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ऊर्जा नीति में ऐतिहासिक बदलाव

भारत ने अक्टूबर 2025 में रूसी तेल आयात 38% घटाया: ऊर्जा नीति में ऐतिहासिक बदलाव

जय राष्ट्र न्यूज़ | नई दिल्ली | 5 दिसंबर 2025 भारत ने अक्टूबर 2025 में रूस से कच्चे तेल का आयात मूल्य के हिसाब से 38 प्रतिशत और मात्रा के हिसाब से 31 प्रतिशत तक कम कर दिया। यह 2022 के यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस पर सबसे ज़्यादा निर्भरता दिखाने वाले भारत के लिए अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त कटौती है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में कुल क्रूड आयात में भी करीब 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है, लेकिन उसका हिस्सा सितंबर 2025 के 40 प्रतिशत से घटकर अक्टूबर में करीब 35 प्रतिशत रह गया। दूसरी तरफ इराक, सऊदी अरब, UAE और अमेरिका से आयात में तेज़ उछाल देखा गया है। पिछले तीन साल का ट्रेंड उलट गया 2022 के बाद से रूस भारत को औसतन 1.5 से 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल बेच रहा था। उस समय पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूसी उराल ग्रेड क्रूड ब्रेंट से 20-30 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिल रहा था। भारतीय रिफाइनरियों (खासकर रिलायंस जामनगर और नायरा वाडिनार) ने इसका भरपूर फायदा उठाया था। लेकिन अक्टूबर 2025 में यह तस्वीर पूरी तरह बदल गई। गिरावट के पांच बड़े कारण रिफाइनरियों पर क्या असर? रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने बताया कि रूसी भारी-खट्टा क्रूड (उराल) की जगह अब वे इराकी बसरा हेवी, सऊदी अरेबियन मीडियम और अमेरिकी WTI मिडलैंड क्रूड ले रहे हैं। इनमें सल्फर कम है और रिफाइनिंग मार्जिन 1.5-2 डॉलर प्रति बैरल बेहतर मिल रहा है। नायरा एनर्जी (रूस की रोसनेफ्ट में हिस्सेदार) ने भी कहा कि वह अब स्पॉट मार्केट से मध्य-पूर्व का तेल खरीद रही है। रोसनेफ्ट से लंबे अनुबंध अभी भी जारी हैं, लेकिन मात्रा में 25-30 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है। अर्थव्यवस्था को फ़ायदा भारत-रूस संबंधों पर असर? विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला “100 प्रतिशत व्यावसायिक” है। रूस के साथ 15 अरब डॉलर का सालाना व्यापार लक्ष्य अभी भी बरकरार है। हाल ही में राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा में S-400 की अतिरिक्त रेजीमेंट, ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात और न्यूक्लियर पावर प्लांट के समझौते हुए हैं। तेल की मात्रा कम होने से द्विपक्षीय संबंधों पर कोई ठेस नहीं पहुँची है। आगे की राह: हरित ऊर्जा और विविधीकरण सरकार ने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसी साल गुजरात और राजस्थान में 50 गीगावाट के सोलर पार्क और 30 गीगावाट के ग्रीन हाइड्रोजन हब को मंजूरी मिली है। लेकिन अभी भी तेल भारत की कुल ऊर्जा मांग का 33 प्रतिशत पूरा करता है। इसलिए अगले 10-15 साल तक विविधीकरण ही एकमात्र रास्ता है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले हफ्ते कहा था,“हमारा लक्ष्य है कि 2035 तक किसी एक देश से 25 प्रतिशत से ज़्यादा तेल न लें।” निष्कर्ष अक्टूबर 2025 की 38 प्रतिशत कटौती कोई अस्थायी घटना नहीं है। यह भारत की नई ऊर्जा रणनीति का पहला ठोस संकेत है। सस्ता तेल चाहिए, लेकिन सुरक्षित और विविध स्रोतों से। आने वाले महीनों में यदि वैश्विक कीमतें 65 डॉलर से नीचे चली गईं, तो फिर रूसी तेल की वापसी हो सकती है। लेकिन तब भी पुरानी मात्रा शायद ही लौटे। भारत अब ऊर्जा के खेल में सिर्फ़ खरीदार नहीं, एक स्मार्ट रणनीतिकार बनकर उभरा है। जय राष्ट्र न्यूज़ – भारत की खबर, भारत की आवाज़Instagram: @jairashtranewsYouTube: @JaiRashtraNewsवेबसाइट: jairashtranews.com RussianOilCut #IndiaEnergyPolicy #JaiRashtraNews

