पंजाब में बाढ़: जनजीवन अस्त-व्यस्त, राहत कार्य जारी

पंजाब इस समय भीषण बाढ़ की मार झेल रहा है। लगातार हो रही भारी वर्षा और पहाड़ी इलाकों से छोड़े गए अतिरिक्त पानी के कारण नदियाँ उफान पर हैं। कई जिलों के सैकड़ों गाँव पानी में डूब चुके हैं। गाँव की गलियाँ, खेत और घर जलमग्न हो गए हैं। लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं। फसलों और पशुधन पर भारी असर पंजाब, जिसे देश का अन्नदाता कहा जाता है, आज फसल बर्बादी के गहरे संकट से जूझ रहा है। धान और मक्का जैसी प्रमुख फसलें पानी में पूरी तरह डूब गई हैं। किसानों की मेहनत और सालभर की कमाई एक ही झटके में खत्म हो गई। साथ ही, हज़ारों मवेशियों और पोल्ट्री को भी बाढ़ ने प्रभावित किया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर और गहरा असर पड़ा है। जनहानि और पलायन कई लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं और हजारों परिवार बेघर हो गए हैं। राहत शिविरों में शरण लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। महिलाएँ, बच्चे और बुज़ुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हैं। स्वास्थ्य सेवाओं और साफ पीने के पानी की कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। राहत और बचाव कार्य राज्य सरकार और प्रशासनिक टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। एनडीआरएफ और स्थानीय स्वयंसेवी संगठन नावों और ट्रैक्टरों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचा रहे हैं। कई जगहों पर अस्थायी शिविर, भोजन वितरण केंद्र और चिकित्सा सुविधाएँ भी स्थापित की गई हैं। राजनीतिक बहस और भविष्य की चुनौती बाढ़ ने न केवल पंजाब की आर्थिक स्थिति को झकझोरा है, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी बहस छेड़ दी है। सरकार पर पर्याप्त तैयारी न करने के आरोप लग रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि समय रहते बाँधों और तटबंधों की मरम्मत की जाती और जल निकासी की व्यवस्था सुधारी जाती, तो नुकसान कम हो सकता था। सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं  पंजाब की यह बाढ़ सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि चेतावनी भी है कि हमें जल प्रबंधन और आपदा नियंत्रण की योजनाओं को और मज़बूत करना होगा। आज सबसे बड़ी ज़रूरत है कि प्रभावित परिवारों को तुरंत राहत मिले और भविष्य में ऐसी त्रासदी को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ। PunjabFloods #punjabNews#punjabfloods2025 #PunjabRescue #floods #PunjabFloodSituation #BreakingNews #FloodAlert

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turmoil of Maharashtra

महाराष्ट्र की राजनीतिक घमासान में एक दो नहीं 4-4 ‘संजय’ पर चर्चा, तीखी जुबानी जंग से लेकर हाथापाई तक 

