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ग्लोबल इक्विटी फंड्स में लगातार चौथे सप्ताह निवेश, 20.01 अरब डॉलर का इनफ्लो; टेक फंड्स से निकला पैसा

17 अक्टूबर 2026: वैश्विक शेयर बाजारों में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, 14 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में ग्लोबल इक्विटी फंड्स में 20.01 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। यह लगातार चौथा सप्ताह रहा, जब इन फंड्स में नेट इनफ्लो देखने को मिला। हालांकि, टेक्नोलॉजी आधारित फंड्स से निकासी ने संकेत दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक शेयरों के ऊंचे मूल्यांकन को लेकर निवेशक सतर्कता बरत रहे हैं। अमेरिकी इक्विटी फंड्स में सबसे ज्यादा निवेश क्षेत्रीय आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी इक्विटी फंड्स में करीब 16.68 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश आया। वहीं, यूरोपीय इक्विटी फंड्स में लगभग 2.35 अरब डॉलर का इनफ्लो दर्ज किया गया। एशियाई इक्विटी फंड्स में भी शुद्ध खरीदारी देखने को मिली। अमेरिकी फंड्स में बड़े पैमाने पर निवेश से संकेत मिलता है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल शेयर बाजारों में अपनी भागीदारी बनाए हुए हैं। टेक्नोलॉजी फंड्स से 1.21 अरब डॉलर की निकासी ग्लोबल इक्विटी फंड्स में कुल निवेश मजबूत रहने के बावजूद टेक्नोलॉजी सेक्टर के फंड्स से करीब 1.21 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी हुई। हालिया तेजी और ऊंचे मूल्यांकन के बाद कुछ निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली करने या जोखिम कम करने की कोशिश इसकी संभावित वजह हो सकती है। AI से जुड़ी कंपनियों में निवेश को लेकर भी बाजार में सतर्कता बनी हुई है। हालांकि, फंड्स से निकासी के आंकड़े अकेले यह साबित नहीं करते कि निवेशकों का टेक्नोलॉजी सेक्टर से भरोसा पूरी तरह कमजोर हो गया है। फाइनेंशियल सेक्टर फंड्स में बढ़ी मांग टेक्नोलॉजी फंड्स के विपरीत, फाइनेंशियल सेक्टर के फंड्स में करीब 1.73 अरब डॉलर का निवेश आया। ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बने रहने की संभावना कुछ बैंकों और वित्तीय कंपनियों की कमाई को समर्थन दे सकती है। हालांकि, ऊंची दरों का असर सभी वित्तीय संस्थानों पर एक जैसा नहीं होता। कर्ज की मांग, फंडिंग लागत और ऋण चूक जैसे कारक भी इस क्षेत्र के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं। बॉन्ड फंड्स में भी 22.65 अरब डॉलर का निवेश सप्ताह के दौरान ग्लोबल बॉन्ड फंड्स में करीब 22.65 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। शॉर्ट-टर्म बॉन्ड और सरकारी ऋण से जुड़े उत्पादों में निवेशकों की दिलचस्पी देखने को मिली। बॉन्ड फंड्स में बढ़ता निवेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब वैश्विक बाजार ब्याज दरों के भविष्य और महंगाई की दिशा का आकलन कर रहे हैं। निवेशक अपने पोर्टफोलियो में जोखिम और संभावित रिटर्न के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। गोल्ड और कीमती धातुओं में भी निवेश भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई को लेकर अनिश्चितता के बीच कीमती धातुओं से जुड़े फंड्स में भी निवेश जारी रहा। इससे संकेत मिलता है कि कुछ निवेशक शेयर बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखते हुए पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए रक्षात्मक परिसंपत्तियों का सहारा ले रहे हैं। बाजार के लिए क्या हैं संकेत? ग्लोबल इक्विटी फंड्स में लगातार चार सप्ताह तक इनफ्लो यह दर्शाता है कि वैश्विक शेयर बाजारों में निवेश की रुचि बनी हुई है। वहीं, टेक्नोलॉजी फंड्स से निकासी संकेत देती है कि निवेशक ऊंचे मूल्यांकन वाले AI और टेक शेयरों में जोखिम का दोबारा आकलन कर सकते हैं। फाइनेंशियल सेक्टर और बॉन्ड फंड्स में निवेश से यह भी पता चलता है कि निवेशक अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों में अवसर तलाश रहे हैं। हालांकि, आगे निवेश का रुख केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीति, महंगाई, कंपनियों की कमाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। स्रोत: Reuters, LSEG जय राष्ट्र न्यूज़

