Sawan Somvar Vrat 2025

Sawan Somvar Vrat 2025: शिवलिंग पर अर्पित करें ये 11 चीजें, होगी हर मनोकामना पूरी

सावन का महीना भगवान शिव (Lord Shiva) की आराधना का सबसे पावन समय होता है। इस माह में प्रत्येक सोमवार को व्रत और पूजन का विशेष महत्व है, जिसे “सावन सोमवार व्रत” कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों को मनचाहा वरदान देते हैं। विशेष रूप से सावन सोमवार को शिवलिंग (Shivling) पर कुछ खास वस्तुएं चढ़ाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और दुर्भाग्य दूर होकर किस्मत चमकने लगती है। आइए जानते हैं, शिवलिंग पर कौन-कौन सी चीजें चढ़ानी चाहिए और उनका आध्यात्मिक महत्व क्या है— शिवलिंग पर अर्पित करें ये 11 चीजें 1. गंगाजल – पवित्रता और शुद्धि का प्रतीक गंगाजल को भगवान शिव का सबसे प्रिय जल माना जाता है। इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन एवं शरीर की शुद्धि होती है। 2. दूध – आरोग्यता और संतुलन का प्रतीक शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दूर होती हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यह क्रोध और तनाव को भी शांत करता है। 3. बेलपत्र – शिव का विशेष प्रिय बेलपत्र को त्रिदेवों का प्रतीक माना गया है। इसे शिवलिंग पर चढ़ाने से पुण्य की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ध्यान रखें कि बेलपत्र ताजे और साफ हों। 4. भस्म – वैराग्य और तपस्या का चिन्ह शिव भस्मधारी हैं, इसलिए उन्हें भस्म अर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे सांसारिक बंधनों से मुक्ति मिलती है और आत्मिक शांति प्राप्त होती है। 5. धतूरा और आक – संकटों से रक्षा धतूरा और आक के फूल शिवलिंग पर चढ़ाने से जीवन में आ रही बाधाएं और रोग दूर होते हैं। यह उपाय शत्रुओं से रक्षा और मानसिक शक्ति बढ़ाने में सहायक होता है। 6. शहद – मधुरता और प्रेम का प्रतीक शहद शिवलिंग पर अर्पित करने से जीवन में सौहार्द, प्रेम और पारिवारिक शांति बनी रहती है। यह रिश्तों को मधुर बनाने वाला उपाय है। 7. सफेद पुष्प – सौम्यता का प्रतीक भगवान शिव को श्वेत पुष्प अत्यंत प्रिय होते हैं। कमल, कनेर और कुंद के फूल अर्पित करने से मानसिक शुद्धता और ईश्वर कृपा प्राप्त होती है। 8. फल और ताजे भोग – सुख और समृद्धि का माध्यम शिवलिंग पर मौसमी फल और मिठाई अर्पित करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। खासतौर पर नारियल, केला और मिश्री शिवजी को अर्पित करना शुभ माना जाता है। 9. पंचामृत – पांच तत्वों का संतुलन पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से शिवलिंग का अभिषेक करने से जीवन के पंचतत्व संतुलित होते हैं। यह उपाय सौभाग्य और दीर्घायु की प्राप्ति में सहायक होता है। 10. अक्षत और रोली – समर्पण का प्रतीक शुद्ध अक्षत (कच्चे चावल) और रोली से तिलक करने से पूजा का पूरक रूप बनता है। इससे शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 11. केसर – विवाह में सफलता यदि कोई कन्या योग्य वर की प्राप्ति की इच्छा रखती है, तो शिवलिंग पर केसर मिश्रित जल चढ़ाना अत्यंत लाभकारी होता है। यह उपाय वैवाहिक जीवन में सुख और सौभाग्य लाता है। पूजा विधि का विशेष ध्यान रखें शिवलिंग पर ये सभी सामग्री अर्पित करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें। पूजन पूर्व दिशा की ओर मुख करके करें और पूरे विधिविधान से श्रद्धा और संयम के साथ यह अनुष्ठान करें। इसे भी पढ़ें:- महाभारत के युद्ध में गूंजे थे दिव्य अस्त्रों के नाम, जानिए उनकी अद्भुत शक्तियां व्रत रखने के नियम: नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news  #Sawan2025 #SawanSomvar #ShivBhakti #Mahadev #ShivlingPuja #SomvarVrat #LordShiva #ShivaWorship #SawanVratTips #HarHarMahadev #SawanSomvarVrat2025

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Sawan Somwar 2025

सावन सोमवार 2025: भोलेनाथ को प्रसन्न करने के ये हैं सिद्ध उपाय, पूरी होंगी हर मनोकामनाएं