महाराष्ट्र की राजनीति में एक तरफ जहां मराठी बनाम हिंदी भाषा का मुद्दा गर्म है, वहीं राज्य में संजय नाम के नेता भी सुर्खियों में हैं। एक तरफ जहां उद्धव ठाकरे गुट के मुख्य प्रवक्ता और राज्य सभा सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) अपने बयानों को लेकर हमेशा चर्चा में रहते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस से शिंदे गुट वाली शिवसेना में आए संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) भी विपक्ष पर तीखा पलटवार करने के कारण मीडिया में छाए रहते हैं। इन दोनों संजय के अलावा महाराष्ट्र में संजय नाम से दो और ऐसे नेता हैं, जो चर्चा में बने रहते हैं। ये हैं संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) और संजय गायकवाड़ (Sanjay Gaikwad)।  संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) राज्य सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री हैं और इस समय कैश कांड वीडियो को लेकर चर्चा में बने हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ संजय गायकवाड़ मुंबई के आकाशवाणी की कैंटीन में खराब खाने को लेकर मारपीट करने के चक्कर में चर्चित हो चुके हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में देखें तो ये चारों संजय इस समय एक दूसरे पर हमलवार हैं। संजय राउत (Sanjay Raut) जहां शिरसाट और गायकवाड़ को घेरने में जुटे हैं, तो वहीं संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) अपने बयानों से राउत पर प्रहार कर रहे हैं।  संजय राउत बनाम संजय शिरसाट और संजय निरुपम बता दें कि मंत्री संजय शिरसाट (Sanjay Shirsat) को आयकर विभाग ने संपत्ति में गड़बड़ी को लेकर नोटिस भेजा हुआ है। इस पर राजनीति अभी थमी भी नहीं थी कि संजय राउत (Sanjay Raut) ने शिरसाट के बेडरूम का एक वीडियो जारी किया। जिसमें शिरसाट कथित तौर पर नोटों से भरे एक बैग के पास सिगरेट पीते नजर आ रहे हैं। संजय राउत ने इस वीडियो के माध्यम से शिंदे की शिवसेना पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए घेरा है। वहीं संजय शिरसाट ने बैग में कपड़े होने का दावा करते हुए राउत पर मानहानि का केस करने की चेतावनी दी है।  वहीं दूसरी तरफ संजय निरुपम और संजय राउत (Sanjay Raut) भी एक दूसरे पर लगातार प्रहार करने में जुटे हैं। पिछले दिनों संजय राउत ने दावा किया था कि गुरु पूर्णिमा के दिन एकनाथ शिंदे अपने “गुरु” गृह मंत्री अमित शाह से मिलने दिल्ली गए थे। राउत के इस दावे को संजय निरुपम ने झूठा बातते हुए घेरा। निरुपम ने कहा कि गुरु पूर्णिमा के दिन अमित शाह झारखंड में थे और वहां एक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे। यह सभी को पता है, लेकिन इसके बाद भी राउत ने गंदी राजनीति के लिए झूठ फैलाया। इसके लिए राउत को बिना किसी शर्त एकनाथ शिंदे से माफी मांगनी चाहिए। साथ ही राउत को चटुकार तक कह दिया। इसके बाद से ही दोनों में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है।   इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ संजय गायकवाड़ भी भर रहे हुंकार बुलढाणा विधानसभा से विधायक संजय गायकवाड़ अपने कैंटीन प्रकरण को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। गायकवाड़ ने खराब खाने का आरोप लगाते हुए कैंटीन कर्मचारियों के साथ मारपीट की थी, जिसका वीडियो वायरल हो गया। गायकवाड़ के इस हरकत पर महराष्ट्र में खूब बवाल हुआ है। विवाद बढ़ने के बाद सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कार्रवाई के लिए यह मामला विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर को रेफर कर दिया है। अब देखना यह होगा कि स्पीकर इस मामले में क्या एक्शन लेते हैं। संजय गायकवाड़ अपनी हरकतों और बयानों को लेकर अक्सर कंट्रोवर्सी में रहते हैं। कैंटीन कर्मचारियों को पीटने के बाद गायकवाड़ ने विवादित बयान देते दक्षिण भारतीयों पर भी निशाना साधा था। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा था साउथ इंडियन डांस और लेडीज बार चला मराठा संस्कृति को खराब कर रहे हैं। ऐसे लोगों को कैंटीन के ठेके नहीं मिलने चाहिए। Latest News in Hindi Today Hindi news  #Maharashtraelection #Election2025 #Mumbai #Devendrafadnavish

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Mahakal Ujjain

उज्जैन में क्यों निकलती है महाकाल की सवारी? जानिए सदियों पुरानी परंपरा और उसका धार्मिक रहस्य