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AI निवेश में तेजी से बदल सकती है वैश्विक ब्याज दरों की नीति, लंबे समय तक ऊंची दरें रखने पर विचार कर रहे केंद्रीय बैंक

बैंकॉक, 17 अक्टूबर 2026: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर पर दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे निवेश ने केंद्रीय बैंकों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर चिप्स, बिजली आपूर्ति और कंप्यूटिंग क्षमता पर बड़े पैमाने पर हो रहे खर्च से मांग बढ़ रही है। इससे महंगाई का दबाव बने रहने की आशंका है। ऐसे में कई केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने या जरूरत पड़ने पर मौद्रिक नीति को और सख्त करने पर विचार कर सकते हैं। AI बूम से क्यों बढ़ रही पूंजी की मांग? AI कंपनियों और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, पावर ग्रिड और कूलिंग सिस्टम विकसित करने के लिए भारी निवेश की जरूरत है। इस वजह से कर्ज और पूंजी की मांग बढ़ रही है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, AI से उत्पादकता में होने वाला बड़ा सुधार भविष्य में दिखाई दे सकता है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से खर्च बढ़ने का असर मांग और कीमतों पर पहले पड़ सकता है। यदि उत्पादन क्षमता उसी गति से नहीं बढ़ती, तो महंगाई का दबाव लंबे समय तक बना रह सकता है। केंद्रीय बैंकों की चिंता क्या है? अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की बैठकों के दौरान मौद्रिक नीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा में AI निवेश के आर्थिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता खर्च अर्थव्यवस्था में मांग को बढ़ावा दे सकता है। हालांकि, यदि वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति मांग के अनुरूप नहीं बढ़ती, तो कीमतों और वेतन पर ऊपर की ओर दबाव बना रह सकता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। उन्हें महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाना होगा। ECB, Bank of England और BOJ पर भी नजर Reuters के अनुसार, यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB), बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान (BOJ) की मौद्रिक नीतियां भी वैश्विक बाजारों के लिए अहम हैं। इन केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर संबंधी फैसलों और आगे की नीति के संकेतों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। AI निवेश के अलावा रक्षा क्षेत्र, ऊर्जा परिवर्तन और औद्योगिक नीतियों से जुड़े खर्च भी वैश्विक स्तर पर पूंजी की मांग को ऊंचा रख सकते हैं। इन सभी कारकों का असर ब्याज दरों और वित्तीय परिस्थितियों पर पड़ सकता है। क्या बढ़ सकता है ‘न्यूट्रल इंटरेस्ट रेट’? अर्थशास्त्री इस संभावना पर भी चर्चा कर रहे हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में न्यूट्रल इंटरेस्ट रेट का स्तर संरचनात्मक रूप से बढ़ सकता है। यह वह अनुमानित ब्याज दर है, जिस पर मौद्रिक नीति न तो अर्थव्यवस्था को विशेष रूप से प्रोत्साहित करती है और न ही उस पर खास दबाव डालती है। यदि निवेश, सरकारी खर्च और पूंजी की मांग लंबे समय तक ऊंची रहती है, तो न्यूट्रल दर भी ऊपर जा सकती है। ऐसी स्थिति में महामारी से पहले के दौर जैसी बेहद सस्ती पूंजी और कम ब्याज दरों की वापसी कठिन हो सकती है। हालांकि, न्यूट्रल दर का वास्तविक स्तर सीधे दिखाई नहीं देता और इसका आकलन आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है। AI निवेश में गिरावट से भी बढ़ सकता है जोखिम AI बूम का असर केवल महंगाई और ब्याज दरों तक सीमित नहीं है। यदि कंपनियों को AI में किए गए भारी निवेश से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता या AI कंपनियों के मूल्यांकन में तेज गिरावट आती है, तो वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। IMF ने भी AI निवेश में संभावित कमजोरी और बाजार में तेज गिरावट से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर जोखिमों की ओर ध्यान दिलाया है। इस तरह AI निवेश में तेजी और अचानक गिरावट, दोनों ही परिस्थितियां केंद्रीय बैंकों के लिए नीतिगत चुनौतियां पैदा कर सकती हैं। कंपनियों, सरकारों और कर्जदारों पर क्या होगा असर? यदि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो कंपनियों और सरकारों के लिए कर्ज लेना महंगा हो सकता है। खासकर अधिक कर्ज वाली अर्थव्यवस्थाओं और AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़े ऋण लेने वाली कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, ऊंची ब्याज दरें महंगाई को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं। केंद्रीय बैंकों के सामने चुनौती यह होगी कि वे बढ़ते निवेश से मिलने वाले संभावित उत्पादकता लाभ और उससे पैदा होने वाले महंगाई संबंधी जोखिमों का आकलन करते हुए उचित नीति तय करें। AI का बढ़ता निवेश अब केवल तकनीकी क्षेत्र की कहानी नहीं रह गया है। इसका प्रभाव वैश्विक पूंजी प्रवाह, महंगाई, बाजार और आने वाले वर्षों की मौद्रिक नीति पर भी पड़ सकता है। स्रोत: Reuters, IMF जय राष्ट्र न्यूज़