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इंदौर

इंदौर में एकादशी पूजा के दौरान केमिकल फैक्ट्री में आग लगने से दो महिलाओं की मौत, एक घायल

इंदौर में शनिवार शाम एक दुखद हादसा हुआ. राऊ पुलिस स्टेशन इलाके में एक रासायनिक गोदाम में आग लग गई. इस हादसे में दो महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई और एक व्यक्ति घायल हो गया. गोदाम में रखे बड़ी मात्रा में थिनर की वजह से आग और भड़क गई. थिनर एक बहुत ज्यादा ज्वलनशील सॉल्वेंट है जो आमतौर पर पेंट और केमिकल इंडस्ट्री में इस्तेमाल होता है. पुलिस के अनुसार, दमकल विभाग ने तुरंत कार्रवाई की, लेकिन आग पर काबू पाने में डेढ़ घंटे का समय लग गया. आग बुझने के बाद, इमरजेंसी स्टाफ गोदाम के अंदर प्रवेश किया. इस दौरान दो महिलाओं के शव मिले. महिलाओं की पहचान रामकली (50) और ज्योति नीम (34) के रूप में हुई. वहीं, एक अन्य व्यक्ति सूरज भगनानी (34) के दोनों हाथों में जलने से चोटें आईं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. मामले में लाइसेंस से संबंधित जांच कर रही है पुलिस इंदौर के जोन-1 के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस कृष्णा लालचंदानी ने बताया कि पीड़ित लोग एकादशी पूजा कर रहे थे. उन्होंने पत्थर की मिट्टी के दीये जलाए थे, जो पास में रखे थिनर के पास थे. इससे आग लग गई. आग ने वह सामान पकड़ लिया, जिससे बड़ा हादसा हो गया और दो लोगों की जान चली गई. उन्होंने आगे कहा कि शुरुआती जांच में पता चला है कि यह जगह भैयालाल मुकाती नाम के एक व्यक्ति ने किराए पर ली थी. हालांकि, इस जगह को आम तौर पर फैक्ट्री कहा जाता है, लेकिन पुलिस को अभी यह कन्फर्म करना बाकी है कि यह मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के तौर पर काम कर रही थी या सिर्फ एक स्टोरेज गोदाम था. अधिकारी अब इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या उस फैसिलिटी के पास ऐसे खतरनाक पदार्थों को स्टोर करने के लिए लाइसेंस थे और क्या इस घटना में किसी लापरवाही का हाथ था. स्थानीय लोगों ने जोर की आवाजें सुनीं और जगह से घना धुआँ उठता देखा. इससे आसपास डर फैल गया. पास की कुछ इकाइयों को सावधानी से खाली कराया गया. अब तक कोई और चोट नहीं आई है. अधिकारी पूरी जांच करने और जिम्मेदारी तय करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने का वादा कर रहे हैं

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उत्तर में सर्दी की दस्तक, दक्षिण में भारी बारिश का अलर्ट, जानें IMD का ताजा पूर्वानुमान