धार्मिक नगरी उज्जैन को प्राचीन काल से ही शिव की नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग को बारह ज्योतिर्लिंगों में सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त है। सावन के पावन महीने में जब पूरी धरती शिवमय हो जाती है, तब उज्जैन में महाकाल की सवारी एक ऐसा अद्भुत आयोजन होता है, जिसे देखने और अनुभव करने के लिए लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से उमड़ पड़ते हैं। पर क्या आपने कभी सोचा है कि इस महाकाल की सवारी का धार्मिक महत्व क्या है? क्यों भगवान स्वयं नगर भ्रमण पर निकलते हैं? आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक परंपरा और उसकी आस्था से जुड़ी गहराई को। महाकाल की सवारी क्या है? महाकाल की सवारी उज्जैन (Mahakal Ujjain) में सावन और भाद्रपद के विशेष सोमवारों को निकलने वाली एक पवित्र धार्मिक शोभायात्रा है। इस सवारी में भगवान महाकाल अपने विविध स्वरूपों—मनमहेश, चंद्रमौलेश्वर, भूतनाथ आदि—में नगर भ्रमण करते हैं। यह सवारी महाकाल मंदिर से निकलकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए रामघाट तक जाती है, जहां शिप्रा नदी में भगवान का अभिषेक किया जाता है। महाकाल की सवारी 2025: जानिए कब-कब निकलेंगी भव्य शोभायात्राएं  सावन मास में भगवान महाकाल की सवारी हर सोमवार को निकाली जाती है। वर्ष 2025 में यह सवारियां निम्नलिखित तिथियों को उज्जैन (Ujjain) नगर में श्रद्धा और भव्यता के साथ निकाली जाएंगी: महाकाल की सवारी का ऐतिहासिक महत्व (Mahakal Ki Sawari History) सावन और भाद्रपद के पावन महीनों में निकलने वाली महाकाल की यह विशेष सवारी एक प्राचीन धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, जो आज भी पूरे श्रद्धा और विधि-विधान से निभाई जाती है। इतिहास के अनुसार, इस सवारी को भव्य रूप देने का श्रेय राजा भोज को जाता है। उनके शासनकाल में महाकाल की सवारी में नए रथों और हाथियों को सम्मिलित कर इसे एक राजसी शोभायात्रा का रूप दिया गया था। तब से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है और प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन में भाग लेते हैं। महाकाल की सवारी का आध्यात्मिक महत्व (Mahakal Sawari Significance) महाकाल की सवारी को अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन माना जाता है। इस अवसर पर भगवान महाकाल को रथ पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया जाता है। सवारी के दौरान भक्तगण ऊँचे स्वर में “जय महाकाल” के नारे लगाते हैं और ढोल-नगाड़ों की गूंज से पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है। इस भव्य यात्रा में तलवारबाज, घुड़सवार और अखाड़ों के साधु-संत भी भाग लेते हैं। यह सवारी महाकाल की शक्ति, साकार स्वरूप और नगर पर उनकी कृपा का प्रतीक मानी जाती है। धार्मिक ग्रंथों में भी इस परंपरा का उल्लेख मिलता है, जो इसकी प्राचीनता और महत्व को प्रमाणित करता है। इसे भी पढ़ें:- सावन 2025: क्यों प्रिय है महादेव को बेलपत्र? जानिए इसके पीछे छिपी पौराणिक कथा और महत्व सावन में क्यों होती है सवारी? सावन का महीना भगवान शिव (Lord Shiva) को अत्यंत प्रिय है। इस मास में की गई शिव उपासना, व्रत, अभिषेक और पूजन का फल अत्यधिक होता है। सावन के सोमवार और महाकाल की सवारी का संयोग भक्तों के लिए एक दुर्लभ अवसर होता है, जब वे स्वयं महाकाल के नगर भ्रमण और दर्शन का पुण्य प्राप्त करते हैं। यह विश्वास है कि महाकाल की सवारी में सम्मिलित होने से कष्टों का नाश, पापों से मुक्ति और कुल की उन्नति होती है। यही कारण है कि यह सवारी हर वर्ष भव्य रूप से श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली जाती है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news  #MahakalKiSawari #UjjainMahakal #LordShivaProcession #Sawan2025 #MahakalDarshan #SpiritualIndia

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Lord Shiva Puja Vidhi

सावन सोमवार 2025: शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय इन गलतियों से रहें सावधान, जानें सही विधि और शुभ मुहूर्त

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पावन और फलदायी माना जाता है। विशेष रूप से सावन के सोमवार को व्रत और जलाभिषेक करने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं। भक्तगण इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, भस्म आदि अर्पित कर पूजन करते हैं। लेकिन कई बार श्रद्धा के साथ की गई पूजा भी अशुद्धियों और अनजाने में हुई गलतियों के कारण पूर्ण फल नहीं देती। इसलिए जरूरी है कि सावन सोमवार (Savan Somwar) के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखा जाए। शिवलिंग पर जल अर्पण की विधि (Lord Shiva Puja Vidhi) जब आप शिव मंदिर या घर में शिवलिंग की पूजा करने जाएं, तो पूजन स्थल पर उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों। पूजा में तांबे, पीतल या चांदी के लोटे में जल लेकर विधिपूर्वक अर्पण करें। सबसे पहले शिवलिंग के दाहिने भाग पर जल चढ़ाएं, जो गणेश जी का प्रतीक स्थान माना जाता है।इसके बाद बाएं भाग पर जल अर्पित करें, जो भगवान कार्तिकेय से संबंधित माना जाता है।फिर शिवलिंग के मध्य भाग में जल चढ़ाएं, जिसे अशोक सुंदरी (शिव-पार्वती की पुत्री) का स्थान कहा गया है।इसके बाद शिवलिंग के गोलाकार आधार पर जल चढ़ाएं, जिसे माता पार्वती के कर-स्पर्श जैसा माना जाता है।अंत में शिवलिंग के मुख्य ऊपरी भाग पर जल अर्पित करें, जो स्वयं भगवान शिव का प्रतीक होता है। मंत्र जाप का महत्व: पूरे जलाभिषेक के दौरान श्रद्धा भाव से “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें। यह न केवल पूजा को पूर्ण बनाता है, बल्कि मन को भी एकाग्र और शुद्ध करता है, जिससे भगवान शिव की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है। सावन में जलाभिषेक का शुभ समय (Sawan Somvar Puja Vidhi 2025) 1. ब्रह्म मुहूर्त:शिवलिंग पर जल अर्पण करने का सर्वोत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त होता है, जो सूर्योदय से करीब डेढ़-दो घंटे पहले माना जाता है। यह समय आत्मिक शुद्धि, ध्यान और ईश्वर की साधना के लिए अत्यंत शुभ और प्रभावकारी माना गया है। 2. प्रातःकाल (सुबह 4 से 6 बजे):यदि ब्रह्म मुहूर्त में पूजा संभव न हो, तो सुबह 4 बजे से 6 बजे के बीच शिवलिंग पर जलाभिषेक करना भी अत्यंत लाभकारी होता है। इस समय शरीर, मन और वातावरण तीनों शुद्ध रहते हैं, जिससे पूजा में एक विशेष ऊर्जा और पवित्रता बनी रहती है। 3. सुबह 7:00 से 11:00 बजे तक:जो लोग बहुत जल्दी नहीं उठ पाते, उनके लिए सुबह 7 बजे से 11 बजे के बीच भी शिव पूजन करना शुभ माना जाता है। इस समय की गई पूजा यदि पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक की जाए, तो भगवान शिव अवश्य प्रसन्न होते हैं और भक्त को मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। इसे भी पढ़ें:- सावन 2025: क्यों प्रिय है महादेव को बेलपत्र? जानिए इसके पीछे छिपी पौराणिक कथा और महत्व जल चढ़ाते समय न करें ये गलतियां नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें।Latest News in Hindi Today Hindi news  #SawanSomvar2025 #LordShivaBlessings #SawanVrat #ShivBhakti #MiraculousRemedie