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IMF chief Kristalina Georgieva की चेतावनी—Safeguards और ethical framework के बिना AI के risks benefits से बड़े हो सकते हैं

वॉशिंगटन, 17 अक्टूबर 2026: International Monetary Fund (IMF) की Managing Director Kristalina Georgieva ने Artificial Intelligence को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर AI के विकास और इस्तेमाल के साथ मजबूत safeguards, governance और ethical frameworks नहीं बनाए गए, तो इसके risks इसके economic और social benefits से भी बड़े हो सकते हैं। AI productivity बढ़ा सकता है, लेकिन खतरे भी बड़े हैं Georgieva ने कहा कि AI global productivity, healthcare, education और innovation को तेजी से आगे बढ़ा सकता है। लेकिन इसके साथ job displacement, inequality, misinformation, cyber risks और concentration of power जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। Ethical framework क्यों जरूरी? IMF chief ने जोर दिया कि AI development केवल technology companies पर नहीं छोड़ा जा सकता। Governments, regulators और private sector को मिलकर ऐसे rules बनाने होंगे जो transparency, accountability और human oversight सुनिश्चित करें। Developing countries पर असर ज्यादा हो सकता है Georgieva ने चेताया कि जिन देशों के पास digital infrastructure और skilled workforce कमजोर है, वे AI transition में पीछे छूट सकते हैं। इससे global inequality और बढ़ सकती है। इसी वजह से AI access और training को inclusive बनाने पर जोर दिया गया। Jobs पर भी बड़ा असर IMF पहले भी estimate कर चुका है कि AI दुनिया भर में लगभग 40% jobs को प्रभावित कर सकता है। Advanced economies में यह share और ज्यादा हो सकता है। कुछ jobs की productivity बढ़ेगी, जबकि कुछ roles automation के कारण खत्म या बदल सकते हैं। “Move fast” approach पर सवाल Georgieva ने संकेत दिया कि AI development में केवल speed और competition पर focus करना खतरनाक हो सकता है। उनके मुताबिक innovation को रोकना सही नहीं है, लेकिन responsible deployment और clear safeguards जरूरी हैं। Global coordination की जरूरत IMF chief ने governments से AI governance पर international cooperation बढ़ाने को कहा। उनका मानना है कि technology global है, इसलिए उसके risks को manage करने के लिए भी cross-border coordination जरूरी होगा। source – Reuters, IMF जय राष्ट्र न्यूज़

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रुपये को संभालने के लिए RBI की रणनीति में बदलाव, डॉलर की बिक्री के साथ ब्याज दरों पर भी जोर