अक्टूबर का आखिरी हफ्ता आते-आते मौसम ने पूरे देश में करवट ले ली है. जहां उत्तर भारत में सुबह-शाम की ठंड अब खुलकर महसूस की जाने लगी है, वहीं दक्षिण भारत के कई राज्यों में बादल भारी पड़ने को तैयार हैं. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 30 अक्टूबर के लिए जो ताजा अपडेट जारी किया है, उसके मुताबिक देश के दक्षिणी हिस्सों में चक्रवाती असर के चलते कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है. उत्तर भारत में सर्दी की दस्त दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में अब सर्दी की शुरुआती दस्तक महसूस हो रही है. सुबह और देर शाम हल्की ठंडक के साथ ठंडी हवाएं चल रही हैं. दिल्ली-एनसीआर में आज सुबह हल्का कोहरा या धुंध देखने को मिल सकता है. हालांकि दिन में आसमान साफ रहेगा और मौसम शुष्क बना रहेगा. मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली का अधिकतम तापमान 29 से 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 17 से 19 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है. हवा की गुणवत्ता “खराब” श्रेणी में रहने की संभावना जताई गई है, इसलिए सुबह की वॉक या आउटडोर गतिविधियों के दौरान सतर्क रहना बेहतर रहेगा. दक्षिण भारत में भारी बारिश का अलर्ट दूसरी तरफ दक्षिण भारत में मौसम पूरी तरह उलट गया है. तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के तटीय इलाकों में भारी बारिश के आसार हैं. समुद्र के ऊपर बन रहे चक्रवाती सिस्टम के कारण अगले 24 घंटे इन राज्यों के लिए चुनौती भरे साबित हो सकते हैं. कई इलाकों में बिजली कड़कने और तेज़ हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है. पहाड़ों में बर्फबारी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में लगातार बर्फबारी का दौर जारी है. इससे वहां के पर्यटक स्थलों की खूबसूरती तो बढ़ी है, लेकिन इसके साथ तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा रही है. इस बर्फबारी का असर अब मैदानी इलाकों में भी दिखने लगा है सुबह और रात के समय ठंडक बढ़ने लगी है. यूपी और पूर्वोत्तर में बारिश की संभावना उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों में आज हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. कुछ इलाकों में गरज-चमक और तेज़ हवाएं (30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से) चलने की संभावना भी जताई गई है. वहीं, पूर्व और पूर्वोत्तर राज्यों जैसे असम, मेघालय और नागालैंड में भी बिजली गिरने और बरसात की गतिविधियां बनी रहेंगी.

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महाराष्ट्र में फिर छिड़ा भाषा विवाद, MNS ने मेट्रो स्टेशन पर हिंदी को लेकर जताया विरोध

महाराष्ट्र में फिर छिड़ा भाषा विवाद, MNS ने मेट्रो स्टेशन पर हिंदी को लेकर जताया विरोध

महाराष्ट्र में एक बार फिर भाषा को लेकर विवाद सामने आया है. इस बार मामला मुंबई के अंधेरी मेट्रो स्टेशन का है, जहां सिर्फ हिंदी में विज्ञापन लिखे जाने पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध किया. उन्होंने स्टेशन के नाम पर कालिख पोत दी और नारेबाजी की. उनका कहना था कि मराठी को नजरअंदाज करना महाराष्ट्र की अस्मिता का अपमान है. पहले भी विवाद ये कोई पहली बार नहीं है जब भाषा को लेकर विवाद हुआ हो. जुलाई में मीरा रोड पर एक मिठाई दुकानदार को सिर्फ इसलिए पीटा गया क्योंकि उसने मराठी बोलने से इनकार किया था. इस घटना का वीडियो वायरल हुआ और सात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी. इनमें से तीन को नोटिस भी जारी किया गया. इसके बाद सैकड़ों MNS कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और मराठी गौरव की रक्षा के लिए विरोध मार्च निकाला. पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया ताकि माहौल बिगड़ने से रोका जा सके. वीरार और पालघर में मारपीट भाषाई विवाद यहीं नहीं रुका. जुलाई 2025 में ही वीरार और पालघर में एक ऑटो-रिक्शा चालक को मराठी न बोलने पर पीटा गया. इस बार हमला शिवसेना (UBT) के कार्यकर्ताओं ने किया. वीडियो में देखा गया कि चालक ने कहा, “हिंदी या भोजपुरी बोलना मेरा हक है.” लेकिन ऐसा कहने पर उसे थप्पड़ मारे गए और सार्वजनिक माफी मांगने को मजबूर किया गया. महाराष्ट्र बैंक की शाखा में मारपीट लोनावाला के महाराष्ट्र बैंक की एक शाखा में भी ऐसा ही मामला सामने आया. वहां MNS कार्यकर्ताओं ने मैनेजर से मराठी में बात करने की मांग की. जब एक कर्मचारी ने हिंदी के इस्तेमाल का समर्थन किया, तो उसे भी पीटा गया. इन घटनाओं से साफ है कि महाराष्ट्र में भाषा को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है. मराठी को लेकर भावनाएं गहरी हैं लेकिन हिंसा और जबरदस्ती से समाधान नहीं निकलता. भाषा का सम्मान जरूरी है लेकिन साथ ही हर नागरिक को अपनी पसंद की भाषा बोलने का अधिकार भी मिलना चाहिए.