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Career in yoga

Career in yoga: कोर्स से लेकर इंस्टीट्यूट्स तक योगा में करियर बनने के लिए पाएं इसके बारे में पूरी जानकारी

योगा (Yoga) के बारे में न केवल आज पूरा विश्व जानता है, बल्कि शारीरिक और मानसिक बचाव के लिए इसे अपनाया भी है। भारत में शुरू हुई इस तकनीक को आजकल करोड़ों लोग अपने जीवन का जरूरी हिस्सा बना चुके हैं। ऐसा माना गया है कि नियमित रूप से योगा करने से कई समस्याओं से राहत पाई जा सकती है। लेकिन, योगा (Yoga) की शुरुआत करने के लिए एक्सपर्ट की सलाह और मार्गदर्शन लेना जरूरी है। अगर आप योगा (Yoga) में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं, तो आपको इसके बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए कि आप इसका कहां कोर्स कर सकते हैं और उसमे कितना समय लगेगा आदि। आइए जानें कि योगा में करियर कैसे बनाएं (How to make a career in yoga)? इसकी पढ़ाई कहां से की जाए, यह जानकारी भी पाएं। योगा में करियर कैसे बनाएं (How to make a career in yoga): योगा कोर्स  योगा में करियर (Career in yoga) बनाने के लिए आप कई कोर्स कर सकते हैं, जो इस प्रकार हैं: योगा कोर्स करवाने वाले मुख्य इंस्टीट्यूट्स हमारे देश में ऐसे कई इंस्टीट्यूट्स हैं जो यह कोर्स कराते हैं। इनकी लिस्ट बहुत लंबी है। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं:  इसे भी पढ़ें:- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट कैसे बनें? योगा में करियर बनाने के लिए किन स्किल्स का होना जरूरी है? योगा में करियर (Career in yoga) बनाने के लिए कैंडिडेट्स में निम्नलिखित स्किल्स होना जरूरी है:  नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi  #HowtomakeacareerinYoga #Yoga #YogaScience #MainInstitutesOfferingYogaCourses #CareerinYoga

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link between diabetes and loneliness

Loneliness: अकेलेपन का कनेक्शन ब्लड शुगर से – क्या कहती है रिसर्च?