सावन का महीना हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है, विशेषकर भगवान शिव की आराधना के लिए। वर्ष 2025 में सावन (Sawan Somvar) का प्रारंभ 10 जुलाई से होगा और इसका समापन 7 अगस्त को होगा। इस एक महीने की अवधि में आने वाले प्रत्येक सोमवार को ‘सावन सोमवार व्रत’ रखा जाता है, जो कि भगवान शिव को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस पावन माह में सच्चे मन से की गई पूजा अर्चना, व्रत और उपायों से भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। विशेषकर कुंवारी कन्याओं के लिए यह माह विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह व्रत उन्हें मनचाहा वर पाने में सहायक माना जाता है। सावन सोमवार 2025 की तिथियाँ: चमत्कारी उपाय जो शिव जी की कृपा दिलाएं: धन-संपत्ति बढ़ाने के लिए सावन सोमवार का सरल उपाय यदि आप अपने जीवन में आर्थिक समृद्धि चाहते हैं, तो सावन के प्रत्येक सोमवार को प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और समीप स्थित शिव मंदिर जाएं। वहां शिवलिंग का पहले गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें, फिर रोली और अक्षत से तिलक करें। इसके बाद शिव जी को शक्कर और ताजे फलों का भोग लगाएं। धूप और दीप जलाकर भगवान शिव (Lord Shiva) को नमन करें और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें। इस विधि से धन की वृद्धि और आर्थिक स्थिरता प्राप्त होती है। नकारात्मक ऊर्जा और जीवन संकटों से मुक्ति का उपाय यदि आप अपने जीवन से नकारात्मकता और बार-बार आने वाले संकटों से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो सावन के सोमवार (Sawan Somvar) को प्रातः स्नान करके शिव मंदिर जाएं। वहां शिवलिंग पर भांग और बेलपत्र अर्पित करें। भांग चढ़ाने से मन की नकारात्मक प्रवृत्तियों का शुद्धिकरण होता है, जबकि बेलपत्र चढ़ाने से जीवन के कठिन समय शांत होने लगते हैं। यह उपाय भगवान शिव (Lord Shiva) की विशेष कृपा दिलाने में सहायक होता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है। विवाह में रुकावट दूर करने का उपाय यदि विवाह में बार-बार अड़चनें आ रही हैं, तो सावन सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और उस जल में थोड़ी केसर मिलाकर रुद्राभिषेक करें। अभिषेक करते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करें और विवाह की कामना करें। यह उपाय विवाह से संबंधित दोषों को शांत करता है और शीघ्र शुभ समाचार मिलने की संभावना बढ़ जाती है। उन्नति और सम्मान प्राप्ति का उपाय अगर आप अपने करियर में तरक्की और समाज में प्रतिष्ठा की कामना करते हैं, तो सावन के सोमवार (Sawan Somvar) को विशेष रूप से पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें। पंचामृत में दूध, दही, शहद, शक्कर और गंगाजल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं और मन में अपने लक्ष्य को दोहराते हुए प्रार्थना करें। यह साधना आत्मबल को बढ़ाती है और यश, सफलता व सामाजिक मान-सम्मान प्रदान करती है। इसे भी पढ़ें:- सावन 2025: क्यों प्रिय है महादेव को बेलपत्र? जानिए इसके पीछे छिपी पौराणिक कथा और महत्व अच्छे स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए उपाय यदि आप शारीरिक रोगों से छुटकारा पाना चाहते हैं या मानसिक तनाव से मुक्ति की इच्छा रखते हैं, तो सावन सोमवार के दिन शिव मंदिर में सेवा करें। मंदिर परिसर की साफ-सफाई करें या सफाई कार्य में सहयोग दें। कहा जाता है कि भगवान शिव (Lord Shiva) को स्वच्छता अत्यंत प्रिय है, और यह सेवा उन्हें प्रसन्न करती है। इस उपाय से जीवन में आरोग्य, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। शिवलिंग पर क्या अर्पित करने से क्या फल प्राप्त होता है? Latest News in Hindi Today Hindi news Sawan Somvar #SawanSomwar2025 #LordShivaRemedies #BholenathBlessings #SawanVrat2025 #SpiritualTips #ShivaPuja #HinduFestivals #WishFulfillment

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Sawan Somvar Vrat 2025 Rules to Please Lord Shiva

सावन सोमवार व्रत 2025: शिव कृपा पाने के लिए अपनाएं ये नियम, बन जाएं भोलेनाथ के प्रिय

सावन का महीना भगवान शिव (Lord Shiva) को समर्पित होता है। यह मास पूरे वर्ष में सबसे पवित्र और आध्यात्मिक दृष्टि से फलदायी माना जाता है। विशेष रूप से सावन के सोमवार को व्रत रखने और शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। वर्ष 2025 में सावन मास की शुरुआत 11 जुलाई से होगी और समापन 9 अगस्त को होगा। इस अवधि में कुल चार सोमवार आएंगे, जो शिवभक्ति और व्रत के लिए अत्यंत शुभ माने जाएंगे। व्रत की विधि: 1. स्नान और शुद्ध वस्त्रों का महत्व व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और तन, मन और विचारों को पवित्र करें। इसके बाद साफ-सुथरे और सात्विक वस्त्र धारण करें। यही पूजा की प्रथम और आवश्यक तैयारी है। 2. सात्विकता और उपवास का पालन दिनभर सात्विकता बनाए रखें। फल, दूध और पानी का सेवन करें। नमक, अनाज, मसाले और तामसिक भोजन से परहेज करें। मानसिक और शारीरिक संयम भी आवश्यक है। 3. श्रद्धापूर्वक शिवलिंग का अभिषेक करें घर या मंदिर में शिवलिंग (Lord Shiva) पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद से अभिषेक करें। बेलपत्र, भस्म, धतूरा, सफेद फूल आदि अर्पित करें। पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। 4. संध्या के समय चंद्रदेव को अर्घ्य दें व्रत पूर्ण होने के पश्चात संध्या के समय चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करना नितांत आवश्यक है। यह मन की निर्मलता, मानसिक संतुलन और चंद्रमा की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। 5. संयमित वाणी, विचार और आचरण व्रत के दौरान क्रोध, छल, निंदा, झूठ और लोभ जैसे भावों से दूरी बनाए रखें। मधुर वाणी, निर्मल विचार और सरल आचरण शिव भक्ति को पूर्णता प्रदान करते हैं। 6. दान और सेवा से पुण्य अर्जन करें व्रत के दिन किसी भूखे को भोजन कराएं, प्यासे को जल पिलाएं और ज़रूरतमंद को वस्त्र दें। सेवा और करुणा से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और जीवन में उनकी कृपा का प्रवाह होता है। सावन व्रत में इन खाद्य पदार्थों का करें सेवन 1. फल और फलों का सलाद ताजे मौसमी फल जैसे सेब, केला, अंगूर, अनार आदि का सेवन करें या इनसे फल सलाद बनाकर खाएं। ये शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं और दिनभर की ऊर्जा बनाए रखते हैं। 2. राजगिरा से बने पराठे राजगिरा आटा व्रत में उपयुक्त होता है। इससे बने पराठे हल्के और स्वादिष्ट होते हैं जिन्हें दही या हरी चटनी के साथ खाया जा सकता है। 3. साबूदाना, मखाना, कुट्टू और अरारोट इन उपवास अनाजों से साबूदाना खिचड़ी, मखाना खीर, कुट्टू के पकौड़े या पराठे, अरारोट हलवा जैसे व्यंजन बनाए जा सकते हैं। ये पचने में आसान और पौष्टिक होते हैं। 4. दूध और दूध से बनी चीजें दूध, दही, छाछ, पनीर और घी जैसी चीजें व्रत में शरीर को आवश्यक पोषण और ताकत देती हैं। ये कमजोरी नहीं आने देते और लंबे समय तक पेट भरा रखते हैं। 5. मेवे और ड्राय फ्रूट्स बादाम, काजू, किशमिश, खजूर जैसे मेवे व्रत में उत्तम माने जाते हैं। ये एनर्जी बूस्टर होते हैं और पोषण में भी सहायक होते हैं। 6. नारियल पानी और हाइड्रेशन व्रत में नारियल पानी पीना अत्यंत लाभकारी होता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखता है और आवश्यक खनिजों की पूर्ति करता है। 7. हल्की और उपयुक्त सब्जियां शकरकंद, लौकी, आलू और अरबी जैसी सब्जियां व्रत में आसानी से पचने वाली होती हैं। इन्हें उबालकर या हल्के घी में सेंधा नमक व काली मिर्च डालकर बनाया जा सकता है। 8. व्रत में उपयोगी मसाले और स्वाद सेंधा नमक, काली मिर्च, हरा धनिया जैसे व्रत में अनुमेय मसाले न केवल स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि पाचन में भी सहायता करते हैं। इसे भी पढ़ें:- सावन 2025: क्यों प्रिय है महादेव को बेलपत्र? जानिए इसके पीछे छिपी पौराणिक कथा और महत्व व्रत के लाभ: सावन सोमवार व्रत (Sawan Somwar Vrat) करने से कुंवारी कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Lord Shiva #SawanSomvar2025 #LordShiva #SomvarVrat #ShivaDevotees #SawanVratRules