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कमाए 241 करोड़…प्रशांत किशोर का बड़ा दावा, कहा- 98 करोड़ पार्टी को किए डोनेट

राज्य में चुनावी माहौल गरम है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. इसी बीच जन सुराज अभियान चला रहे प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने अपनी पार्टी जनसुराज को लेकर बड़ा खुलासा किया है. पिछले साल 2 अक्टूबर को उन्होंने जनसुराज को राजनीतिक पार्टी के रूप में लॉन्च किया था और अब बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. प्रशांत किशोर ने तोड़ी चुप्पी प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) पर कई नेता आरोप लगा रहे हैं कि वो बीजेपी के एजेंट हैं. साथ ही उनकी बड़ी टीम और प्रचार को देखकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतना पैसा कहां से आ रहा है. अब प्रशांत किशोर ने इन सवालों पर चुप्पी तोड़ते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,आरोप पर पीके ने क्या कहा? पीके (Prashant Kishore) ने आगे कहा कि उन्होंने देश के कई नेताओं को राजनीतिक सलाह दी है और अब 2022 से वो इसके लिए फीस भी लेते हैं.प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने यह भी कहा कि उनके पास सरस्वती से पैसा आता है. उन्होंने कहा कि पहले वो फीस नहीं लेते थे लेकिन अब उन्होंने इसे प्रोफेशनल तरीके से करना शुरू किया है. सत्ता पक्ष और विपक्ष पर निशाना बिहार में घूम-घूमकर जनसभाएं कर रहे प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों पर निशाना साध रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि वो बीजेपी की B टीम की तरह काम कर रहे हैं जबकि प्रशांत का दावा है कि जनसुराज (Jan Suraaj) बिहार के लोगों को एक नया और साफ विकल्प देने की कोशिश कर रही है.

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दुर्गा पूजा में 'काबा-मदीना' की गूंज, बंगाल में सनातन पर चोट

दुर्गा पूजा में ‘काबा-मदीना’ की गूंज, बंगाल में सनातन पर चोट

दुर्गा पूजा में ‘काबा-मदीना’ की गूंज, बंगाल में सनातन पर चोट कोलकाता के भवानीपुर 75 पल्ली दुर्गा पूजा पंडाल में इस बार कुछ ऐसा हुआ जिसने लाखों हिंदू समाज के लोगों को भीतर तक झकझोर दिया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पंडाल का उद्घाटन किया, तालियां बजाईं. वहीं उनके करीबी नेता मदन मित्रा मंच पर गाते हुए कहा कि मेरे दिल में काबा है और आँखों में मदीना है. मुद्दे की बातअब सवाल ये उठता है कि दुर्गा पूजा जैसे सनातन पर्व पर इस तरह के गीतों का क्या काम? क्या ये जानबूझकर सनातन भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश नहीं है? क्या ये एक सांस्कृतिक अतिक्रमण नहीं है जहां देवी दुर्गा की आराधना के बीच इस्लामी प्रतीकों की बात की जा रही है? वोट के लिए आस्था से खिलवाड़ममता बनर्जी का ये कदम कोई पहली बार नहीं है. इससे पहले भी उन्होंने पितृ पक्ष के दौरान दुर्गा पूजा पंडालों का उद्घाटन कर हिंदू परंपराओं को नजरअंदाज किया था. जबकि शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में कोई नया कार्य या उत्सव शुरू करना अशुभ माना जाता है लेकिन बंगाल की राजनीति में वोट बैंक की मजबूरी शायद आस्था से बड़ी हो गई है. सबसे बड़ी चिंता की बात तो ये है कि इस सबके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठती है. न कोई बड़ा संत बोलता है, न कोई संगठन सड़कों पर उतरता है. सोशल मीडिया पर कुछ लोग जरूर नाराजगी जताते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर विरोध न के बराबर है. पश्चिम बंगाल में सनातन धर्म ना के बराबरक्या बंगाल में सनातन धर्म अब सिर्फ एक मौन दर्शक बनकर रह गया है? क्या दुर्गा पूजा जैसे पर्व अब राजनीतिक मंच बनते जा रहे हैं जहां देवी की आराधना से ज़्यादा नेताओं की पीआर चलती है? इसे भी पढ़ें-अगर अब भी हम चुप रहे, तो आने वाले वर्षों में दुर्गा पूजा में देवी के स्थान पर कोई और प्रतीक खड़ा मिलेगा। ये समय है जागने का, बोलने का और अपनी आस्था की रक्षा करने का वरना इतिहास हमें माफ नहीं करेगा.