डायबिटीज (Diabetes) यानी मधुमेह एक ऐसी समस्या है, जो आजकल लोगों की खराब जीवनशैली के कारण बढ़ती जा रही है। डायबिटीज (Diabetes) के कारण कई गंभीर रोग होने की संभावना भी बढ़ जाती है। यही वजह है कि इस रोग की संभावना को कम करने के लिए एक्सपर्ट सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं। वहीं, एक और परेशानी जिससे आजकल अधिकतर पब्लिक परेशान है वो है अकेलापन (Loneliness)। यह अकेलापन (Loneliness) भी कई रोगों का कारण बन सकता है जैसे स्ट्रेस, एंग्जायटी आदि। लेकिन, एक नई स्टडी के अनुसार अकेलापन डायबिटीज (Diabetes) का कारण भी बन सकता है। आइए जानें डायबिटीज और अकेलेपन के बीच में लिंक (The link between diabetes and loneliness) के बारे में। डायबिटीज और अकेलेपन के बीच में लिंक (The link between diabetes and loneliness): पाएं जानकारी  हेल्थलाइन (Health line) के अनुसार अकेलापन डायबिटीज (Diabetes) को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है और कई कंडीशंस का कारण बन सकता है जैसे डिप्रेशन और एंग्जायटी। एक नई स्टडी के अनुसार अकेलापन (Loneliness) न केवल मेंटल हेल्थ को प्रभावित करता है, बल्कि इससे फिजिकल हेल्थ भी प्रभावित हो सकती है। यानी डायबिटीज और अकेलेपन के बीच में लिंक (The link between diabetes and loneliness) पाया गया है। इस स्टडी के अनुसार जो लोग सोशली आइसोलेटेड होते हैं, उनमें डायबिटीज और हाई ब्लड शुगर का खतरा बढ़ सकता है। इस स्टडी में ऐसा पाया गया है कि जो बुजुर्ग अकेले रहते हैं उनमें डायबिटीज (Diabetes) का रिस्क 34% अधिक होता है। इन लोगों में अकेले नहीं रहने वाले लोगों की तुलना में 75% अधिक पुअर शुगर कंट्रोल भी पाया गया है। इस स्टडी से यह भी पता चलता है कि अकेलापन (Loneliness) डायबिटीज का एक महत्वपूर्ण फैक्टर हो सकता है जिसे अक्सर अनदेखा किया जाता है। डायबिटीज और अकेलेपन से कैसे बचें?  डायबिटीज (Diabetes) से बचने के लिए अपनी लाइफस्टाइल को ठीक बनाए रखना जरूरी है। इसमें सही डायट का सेवन करना, एक्सरसाइज और योगा करना, तनाव से बचना आदि शामिल है। इसके साथ ही नियमित रूप से चेक-अप कराना भी इसके लिए महत्वपूर्ण माना गया है। अकेलेपन से बचाव के लिए यह सुझाव आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं: वालंटियर बने दूसरों की मदद करना अकेलेपन को दूर करने का सबसे बेहतरीन तरीका है। इसके लिए उन ग्रुप्स और आर्गेनाईजेशन को ज्वाइन करें, जो यह कार्य करते हैं। इसके साथ ही आप सपोर्ट ग्रुप को भी ज्वाइन कर सकते हैं।  एक्टिव रहें एक्टिव रहने से आप अपने अकेलापन (Loneliness), डायबिटीज (Diabetes) और कई समस्याओं से बचा जा सकता है। यही नहीं इससे आप अन्य लोगों से भी मिलजुल सकते हैं। इसके लिए आप योगा, कार्डियो जैसी क्लासेज को ज्वाइन कर सकते हैं। अपने प्रियजनों और दोस्तों से बात करें अकेलापन (Loneliness) को दूर करने के लिए उन लोगों के सम्पर्क में रहें जो आपके करीबी हैं। ऐसे लोगों से कनेक्ट करते रहें जो आपको पॉजिटिव रहने में मदद करें। कुछ ऑनलाइन सपोर्ट ग्रुप्स और फोरम्स को भी ज्वाइन कर सकते हैं। डायबिटीज और अकेलेपन के बीच में लिंक (The link between diabetes and loneliness) के बारे में आप जान ही गए होंगे। अब जानते हैं डायबिटीज (Diabetes) के बारे में कुछ और। इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा डायबिटीज के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य  नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news  #Thelinkbetweendiabetesandloneliness #diabetes #loneliness 

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Election Commission

बिहार में वोटर लिस्ट से कट सकते हैं 35 लाख से ज्यादा नाम,  वेरिफिकेशन प्रक्रिया में अब तक 88% मतदाताओं ने भरा गणना पत्र

