुद्ध रहते हैं, जिससे पूजा में एक विशेष ऊर्जा और पवित्रता बनी रहती है।
3. सुबह 7:00 से 11:00 बजे तक:
जो लोग बहुत जल्दी नहीं उठ पाते, उनके लिए सुबह 7 बजे से 11 बजे के बीच भी शिव पूजन करना शुभ माना जाता है। इस समय की गई पूजा यदि पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक की जाए, तो भगवान शिव अवश्य प्रसन्न होते हैं और भक्त को मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।
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जल चढ़ाते समय न करें ये गलतियां
- तांबे के लोटे का ही प्रयोग करें
जलाभिषेक के लिए तांबे का पात्र सर्वोत्तम माना गया है। प्लास्टिक, स्टील या एल्यूमिनियम के बर्तन का प्रयोग न करें। - धार सीधी न गिराएं
जल की धारा को शिवलिंग के मध्य भाग (गर्भ) पर तेज़ी से नहीं गिराना चाहिए। इससे ऊर्जा बाधित होती है। जल को धीरे-धीरे और श्रद्धा के साथ चढ़ाएं। - कटे-फटे बेलपत्र न चढ़ाएं
बेलपत्र पर कोई छेद या कटाव नहीं होना चाहिए। शुद्ध, तीन पत्तियों वाला और साबूत बेलपत्र ही शिव को चढ़ाना चाहिए। - शिवलिंग पर सिंदूर, हल्दी या कुंकुम न चढ़ाएं
शिवलिंग (Shivling) पर सिंदूर या हल्दी चढ़ाना निषेध है। ये सामग्री देवी पूजन के लिए होती हैं, न कि शिव पूजन के लिए। - जल अर्पण करते समय मौन या मंत्रोच्चार बनाए रखें
जलाभिषेक करते समय बातचीत या शोर-शराबा करने से पूजा का प्रभाव घटता है। शांत वातावरण में, मन को एकाग्र कर भगवान को जल अर्पित करें।
नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें।
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