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Mysterious Color Change of Khatu Shyam Idol

खाटू श्याम मंदिर: क्या है श्याम बाबा की प्रतिमा के बदलते रंग का रहस्य?

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर न केवल भारत बल्कि दुनियाभर में भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) के कलियुगीन अवतार श्री श्याम बाबा को समर्पित है, जिनकी प्रतिमा के बारे में मान्यता है कि इसका रंग समय-समय पर बदलता है। कभी यह प्रतिमा काली दिखती है, कभी हल्की भूरी, तो कभी बिल्कुल उजली और चमकदार। भक्त इसे बाबा का चमत्कार मानते हैं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी इस रहस्य को समझने का प्रयास करता है। तो आखिर क्या है खाटू श्याम की प्रतिमा के रंग बदलने का रहस्य? आइए जानते हैं इससे जुड़ी कथा, मान्यताएं और संभावित कारण। कौन हैं खाटू श्याम? खाटू श्याम जी (Khatu Shyam) को महाभारत के युद्ध में वीरता और बलिदान का प्रतीक माने जाने वाले बर्बरीक का कलियुगीन स्वरूप माना जाता है। बर्बरीक, घटोत्कच और नाग कन्या मोरवी का पुत्र था, जो अत्यंत पराक्रमी और तीन बाणों का धनी था। भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध से पूर्व उसकी परीक्षा ली और उसके बलिदान की मांग की। बर्बरीक ने बिना झिझक अपना शीश श्रीकृष्ण को अर्पित कर दिया। श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में तुम श्याम नाम से पूजे जाओगे और मेरी ही तरह भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करोगे। क्या है प्रतिमा के बदलते रंग का रहस्य? कृष्ण पक्ष: परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, जैसे ही माह का कृष्ण पक्ष आरंभ होता है, खाटू श्याम जी (Khatu Shyam) की प्रतिमा को सांवले यानी श्याम वर्ण रूप में अलंकृत किया जाता है। इस समय उन्हें विशेष चंदन और अन्य सुगंधित सामग्री से श्रृंगारित किया जाता है, जिससे प्रतिमा में पीले रंग की आभा दिखाई देती है। यह रूप बाबा के सौम्य और करुणामय स्वरूप को दर्शाता है, जो भक्तों को विशेष रूप से आकर्षित करता है। शुक्ल पक्ष: वहीं जब शुक्ल पक्ष आता है, तब श्याम बाबा को शालिग्राम स्वरूप में सजाया जाता है। इस रूप में उनकी प्रतिमा में गहरे काले रंग की झलक देखने को मिलती है। विशेषकर अमावस्या के दिन बाबा का अभिषेक विविध औषधीय द्रव्यों और पवित्र सामग्रियों से किया जाता है, जिससे उनका वास्तविक रूप उभरकर सामने आता है। यह गहरा रंग उनकी गंभीरता, तेज और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है। भक्तों के लिए एक रहस्य, परंपरा के लिए श्रद्धा का प्रतीक: धार्मिक मान्यता के अनुसार, खाटू श्याम जी (Khatu Shyam) की प्रतिमा महीने के 23 दिन श्याम वर्ण यानी हल्का पीला रूप धारण करती है, जबकि 7 दिन वह शालिग्राम रूप यानी गहरे रंग में दिखाई देती है। यह परिवर्तन केवल एक चमत्कार नहीं, बल्कि मंदिर की प्राचीन परंपरा का हिस्सा है। बाबा के इन दोनों स्वरूपों का दर्शन भक्तों को उनकी विविध लीलाओं और स्वरूपों की अनुभूति कराता है, जिससे उनकी भक्ति और गहरी हो जाती है। धार्मिक मान्यता और महत्व खाटू श्याम जी को भगवान श्रीकृष्ण (Lord ShriKrishna) के कलियुग में प्रकट हुए रूप के तौर पर पूजा जाता है। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के समय वीर योद्धा बर्बरीक, जो आगे चलकर खाटू श्याम के नाम से विख्यात हुए, ने अपनी भक्ति और समर्पण में भगवान श्रीकृष्ण को अपना शीश अर्पित कर दिया था। श्रीकृष्ण उनकी निःस्वार्थ भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया कि कलियुग में वे श्याम नाम से पूजे जाएंगे और उनके भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी। इसीलिए आज खाटू श्याम जी (Khatu Shyam) को हारे का सहारा कहा जाता है। इसे भी पढ़ें:- मुखाग्नि से पहले क्यों किया जाता है सुहागिन स्त्री का सोलह श्रृंगार? मंदिर की प्राचीन परंपरा का अभिन्न अंग है रंग परिवर्तन मान्यताओं के अनुसार, खाटू श्याम जी (Khatu Shyam) की प्रतिमा हर माह लगभग 23 दिन श्याम वर्ण यानी हल्के पीले स्वरूप में और शेष 7 दिन शालिग्राम यानी गहरे काले रूप में भक्तों को दर्शन देती है। यह रूपांतरण श्रद्धालुओं के लिए भले ही एक चमत्कार जैसा प्रतीत होता हो, लेकिन यह वास्तव में मंदिर की सदियों से चली आ रही एक विशेष परंपरा है। इस परंपरा के अंतर्गत बाबा को विभिन्न स्वरूपों में श्रृंगारित किया जाता है, जिससे उनकी विविध लीलाओं और रूपों का दर्शन संभव हो पाता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Khatu Shyam #KhatuShyamJi #ShyamBaba #SpiritualMystery #RajasthanTemple #DivineMiracle