बिहार में चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा कराया जा रहा मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण और सत्यापन कार्य (SIR) अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। आयोग की यह महत्त्वाकांक्षी पहल 24 जून 2025 को राज्यभर में गणना फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो 25 जुलाई तक चलेगा। मतलब अब इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मात्र 10 दिन और रह गए हैं। एसआईआर (SIR) के तहत अब तक 7 करोड़ 90 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाताओं में से 6 करोड़ 60 लाख 67 हजार 208 लोगों ने अपने गणना फॉर्म सफलतापूर्वक भरकर जमा करा दिए हैं। यह आंकड़ा कुल मतदाताओं का लगभग 88 फीसदी है, जो आयोग के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है। हालांकि, इस प्रक्रिया में जो सबसे चौकाने वाली सामने आई है, वह यह है कि अब तक के सर्वेक्षण और फॉर्म सत्यापन के आधार पर करीब 35 लाख 69 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट (Voter List) से हटाए जा सकते हैं। यह आंकड़ा उन मतदाताओं का है, जो सत्यापन के दौरान या तो मृत पाए गए या एक से ज्यादा स्थानों पर पंजीकृत मिले या फिर स्थायी रूप से किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो गए। मतदाता सूची से हट सकता है बिहार के 4.52% लोगों का नाम चुनाव आयोग (Election Commission) की वेबसाइट पर अब तक कुल 5 करोड़ 74 लाख से अधिक प्रपत्र अपलोड किए जा चुके हैं। दस्तावेजों के आधार पर बताया गया है कि सत्यापन के दौरान 1.59% मतदाता मृत पाए गए और 2.2% ने स्थायी रूप से अपने निवास स्थान बदल चुक हैं। इसके अलावा 0.73% मतदाता ऐसे भी मिले हैं जो एक से ज्यादा स्थानों पर पंजीकृत पाए गए। कुल मिलाकर आयोग को इन तीनों श्रेणियों में 4.52% मतदाता ऐसे मिले हैं जिनके नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है।   वहीं, अब भी करीब 11.82% मतदाता ऐसे हैं जिन्होंने अपने फॉर्म आयोग के पास जमा नहीं किए हैं। आयोग इन बचे हुए मतदाताओं तक पहुंचने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। तीसरे दौर में राज्यभर में एक लाख बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) को फिर से मैदान में उतारा गया है ताकि घर-घर जाकर बचे हुए मतदाताओं से फॉर्म भरवाया जा सके। इस कार्य में चुनाव आयोग को विभन्न राजनीतिक दलों द्वारा तैनात 1.5 लाख बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) का भी सहयोग मिल रहा है।  मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण और सत्यापन कार्य (SIR) के लिए बिहार के सभी 261 विधानसभा क्षेत्र के 5,683 वार्डों में विशेष शिविर लगाया गया है। इन शिविरों का उद्देश्य सभी विधानसभा में  मतदाता फॉर्म का सत्यापन करना है। साथ ही जो मतदाता अस्थायी रूप से राज्य से बाहर गए हैं, उनके लिए भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि वे भी ऑनलाइन या अन्य माध्यमों से समय रहते अपना फॉर्म जमा कर सकें। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? आयोग 1 अगस्त को जारी करेगा ड्राफ्ट वोटर लिस्ट चुनाव आयोग (Election Commission) के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के बाद 1 अगस्त 2025 को मतदाता सूची का ड्राफ्ट संस्करण प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद मतदाताओं को आपत्ति और सुधार के लिए कुछ दिन के लिए समय दिया जाएगा, ताकि अंतिम सूची में किसी भी प्रकार की त्रुटि न रह जाए। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद फाइनल मतदाता सूची जारी कर विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी जाएगी।   बिहार में चल रही इस मतदाता सत्यापन प्रक्रिया को भाजपा समेत एनडीए गठबंधन के दल जहां लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान वैध मतदाताओं का नाम भी सूची से हटाया जा रहा है।  Latest News in Hindi Today Hindi news  #ElectionCommission #Biharelection2025 #Voterlist #SIR #Biharassemblyelection

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Kanwar Yatra

कांवड़ क्यों रखा जाता है कंधे पर? जानिए रावण और शिवभक्ति से जुड़ी पौराणिक कथा

सावन माह में उत्तर भारत की सड़कें उस भक्ति और श्रद्धा की दौड़ से गूंजती हैं, जब लाखों शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। हाथ में नहीं, बल्कि कंधे पर कांवड़ उठाए हुए। इस यात्रा की धार्मिक परंपरा तो स्पष्ट है—गंगा जल लेकर शिवलिंग पर अर्पित करना—लेकिन कांवड़ कंधे पर क्यों रखी जाती है? क्या इसमें कोई खास रहस्य छिपा है? रोचक रूप से, इसका संबंध मिलता है महर्षि अगस्त्य और लंकापति रावण से जुड़ी एक पौराणिक कथा से। आइये जानते हैं इस रहस्य की गहराई। कांवड़ यात्रा क्या है? कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) एक ऐसी पवित्र परंपरा है, जो सीधे भगवान शिव (Lord Shiva) की भक्ति से जुड़ी हुई है। यह यात्रा उन्हें प्रसन्न करने के उद्देश्य से की जाती है। यह केवल श्रद्धा की नहीं, बल्कि संयम, सहनशीलता और सामूहिक एकता की भी यात्रा है। कांवड़ यात्रा के माध्यम से व्यक्ति न केवल शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक और आत्मिक रूप से भी शुद्ध होता है। इस दौरान कांवड़िए मांस-मदिरा से पूरी तरह दूर रहते हैं और सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं। तामसिक भोजन का त्याग किया जाता है और हर गतिविधि में अनुशासन का पालन होता है। कांवड़ यात्रा के ये 10 दिन किसी तपस्या से कम नहीं होते, जो न केवल भक्ति का मार्ग दिखाते हैं, बल्कि जीवन में संयम और साधना का महत्व भी सिखाते हैं। कांवड़ कौन और क्यों कंधे पर रखी जाती है? कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। कांवड़ को कंधे पर उठाकर चलना भक्तों के लिए एक प्रकार की तपस्या और आत्मानुशासन का रूप है। इस दौरान वे तमाम शारीरिक कष्टों और थकावट को सहते हैं, लेकिन उनकी भक्ति में कोई कमी नहीं आती। यह प्रतीक है उस दृढ़ निष्ठा का, जो यह दर्शाता है कि शिवभक्त अपने ईष्टदेव के लिए हर प्रकार की चुनौती और कठिनाई का साहसपूर्वक सामना कर सकते हैं। पौराणिक रहस्य: रावण, अगस्त्य और कांवड़ कांवड़ यात्रा की उत्पत्ति से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं, जिनमें सबसे प्रसिद्ध कथा लंकाधिपति रावण की मानी जाती है। रावण को भगवान शिव का अत्यंत भक्त बताया गया है। एक बार उसने शिव को प्रभावित करने के लिए कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास किया, जिससे शिवजी कुपित हो गए। अपनी भूल का एहसास होने पर रावण ने उन्हें प्रसन्न करने के लिए गंगाजल से अभिषेक करने का संकल्प लिया। ऐसा कहा जाता है कि रावण ही वह पहला भक्त था, जिसने गंगाजल को एक विशेष विधि से कांवड़ में भरकर लाया था और उसे कंधे पर उठाकर शिवजी तक पहुंचाया था। उसी परंपरा को निभाते हुए आज भी लाखों श्रद्धालु सावन मास में कांवड़ अपने कंधे पर लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। धार्मिक महत्व: ऐसा विश्वास किया जाता है कि कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) से जीवन के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं। जब भक्त पवित्र गंगाजल को कांवड़ में भरकर अपने कंधों पर उठाकर चलते हैं, इसलिए कांवड़ यात्रा को एक आध्यात्मिक तपस्या का रूप माना जाता है, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने पापों का प्रायश्चित करता है। इस यात्रा से शिवभक्तों को भगवान शिव की विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है। साथ ही उनके जीवन में सकारात्मकता, मानसिक शांति और आत्मिक विकास की अनुभूति होती है। यह पावन यात्रा मोक्ष की ओर अग्रसर होने का भी एक साधन मानी जाती है। इसे भी पढ़ें:- मुखाग्नि से पहले क्यों किया जाता है सुहागिन स्त्री का सोलह श्रृंगार? संकल्प और सेवा — कांवड़ यात्रा का सार कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) सिर्फ धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि स्वेच्छा के अनुसार किए गए तप, संयमित जीवन और दया-भावयुक्त सेवा का प्रतीक है: नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news  #KanwarYatra2025 #Sawan2025 #BolBam #HarHarMahadev #LordShiva #ShivBhakti #GangaJal