मुंबई, 17 अक्टूबर 2026: भारतीय रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब केवल डॉलर की बिक्री और विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप पर निर्भर नहीं दिख रहा है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक परिस्थितियों को सावधानीपूर्वक सख्त करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसमें ब्याज दरों में बढ़ोतरी, बाजार में उपलब्ध नकदी कम करना और बॉन्ड की बिक्री जैसे उपाय शामिल हैं। इसका उद्देश्य महंगाई पर नियंत्रण के साथ-साथ पूंजी के बाहर जाने और रुपये की कमजोरी को सीमित करना है। चार साल बाद बढ़ाई गई ब्याज दर अक्टूबर में RBI ने नीतिगत ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की। यह चार साल में पहली दर वृद्धि बताई गई है। इसके अलावा, बैंकिंग प्रणाली में उपलब्ध नकदी कम करने के लिए बॉन्ड बिक्री और रिजर्व से जुड़े उपाय भी अपनाए गए हैं। इन कदमों से वित्तीय परिस्थितियों को सख्त करने और रुपये को समर्थन देने की कोशिश की जा रही है। 2026 में करीब 6% कमजोर हुआ रुपया इस साल भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 6% कमजोर हुआ है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी और डॉलर की बढ़ती मांग ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है। हालांकि, RBI के हालिया कदमों के बाद रुपया अपने निचले स्तर से करीब 2% उबरने में कामयाब रहा है। केवल डॉलर बेचने से नहीं बनेगी बात? रुपये की गिरावट को थामने के लिए RBI विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ाता रहा है। हालांकि, लगातार हस्तक्षेप से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ सकता है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल विभिन्न विदेशी मुद्रा उपायों के तहत RBI करीब 150 अरब डॉलर तक का इस्तेमाल कर चुका है। ऐसे में ब्याज दरों और नकदी प्रबंधन से जुड़े उपाय रुपये को समर्थन देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं। दिसंबर में फिर बढ़ सकती हैं ब्याज दरें? सितंबर में महंगाई दर 5.54% तक पहुंचने के बाद दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी को लेकर बाजार में चर्चा तेज हुई है। कुछ विश्लेषक 50 बेसिस पॉइंट तक की सख्ती की संभावना जता रहे हैं। हालांकि, RBI ने दिसंबर में ऐसी किसी बढ़ोतरी की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से निकाले 33 अरब डॉलर रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से करीब 33 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। घरेलू ब्याज दरें और यील्ड बढ़ने से रुपये में निवेश की आकर्षकता बढ़ सकती है। इससे पूंजी की निकासी पर अंकुश लगाने में मदद मिलने की संभावना है, हालांकि निवेशकों के फैसले वैश्विक परिस्थितियों और बाजार की धारणा पर भी निर्भर करेंगे। ज्यादा सख्ती से अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी रुपये को सहारा दे सकती है, लेकिन इसके साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं। कर्ज महंगा होने से कारोबार, आवास ऋण लेने वालों और छोटे कर्जदारों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से RBI के सामने रुपये को स्थिर रखने, महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने और आर्थिक विकास को समर्थन देने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक फिलहाल 2013 जैसी अचानक और तीखी आपातकालीन सख्ती के बजाय सावधानीपूर्वक कदम उठाने की रणनीति अपनाता दिख रहा है। स्रोत: Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP founder Abhijeet Dipke गिरफ्तार, ‘Lehra Do Tiranga’ rally से पहले preventive action; Neha Bora detention के बाद रिहा

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026: CJP founder Abhijeet Dipke को Delhi Police ने ‘Lehra Do Tiranga’ rally से पहले preventive action के तहत हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया। Police का कहना है कि यह कदम law-and-order situation और संभावित breach of peace को देखते हुए उठाया गया। वहीं student activist Neha Bora को भी कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। Rally से पहले बढ़ी police कार्रवाई Connaught Place और Central Delhi में CJP की rally को लेकर पहले से heavy security deployment किया गया था। Police ने organisers को बिना permission gathering या march न करने की चेतावनी दी थी। इसी backdrop में Dipke के खिलाफ preventive action लिया गया। Abhijeet Dipke की गिरफ्तारी क्यों हुई? Police sources के मुताबिक Dipke को breach of peace रोकने के मकसद से पकड़ा गया। CJP ने इसे political suppression बताया है और कहा कि उनका programme peaceful था। Neha Bora को भी लिया गया detention में AISA president Neha Bora को भी police ने rally से जुड़े security arrangements के दौरान detention में लिया था। हालांकि कुछ समय बाद उन्हें release कर दिया गया। Connaught Place बना security zone Central Park, Rajiv Chowk, Parliament Street और आसपास के इलाकों में barricading, checking और police deployment बढ़ाई गई। ‘Lehra Do Tiranga’ programme के चलते Central Delhi में traffic restrictions भी लागू रहे। CJP की मुख्य मांगें क्या हैं? CJP Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे, voter-list revision पर जवाबदेही और हाल के police action के खिलाफ protest कर रही है। Group ने Jantar Mantar और Connaught Place पर लगातार demonstrations की कोशिश की है। राजनीतिक विवाद और तेज Dipke की गिरफ्तारी के बाद opposition leaders ने police action पर सवाल उठाए हैं, जबकि Delhi Police का कहना है कि उसका focus public order और safety बनाए रखना है। source – Reuters, Delhi Police जय राष्ट्र न्यूज़