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Why Belpatra Is Dear to Lord Shiva in Sawan 2025

सावन 2025: क्यों प्रिय है महादेव को बेलपत्र? जानिए इसके पीछे छिपी पौराणिक कथा और महत्व

सावन का महीना भगवान शिव (Lord Shiva) की आराधना का सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है। इस माह में भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, पंचामृत, धतूरा, भस्म, शमी पत्र और बेलपत्र चढ़ाकर महादेव को प्रसन्न करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर बेलपत्र ही क्यों शिव को इतना प्रिय है? इसके पीछे केवल धार्मिक नियम नहीं, बल्कि गहरी पौराणिक मान्यताएं और कथाएं जुड़ी हैं। आइए, सावन 2025 (Sawan 2025) के शुभ अवसर पर जानते हैं बेलपत्र का महत्व, उसकी वैज्ञानिकता और इससे जुड़ी कथाओं की विस्तृत जानकारी। बेलपत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण धार्मिक मान्यताएं बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखने योग्य बातें: इसे भी पढ़ें:- मुखाग्नि से पहले क्यों किया जाता है सुहागिन स्त्री का सोलह श्रृंगार? बेलपत्र से जुड़ी पौराणिक कथा: पहली कथा के अनुसार, जब समुद्र मंथन हुआ था, तब उसमें से कालकूट विष निकला जिसे संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव (Lord Shiva) ने अपने कंठ में धारण कर लिया। विष के प्रभाव से उनका कंठ अत्यधिक तपने लगा। तब देवताओं ने शिव की पीड़ा को शांत करने के लिए उन्हें जल के साथ बेलपत्र अर्पित करना शुरू किया। बेलपत्र की शीतलता ने शिवजी को राहत पहुंचाई। तभी से शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा आरंभ हुई। दूसरी मान्यता यह है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए वर्षों तक घने जंगलों में कठोर तप किया। तपस्या के दौरान उन्होंने बेल के पत्तों से शिवजी की उपासना की और उन्हें प्रसन्न किया। शिव ने पार्वती की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से बेलपत्र को शिवलिंग पर अर्पित करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। यही कारण है कि भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है। Latest News in Hindi Today Hindi news Sawan 2025 #Sawan2025 #LordShiva #Belpatra #SawanSpecial #ShivaWorship #SpiritualSignificance #HinduMythology #Mahadev