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Weather alert in Delhi-NCR

दिल्ली-एनसीआर में मौसम का अलर्ट 

दिल्ली-एनसीआर में मौसम का अलर्ट: हल्की-से-हैवी बारिश, उमस और बदलाव की संभावना नई दिल्ली, 19 सितम्बर 2025। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने दिल्ली और आसपास के इलाकों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है। अधिकतर इलाकों में दोपहर से शाम के बीच हल्की-से-मध्यम बारिश की संभावना जतायी गयी है, जबकि कुछ इलाकों में तेज बारिश या गरज-चमक के साथ तूफानी हवाएँ भी आ सकती हैं। हाल ही में मौसम-अवलोकन से पता चला है कि Palam, Safdarjung और आसपास के ऑब्जर्वेशन स्टेशनों पर बादल छाए हुए हैं, हवा की दिशा बदल रही है, और आर्द्रता अधिक है। इन परिस्थितियों के चलते अचानक मौसम बदलने की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और बुजुर्गों, बच्चों व संवेदनशील लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। बारिश के साथ-साथ तापमान में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। सुबह-शाम की अपेक्षित न्यूनतम तापमान लगभग 23-25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि दिन के समय अधिकतम तापमान बढ़-चढ़कर 34-36 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है। विशेष रूप से बाहर निकलने पर तेज़ धूप और उमस महसूस हो सकती है। जनजीवन पर असर और सुझाव इस मौसम अलर्ट के चलते सड़कें गीली होने के कारण आवाजाही में बाधाएँ हो सकती हैं। जलजमाव की संभावना वाले इलाकों में वाहन धँसाव या पानी के कारण रस्ते फिसलने जैसी घटनाएँ हो सकती हैं। सार्वजनिक परिवहन पर असर हो सकता है, साथ ही उड़ानों या अन्य यात्रा योजनाओं में बदलाव संभव है। वाटरप्रूफ कवच और छतरी साथ रखना ठीक रहेगा। घर से निकलने से पहले स्थानीय मौसम अपडेट देख लें। रात के समय हल्के-बूंदा-बांदी की संभावना के चलते बाहर की गतिविधियों को सीमित करना बेहतर होगा। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या फेफड़ों से जुड़ी बीमारी वाले लोगों को विशेष ध्यान देना चाहिए। अगले कुछ दिन का पूर्वानुमान आगामी दो-तीन दिनों में बारिश-विभिन्नता बनी रहने की उम्मीद है। दोपहर या शाम के समय हल्की-मध्यम बारिश की गतिविधियाँ होंगी, कुछ इलाकों में मौसम साफ़ होगा। मौसम विभाग की माने तो मानसून का प्रभाव अब धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन अभी भी अस्थिर मौसम की स्थिति बनी हुई है।

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1965 के जांबाजों से बोले राजनाथ सिंह