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दुष्यंत गौतम की नियुक्ति का विरोध तेज, अंकिता भंडारी के माता-पिता ने राष्ट्रपति से लगाई गुहार

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026: अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित ‘VIP एंगल’ को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। अंकिता के माता-पिता ने दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप की अपील की है। परिवार का कहना है कि कथित VIP एंगल की CBI जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर आगे की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। माता-पिता ने राष्ट्रपति से क्या अपील की? अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और मां सोनी देवी ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति की खबर पर दुख और नाराजगी जताई है। उन्होंने राष्ट्रपति से अपील की कि कथित VIP एंगल की जांच पूरी होने तक नियुक्ति को रोकने पर विचार किया जाए। परिवार ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे अपने आंदोलन को देशभर में ले जा सकते हैं। दुष्यंत गौतम का नाम विवाद में कैसे आया? 2022 के अंकिता भंडारी हत्याकांड में मुख्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। हालांकि, परिवार लंबे समय से मामले में कथित VIP की भूमिका की जांच की मांग करता रहा है। 2025 के अंत में सामने आए कुछ ऑडियो-वीडियो क्लिप के बाद इस विवाद में दुष्यंत कुमार गौतम का नाम जोड़ा गया। गौतम ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें झूठा और साजिश का हिस्सा बताया है। इन आरोपों को अदालत में सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। राहुल गांधी ने भी राष्ट्रपति को लिखा पत्र लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार करने और इसे फिलहाल रोकने की अपील की है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने इंडिया गेट पर अंकिता के माता-पिता से मुलाकात भी की थी। इस मुलाकात के बाद मामले में कथित VIP एंगल की जांच और नियुक्ति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई। विरोध कर रहे कांग्रेस नेताओं पर FIR उत्तराखंड में भी इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत करीब 30 कांग्रेस नेताओं के खिलाफ देहरादून में प्रदर्शन के सिलसिले में FIR दर्ज किए जाने की खबर है। ये नेता दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। इस कार्रवाई के बाद मामले ने राज्य की राजनीति में भी नया मोड़ ले लिया है। उत्तराखंड सरकार ने क्या कहा? राज्य सरकार का कहना है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, विशेष जांच दल (SIT) का गठन हुआ और परिवार की मांग पर CBI जांच की सिफारिश भी की गई। सरकार ने विपक्ष पर मामले का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि यदि किसी के पास ठोस सबूत हैं, तो उन्हें जांच एजेंसियों या अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। CBI जांच के निष्कर्षों पर टिकी नजर फिलहाल विवाद के केंद्र में कथित VIP एंगल की जांच और दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को लेकर उठ रही आपत्तियां हैं। अंकिता के माता-पिता और विपक्षी नेता नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं, जबकि गौतम अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार कर चुके हैं। अब जांच के निष्कर्षों और संबंधित अधिकारियों की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। स्रोत – The Indian Express, Times of India, The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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नवरात्रि के बीच मां भगवती मंदिर में भीषण आग, ऐतिहासिक मंदिर का मुख्य हिस्सा जलकर खाक