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Sawan 2025 First Monday

सावन 2025: पहले सोमवार पर शिववास और शुभ योगों का महासंगम

सावन, जिसे श्रावण मास भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग का वह पवित्र महीना है जिसमें भगवान शिव (Lord Shiva) की पूजा-उपासना का विशेष महत्व होता है। वर्ष 2025 में सावन का आरंभ 11 जुलाई से हो रहा है और यह माह 9 अगस्त तक चलता है । सावन के दौरान हर सोमवार को रहा गया व्रत सावन सोमवार व्रत —आस्था में विश्वास रखने वाले भक्तों के लिए दोगुने लाभ का स्रोत माना जाता है। सावन सोमवार 2025: शुभ मुहूर्त की जानकारी वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन मास का पहला सोमवार कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ेगा। सरल भाषा में कहें तो 14 जुलाई को रात 11 बजकर 59 मिनट तक चतुर्दशी तिथि रहेगी। इसी कारण 14 जुलाई को ही सावन का पहला सोमवार और संकष्टी चतुर्थी दोनों पड़ रही हैं। सावन सोमवार 2025: विशेष योग और उनका महत्व ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सावन (Sawan) का पहला सोमवार कई खास और दुर्लभ योगों से युक्त होगा। इस दिन शाम 4 बजकर 14 मिनट तक आयुष्मान योग रहेगा, जिसके बाद सौभाग्य योग का प्रारंभ होगा। इसके साथ ही इस दिन शिववास योग का भी संयोग बन रहा है, जो पूरी रात रहेगा। इस दौरान भगवान शिव पहले कैलाश पर्वत पर माता पार्वती संग विराजमान होंगे, फिर नंदी पर सवार होंगे। ऐसी मान्यता है कि इन योगों में भगवान शिव (Lord Shiva) की आराधना करने से साधक को सामान्य दिनों की तुलना में दोगुना फल प्राप्त होता है। सावन का आध्यात्मिक महत्व श्रावण (Sawan) मास भगवान शिव का प्रिय महीना है और इस दौरान देवी पार्वती की काव्यात्मक महिमा भी विशेष रूप से गायी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी महीने माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पत्नी रूप में प्राप्त किया था, जिससे श्रावण मास की भोलेनाथ के प्रति भक्ति और भी दृढ़ हुई। समुद्र मंथन में उत्पन्न विष ‘हलाहल’ को पीकर संसार की रक्षा करने वाले शिव को सच्चा पूजक श्रावण के सोमवारों पर निरंतर जलाभिषेक, बेल पत्र चढ़ाना और रुद्राभिषेक जैसी विधियां करते हैं, जिससे पुण्य और चमत्कारिक फल अर्जित होता है। सावन 2025 के सोमवार और विशेष योग 14 जुलाई 2025 – पहला सोमवार सावन (Sawan) का पहला सोमवार धनिष्ठा नक्षत्र में आ रहा है। इस दिन आयुष्मान योग का निर्माण होगा। साथ ही गणेश चतुर्थी का विशेष संयोग भी बन रहा है, जिससे शिव-गणेश की एक साथ पूजा का अवसर मिलेगा। 21 जुलाई 2025 – दूसरा सोमवार इस दिन चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में वृषभ राशि में स्थित रहेंगे। ऐसे में गौरी योग के साथ-साथ कामिका एकादशी का भी संयोग है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और वृद्धि योग का निर्माण होगा, जिससे भगवान शिव (Lord Shiva) और विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त होगी। सुख, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति का उत्तम समय रहेगा। 28 जुलाई 2025 – तीसरा सोमवार इस दिन चंद्रमा पूर्वाफाल्गुनी और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में भ्रमण करेगा तथा सिंह राशि में रहेगा। इससे अत्यंत शुभ धन योग बनेगा। इसके अतिरिक्त मंगल का गोचर होने से भगवान शिव की उपासना के माध्यम से मंगल दोष और कालसर्प दोष के प्रभाव को कम करने का सुनहरा अवसर रहेगा। इस दिन वृद्ध चतुर्थी का योग भी रहेगा। 4 अगस्त 2025 – चौथा सोमवार सावन का अंतिम सोमवार भी अत्यंत शुभ रहेगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, ब्रह्म योग और इंद्र योग का दुर्लभ संगम होगा। चंद्रमा अनुराधा और चित्रा नक्षत्र में स्थित रहकर वृश्चिक राशि में संचार करेगा। इस दिन भगवान शिव की पूजा से जीवन के हर क्षेत्र में सिद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त होगा। इसे भी पढ़ें:- मुखाग्नि से पहले क्यों किया जाता है सुहागिन स्त्री का सोलह श्रृंगार? पूजा व व्रत विधि सावन (Sawan) के सोमवार को भगवान शिव की विशेष पूजा विधि से आराधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल छिड़क कर उसे पवित्र करें। फिर भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग स्थापित करें और प्रतिदिन गंगाजल से उनका अभिषेक करें। शिवलिंग पर सबसे पहले बेलपत्र अर्पित करें, फिर फूल चढ़ाएं और सफेद चंदन का लेप करें। इसके बाद घी का दीपक प्रज्वलित करें। महिलाएं इस दिन माता पार्वती का श्रृंगार करें। फिर “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं” मंत्र का 108 बार जप करें। जो भक्त सावन सोमवार का व्रत कर रहे हों, वे सोमवार व्रत की कथा का पाठ करें और अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। व्रत रखने वाले केवल एक बार भोजन करें और वह भी सात्विक होना चाहिए। इस दिन मन, वचन और कर्म से किसी को आहत न करें, तभी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Sawan #sawan2025 #sawansomwar #shivvas #auspiciousyogas #shravanmonth #sawanpuja #hindufestival2025

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Ravan and the Stairs to Heaven