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Sawan Somvar Vrat 2025

Sawan Somvar Vrat 2025: शिवलिंग पर अर्पित करें ये 11 चीजें, होगी हर मनोकामना पूरी

सावन का महीना भगवान शिव (Lord Shiva) की आराधना का सबसे पावन समय होता है। इस माह में प्रत्येक सोमवार को व्रत और पूजन का विशेष महत्व है, जिसे “सावन सोमवार व्रत” कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों को मनचाहा वरदान देते हैं। विशेष रूप से सावन सोमवार को शिवलिंग (Shivling) पर कुछ खास वस्तुएं चढ़ाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और दुर्भाग्य दूर होकर किस्मत चमकने लगती है। आइए जानते हैं, शिवलिंग पर कौन-कौन सी चीजें चढ़ानी चाहिए और उनका आध्यात्मिक महत्व क्या है— शिवलिंग पर अर्पित करें ये 11 चीजें 1. गंगाजल – पवित्रता और शुद्धि का प्रतीक गंगाजल को भगवान शिव का सबसे प्रिय जल माना जाता है। इसे शिवलिंग पर अर्पित करने से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन एवं शरीर की शुद्धि होती है। 2. दूध – आरोग्यता और संतुलन का प्रतीक शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दूर होती हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यह क्रोध और तनाव को भी शांत करता है। 3. बेलपत्र – शिव का विशेष प्रिय बेलपत्र को त्रिदेवों का प्रतीक माना गया है। इसे शिवलिंग पर चढ़ाने से पुण्य की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ध्यान रखें कि बेलपत्र ताजे और साफ हों। 4. भस्म – वैराग्य और तपस्या का चिन्ह शिव भस्मधारी हैं, इसलिए उन्हें भस्म अर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे सांसारिक बंधनों से मुक्ति मिलती है और आत्मिक शांति प्राप्त होती है। 5. धतूरा और आक – संकटों से रक्षा धतूरा और आक के फूल शिवलिंग पर चढ़ाने से जीवन में आ रही बाधाएं और रोग दूर होते हैं। यह उपाय शत्रुओं से रक्षा और मानसिक शक्ति बढ़ाने में सहायक होता है। 6. शहद – मधुरता और प्रेम का प्रतीक शहद शिवलिंग पर अर्पित करने से जीवन में सौहार्द, प्रेम और पारिवारिक शांति बनी रहती है। यह रिश्तों को मधुर बनाने वाला उपाय है। 7. सफेद पुष्प – सौम्यता का प्रतीक भगवान शिव को श्वेत पुष्प अत्यंत प्रिय होते हैं। कमल, कनेर और कुंद के फूल अर्पित करने से मानसिक शुद्धता और ईश्वर कृपा प्राप्त होती है। 8. फल और ताजे भोग – सुख और समृद्धि का माध्यम शिवलिंग पर मौसमी फल और मिठाई अर्पित करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। खासतौर पर नारियल, केला और मिश्री शिवजी को अर्पित करना शुभ माना जाता है। 9. पंचामृत – पांच तत्वों का संतुलन पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से शिवलिंग का अभिषेक करने से जीवन के पंचतत्व संतुलित होते हैं। यह उपाय सौभाग्य और दीर्घायु की प्राप्ति में सहायक होता है। 10. अक्षत और रोली – समर्पण का प्रतीक शुद्ध अक्षत (कच्चे चावल) और रोली से तिलक करने से पूजा का पूरक रूप बनता है। इससे शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 11. केसर – विवाह में सफलता यदि कोई कन्या योग्य वर की प्राप्ति की इच्छा रखती है, तो शिवलिंग पर केसर मिश्रित जल चढ़ाना अत्यंत लाभकारी होता है। यह उपाय वैवाहिक जीवन में सुख और सौभाग्य लाता है। पूजा विधि का विशेष ध्यान रखें शिवलिंग पर ये सभी सामग्री अर्पित करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें। पूजन पूर्व दिशा की ओर मुख करके करें और पूरे विधिविधान से श्रद्धा और संयम के साथ यह अनुष्ठान करें। इसे भी पढ़ें:- महाभारत के युद्ध में गूंजे थे दिव्य अस्त्रों के नाम, जानिए उनकी अद्भुत शक्तियां व्रत रखने के नियम: नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news  #Sawan2025 #SawanSomvar #ShivBhakti #Mahadev #ShivlingPuja #SomvarVrat #LordShiva #ShivaWorship #SawanVratTips #HarHarMahadev #SawanSomvarVrat2025