1965 के जांबाजों से बोले राजनाथ सिंह

1965 के जांबाजों से बोले राजनाथ सिंह: भारत पड़ोसियों के मामले में भाग्यशाली नहीं, पर इसे नियति नहीं माना नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के वीर सैनिकों से बातचीत करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से भारत अपने पड़ोसियों के साथ रिश्तों के मामले में हमेशा भाग्यशाली नहीं रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश ने इस स्थिति को अपनी नियति मानकर कभी स्वीकार नहीं किया। भारत ने हर चुनौती का सामना किया और अपनी तकदीर खुद लिखी। कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने 1965 के युद्ध में लड़ने वाले जांबाजों को नमन किया। उन्होंने कहा कि उस दौर के सैनिकों का साहस, बलिदान और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्हीं की वीरता की बदौलत आज भारत की सीमाएं सुरक्षित हैं और हमारी सेनाओं का मनोबल ऊंचा है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत हमेशा शांति और सहयोग की नीति पर चला है, लेकिन जब-जब हमारी सीमाओं को ललकारा गया है, तब-तब हमारी सेनाओं ने दुश्मन को करारा जवाब दिया है। राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि भारत का पड़ोसी कौन होगा यह हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन उनसे संबंध किस तरह रखने हैं यह हमारे नियंत्रण में जरूर है। उन्होंने यह संदेश दिया कि भारत हमेशा बेहतर रिश्ते बनाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन अगर पड़ोसी सहयोग न करें तो भी देश पीछे नहीं हटेगा। रक्षा मंत्री ने यह भी दोहराया कि भारत किसी से वैरभाव नहीं चाहता, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के साथ कोई समझौता भी नहीं करेगा। इस मौके पर उन्होंने हाल के सैन्य अभियानों का भी उल्लेख किया और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हुए कदमों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत ने कठिन हालात में भी जीत को अपनी आदत बना लिया है। उन्होंने सैनिकों और उनके परिवारों को विश्वास दिलाया कि सरकार उनके साहस और बलिदान को कभी भुला नहीं सकती। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजनाथ सिंह का यह बयान मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और सीमावर्ती तनावों के बीच बेहद अहम है। चीन और पाकिस्तान के साथ रिश्तों में आए उतार-चढ़ाव की पृष्ठभूमि में रक्षा मंत्री ने साफ संदेश दिया है कि भारत संवाद और दोस्ती की नीति को प्राथमिकता देता है, लेकिन सुरक्षा से जुड़ी हर चुनौती का सख्ती से सामना भी करेगा। 1965 का युद्ध भारत के इतिहास का एक अहम मोड़ माना जाता है। इस युद्ध में भारतीय सेनाओं ने जिस साहस और रणनीति का परिचय दिया, उसने पूरे देश को गौरवान्वित किया। राजनाथ सिंह का जांबाजों के साथ यह संवाद न केवल इतिहास को याद करने का अवसर था, बल्कि वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा नीतियों पर भी एक सशक्त संकेत था

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Manipur violence 2025

फिर जला उठा मणिपुर, कई जिलों में कर्फ्यू, जानें क्यों और कैसे भड़की हिंसा?