रावण और स्वर्ग की सीढ़ियां: अधूरी रह गई अमरता की खोज

रावण केवल लंका का महाराज या धनुर्धर नहीं था, बल्कि वह एक गहन साधक और विद्वान भी था। उसकी कहानी में एक बेहद रहस्यमय पहलू जुड़ा है: उसने स्वयं स्वर्ग तक पहुंचने के लिए पाँच सीढ़ियों का निर्माण किया था, लेकिन चौथी तक ही सीमित रह गया। इसे ही रावण की गलती माना जाता है। इस लेख में जानिए उन पाँच सीढ़ियों की जगहें और कैसे हर एक ने उसकी नियति में निर्णायक भूमिका निभाई। स्वर्ग की सीढ़ी का रहस्य: रावण की अधूरी अमरता की कहानी रावण की स्वर्ग की सीढ़ी बनाने की कहानी उसकी अमरता पाने की महत्वाकांक्षा से शुरू होती है। रावण अत्यंत विद्वान और तपस्वी था, लेकिन उसे अपने बल और शक्ति पर अत्यधिक घमंड था। उसने अपनी शक्तियों को और अधिक बढ़ाने तथा अमरता प्राप्त करने के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या की। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे एक वरदान दिया, लेकिन इसके लिए एक कठिन शर्त रखी। शिवजी ने कहा कि यदि रावण एक ही दिन में स्वर्ग तक जाने वाली पांच सीढ़ियां बना लेता है, तो वह अमर हो जाएगा। रावण ने तुरंत कार्य शुरू कर दिया और बड़ी तत्परता से सीढ़ियां बनाने लगा। लेकिन वह सिर्फ चार सीढ़ियां ही बना पाया, क्योंकि काम के दौरान ही उसे नींद आ गई और वह पांचवीं सीढ़ी का निर्माण नहीं कर सका। इस प्रकार, रावण का स्वर्ग जाने और अमरता प्राप्त करने का सपना अधूरा रह गया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रावण (Ravan) द्वारा बनाई गई पहली सीढ़ी आज के उत्तराखंड स्थित हरिद्वार में मानी जाती है। यही कारण है कि यहां के प्रमुख घाट का नाम हर की पौड़ी पड़ा, जिसमें “पौड़ी” शब्द का अर्थ ही “सीढ़ी” होता है। यह स्थान हिंदुओं के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। हर की पौड़ी पर प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु स्नान करते हैं और गंगा आरती में भाग लेते हैं। सावन मास के दौरान यहां शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, जो इसे और भी आध्यात्मिक रूप से विशेष बनाती है। इस प्रकार, रावण की अधूरी स्वर्ग यात्रा की यह कथा हमें यह सिखाती है कि चाहे कोई कितना भी बलवान और विद्वान क्यों न हो, यदि उसमें संयम और जागरूकता की कमी हो, तो उसका उद्देश्य अधूरा रह सकता है। पौड़ीवाला मंदिर, सिरमौर (सीढ़ी 2) पौराणिक मान्यता के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित पौड़ीवाला वह स्थान है जहां रावण ने स्वर्ग तक पहुंचने के लिए दूसरी सीढ़ी का निर्माण किया था। यह स्थान धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां भगवान शिव (Lord Shiva) का एक प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर भी स्थित है, जिसे पौड़ीवाला शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर का संबंध रामायण काल से है और कुछ धार्मिक ग्रंथों में भी इस प्रकार के मंदिर का उल्लेख मिलता है। इसी कारण, इस स्थान को रावण (Ravan) द्वारा निर्मित दूसरी सीढ़ी के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है। इस मंदिर में हर वर्ष हजारों श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं, खासकर वे लोग जो पौराणिक स्थलों और शिव भक्ति में रुचि रखते हैं। स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूर-दराज से भी भक्त यहां नियमित रूप से आते हैं, जिससे यह स्थान धार्मिक पर्यटन का भी एक अहम केंद्र बन गया है। चूड़ेश्वर महादेव (सीढ़ी 3) पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रावण (Ravan) ने स्वर्ग तक पहुंचने के लिए जिस तीसरी सीढ़ी का निर्माण किया था, वह हिमाचल प्रदेश के चूड़ेश्वर महादेव मंदिर में किया गया था। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है, जिसे हिंदू श्रद्धालुओं के बीच विशेष धार्मिक महत्ता प्राप्त है। चूड़ेश्वर महादेव मंदिर हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित है और इसे रावण की तपस्या तथा शिवभक्ति से जुड़ा पौराणिक स्थल माना जाता है। यह स्थान न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था का केंद्र बना हुआ है। धार्मिक यात्रा और आध्यात्मिक शांति की खोज में लगे श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर एक आदर्श गंतव्य है, जहां लोग शिव के दर्शन के साथ रावण की अधूरी अमरता की कथा से भी रूबरू होते हैं। इसे भी पढ़ें:- मुखाग्नि से पहले क्यों किया जाता है सुहागिन स्त्री का सोलह श्रृंगार? किन्नर कैलाश (सीढ़ी 4) ऐसी मान्यता है कि रावण (Ravan) ने स्वर्ग की ओर जाने वाली चौथी सीढ़ी का निर्माण हिमाचल प्रदेश के किन्नर कैलाश में किया था। यह स्थान भगवान शिव और माता पार्वती का निवास स्थल माना जाता है और हिंदू श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र और श्रद्धा से जुड़ा हुआ है। किन्नर कैलाश श्रृंखला हिमाचल के किन्नौर जिले में स्थित है। यहां एक 79 फीट ऊंचा शिवलिंग स्थित है, जिसकी खास बात यह है कि यह दिनभर में कई बार अपना रंग बदलता है, जिसे चमत्कारी और दिव्य माना जाता है। यह विशाल शिवलिंग पार्वती कुंड के समीप स्थित है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण माता पार्वती ने स्वयं किया था। यह स्थल न केवल प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है, बल्कि आध्यात्मिक शांति और शिवभक्ति के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां हर साल सैकड़ों श्रद्धालु कठिन चढ़ाई के बावजूद दर्शन के लिए आते हैं और रावण की अधूरी स्वर्ग-यात्रा से जुड़ी इस प्राचीन कथा को भी जानने का प्रयास करते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Ravan #ravan #heavenlystairs #immortality #mythology #ancientindia

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Can We Eat Prasad Offered on Shivling

क्या शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद खा सकते हैं? जानें शास्त्रों की मान्यताएं और नियम

हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। विशेषकर सावन माह, प्रदोष व्रत, सोमवार व महाशिवरात्रि के दिन श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, फूल आदि अर्पित करते हैं। लेकिन एक सवाल अक्सर भक्तों के मन में आता है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद (विशेषकर दूध, जल, फल आदि) क्या खाया जा सकता है या नहीं? क्या यह शुभ होता है या फिर इससे बचना चाहिए? आइए जानें भगवान शिव को अर्पित की गई पूजा सामग्री का क्या होता है महत्व? जानिए अभिषेक में चढ़े दूध, जल, भांग और बेलपत्र को खाने से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और उनके पीछे का तात्त्विक कारण।  शिवलिंग की पूजा और उसकी विशेषता शिवलिंग, भगवान शिव का निराकार रूप है और इसे सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति और संहार का प्रतीक माना जाता है। शिवलिंग (Shivling) पर जलाभिषेक या दुग्धाभिषेक करना अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। इस प्रक्रिया को ‘अभिषेक’ कहा जाता है, जो कि भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का मुख्य साधन है। परंतु, प्रसाद के रूप में जो वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं, उनके उपयोग के कुछ विशिष्ट नियम भी शास्त्रों में दिए गए हैं। पौराणिक संदर्भ शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव के मुख से चण्डेश्वर नामक गण उत्पन्न हुए थे, जिन्हें भूत-प्रेतों का अधिपति माना जाता है। मान्यता है कि शिवलिंग पर अर्पित किया गया भोग या प्रसाद चण्डेश्वर को समर्पित होता है। इसी कारण यह विश्वास प्रचलित है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद भोजन के रूप में ग्रहण करना ऐसा है, जैसे भूत-प्रेतों का भोजन करना। इसलिए धार्मिक दृष्टिकोण से शिवलिंग पर चढ़े प्रसाद को खाने की मनाही होती है। मूर्ति पर अर्पित प्रसाद को किया जा सकता है ग्रहण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चांदी, पीतल और तांबे जैसे धातुओं से बने शिवलिंग (Shivling) पर चढ़ाए गए प्रसाद को ग्रहण करना दोषरहित होता है। ऐसे प्रसाद को खाने से किसी प्रकार की बाधा नहीं होती। इसके अलावा, भगवान शिव (Lord Shiva) की प्रतिमा पर चढ़ाया गया प्रसाद भी शुभ और ग्रहणीय माना गया है। मान्यता है कि शिव मूर्ति पर अर्पित प्रसाद को श्रद्धापूर्वक सेवन करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। प्रसाद से जुड़ी महत्वपूर्ण सावधानियां शिवलिंग (Shivling) पर कुछ विशेष सामग्री चढ़ाना निषेध माना गया है, जिनमें तुलसी के पत्ते और हल्दी प्रमुख हैं। ऐसे पदार्थों को भगवान शिव को अर्पित नहीं करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, शिवलिंग पर अर्पित किए जाने वाले भोग को पीतल या चांदी जैसे पवित्र धातुओं से बने पात्र में रखना चाहिए। ध्यान रखें कि भोग को कभी भी सीधे भूमि पर न रखें। जब पूजा विधिवत पूर्ण हो जाए, तब उस प्रसाद को श्रद्धापूर्वक शिवलिंग के निकट से हटाना चाहिए। इससे धार्मिक मर्यादा बनी रहती है और पूजा सफल मानी जाती है। इसे भी पढ़ें:- मुखाग्नि से पहले क्यों किया जाता है सुहागिन स्त्री का सोलह श्रृंगार? प्रसाद से जुड़े आवश्यक नियम शिवलिंग (Shivling) पर कुछ विशेष वस्तुएं अर्पित करना वर्जित माना गया है, जिनमें तुलसी के पत्ते और हल्दी प्रमुख हैं। शिवलिंग को प्रसाद अर्पित करते समय इसे पीतल या चांदी जैसे पवित्र धातु के पात्र में रखकर ही चढ़ाना चाहिए। कभी भी प्रसाद को सीधे भूमि पर नहीं रखना चाहिए। पूजा संपन्न होने के बाद प्रसाद को शिवलिंग के समीप से उठाकर विधिपूर्वक अलग स्थान पर रखना चाहिए। इससे पूजा में शुद्धता बनी रहती है और धार्मिक नियमों का पालन भी होता है। बेलपत्र और धतूरा क्यों नहीं खाते? बेलपत्र भगवान शिव (Lord Shiva) को अत्यंत प्रिय है, लेकिन यह औषधीय गुणों से युक्त होते हुए भी आमतौर पर सेवन के योग्य नहीं माना गया है। वहीं धतूरा विषैला होता है और स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक है। इसलिए ये पूजन सामग्री केवल पूजा तक ही सीमित रखी जाती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Shivling #shivling #prasad #hindubeliefs #shivpuja #spiritualrules #scripturalbeliefs #shivalinga #prasadrituals

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Sawan 2025

सावन 2025 में लगाएं ये पौधे, मिलेगी भोलेनाथ की कृपा

हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और कृपा प्राप्ति के लिए विशेष महत्व रखता है। यह माह पूरे वर्ष में सबसे पवित्र महीनों में एक माना जाता है, जिसमें शिव भक्त पूरे समर्पण और श्रद्धा से उपवास, पूजा, जलाभिषेक और व्रत करते हैं। सावन के महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने, बेलपत्र अर्पित करने के साथ-साथ कुछ खास पौधे लगाने की भी परंपरा है, जिन्हें धर्म, आयुर्वेद और वास्तु तीनों दृष्टिकोण से बेहद शुभ और कल्याणकारी माना गया है। आइए जानते हैं सावन 2025 (Sawan) में कौन-कौन से पौधे लगाने से न केवल बिगड़े काम बन सकते हैं, बल्कि भगवान शिव की कृपा भी आप पर बनी रहती है। 1. बेल का पौधा (Bel Tree) भगवान शिव (Lord Shiva) को बेल के पत्ते (बिल्व पत्र) अत्यंत प्रिय माने जाते हैं। तीन पत्तियों वाला बेल पत्र शिवलिंग पर अर्पित करने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं। सावन माह (Sawan) में घर के आंगन या बगीचे में बेल का पौधा लगाना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इसे लगाने से घर से दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। वास्तु शास्त्र भी इसे शुभ मानता है, क्योंकि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाता है। 2. तुलसी का पौधा (Tulsi Plant) हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यंत पवित्र और देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। भले ही तुलसी के पत्ते सीधे भगवान शिव को अर्पित नहीं किए जाते, लेकिन घर में तुलसी का पौधा लगाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। सावन के महीने में तुलसी का पौधा लगाकर नियमित रूप से उसकी पूजा करने से घर में सुख-शांति और धन-समृद्धि का वास होता है। 3. धतूरे का पौधा धतूरा उन प्रिय पुष्पों में से एक है जिन्हें भगवान शिव को अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन के पावन महीने में शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाने से भगवान भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं। यदि आप अपने घर में धतूरे का पौधा लगाते हैं, तो यह शिव कृपा का प्रतीक माना जाता है। यह पौधा न केवल आर्थिक समृद्धि लाता है, बल्कि शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में भी सहायक होता है। 4. आक का पौधा (मदार) भगवान शिव को आक का पौधा विशेष रूप से प्रिय है, विशेषकर इसके सफेद फूल। सावन के महीने में आक का पौधा रोपण करना शुभ माना जाता है। इसे घर में लगाने से महादेव की कृपा बनी रहती है, जिससे परिवार में धन-धान्य में वृद्धि होती है। आक के फूल और पत्ते शिवलिंग पर चढ़ाने से शिवजी प्रसन्न होते हैं और भक्त की इच्छाएं पूर्ण करते हैं। 5. शमी का पौधा (Shami Tree) शमी का पौधा भगवान शिव (Lord Shiva) के साथ-साथ शनिदेव को भी अत्यंत प्रिय है। इसे घर में लगाने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और वातावरण में शांति बनी रहती है। सावन के पावन महीने में शमी का पौधा लगाने से शिवजी की कृपा तो मिलती ही है, साथ ही शनिदेव का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। मान्यता है कि इससे धन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं और आर्थिक स्थिति में सुधार आता है। इसे भी पढ़ें:- मुखाग्नि से पहले क्यों किया जाता है सुहागिन स्त्री का सोलह श्रृंगार? घर में सकारात्मकता लाने वाला पौधा भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय हैं। यदि आप महादेव की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो सावन के महीने में अपने घर में बेलपत्र का पौधा अवश्य लगाएं और नियमित रूप से उसकी पूजा करें। इसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बेलपत्र का पौधा लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और शिवजी को अर्पित करने पर भक्त को उत्तम फल प्राप्त होते हैं। इस पौधे को घर की उत्तर या दक्षिण दिशा में लगाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। हर इच्छा होगी पूरी सनातन धर्म में शमी के पौधे को अत्यंत पावन और फलदायी माना गया है। सावन (Sawan) के पवित्र माह में यदि इस पौधे को घर में लगाया जाए, तो परिवार के सभी सदस्यों पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और नकारात्मकता दूर होती है। पूजा के समय महादेव को शमी की पत्तियां अर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Lord Shiva #sawan2025 #lordshiva #sacredplants #shivbhakti #hindufestivals #plantforpositivity #shivpooja