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Excessive salt intake

Excessive Salt Intake: भारत में एक साइलेंट महामारी, जो स्वास्थ्य के लिए है एक बड़ा खतरा

नमक (Salt) यानी साल्ट खाने का एक जरूरी हिस्सा है, जिसकी मात्रा खाने में ज्यादा हो या कम, दोनों ही स्थितियों में खाने का स्वाद पूरी तरह से बदल जाता है। नमक शरीर के लिए फायदेमंद है और कई कार्यों को करने में उपयोगी है जैसे फ्लूइड बैलेंस, नर्व और मसल फंक्शन व मसल फंक्शन को मेंटेन करना। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अधिक नमक (Salt) खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है? हाल ही में हुई एक रिसर्च के अनुसार भारत में अधिक नमक का सेवन (Excessive salt intake) एक साइलेंट महामारी की तरह है, जो कई गंभीर समस्याओं के रिस्क को बढ़ा रही है। आइए जानें कि भारत में अधिक नमक का सेवन क्यों है साइलेंट महामारी (Why high salt intake is a silent epidemic in India)? भारत में अधिक नमक का सेवन क्यों है साइलेंट महामारी (Why high salt intake is a silent epidemic in India)? इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (ICMR) के अनुसार हमारे देश में अधिक नमक का सेवन (Excessive salt intake) करना एक साइलेंट महामारी के समान है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट प्रॉब्लम्स और किडनी डिजीज का खतरा बढ़ रहा है। आइए जानें विस्तार में कि कौन-कौन से कारण है जिसकी वजह से भारत में अधिक नमक का सेवन (Excessive salt intake) को एक साइलेंट महामारी माना जा रहा है:  यह तो थी जानकारी कि भारत में अधिक नमक का सेवन क्यों है साइलेंट महामारी (Why high salt intake is a silent epidemic in India)? अब जानिए कि नमक की खपत कम करने के लिए आप क्या कर सकते हैं?  इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा नमक की खपत कम करने के लिए क्या करें?  नमक का भी सही या कम मात्रा में सेवन करना चाहिए। नमक (Salt) की खपत को कम करने के लिए आप इन तरीकों को अपना सकते हैं: यह तो थी जानकारी भारत में अधिक नमक (Salt) के सेवन के बारे में। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी दोनों लोगों को कम सोडियम युक्त नमक के सेवन करने की सलाह देते हैं, ताकि कई गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम्स से बचा जा सके। इसके साथ ही उन्होंने जागरूकता अभियान भी शुरू किया है ताकि लोगों को अधिक नमक से जुड़ी समस्याओं के बारे में जागरूक किया जा सके। याद रखें कि नमक (Salt) के शरीर के लिए लाभ और हानियां उसकी मात्रा पर निर्भर करती हैं। अगर इसको कम और सही मात्रा में लिया जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news  #WhyhighsaltintakeisasilentepidemicinIndia #Excesssaltintake #silentepidemic #salt #heartproblems

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