बागेश्वर, 17 अक्टूबर 2026: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के बदियाकोट स्थित प्राचीन आदि बद्री मां नंदा भगवती मंदिर में नवरात्रि के दौरान भीषण आग लग गई। आग की चपेट में आने से मंदिर के मुख्य ढांचे, पूजा मंडप और पारंपरिक लकड़ी की नक्काशी को भारी नुकसान पहुंचा। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मंदिर सदियों से क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। लकड़ी का मुख्य ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त मंदिर का बड़ा हिस्सा लकड़ी से बना था और उस पर पारंपरिक शैली की बारीक नक्काशी की गई थी। आग तेजी से फैलने के कारण मंदिर के मुख्य ढांचे, मूर्ति स्थल और पूजा मंडप को भारी नुकसान पहुंचा। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि आग की भीषण गर्मी से मंदिर की घंटियां तक पिघल गईं। इस घटना से मंदिर की पारंपरिक वास्तुकला और ऐतिहासिक विरासत को बड़ा नुकसान हुआ है। आग लगने की वजह अभी स्पष्ट नहीं मंदिर में आग लगने के सटीक कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। नवरात्रि के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दीपक जलाए जाने के कारण उससे आग लगने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, मंदिर में बिजली का कनेक्शन होने के चलते शॉर्ट सर्किट की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है। प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। आग लगने के वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। दुर्गम इलाके ने बढ़ाई राहत कार्यों में मुश्किल बदियाकोट हिमालयी क्षेत्र में स्थित एक दुर्गम इलाका है। यहां तक दमकल वाहनों की तत्काल पहुंच आसान नहीं होने के कारण आग बुझाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने आग पर काबू पाने के प्रयास किए, लेकिन आग की तीव्रता के कारण मंदिर को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। दानपुर क्षेत्र का प्रमुख आस्था केंद्र आदि बद्री मां नंदा भगवती मंदिर को दानपुर क्षेत्र की 14 पट्टियों का साझा शक्तिपीठ माना जाता है। मंदिर से जुड़ी स्थानीय धार्मिक परंपराएं और हर आठ वर्ष में आयोजित होने वाली ‘आठ्यौं जात’ भी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में मंदिर को हुआ नुकसान केवल धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे स्थानीय समुदाय की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए भी बड़ी क्षति माना जा रहा है। नुकसान का आकलन जारी मंदिर समिति ने पुलिस को शिकायत दी है। प्रशासन आग लगने के कारणों की जांच करने के साथ मंदिर को हुए नुकसान का आकलन कर रहा है। यह मंदिर उत्तराखंड सरकार के ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ का भी हिस्सा है। मंदिर के विकास के लिए करीब 1.1 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने की जानकारी सामने आई है। फिलहाल, जांच और नुकसान के आकलन के बाद ही मंदिर की स्थिति तथा आगे की बहाली से जुड़ी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। स्रोत – दैनिक जागरण, टाइम्स ऑफ इंडिया, दैनिक ट्रिब्यून जय राष्ट्र न्यूज़

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अभिजीत दिपके आणि दिल्ली पोलिसांमध्ये घरातच शाब्दिक वाद? VIDEO व्हायरल