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Shri Ram Mandir Ayodhya

Shri Ramayana Yatra Tour Package: IRCTC की ‘श्री रामायण यात्रा’

बारिश के मौसम में अगर आप कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) आपके लिए एक बेस्ट ट्रेवल पैकेज लेकर आया है। IRCTC द्वारा इस वर्ष श्री रामायण यात्रा नाम की विशेष ट्रेन टूर पैकेज (Shri Ramayana Yatra Tour Package) का आयोजन किया जा रहा है, जो धार्मिक आस्था से जुड़े लोगों के लिए एक सुनहरा अवसर है। यह यात्रा 25 जुलाई 2025 से शुरू होगी और कुल 17 दिनों की होगी, जिसमें देशभर के 30 प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा कराई जाएगी। आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा  श्री राम मंदिर अयोध्या (Shri Ram Mandir Ayodhya) के उद्घाटन के बाद से ही धार्मिक पर्यटन को देशभर में जबरदस्त गति मिली है। IRCTC भी धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है और यह  श्री रामायण यात्रा नाम की विशेष ट्रेन टूर पैकेज (Shri Ramayana Yatra Tour Package) उसी का हिस्सा है। यह पांचवीं बार है जब यह विशेष यात्रा आयोजित की जा रही है। इसके माध्यम से रामभक्तों को भगवान श्रीराम (Lord Shri Ram) के जीवन से जुड़े विभिन्न स्थलों का दर्शन करने का अवसर मिलेगा। यात्रा का मार्ग और प्रमुख स्थल श्री रामायण यात्रा (Shri Ramayana Yatra) की शुरुआत दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से होगी और यह भारत गौरव डीलक्स एसी पर्यटक ट्रेन से संचालित की जाएगी। ट्रेन अयोध्या से होकर नंदीग्राम, सीतामढ़ी, जनकपुर, बक्सर, वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट, नासिक, हम्पी और रामेश्वरम होते हुए  फिर दिल्ली लौटेगी। ट्रेन में मिलने वाली सुविधाएं भारत गौरव डीलक्स एसी पर्यटक ट्रेन को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। इसमें दो रेस्टोरेंट, एक एडवांस  किचन, कोच में शॉवर क्यूबिकल, सेंसर आधारित वॉशरूम, फुट मसाजर, CCTV कैमरा, और सुरक्षा गार्ड की सुविधा उपलब्ध है। यात्रियों के आराम और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है। पैकेज शुल्क और व्यवस्थाएं इस रामायण यात्रा टूर के लिए विभिन्न श्रेणियों के अनुसार किराया तय किया गया है: इस पैकेज में यात्रियों को 3-स्टार होटलों में ठहरने की व्यवस्था, शुद्ध शाकाहारी भोजन, दर्शनीय स्थलों पर ले जाने की सुविधा और यात्रा बीमा भी शामिल है। यह टूर पूरी तरह से सुविधाजनक है, जिसमें यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो सकती है। इसे भी पढ़ें:- मुखाग्नि से पहले क्यों किया जाता है सुहागिन स्त्री का सोलह श्रृंगार? क्यों है यह यात्रा खास? श्री रामायण यात्रा (Shri Ram Mandir Ayodhya) न केवल धार्मिक आस्था को बल देती है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और आध्यात्मिक विरासत को जानने का एक अद्भुत अवसर भी प्रदान करती है। यह यात्रा उन लोगों के लिए आदर्श है जो भगवान राम के जीवन से जुड़े स्थलों को स्वयं जाकर अनुभव करना चाहते हैं। इसके माध्यम से यात्रियों को यह समझने का मौका मिलता है कि रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का एक अहम हिस्सा है। अगर आप इस मानसून में कुछ अलग, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो IRCTC की श्री रामायण यात्रा (Shri Ramayana Yatra) आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक यादगार और समृद्ध अनुभव भी है जो जीवन भर आपके साथ रहेगा। टिकट जल्दी भरने की संभावना है, इसलिए यदि आप इस यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो जल्द से जल्द अपनी सीट आरक्षित करा लेना बेहतर रहेगा। Latest News in Hindi Today Hindi news Shri Ram Mandir Ayodhya #ShriRamayanaYatra #IRCTCTourPackage #RamayanaCircuit #SpiritualTour #RamayanaTrain

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