मणिपुर में कुछ माह शांति के बाद एक बार फिर से हिंसा (Manipur Violence) भड़क उठी है। इस बार हिंसा का कारण मैतेई और कुकी समुदाय के बीच लड़ाई नहीं, बल्कि मैतेई समुदाय का प्रशासन के खिलाफ उग्र प्रदर्शन है। दरअसल, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की एक टीम ने शनिवार को मैतेई समुदाय के संगठन अरम्बाई टेंगोल (Arambai Tengol) के एक नेता को गिरफ्तार किया है। इसके बाद से ही राज्य कके मैतेई बहुल जिलों में उग्र प्रदर्शन (Manipur Violence) शुरू हो गया, जो कुछ ही देर में हिंसा में बदल गई। बता दें कि सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से राज्य में हिंसा फैलाने वाले नेताओं को गिरफ्तार कर रही हैं। यह प्रक्रिया कई महीनों से चल रही है। बीते शनिवार को भी एनआई (NIA) की टीम ने दो प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े तीन उग्रवादियों को गिरफ्तार किया। साथ ही टेंग्नौपाल जिले में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) भी बरामद किया। बताया जा रहा है कि इन गिरफ्तार उग्रवादियों में एक कानन सिंह भी है। यह अरम्बाई टेंगोल संगठन (Arambai Tengol) में अहम भूमिका निभाता है। इस गिरफ्तारी की खबर जैसे ही मणिपुर में फैली, उग्र प्रदर्शन शुरू हो गया। एक प्रदर्शनकारी की मौत, दर्जनों लोग घायल  कई जिलों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें सुरक्षाकर्मियों समेत कई प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। इंफाल ईस्ट जिले में हिंसक भीड़ ने बसों में आग लगा दी। क्वाकेथेल में प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच से कई राउंड गोलियां भी चलाई गई। इम्फाल एयरपोर्ट के बाहर भी हिंसक प्रदर्शन (Manipur Violence) हुआ। प्रदर्शनकारियों को सूचना मिली थी कि उनके गिरफ्तार नेता को सुरक्षा बल राज्य से बाहर ले जा रहे हैं। जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने एयरपोर्ट को घेर लिया। इसके अलावा कई दूसरी जगहों पर भी सुरखा बलों और प्रदर्शकारियों में हिंसक झड़प हुई। प्रदर्शकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की गई लाठी चार्ज में कथित तौर पर एक व्यक्ति की मौत हो गई। बढ़ते विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने इम्फाल पूर्व, इम्फाल पश्चिम, थौबल, बिष्णुपुर जिले और काकचिंग घाटी में पांच दिनों के लिए इंटरनेट सेवा बंद करने के साथ कर्फ्यू लागू कर दिया है।   इसे भी पढ़ें:-पीएम मोदी ने किया दुनिया के सबसे ऊंचे चिनाब रेल ब्रिज का उद्घाटन, कटरा से श्रीनगर का सफर होगा आसान  क्या है अरमबाई टेंगोल और क्या करता है काम? बता दें कि जिस नेता को गिरफ्तार करने से यह हिंसा भड़की है, वह अरमबाई टेंगोल संगठन (Arambai Tengol) से जुड़ा हुआ है। यह मैतेई समुदाय का एक संगठन है, जो सांस्कृतिक पुनरुत्थानवादी समूह के रूप में कार्य करता था। लेकिन राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से ही यह संगठन एक उग्रवादी संगठन बन गया और इससे जुड़े सदस्यों पर बड़े पैमाने पर जातीय हिंसा (Manipur Violence) को अंजाम देने का आरोप लगा। इस संगठन के कई सदस्य गिरफ्तार किए जा चुके हैं और कई सदस्य हाल ही में राज्यपाल के सामने आत्मसमर्पण किया है। हालांकि, इस संगठन के सैकड़ों सदस्य अब भी राज्य में हिंसक वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। जिसके कारण ही सुरक्षा एजेंसियां अब इस संगठन के बड़े नेताओं को गिरफ्तार करने में जुटी हैं। जिस कानन सिंह को गिरफ्तार करने के बाद यह हिंसा भड़की है, वह संगठन का कोर मेंबर था। कहा जा रहा है कि वह संगठन के सदस्यों तक हाथियारों पहुंचाने और हिंसक कार्रवाई को अंजाम देने का कार्य करता था। सुरक्षा एजेंसी से जुड़े सूत्रों के अनुसार इस उग्रवादी नेता को गिरफ्तार कर गुवाहाटी लाया गया है और वहीं पर उससे पूछताछ की जा रही है।    Latest News in Hindi Today Hindi news  #Manipur #Violence #Curfew #EthnicConflict #IndiaNews #ManipurNews #NorthEastIndia #ManipurClashes #LatestUpdate

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General Anil Chauhan

CDS अनिल चौहान का बड़ा दावा: ‘ऑपरेशन सिंदूर के तहत 8 घंटे में पाकिस्तान को किया ध्वस्त’

भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान (General Anil Chauhan) ने सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित शांगरी-ला डायलॉग में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अहम बयान दिया। उन्होंने  प्रतिष्ठित शांगरी-ला डायलॉग के मंच से कहा है कि पाकिस्तान को 40 देशों के सामने बेनकाब किया गयाऔर बताया कि कैसे भारत ने सैन्य और रणनीतिक कौशल का प्रदर्शन करते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। जनरल चौहान ने कहा कि इस ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान युद्ध केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें राजनीतिक संकेत भी जुड़े थे। यह युद्ध की आधुनिक शैली को दर्शाता है, जिसमें डिप्लोमैसी और सैन्य कार्रवाई साथ-साथ चलती है। हवाई हमले में मिली सफलता पुणे विश्वविद्यालय में भविष्य के युद्ध और युद्धकला विषय पर बात करते हुए जनरल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) को हवाई युद्ध की दृष्टि से एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत ने विरोधी की हवाई रक्षा प्रणाली को भेदते हुए गहराई तक सफलतापूर्वक हमला किया। यह इस बात का संकेत है कि भारतीय वायुसेना सटीकता और आक्रामक रणनीति के साथ कार्य करने में सक्षम है। पाकिस्तान की सीमित क्षमताएं और भारत की तैयारी जनरल अनिल चौहान (General Anil Chauhan) ने पाकिस्तान की ड्रोन क्षमताओं को भारत के मुकाबले कमजोर बताया और कहा कि भारतीय सेना पूरी तरह से पेशेवर है जो केवल नुकसान पर नहीं, बल्कि परिणामों पर ध्यान केंद्रित करती है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान भारत के साथ 48 घंटे की लड़ाई की योजना बना रहा था, लेकिन भारत ने उसे महज 8 घंटे में ध्वस्त कर दिया। भारत की इस रणनीतिक प्रतिक्रिया ने यह साफ कर दिया कि भारत अब पारंपरिक युद्धों की बजाय त्वरित, निर्णायक और तकनीकी रूप से उन्नत सैन्य कार्रवाइयों में विश्वास रखता है। परमाणु धमकी नहीं सहन करेगा भारत सीडीएस (CDS) ने पाकिस्तान को साफ चेतावनी दी है कि भारत किसी भी प्रकार की परमाणु धमकी को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि पहलगाम में जो कुछ हुआ वह अमानवीय था और इसकी प्रतिक्रिया उसी स्तर पर दी गई। यह संदेश अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के मजबूत रुख को दर्शाता है। इसे भी पढ़ें:- अमेरिका में इस वजह से एक सनकी ने यहूदी भीड़ पर फेंका पेट्रोल बम, लगाया ‘फ्री फिलिस्तीन’ का नारा लंबे युद्ध से परहेज, लेकिन सतर्कता आवश्यक जनरल अनिल चौहान (General Anil Chauhan) ने कहा कि भारत लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष में नहीं पड़ना चाहता। उन्होंने ऑपरेशन प्रकरम और बालाकोट हमले के बाद की स्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे संघर्षों में भारी संसाधनों की आवश्यकता होती है और यह आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक रूप से नुकसानदेह हो सकते हैं। ऑपरेशन सिंदूर की खास बात यह थी कि यह एक सीमित लेकिन प्रभावी कार्रवाई थी, जिसे समय रहते रोक दिया गया, ताकि अनावश्यक युद्ध को टाला जा सके। ऑपरेशन सिंदूर: जारी है संघर्ष सीडीएस (CDS) ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है। यह एक सतत प्रक्रिया है जिसमें भारत को अपनी चौकसी बनाए रखनी होगी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने महसूस किया कि वह लगातार अपनी स्थिति खो रहा है और अगर यह स्थिति अधिक समय तक बनी रहती, तो उसकी स्थिति और खराब हो सकती थी। इसी डर के चलते उसने बातचीत का विकल्प चुना। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) भारत की नई सैन्य सोच और रणनीतिक दृष्टिकोण का प्रमाण है। यह केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की राजनीतिक, कूटनीतिक और रणनीतिक दृढ़ता का प्रतीक है। जनरल अनिल चौहान के वक्तव्य ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं रहा, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर पहल करने से भी पीछे नहीं हटेगा। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर बेनकाब किया, बल्कि भारत की सैन्य नीति और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती से प्रस्तुत किया। Latest News in Hindi Today Hindi news General Anil Chauhan #CDSAnilChauhan #OperationSindoor #PakistanStrike #IndianArmy #DefenceNews #IndiaPakistan #MilitaryAction #NationalSecurity

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