नवी दिल्ली, 17 ऑक्टोबर 2026: कॉकroach जनता पार्टी (CJP) चे संस्थापक अभिजीत दिपके यांच्या घरी दिल्ली पोलीस पोहोचल्यानंतर झालेल्या शाब्दिक वादाचा व्हिडिओ सोशल मीडियावर व्हायरल झाला आहे. CJP च्या ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रमापूर्वी हा प्रकार घडला. पोलिसांनी दिपके यांना कनॉट प्लेस येथे परवानगीशिवाय मोर्चा किंवा मोठा जमाव आयोजित न करण्याबाबत नोटीस दिली होती. “माझ्या घरी कोण येईल, हे तुम्ही ठरवणार नाही” व्हायरल व्हिडिओमध्ये अभिजीत दिपके आणि पोलीस अधिकाऱ्यांमध्ये तीव्र शाब्दिक वाद होताना दिसत आहे. दिपके पोलिसांच्या उपस्थितीवर आणि त्यांच्या कारवाईवर प्रश्न उपस्थित करताना दिसतात. दुसऱ्या व्हिडिओमध्ये दिपके यांनी “मी एकटाच आहे” असे सांगत ताब्यात घेण्याच्या कारवाईवर आक्षेप घेतल्याचे दिसते. या व्हिडिओंमुळे सोशल मीडियावर या प्रकरणाची चर्चा सुरू झाली आहे. दिल्ली पोलिसांनी दिली होती नोटीस दिल्ली पोलिसांनी दिपके यांना कनॉट प्लेस येथील सेंट्रल पार्कमध्ये प्रस्तावित तिरंगा कार्यक्रम आयोजित न करण्याबाबत नोटीस दिली होती. संबंधित परिसरात भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) च्या कलम 163 अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू असल्याचे पोलिसांनी स्पष्ट केले होते. तिरंगा फडकवण्यावर बंदी नाही, मात्र मोर्चाला आक्षेप पोलिसांच्या नोटीसमध्ये तिरंगा फडकवण्यावर बंदी नसल्याचे स्पष्ट करण्यात आले होते. मात्र, आवश्यक परवानगीशिवाय मोठा जमाव किंवा मोर्चा आयोजित केल्यास कायदेशीर कारवाई होऊ शकते, असा इशाराही देण्यात आला होता. दिपके यांना प्रतिबंधात्मक कारवाईअंतर्गत ताब्यात घेतले 16 ऑक्टोबर रोजी कार्यक्रमासाठी घरातून बाहेर पडताना दिल्ली पोलिसांनी अभिजीत दिपके यांना प्रतिबंधात्मक कारवाईअंतर्गत ताब्यात घेतले. या कारवाईचा व्हिडिओही सोशल मीडियावर मोठ्या प्रमाणावर शेअर झाला. व्हिडिओमुळे राजकीय वादाला पुन्हा हवा CJP समर्थकांनी पोलिसांच्या कारवाईवर प्रश्न उपस्थित केले आहेत. दुसरीकडे, दिल्ली पोलिसांनी कायदा-सुव्यवस्था राखणे, वाहतूक सुरळीत ठेवणे आणि गर्दीवर नियंत्रण ठेवणे या कारणांचा हवाला दिला आहे. ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रमाच्या पार्श्वभूमीवर घडलेल्या या घटनांमुळे अभिजीत दिपके आणि दिल्ली पोलिसांमधील वाद पुन्हा चर्चेत आला आहे. स्रोत – Times of India, Aaj Tak जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP की ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली से पहले दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, 28 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026: कॉकroach जनता पार्टी (CJP) की ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कनॉट प्लेस और आसपास के नई दिल्ली जिले में 28,000 से अधिक पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती की गई। प्रशासन ने सेंट्रल पार्क को बंद रखा, जबकि संवेदनशील इलाकों में निषेधाज्ञा लागू रही। 28 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती सुरक्षा व्यवस्था के तहत दिल्ली पुलिस के करीब 6,000 जवानों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की लगभग 220 कंपनियां तैनात की गईं। एक कंपनी में औसतन करीब 100 जवान होते हैं। इस तैनाती के चलते कुल सुरक्षाकर्मियों की संख्या 28,000 से अधिक बताई गई। सेंट्रल पार्क बंद, धारा 163 के तहत प्रतिबंध कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को प्रशासनिक कारणों से बंद रखा गया। इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू रहे। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य बिना अनुमति बड़ी सभाओं और जुलूसों को रोकना तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। पुलिस ने रैली की अनुमति नहीं दी दिल्ली पुलिस ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीप्ते को नोटिस जारी कर कनॉट प्लेस में रैली या प्रदर्शन आयोजित नहीं करने की हिदायत दी थी। पुलिस ने संभावित यातायात बाधा, भगदड़ के खतरे और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही प्रभावित होने जैसी चिंताओं का हवाला दिया। कनॉट प्लेस में CCTV निगरानी और बैरिकेडिंग सुरक्षा व्यवस्था के तहत सेंट्रल पार्क, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन और आसपास के संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त CCTV निगरानी और बैरिकेडिंग की गई। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए हिरासत में लिए गए लोगों को ले जाने हेतु बसों की भी व्यवस्था की गई। CJP संस्थापक अभिजीत दीप्ते गिरफ्तार रैली से पहले दिल्ली पुलिस ने CJP संस्थापक अभिजीत दीप्ते को गिरफ्तार कर लिया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह कार्रवाई शांति भंग होने की आशंका को रोकने के उद्देश्य से की गई। छात्र कार्यकर्ता नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया था, हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। क्यों बुलाई गई थी ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली? CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े आरोपों और पार्टी के गिरफ्तार नेताओं के समर्थन में रैली का आह्वान किया था। पार्टी ने मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया में राजनीतिक पक्षपात किए जाने के आरोपों से इनकार किया है। रैली को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रतिबंधों के बीच दिल्ली पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखने, यातायात सुचारु रखने और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही सुनिश्चित करने की रही। स्रोत – Reuters, The New Indian Express, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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Elon Musk की Tesla Roadster का हैरतअंगेज Stunt, हवा में Flip और SpaceX Thrusters से Controlled Landing

टेक्सास, 16 अक्टूबर 2026: Elon Musk की कंपनी Tesla ने अपनी अगली पीढ़ी की Roadster का एक नाटकीय डेमो पेश किया, जिसमें इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कार को रैंप पर उल्टा चलते, हवा में उछलते, मिड-एयर फ्लिप करते और थ्रस्टर्स की मदद से नियंत्रित लैंडिंग करते दिखाया गया। इस प्रदर्शन को Tesla और SpaceX की इंजीनियरिंग तकनीकों के संयोजन के रूप में पेश किया गया। हवा में कैसे उड़ी Roadster? डेमो से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, Roadster के निचले हिस्से में फैन-आधारित सक्शन सिस्टम दिखाया गया, जो कार को उल्टे रैंप पर टिकाए रखने में मदद करता है। इसके बाद SpaceX से प्रेरित थ्रस्टर्स की मदद से कार को रैंप से ऊपर उठाने, हवा में उसकी दिशा नियंत्रित करने और लैंडिंग में सहायता देने का प्रदर्शन किया गया। हालांकि, इन तकनीकों की वास्तविक क्षमता और उत्पादन मॉडल में उनके इस्तेमाल को लेकर विस्तृत तकनीकी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है। Mid-Air Flip ने खींचा सबसे ज्यादा ध्यान लाइव प्रदर्शन में Roadster एक घुमावदार रैंप पर ऊपर चढ़ी, उल्टी हुई और फिर हवा में निकलकर फ्लिप करते हुए जमीन पर उतरी। एक अन्य स्टंट में कार को Tesla की कई गाड़ियों के ऊपर से छलांग लगाते हुए भी दिखाया गया। इन करतबों ने पारंपरिक इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कारों से अलग Roadster की संभावित क्षमताओं को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। हालांकि, प्रदर्शन में दिखाई गई क्षमताओं की पुष्टि वास्तविक सड़क परिस्थितियों में होना अभी बाकी है। Musk बोले—“Basically Fly Like a Rocket” Elon Musk ने बताया कि Roadster में पीछे की ओर मुख्य थ्रस्टर्स और ऊंचाई नियंत्रित करने वाले थ्रस्टर्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। उनके मुताबिक, इससे कार सीमित रूप से रॉकेट की तरह उड़ने और हवा में दिशा बदलने जैसे करतब कर सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, Musk ने यह भी संकेत दिया कि इस वाहन का मुख्य जोर असाधारण प्रदर्शन पर है। ऐसे में इसकी सुरक्षा, व्यावहारिक उपयोग और सामान्य सड़क परिस्थितियों में संचालन से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण होंगे। 0-60 mph एक सेकंड से कम का दावा प्रदर्शन के दौरान Tesla ने Roadster के 0 से 60 मील प्रति घंटे की रफ्तार एक सेकंड से कम समय में हासिल करने का दावा भी पेश किया। रॉकेट थ्रस्टर्स वाले वेरिएंट के लिए 230 मील प्रति घंटे से अधिक की शीर्ष गति और 300 मील से ज्यादा की रेंज का उल्लेख किया गया है। इन आंकड़ों को फिलहाल कंपनी के दावों के रूप में देखना चाहिए। वास्तविक उत्पादन मॉडल के प्रदर्शन और प्रमाणित परीक्षणों के नतीजे सामने आने के बाद ही इनकी स्वतंत्र पुष्टि हो सकेगी। अभी Prototype, Production का लक्ष्य 2028 फिलहाल दिखाई गई Roadster को प्रोटोटाइप या डेमो वाहन के रूप में देखा जा रहा है। Tesla ने इसके उत्पादन संस्करण को 2028 में लॉन्च करने का लक्ष्य बताया है। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि प्रदर्शन में दिखाए गए सभी हवाई करतब और थ्रस्टर-आधारित सुविधाएं व्यावसायिक रूप से उपलब्ध Roadster में भी उसी रूप में शामिल होंगी या नहीं। अंतिम डिजाइन, सुरक्षा मानकों, कीमत और उत्पादन मॉडल की क्षमताओं को लेकर अधिक जानकारी का इंतजार है। स्रोत: Reuters, TechCrunch, Euronews जय राष्ट्र न्यूज़

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